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अनुच्छेद 141 (भारत का संविधान)
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भारत का संविधान भाग 5 संघ न्यायपालिका अनुच्छेद 142 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 140 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी :श्रेणी:संविधान 1949 प्रकाशित
भारत के संविधान का अनुच्छेद 141 न्यायपालिका की उस केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करता है, जिसके माध्यम से देश में विधि की एकरूपता, निश्चितता और स्थिरता सुनिश्चित की जाती है। यह प्रावधान स्थापित करता है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि पूरे भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगी।Article 141: Law declared by Supreme Court to be binding on all courts https://www.constitutionofindia.net/articles/article-141-law-declared-by-supreme-court-to-be-binding-on-all-courts/ 2025-12-16 भारत का संविधान en-USसुप्रीम कोर्ट का फैसला इस देश की सभी अदालतों के लिए बाध्यकारी : सुप्रीम कोर्ट https://hindi.livelaw.in/category/news-updates/all-courts-in-this-country-are-bound-by-the-judgment-of-the-apex-court-says-supreme-court-165242 31 अक्टूबर 2020 livelaw.in इस प्रकार यह अनुच्छेद न केवल न्यायिक अनुशासन को स्थापित करता है, बल्कि न्यायिक प्रणाली में एक सुसंगत और सुव्यवस्थित विधिक परंपरा के विकास को भी सुनिश्चित करता है।
पृष्ठभूमि
संविधान-निर्माताओं के समक्ष यह चुनौती थी कि एक विशाल और विविधतापूर्ण देश में विधि की व्याख्या और उसका अनुप्रयोग एक समान कैसे रखा जाए। यदि विभिन्न न्यायालय समान विषयों पर भिन्न-भिन्न निर्णय देने लगें, तो इससे विधिक अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। इसी समस्या के समाधान के रूप में अनुच्छेद 141 की परिकल्पना की गई।
यह प्रावधान अंग्रेज़ी विधि परंपरा के “नज़ीर” के सिद्धांत से प्रेरित है,मिश्रा अनुषा अग्रवाल और प्रीशा 2025-11-15 Diverge and Conquer: Why Judicial Divergence is Healthy for the Indian Judicial Framework https://www.rsrr.in/post/diverge-and-conquer-why-judicial-divergence-is-healthy-for-the-indian-judicial-framework 2025-12-16 आरएसआरआर enचौधरी सुजीत https://www.google.com/books/edition/The_Oxford_Handbook_of_the_Indian_Consti/s5EDDAAAQBAJ?hl=en&gbpv=0 The Oxford Handbook of the Indian Constitution खोसला माधव मेहता प्रताप भानु मई 3, 2016 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 978-0-19-105862-2 दिसंबर 16, 2025 जिसके अनुसार उच्चतम न्यायालय के निर्णय निम्न न्यायालयों के लिए मार्गदर्शक और बाध्यकारी होते हैं। भारतीय संदर्भ में इसे संवैधानिक मान्यता देकर यह सुनिश्चित किया गया कि सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या ही विधि की अंतिम और प्रामाणिक व्याख्या मानी जाए।राजगोपाल कृष्णदास 2023-01-12 Under Constitution, law declared by the Supreme Court is binding on all https://www.thehindu.com/news/national/under-constitution-law-declared-by-the-supreme-court-is-binding-on-all/article66369225.ece 2025-12-16 द हिंदू en-IN
अनुच्छेद 141 को अन्य न्यायिक प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 136 (विशेष अनुमति याचिका) और अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के साथ जोड़कर देखा जाता है। इन प्रावधानों के समन्वय से यह स्पष्ट होता है कि सर्वोच्च न्यायालय न केवल अंतिम अपीलीय प्राधिकरण है, बल्कि उसकी विधिक व्याख्याएँ पूरे देश में न्याय के मानक को निर्धारित करती हैं।
इसके अतिरिक्त, “घोषित विधि” का आशय केवल निर्णय के अंतिम परिणाम से नहीं, बल्कि उस निर्णय में निहित विधिक तर्क और सिद्धांतों से भी है, जिन्हें न्यायालय ने प्रतिपादित किया होता है।
मूल पाठ
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के राज्य-क्षेत्र के भीतर स्थित सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगी।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 52 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४७सचिव, भारत सरकार डॉ. जी. नारायण राजू भारत का संविधान https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf 9 नवम्बर 2015 भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड 79
Law declared by Supreme Court to be binding on all courtsभारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 52 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४६
उपयोग
इस प्रावधान का उपयोग विशेष रूप से उन मामलों में स्पष्ट रूप से देखा जाता है, जहाँ सर्वोच्च न्यायालय किसी संवैधानिक या विधिक प्रश्न पर अंतिम व्याख्या प्रस्तुत करता है। उदाहरणस्वरूप, मौलिक अधिकारों की परिधि,निशिकांत दुबे के बयान पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने दी नसीहत, बोले- संविधान सर्वोच्च, कोई कानून से ऊपर नही https://www.abplive.com/news/india/nishikant-dubey-s-controversial-statement-on-supreme-court-former-judge-ashok-kumar-ganguly-says-nobody-is-above-law-2928390 20 अप्रैल 2025 एबीपी लाइव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,पहलगाम हमले पर 'X' पोस्ट 'PM के खिलाफ', उनके नाम का गलत इस्तेमाल: हाईकोर्ट ने नेहा राठौर को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार https://hindi.livelaw.in/allahabad-highcourt/x-posts-on-pahalgam-attack-against-pm-his-name-used-disrespectfully-allahabad-hc-denies-anticipatory-bail-to-singer-neha-rathore-312427 6 दिसंबर 2025 livelaw.in गोपनीयता के अधिकार अथवा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर दिए गए निर्णय पूरे देश में न्याय के मानक निर्धारित करते हैं। इसके पश्चात उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों को उन्हीं सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय देना होता है।
संदर्भ
टिप्पणी
अनुच्छेद 141 भारतीय न्यायिक व्यवस्था में एकरूपता और स्थिरता का आधार स्तंभ है। यह सुनिश्चित करता है कि देश के विभिन्न भागों में स्थित न्यायालय समान परिस्थितियों में समान विधिक सिद्धांतों का पालन करें, जिससे न्याय में समानता और निष्पक्षता बनी रहे।
हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय स्वयं अपने पूर्व निर्णयों से बंधा हुआ नहीं होता और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें परिवर्तित या पुनर्व्याख्यायित कर सकता है। यह लचीलापन न्याय को समयानुकूल और प्रगतिशील बनाए रखने में सहायक होता है।
इस प्रकार अनुच्छेद 141 न केवल विधिक अनुशासन का आधार है, बल्कि यह भारतीय न्यायपालिका को एक सुसंगत, विश्वसनीय और प्रभावी संस्था के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान) https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE/acGM0AYUDwAC भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय, विद्या विभाग 2014
बाहरी कड़ियाँ
संविधान-विधि के स्त्रोत.sci.gov.in
भारत का संविधान
श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद