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मालवा सल्तनत
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अंगूठाकार|1525 में मालवा सल्तनत।
मालवा सल्तनत मालवा क्षेत्र में मध्यकालीन इस्लामिक सल्तनत थी जो वर्तमान मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान पे 1392 से 1562 तक राज करती थी। इसकी स्थापना दिलावर खान ने की थी। तैमूर के आक्रमण के बाद दिल्ली सल्तनत के अस्त-व्यस्त होने पे 1401/2 में मालवा को एक स्वतंत्र क्षेत्र बना लिया गया। 1561 में, सल्तनत के अंतिम शासक बाजबहादुर को मुगल साम्राज्य ने पराजित कर दिया और मालवा मुगल साम्राज्य का सूबा बन गया।Bharatvarsh TV9 जहर पिया पर मुगलों के आगे नहीं झुकीं... जानिए कौन थीं खूबसूरती और सुरों की मलिका रूपमती https://www.tv9hindi.com/knowledge/tragic-love-story-of-rani-roopmati-and-sultan-baz-bahadur-au256-1738303.html 13 मई 2023 TV9 Bharatvarsh 26 फरवरी 2023 hi
शुरुआत में दिलावर खान दिल्ली सल्तनत का राजयपाल था जो अफ़ग़ान या तुर्क-अफ़ग़ान मूल का था। दिलावर खान ने 1392 के बाद दिल्ली को अदायगी देना बंद कर दिया था। 1437 में, खिलजी तुर्क महमूद खिलजी द्वारा दिलावर खान के वंश को ताज-ओ-तख़्त से उखाड़ फेंका गया था। प्रारंभ में धार नए राज्य की राजधानी थी। लेकिन जल्द ही इसे मांडू में स्थानांतरित कर दिया गया जिसका नाम बदलकर शादियाबाद (आनंद का शहर) कर दिया गया। उसकी मृत्यु के बाद उसका पुत्र होशंग शाह गद्दी पर बैठा।
बाद में गुजरात सल्तनत के ज़फर खान मुजफ्फर शाह प्रथम ने मालवा पर आक्रमण किया। होशंग को पराजित किया गया और अपने राजयपाल को धार में नियुक्त किया। 1561 में, अकबर ने अधम खाँ और पीर मुहम्मद खान के नेतृत्व में मुगल सेना भेजी जिसने मालवा पर हमला किया और 29 मार्च 1561 को सारंगपुर की लड़ाई में बाजबहादुर को हराया। 1562 में, अकबर ने उज़बेग अब्दुल्ला खान के नेतृत्व में एक और सेना भेजी, जिसने अंततः बाजबहादुर को हरा दिया। वह चित्तौड़ भाग गया।
उज्जैन के राजधानी के रूप में मालवा मुगल साम्राज्य का सूबा (शीर्ष-स्तरीय प्रांत) बन गया और अब्दुल्ला खान इसके पहले सूबेदार बने। सल्तनत काल के दौरान बने लगभग सारे स्मारक मांडू शहर में केंद्रित हैं।
मालवा साम्राज्य =
ईसवी 350 से 1462 तक राजाओं ने विभिन्न समयों पर मालवा राज्य पर शासन किया।
परवर्ती गुप्त वंश (575–606)
महासेनगुप्त (575–601)
देवगुप्त (मालवा) (601–606)
परमार वंश (948–1305)
परमार वंश
इतिहासकार कैलाश चंद जैन के अनुसार, "उपेन्द्र से वैरिसिंह तक के प्रारंभिक परमार शासकों के बारे में जानकारी बहुत कम है; कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, और वे केवल बाद के स्रोतों से ज्ञात होते हैं।"Jain Kailash Chand 1972 Malwa Through the Ages, from the Earliest Times to 1305 A.D https://books.google.com/books?id=_3O7q7cU7k0C&pg=PA329 Motilal Banarsidass 329 978-81-208-0824-9 उदयपुर के एक अभिलेख से संकेत मिलता है कि परमार वंश कम से कम मालवा के उत्तर-पूर्वी भाग में 1310 तक अस्तित्व में रहा। एक बाद का अभिलेख दर्शाता है कि 1338 तक इस क्षेत्र पर दिल्ली सल्तनत ने कब्ज़ा कर लिया था।Jackson Peter Peter Jackson (historian) https://books.google.com/books?id=lt2tqOpVRKgC The Delhi Sultanate: A Political and Military History Cambridge University Press 2003 978-0-521-54329-3 199
+परमार वंश के शासक क्रम संख्या शासक शासन काल1परमार (पौराणिक)पौराणिक2उपेन्द्र (कृष्णराज)9वीं सदी की शुरुआत3वैरिसिंह प्रथम 9वीं सदी की शुरुआत4सीयक प्रथम9वीं सदी के मध्य5वाक्पतिराज प्रथम9वीं के अंत में – 10वीं सदी की शुरुआत6वैरिसिंह द्वितीय10वीं सदी के मध्य-कालीन7सीयक हर्ष II940–9728वाक्पति मुंज (या मुंज)972–9909सिंधुराज990–101010परमार भोज1010–105511जयसिंह प्रथम1055–107012उदयादित्य1070–108613लक्ष्मदेव1086–109414नरवर्मन1094–113315यशोवर्मन (परमार)1133–114216जयवर्मन प्रथम (परमार) 1142–114317अंतराल (1143–1175) पहले बल्लाल और बाद में सोलंकी राजा कुमारपाल के अधीन1143–117518विंध्यवर्मन1175–119419सुभटवर्मन1194–120920अर्जुनवर्मन प्रथम1210–121521देवपाल (परमार)1215/1218–123922जैतुगीदेव1239–125523जयवर्मन द्वितीय (परमार)1255–127424अर्जुनवर्मन द्वितीय 1274–128525भोज द्वितीय (परमार)1285–130126महालकदेव1301–1305
