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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

दीना भाना

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मार्च 2026 मार्च 2026 दीना भाना 1928 02 28 yes बगास, जयपुर राज्य, ब्रिटिश भारत 2006 08 29 1928 02 28 yes पुणे, महाराष्ट्र, भारत भारतीय भारत सामाजिक कार्यकर्ता; सरकारी कर्मचारी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, पुणे बामसेफ के सह-संस्थापक; कांशीराम साहेब को भीमराव आंबेडकर के विचारों से परिचित कराना आंबेडकरवादी आंदोलन; बहुजन आंदोलन सुमन दीना भाना (28 फ़रवरी 1928 – 29 अगस्त 2006) भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता और बामसेफ के सह-संस्थापक थे। उन्होंने कांशीराम को डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से परिचित कराया, जिससे पूरे भारत में बहुजन आंदोलन को दिशा मिली। उन्हें दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों, सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक कार्यों के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।https://hindi.brambedkar.in/deena-bhana-ke-jeevani दीना भाना की जीवनी प्रारंभिक जीवन दीना भाना का जन्म 28 फ़रवरी 1928 को वर्तमान राजस्थान के जयपुर ज़िले के बगास गाँव में हुआ। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमज़ोर था और उन्हें बचपन में जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। बचपन में, जब उनके पिताजी सवर्णों के यहाँ दूध निकालने जाते थे, तो दीना भाना ने भैंस पालने की इच्छा जताई और ज़िद करके एक भैंस ख़रीदवाई। लेकिन जिस सवर्ण के यहाँ उनके पिताजी जाते थे, उसने यह देखकर पिताजी को बुलाया और कहा, "तुम छोटी जाति के लोग हमारी बराबरी करोगे? तुम भंगी लोग सुअर पालने वाले, भैंस पालोगे? यह भैंस अभी बेच दो।" पिताजी ने अत्यधिक दबाव के कारण भैंस बेच दी। इस घटना ने दीना भाना के मन में अन्याय और असमानता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की भावना जगा दी।https://www.bahujanparivar.com/history/who-is-dinabhana-valmiki-who-made-kanshi-ram-sahab-a-bahujan-hero-z3ybb कौन है दीना भाना जिन्होंने कांशीराम को बहुजन नायक बना दिया 1935 में मात्र सात-आठ वर्ष की उम्र में, दीना भाना ने अपने परिवार को छोड़कर दिल्ली प्रस्थान किया, जहाँ उन्होंने शिक्षा और सामाजिक चेतना की नई राह पकड़ी। दिल्ली में प्रेरणा और शिक्षा दिल्ली में रहते हुए, दीना भाना ने 1944 में डॉ. भीमराव आंबेडकर के भाषण सुने और उनके विचारों से गहराई से प्रभावित हुए। उन्होंने दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के महत्त्व को समझा। हालाँकि उनका औपचारिक शिक्षा स्तर सीमित था, लेकिन वे पढ़ाई में रुचि रखते थे और बाद में पुणे में थोड़ी बहुत अंग्रेज़ी पढ़ी। पुणे में कार्य और संघर्ष 1946 में वे महाराष्ट्र के पुणे जिले चले गए। प्रारंभ में उन्होंने मज़दूरी की और 1948 में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) में चौथे श्रेणी कर्मचारी (सफ़ाई कर्मचारी) के रूप में नौकरी प्राप्त की। पुणे में नौकरी करते समय वे अपने अधिकारों और सम्मान के लिए कई बार संघर्ष करते रहे। विशेष रूप से 14 अप्रैल, आंबेडकर जयंती की छुट्टी की माँग को लेकर उनका संघर्ष उल्लेखनीय था। अधिकारियों ने इसे नकारा और दीना भाना को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इस दौरान, कांशीराम और डी. के. खापर्डे ने उनका समर्थन किया। दीना भाना ने कांशीराम को बाबासाहेब की पुस्तक जाति का विनाश भेंट की। कांशीराम ने इसे पढ़कर दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संगठन बनाने का निर्णय लिया। https://www.dalitdastak.com/birthday-special-if-there-was-no-deenabhana-then-the-bahujan-movement-did-not-get-kanshiram जयंती विशेष: दीना भाना न होते तो बहुजन आंदोलन को कांशीराम न मिलते सामाजिक जागरूकता और आंदोलन दीना भाना ने अपने कार्यालय और समुदाय में दलित और पिछड़े वर्गों के लोगों को संगठित करना शुरू किया। वे यह स्पष्ट रूप से दिखाते थे कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी जाति और शिक्षा सीमित हो, समाज में बदलाव ला सकता है। वे देशभर के गाँवों और शहरों का दौरा करते रहे और दलित समाज की वास्तविक समस्याओं का अध्ययन किया। उन्हें समझ आया कि यह समस्या केवल पुणे या राजस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के बहुजन समाज की व्यापक समस्या है। बामसेफ का गठन इन अनुभवों और सामाजिक जागरूकता के आधार पर, 6 दिसंबर 1978 को दिल्ली के बोट क्लब में बामसेफ (Backward and Minority Communities Employees Federation) का गठन हुआ। दीना भाना इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। संगठन का उद्देश्य पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाना था।https://www.careers360.com/bamcef-full-form बामसेफ फ़ुल फ़ॉर्म (अंग्रेज़ी) बामसेफ ने दलित और पिछड़े वर्गों में शिक्षा, संगठन और राजनीतिक चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दीना भाना ने कांशीराम के नेतृत्व और आंबेडकरवादी विचारधारा को समाज के बड़े हिस्से तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेवानिवृत्ति और अंतिम दिन दीना भाना 1986 में स्वच्छता निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक आंदोलनों और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे। लंबे समय तक कैंसर के इलाज के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और 29 अगस्त 2006 को पुणे में उनका निधन हो गया। विरासत दीना भाना जी को दलित और पिछड़े वर्गों के उत्थान में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है। वे बामसेफ और बहुजन आंदोलन के इतिहास में प्रेरक व्यक्तित्व हैं। उनका जीवन शिक्षा, संगठन और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उनकी स्मृति में उनके जन्मदिन, 28 फ़रवरी को दीना भाना स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका संघर्ष और नेतृत्व आज भी बहुजन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। इन्हें भी देखें बामसेफ कांशीराम बहुजन समाज पार्टी भीमराव आंबेडकर संदर्भ श्रेणी:1928 में जन्मे लोग श्रेणी:२००६ में निधन श्रेणी:भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता श्रेणी:आंबेडकरवादी श्रेणी:बहुजन आंदोलन