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कामवन
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विकिशैली और सन्दर्भों का ठीक प्रयोग नहीं मई 2016
राजस्थान का एक नगर कामां कामवन, काम्यवन राजस्थान भरतपुर श्री_विमल_बिहारी_2014-05-15_08-28.jpg कामां स्थित श्री विमल बिहारी के मंदिर का विग्रह 27 39 13 N 77 16 11 E
कामां या कामवन राजस्थान के भरतपुर जिले का एक उपखंड और तहसील मुख्यालय है। इसका वर्तमान नाम 'कामां' है। लेकिन अब यह उपखंड क्षेत्र भरतपुर जिले से हटकर नए बनाए गए जिले डीग के अंतर्गत आता है लेकिन कामां एक बड़ा ही प्राचीन और ऐतिहासिक क़स्बा है। आसपास के क़स्बे/ शहर हैं : नगर, नंदगाँव, पुनहाना, पलवल और अलवर सत्यभामा धाम सतवास आदि।
इसके ध्रुवीय निर्देशांक हैं : 27°39'13"N 77°16'11"E
पौराणिक महत्ता
कामवन ब्रज का प्रसिद्ध तीर्थ भी है। इसका पौराणिक नाम काम्यकवन, कामवन था। ब्रज की चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में इस स्थान का अपना महत्त्व है।
इंद्र स्तुति करते हैं कि 'हे श्रीकृष्ण! आपके ब्रज में अति रमणीक स्थान हैं। उन में हम सभी जाने की इच्छा करते हैं पर जा नहीं सकते। (कारण, 'अहो मधुपुरीधन्या वैकुण्ठाच्चगरीयसी। विनाकृष्णप्रसादेन क्षणमेकं न तिष्ठति॥' यानी यह मधुपुरी ब्रज धन्य और वैकुण्ठ से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि वैकुण्ठ में तो मनुष्य अपने पुरुषार्थ से पहुँच सकता है पर यहाँ श्रीकृष्ण की आज्ञा के बिना कोई एक क्षण भी नहीं ठहर सकता)।
बृज के 12 प्राचीनतम वनों में कामवन पांचवा वन है। मथुरा से 65 किमी पश्चिम दिशा में गोवर्धन और डीग होते हुए सड़क मार्ग से कामवन (कामां) पंहुचा जा सकता है।
प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. विमल कुण्ड : यहां सरोवर मात्र न होकर लोक-समाज के लिए आज भी तीर्थ स्थल की तरह है। आज भी यहां यह लोक मान्यता है कि आप चाहे चारों धाम की तीर्थ-यात्रा कर आएं, यदि आप विमल कुण्ड में नहीं नहाये तो आपकी तीर्थ-भावना अपूर्ण रहेगी।
2. विमल बिहारी मंदिर
3. कामेश्वर महादेव
4. चरण पहाडी
5. भोजन थाली
6. कदम्ब खंडी
7. प्राचीन महलों के भग्नावशेष
8. श्री सूर्यनारायण मन्दिर सतवास
9. कल्प वृक्ष दर्शन सतवास
कामां के अन्य मंदिर
कामां, जिसे पौराणिक नगरी होने का गौरव हासिल है, मध्यकाल से पूर्व की बहुत प्राचीन नगरी है। इसका ब्रज के वनों में केंद्रीय स्थान रहा है। कोकिलावन भी इसके बहुत नज़दीक है। वहाँ नंदगांव हो कर जाते हैं। नंदगांव, कामां के पास ही सीमावर्ती कस्बा है, यद्यपि वह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में आता है।
ब्रज-संस्कृति में प्रेम तत्त्व ही प्रधान रहा है, जिसके प्रति रसखान जैसा पठान कवि इतना सम्मोहित हो गया कि उसने जन्म जन्मान्तर तक हर रूप में यहीं का होकर रहने की कामना की।