मालवा सल्तनत के सुल्तान
उपाधि नाम शासन काल दिलावर खान को 1392 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान द्वारा मालवा प्रांत का गवर्नर नियुक्त किया गया था। उन्होंने 1401 में मालवा सल्तनत की स्थापना करके स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया। वे गौरी वंश से मालवा के पहले सुल्तान थे।.Upendra Nath Day Medieval Malwa: a Political and Cultural History, 1401-1562 Delhi Munshi Ram Manohar Lal 1965 8–24 https://archive.org/details/medievalmalwaapo001927mbp 2020-05-18 सुल्तान سلطان दिलावर खान गौरी دلاور خان غوری 1401–1406 सुल्तान سلطان हिसाम अल-दीन होशंग शाह حسام الدین ہوشنگ شاہ 1406–1435 सुल्तान سلطان ताजुद्दीन मुहम्मद शाह تاج الدین محمد شاہ 1435–1436 गौरी वंश को हटा कर उसका स्थान खिलजी वंश ने लिया, जिसके संस्थापक महमूद खिलजी, दिलावर खान के भतीजे के बेटे थे. सुल्तान سلطان महमूद खिलजी علاؤالدین محمود شاہ اول 1436–1469 सुल्तान سلطان ग़ियास शाह غیاث الدین شاہ 1469–1500 सुल्तान سلطان नसीरुद्दीन शाह ناصر الدین شاہ 1500–1510 सुल्तान سلطان शिहाबुद्दीन महमूद शाह द्वितीय شہاب الدین محمود شاہ دوئم 1510–1531 मेवाड़ के राजपूत शासक राणा सांगा ने महमूद शाह द्वितीय को पराजित कर बंदी बना लिया और मालवा के अधिकांश भाग पर विजय प्राप्त की.Sharma Dasharatha https://books.google.com/books?id=Wi1uAAAAMAAJ Lectures on Rajput History and Culture 1970 Motilal Banarsidass 978-0-8426-0262-4 27 en Early 16th century marks the rise of patriotic one eyed chief of Mewar named as Rana Sanga who defeat several of his neighbor kingdom and establish Rajput hold on Malwa first time after fall of Parmara dynasty through series of victories over Malwa, Gujarat and Delhi Sultanate.Sharma Gopi Nath https://books.google.com/books?id=jIs9AAAAMAAJ Mewar & the Mughal Emperors (1526–1707 A.D.) 1954 S.L. Agarwala 17–18 en राजा मेदिनी रायChaurasia Radhey Shyam https://books.google.com/books?id=8XnaL7zPXPUC History of Medieval India: From 1000 A.D. to 1707 A.D. 2002 Atlantic Publishers & Dist 978-81-269-0123-4 156 en
(राणा सांगा के जागीरदार के रूप में) 1519–1527 अंतरिम काल; जब गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने महमूद शाह द्वितीय को पराजित किया और स्वयं मालवा के सुल्तान के रूप में शासन किया.Majumdar, R.C. (ed.) (2006). The Delhi Sultanate, Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, pp.173-86 सुल्तान سلطان बहादुर शाह, गुजरात بہادر شاہ 1531 – 1536मुगल सम्राट हुमायूँ ने सुल्तान बहादुर शाह को पराजित किया और 1535 – 1536 के बीच एक वर्ष के लिए संक्षिप्त रूप से मालवा पर कब्ज़ा किया। अमीर امیر हिन्दाल मिर्ज़ा هندل میرزا 1535 – 1536 सुल्तान سلطان बहादुर शाह, गुजरात بہادر شاہ 1536 – 1537मालवा बहादुर शाह के सबसे बड़े भतीजे और खानदेश सल्तनत के सुल्तान मुहम्मद शाह प्रथम को कुछ महीनों के लिए सौंपा गया, लेकिन उनके राज्याभिषेक से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। सुल्तान سلطان मीरान मुहम्मद शाह प्रथम میران محمد شاہ اول 1537एक खिलजी अमीर, मल्लू खान ने कादिर शाह के रूप में स्वतंत्रता की घोषणा की। सुल्तान سلطان कादिर शाह قادر شاہ 1537 – 1542 1542 – 1555; सूरी साम्राज्य के अर्ध-स्वतंत्र गवर्नरों का युग। वली ولی शुजाअत ख़ान شجاعت خان 1542 वली ولی ईसा ख़ान عیسیٰ خان 1542 – 1545 वली ولی शुजाअत ख़ान شجاعت خان 1545 – 1552शुजात ख़ान के पुत्र, बाजबहादुर के अधीन स्वतंत्रता की घोषणा की गई। सुल्तान سلطان बाजबहादुर باز بہادر 1555 – 1562 मालवा सल्तनत को 1562 में मुगल सेना के विरुद्ध बाज बहादुर की हार के बाद समाप्त कर दिया गया ।.Chandra Satish Medieval India: From Sultanat To The Mughals-Mughal Empire (1526-1748) - Part II https://archive.org/details/medievalindiafro0000sati 2007 103–104
सन्दर्भ
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