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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

देउवा

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देउवाPāṇḍe Badarīdatta History of Kumaun (English version of "Kumaun ka itihas") Agrawal Chandra M. Pāṇḍe Badarīdatta 1993 Shyam Prakashan 978-81-85865-01-0 Almora, U.P., India(देऊपा / देउबा) ठकुरी/ठाकुर समुदाय से संबंधित एक उपनाम है, जिसे परंपरागत रूप से क्षत्रिय/राजपूत वर्ग से जोड़ा जाता है। यह उपनाम मुख्य रूप से नेपाल और उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्रों में पाया जाता है और कई परिवार इसे अपने वंश, कुल या पारिवारिक पहचान के रूप में प्रयोग करते हैंUpreti Ganga Dutt Descriptive list of the Martial castes of the Almora District, U.P Methodist Publishing house 1907 Lucknow English। देउवा देउवा क्षत्रिय ठकुरी/रजवार ठकुरी/रजवार कश्यप लाटो गन्याप (गणेश),अशिग्राम केदार,बैरो काफली कालिका हिन्दू धर्म ठाकुरी भाषा,डोटेली,नेपाली,कुमाउनी नेपाल और भारत (उत्तराखण्ड) पश्य गर्खा क्षेत्र(डडेल्धुरा) आर्यन ५०० परिवार का आकार (कुमाऊ क्षेत्रमा -२००, डोटी गड्सेरा देउवान क्षेत्र में १५०, और रुवाखोला क्षेत्रमें १५०) नाम के विभिन्न रूप इस उपनाम के विभिन्न रूपों में शामिल हैं: देऊपा (Deupa) देउबा (Deuba) देओपा (Deopa) इन रूपों का प्रयोग क्षेत्रीय भाषा, उच्चारण और ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर किया जाता है।Pandey Badri Datt History of Kumaun: English Version of "Kumaun Ka Itihas" 1993 Shyam Prakashan 9788185865010 https://books.google.com/books?id=BXZwQgAACAAJ सामाजिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि देउवा उपनाम ठकुरी समुदाय से जुड़ा माना जाता है, जो नेपाल में पारंपरिक रूप से शासक या योद्धा वर्ग से संबंधित रहा है। ठकुरी समुदाय को कई स्थानों पर क्षत्रिय या राजपूत परंपरा से भी जोड़ा जाता है। इतिहास चंद्रवंशी, कश्यप गोत्र। इस देउवा कुल के प्रमुख देवता बडालके गण्यप लाटो (गणेश) तथा आशिग्राम केदार माने जाते हैं। इस कुल द्वारा विष्णु के रूप "गण्यप लाटो (गणेश)", केदार, आशिग्राम केदार, गडतोलो तथा कालीकादेवी कुलदेवी को प्रतिष्ठित कर तराई के मैदानी क्षेत्रों में राज्य का संचालन किया गया। यह कश्यप जाति के चंद्रवंशी पाल माने जाते हैं। उनकी ठकुरानी तथा महारानी चककेदार (भगवान शिव) की परम भक्त थीं। मुसलमानों के साथ हुए युद्ध में भारी मात्रा में धन एवं खजाना समाप्त हो जाने के पश्चात् इन्होंने गौ-रक्षा तथा धर्म की रक्षा के उद्देश्य से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर प्रस्थान किया। तत्पश्चात ये शौनक जनजाति के कत्युरी पाल राजा (कत्यूरी नरेश) के राज्य में पहुँचे, जहाँ इन्हें देवान (सेना) के पद पर नियुक्त किया गया। कालांतर में "देवान" पद के अपभ्रंश होने के कारण यह "देउवा" कहलाने लगे। यह राजपरिवार महाभारत काल में राजा पुरु के समय प्रत्यक्ष रूप से कुरुक्षेत्र के युद्ध में सम्मिलित होकर युद्ध करने वाला माना जाता है। इस परिवार की शाखाएँ भारत के विभिन्न स्थानों में विस्तृत रूप से फैली हुई हैं और इन्हें चंद्रवंशी के नाम से जाना जाता है। सिसोदिया राजाओं, कत्यूरी पाल राजाओं (कत्यूरी नरेश) तथा गुर्जर प्रतिहार वंश के राजपूतों (चंद्रवंशी प्रतिहार चंद ठकुरी) के साथ इनके वैवाहिक संबंध भी स्थापित रहे हैं। देउवा परिवार डडेलधुरा के रुवाखोला, कुमाऊँ बंडालू, पिथौरागढ़, सोर, चंदेनी तथा डोटी गड्सेरा देउवान क्षेत्र में लगभग 500 परिवारों के रूप में फैले हुए हैं। इनमें से कुमाऊँ क्षेत्र में लगभग 200 परिवार, डोटी गड्सेरा देउवान क्षेत्र में लगभग 150 परिवार तथा रुवाखोला क्षेत्र में लगभग 150 परिवार निवास करते हैं। निरयापाल राजा की ताम्र शक 1274 (1409 बि.