शुद्धाद्वैत दर्शन के प्रणेता, पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक तथा सूर सरीखे महान कवि के प्रेरणा स्रोत वल्लभाचार्य के पुत्र गुसाईं जी विट्ठलनाथ ने जब अष्टछाप का गठन किया तो जिन वात्सल्य रूप कृष्ण अर्चना की नयी भक्ति-पद्धति विकसित की उसमें सवर्णों के साथ दलितों और स्त्रियों तक को जगह दी गयी, यद्यपि मीरा जैसी स्वाधीनचेता कवि आग्रह के बावजूद इसमें शामिल नहीं हुई, इस नगर कामवन में शुद्धाद्वैत पुष्टिमार्ग की दो प्रधान पीठ (तीसरी) और (सातवीं) स्थापित है- एक गोकुलचन्द्रमा जी और दूसरी मदनमोहन जी।| कामवन में आचार्य वल्लभाचार्य की बैठक भी भक्त वैष्णवों में पूज्य है।
कामां में चौरासी खम्भा नामक मस्जिद हिंदू मंदिर के ध्वंसावशेषों से निर्मित जान पड़ती है। मस्जिद के स्तंभ घट- पल्लव के अलंकरण तथा प्रतिमाओं से युक्त हैं। इन प्रतिमाओं से ही यह निश्चयपूर्वक कहा जा सकता है कि ये स्तंभ वैष्णव और शैव मंदिरों के सभा मण्डप के अंग थे। एक स्तंभ पर अंकित "नमः शिवाय" अभिलेख इस तथ्य की पुष्टि करता है। अभिलेख के लिपि के अनुसार यह मंदिर आठवीं शताब्दी ईस्वी का प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त एक अन्य अभिलेख युक्त स्तंभ से विष्णु मंदिर के निर्माण का पता चलता है। शूरसेन वंश के दुर्गगण की पत्नी विच्छिका ने एक विष्णु मंदिर बनवाया था।
काम्यवन को ब्रज के बारह वनों में से एक उत्तम वन कहा गया है। काम्यवन के आस-पास के क्षेत्र में तुलसी जी की प्रचुरता के कारण इसे कहीं आदि-वृन्दावन भी कहा जाता है। (वृन्दा तुलसी जी का ही पर्याय है।) वृन्दावन की सीमा का विस्तार पहले दूर-दूर तक फ़ैला हुआ था, गिरिराज-पर्वत, बरसाना, नन्दगाँव आदि स्थलियाँ वृन्दावन की सीमा के अन्तर्गत ही मानी गयीं थीं। महाभारत में वर्णित काम्यवन भी यही माना गया है जहाँ कुछ वक़्त पाण्डवों ने अज्ञातवास किया था। वर्तमान में यहाँ अनेक ऐसे स्थल मौजूद हैं जिससे इसे महाभारत से सम्बन्धित माना जा सकता है। पाँचों पाण्डवों की मूर्तियाँ, धर्मराज युधिष्ठिर के नाम से धर्मकूप तथा धर्मकुण्ड भी यहाँ प्रसिद्ध है।
विष्णु पुराण के अनुसार यहाँ कामवन की परिधि में छोटे-बड़े असंख्य तीर्थ हैं। कामवन अपने चौरासी कुंडों, चौरासी खम्भों और चौरासी मंदिरों के लिए जाना जाता है।
84 तीर्थ, 84 मन्दिर, 84 खम्भे आदि राजा कामसेन ने बनवाये थे, जो यहाँ की अमूल्य धरोहर हैं। यहाँ कामेश्वर महादेव, श्री गोपीनाथ जी, श्रीगोकुल चंद्रमा जी, श्री राधावल्लभ जी, श्री मदन मोहन जी, श्रीवृन्दा देवी आदि aमन्दिर हैं। यद्यपि अनुरक्षण के अभाव में यहाँ के अनेक मंदिर नष्ट भी होते जा रहे हैं, फ़िर भी यहाँ के कुछ तीर्थ आज भी अपना गौरव और श्रीकृष्ण की लीलाओं को दर्शाते हैं। कामवन को सप्तद्वारों के लिये भी जाना जाता है।
काम्यवन में सात दरवाज़े हैं–
डीग दरवाज़ा– काम्यवन के अग्नि कोण में (दक्षिण–पूर्व दिशा में) अवस्थित है। यहाँ से डीग (दीर्घपुर) और भरतपुर जाने का रास्ता है।
लंका दरवाज़ा– यह काम्यवन गाँव के दक्षिण कोण में अवस्थित है। यहाँ से सेतुबन्ध कुण्ड की ओर जाने का मार्ग है।
आमेर दरवाज़ा– काम्यवन गाँव के नैऋत कोण में (दक्षिण–पश्चिम दिशा में) अवस्थित है। यहाँ से चरणपहाड़ी जाने का मार्ग है।
देवी दरवाज़ा– यह काम्यवन गाँव के पश्चिम में अवस्थित है। यहाँ से वैष्णवीदेवी (पंजाब) जाने का मार्ग है।
दिल्ली दरवाज़ा –यह काम्यवन के उत्तर में अवस्थित है। यहाँ से दिल्ली जाने का मार्ग है।
रामजी दरवाज़ा– गाँव के ईशान कोण में अवस्थित है। यहाँ से नन्दगांव जाने का मार्ग है।
मथुरा दरवाज़ा– यह गाँव के पूर्व में अवस्थित है। यहाँ से बरसाना हो कर मथुरा जाने का मार्ग है।
एक अन्य अभिलेख कामां में काम्यकेश्वर नाम से प्रख्यात शिवायतन का उल्लेख करता है। इस दान अभिलेख से यह भी ज्ञात होता है कि इस मंदिर में शिव के साथ- साथ विष्णु एवं चामुण्डा आदि देवताओं की पूजा भी होती थी। यहाँ से प्राप्त चतुर्मुख शिवलिंग के चारों ओर उत्कीर्ण प्रमुख देवों की प्रतिमाएँ भी इसी तथ्य की पुष्टि करते हैं। काम्यकेश्वर मंदिर में ७८६ और ८९६ ई. के बीच के काल में ही शिव- पार्वती और विष्णु की प्रतिमाएँ प्रस्थापित कर दी गई थीं। शूरसेन राजाओं के आश्रम में कामां में चामुण्डा, शिव और विष्णु के मंदिरों के साथ श्वेताम्बर संप्रदाय के काम्यक गच्छ के जैन मंदिरों के निर्माण का भी उल्लेख मिलता है।
कामां में यक्ष सरोवर के अलावा चार शिवलिंगों के भी दर्शन किए जा सकते हैं। इन शिवलिंगों को पांचाली ने अपने पतियों की कुशलकामना के लिए स्थापित किया था। यहां उस इमारत के खंडहर आज भी मौजूद हैं, जहां पांडवों ने विश्राम किया था।
इस नगरी का जयपुर रियासत से अठारहवीं सदी में रिश्ता तब हुआ, जब सवाई जयसिंह ने यहाँ अपने एक सूबेदार कीरत सिंह को भेजा, जिसका परिणाम भरतपुर रियासत के जन्म के रूप में हुआ।
कामवन के निकट गांव
कामवन निकट के गाँव
कामां के निकटवर्ती गाँव कनवारा हैं जिसमे कर्ण कुंड स्थित हैं तथा इससे थोड़ा आगे कदमखंडी वन क्षेत्र हैं जहां श्री नागा जी की प्रतिमा है और नागा जी की समाधि स्थल स्थित है तथा इस वन में अनेक साधु तपस्या करते हैं।
1. सत्यभामा धाम सतवास।
भौगोलिक स्थिति
अलवर दिल्ली, पलवल, फरीदाबाद जयपुर कामां मथुरा आगरा कामां क्षेत्र उत्तरप्रदेश व हरियाणा की सीमाओं से जुड़ा हुआ है अगर ब्रज क्षेत्र की बात करें तो 84 कोस यात्रा में इसका प्रमुख महत्व है क्योंकि इसे आदि वृंदावन के नाम से भी जाना जाता है।
बाहरी कड़ियाँ
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