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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

क्षुरिकोपनिषद

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क्षुरिकोपनिषद कृष्ण यजुर्वेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यतः वेदव्यास जी को कई उपनिषदों का लेखक माना जाता है। क्षुरिकोपनिषद 150px वेदव्यास अन्य पौराणिक ऋषि भारत संस्कृत कृष्ण यजुर्वेदीय उपनिषद ज्ञान योग, द्वैत अद्वैत सिद्धान्त हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ रचनाकाल उपनिषदों के रचनाकाल के सम्बन्ध में विद्वानों का एक मत नहीं है। कुछ उपनिषदों को वेदों की मूल संहिताओं का अंश माना गया है। ये सर्वाधिक प्राचीन हैं। कुछ उपनिषद ‘ब्राह्मण’ और ‘आरण्यक’ ग्रन्थों के अंश माने गये हैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नहीं है समान्यतः उपनिषदों का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना गया है। उपनिषदों के काल-निर्णय के लिए निम्न मुख्य तथ्यों को आधार माना गया है— पुरातत्व एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ पौराणिक अथवा वैदिक ॠषियों के नाम सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राजाओं के समयकाल उपनिषदों में वर्णित खगोलीय विवरण निम्न विद्वानों द्वारा विभिन्न उपनिषदों का रचना काल निम्न क्रम में माना गया हैRanade 1926, pp. 13–14- {| | {|class="wikitable" |+ विभिन्न विद्वानों द्वारा वैदिक या उपनिषद काल के लिये विभिन्न निर्धारित समयावधि ! लेखक!! शुरुआत (BC)!!समापन (BC)||विधि |- |लोकमान्य तिलक (Winternitz भी इससे सहमत है)||<div style="text-align: center;">6000||<div style="text-align: center;">200||खगोलीय विधि |- |बी. वी. कामेश्वर||<div style="text-align: center;">2300||<div style="text-align: center;">2000||खगोलीय विधि |- |मैक्स मूलर||<div style="text-align: center;">1000||<div style="text-align: center;">800||भाषाई विश्लेषण |- |रनाडे||<div style="text-align: center;">1200||<div style="text-align: center;">600||भाषाई विश्लेषण, वैचारिक सिदान्त, etc |- |राधा कृष्णन||<div style="text-align: center;">800||600||वैचारिक सिदान्त |} || + मुख्य उपनिषदों का रचनाकाल डयुसेन (1000 or 800 – 500 BC) रनाडे (1200 – 600 BC) राधा कृष्णन (800 – 600 BC) अत्यंत प्राचीन उपनिषद गद्य शैली में: बृहदारण्यक, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, कौषीतकि, केनकविता शैली में: केन, कठ, ईश, श्वेताश्वतर, मुण्डकबाद के उपनिषद गद्य शैली में: प्रश्न, मैत्री, मांडूक्यसमूह I: बृहदारण्यक, छान्दोग्यसमूह II: ईश, केनसमूह III: ऐतरेय, तैत्तिरीय, कौषीतकिसमूह IV: कठ, मुण्डक, श्वेताश्वतरसमूह V: प्रश्न, मांडूक्य, मैत्राणयी''बुद्ध काल से पूर्व के: ऐतरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केनमध्यकालीन: केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्यसांख्य एवं योग पर अधारित:''' मैत्री, श्वेताश्वतर |} सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ उपनिषदों ने आत्मनिरीक्षण का मार्ग बताया मूल ग्रन्थ Upanishads at Sanskrit Documents Site पीडीईएफ् प्रारूप, देवनागरी में अनेक उपनिषद GRETIL TITUS अनुवाद Translations of major Upanishads 11 principal Upanishads with translations Translations of principal Upanishads at sankaracharya.org Upanishads and other Vedanta texts डॉ मृदुल कीर्ति द्वारा उपनिषदों का हिन्दी काव्य रूपान्तरण Complete translation on-line into English of all 108 Upaniṣad-s [not only the 11 (or so) major ones to which the foregoing links are meagerly restricted]-- lacking, however, diacritical marks श्रेणी:दर्शन श्रेणी:वैदिक धर्म श्रेणी:उपनिषद