स.) के कार्तिक वदी 5 के अभिलेखों में थेचल देउवा, असराऊ देउवा, धौ देउवा, जयसिंह देउवा, सक्धौँ देउवा तथा जैतपाल देउवा का उल्लेख प्राप्त होता है। सेरो के ऊपरी भाग में उस समय शिखर नगर के जैतपाल का अधिकार माना जाता है। जैतपाल देउवा का खेत अथवा कृषि क्षेत्र वर्तमान में सेती गहनन के समीप स्थित है, जिसे आज भी "जैतपाल का सीरो" के नाम से जाना जाता है। इसके पश्चात गनेदकोट तथा कुचाकोट होते हुए यह क्षेत्र रुवाखोला की दिशा में विस्तृत होता हुआ माना जाता है। निरयापाल राजा के ताम्रपत्र में शक 1274 (वि.सं. 1409), कार्तिक वदी 5 की तिथि पर देउवा वंश के कई व्यक्तियों का उल्लेख मिलता है। इस ताम्रपत्र में थेचल देउवा, असराऊ देउवा, धौ देउवा, जयसिंह देउवा, सक्धौँ देउवा तथा जैतपाल देउवा के नाम दर्ज हैं। इस विवरण के अनुसार सेरो के ऊपरी भाग पर उस समय जैतपाल देउवा का अधिकार था, जो वर्तमान में शिखर नगर क्षेत्र के अंतर्गत माना जाता है। जैतपाल देउवा की भूमि सेती गहनन के पास स्थित बताई जाती है, जिसे आज भी स्थानीय रूप से “जैतपाल का सीरो” कहा जाता है। ताम्रपत्र में वर्णित क्षेत्र की सीमा गनेदकोट और कुचाकोट से होते हुए आगे रुवाखोला की दिशा तक विस्तृत बताई गई है। यह विवरण उस समय के भू-अधिकार और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी प्रदान करता है। पाठ=Mandhata_Shahi-_SAKE-1612.jpg|अंगूठाकार|Mandhata_Shahi-_SAKE-1612.jpg डडेलधुरा क्षेत्र में देउवा वंश का प्रमाणित इतिहास राजा निरयापाल के शासनकाल से स्पष्ट रूप से प्राप्त होता है। राजा निरयापाल द्वारा जारी ताम्रपत्रों में चार देउवाओं—जैतपाल देउवा, जयसिंह देउवा, सकाधौ देउवा तथा थेवल देउवा—के नाम 9 से 19 बि.सं. के मध्य अंकित मिलते हैं। इन अभिलेखों से यह संकेत मिलता है कि उस काल में देउवा वंश का इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान था। देउवा समुदाय का निवास कुमाऊँ, डोटी, गडसेरा देउवान तथा डडेल्धुरा के रुवाखोला–पसे गर्खा क्षेत्र में पाया जाता है। ऐतिहासिक दृष्टि से पसे गर्खा, डडेल्धुरा और डोटी देउवाओं के अधीन एक प्रमुख क्षेत्र माना जाता था। इतिहास में यह जाति अपने युद्धकौशल और वीरता के लिए प्रसिद्ध रही है। वर्तमान समय में इसके वंशज कुमाऊँ क्षेत्र सहित अन्य स्थानों में भारतीय सेना, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और विधि जैसे विभिन्न पेशों में कार्यरत हैं। देउवा हिंदू समाज की एक (क्षत्रिय/राजपूत) जाति मानी जाती है, जिसके लोग मुख्यतः नेपाल, भारत तथा अन्य क्षेत्रों में निवास करते हैं। देउवा खानदान के सम्मानित व्यक्तित्व नेपाल के माननीय पूर्व प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउवा डोटी कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप देउवा परोपकारी उद्योगपति अर्जुन देउवा नेपाल सेना में मेजर शिव बहादुर देउवा नेपाल सेना में कैप्टन दल बहादुर देउवा, नेपाल पुलिस में एसएसपी दिलीपसिंह देउवा डोटी पत्रकार टेकेंद्र देउवा, डोटी पत्रकार श्रवण देउवा सर्वेक्षक अधिकारी इंद्र बहादुर देउवा नेपाली कांग्रेस कैलाली प्रकाश बहादुर देउवा राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने कैलाली क्षेत्र संख्या 5 से प्रांतीय विधानसभा (2) में जीत हासिल की। देउवाके कुलगुरु/ पुजारी डोटीमा अत्रि गोत्रीय ओझा , र बडु डडेल्धुराके रुवाखोला में भारद्वाज कुल के निरोला भंडारी के वंशज भेउलेनि ब्राह्मण। कुमाऊँ में उपमन्यु गोत्रीय जोशी कुलका देवता \ देवी केदार, अशिग्राम केदार,लाटो गन्याप (गणेश) गद्तोला ,कालिका ।