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411 समाचार
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मुज़फ्फरपुर

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मुज़फ़्फ़रपुर Muzaffarpur शहर infobox 250 1/2/2/2 Aerial view of Muzaffarpur.jpg शहर का दृश्य NTPC Kantin Muzaffarpur.jpg NTPC कांटी BIO-Fuel Plant Muzaffarpur.jpg जैव ईंधन घर Sahu Pokhar.jpg साहू पोखर मंदिर P&M Mall Muzaffarpur.jpg P&M मॉल Homi Bhabha Cancer Hospital & Research Center- Muzaffarpur 01.jpg होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र RamaKrishna Mission Seva Sharam Muzaffarpur.jpg रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम Baba GaribNath.jpg श्री गरीबनाथ मंदिर India Bihar#India right yes मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार) 26 7 21 N 85 23 26 E inline देश राज्य बिहार ज़िला मुज़फ़्फ़रपुर प्रमंडल तिरहुत स्थापना 1 जनवरी 1875 नगर निगम मुज़फ़्फ़रपुर नगर निगम सांसद राज भूषण चौधरी Metric 91 60 3,54,462 2011 127वाँ (भारत)चतुर्थ (बिहार) IST भाषाएँ आधिकारिक हिन्दी second Report of the Commissioner for Linguistic Minorities in India http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM52ndReport.pdf nclm.nic.in Ministry of Minority Affairs 21 December 2018 dead https://web.archive.org/web/20170525141614/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM52ndReport.pdf 25 May 2017 अतिरिक्त आधिकारिक अंग्रेज़ी क्षेत्रीय बज्जिकाBajjika https://www.ethnologue.com/language/bho Ethnologue 22 September 2020 en +5:30 PIN 842001-05https://indiapincodes.net/Bihar/Muzaffarpur/ Pin Codes of Muzaffarpur, Bihar, India, Muzaffarpur Pincode Search indiapincodes.net 0621 दूरभाष कोड BR-06 लिंगानुपात 1000 ♂ / 890 ♀ muzaffarpur.bih.nic.in/ विधान परिषद के सदस्य दिनेश प्रसाद सिंह विधायक विजेन्द्र चौधरीMuzaffarpurchunav 2020: क्या इस बार मंत्री जी लगाएंगे हैट्रिक या पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी करेंगे वापसी? https://www.jagran.com/bihar/muzaffarpur-will-the-minister-impose-hat-trick-or-former-mla-vijendra-chaudhary-will-come-this-time-in-muzaffarpur-election2020-20997788.html 18 November 2020 Dainik Jagran 1 November 2020 hi महापौर निर्मला साहू साक्षरता 85.16% लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र मुज़फ़्फ़रपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र मुज़फ़्फ़रपुर नगर आयुक्त विक्रम वीरकार en उत्तर बिहार की राजधानी मुज़फ़्फ़रपुर (en Muzaffarpur no) भारत के बिहार राज्य के तिरहुत प्रमंडल के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह दोनों प्रमंडल और ज़िले की राजधानी है। यह बूढ़ी गण्डक नदी के तट पर बसा हुआ है। मुज़फ़्फ़रपुर बिहार का चौथा सबसे आबाद शहर है, जिस प्रकार इसे उत्तर बिहार की राजधानी मानी जाती है।Muzaffarpur City Population 2025 https://www.census2011.co.in/census/city/165-muzaffarpur.html Census2011.co.in 11 सितंबर 2025 विवरण मुज़फ़्फ़रपुर उत्तरी बिहार का एक प्रमुख शहर है। अपने सूती वस्त्र उद्योग,लाह (लाख)की चूड़ियों, शहद तथा आम और लीची जैसे फलों के उम्दा उत्पादन के लिये यह जिला पूरे विश्व में जाना जाता है, खासकर यहाँ की शाही लीची का कोई जोड़ नहीं है।https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/shahi-litchi-to-get-gi-tag-soon/articleshow/64900499.cms Bihar's famous Shahi litchi to get GI tag soon 8 जुलाई 2018 https://web.archive.org/web/20180804013808/https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/shahi-litchi-to-get-gi-tag-soon/articleshow/64900499.cms 4 अगस्त 2018 live यहाँ तक कि भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी यहाँ से लीची भेजी जाती है। बिहार के जर्दालु आम, मगही पान और कतरनी धान को जीआइ टैग (ज्योग्रफिकल इंडिकेशन) मिल चुका है। अब शाही लीची को भी जल्द जीआइ मिल जाएगा।https://www.jagran.com/bihar/patna-city-famous-shahi-litchi-of-bihar-to-get-gi-tag-soon-17793985.html अब बिहार की खास होगी मुज़फ़्फ़रपुर की शाही लीची, जल्‍दी मिलगा GI टैग 8 जुलाई 2018 https://web.archive.org/web/20180708133159/https://www.jagran.com/bihar/patna-city-famous-shahi-litchi-of-bihar-to-get-gi-tag-soon-17793985.html 8 जुलाई 2018 livehttp://zeenews.india.com/hindi/india/bihar-jharkhand/bihar-muzaffarpur-famous-shahi-litchi-get-gi-tag-soon/413551 धान, पान और आम के बाद मुज़फ़्फ़रपुर की शाही लीची को भी जल्द मिल जाएगा GI टैग 8 जुलाई 2018 https://web.archive.org/web/20180708104255/http://zeenews.india.com/hindi/india/bihar-jharkhand/bihar-muzaffarpur-famous-shahi-litchi-get-gi-tag-soon/413551 8 जुलाई 2018 live 2017 मे मुज़फ़्फ़रपुर स्मार्ट सिटी के लिये चयनित हुआ है। अपने उर्वरक भूमि और स्वादिष्ट फलों के स्वाद के लिये मुज़फ़्फ़रपुर देश विदेश मे "स्वीटसिटी"'(लीची की भूमि) के नाम से जाना जाता है। मुज़फ़्फ़रपुर थर्मल पावर प्लांट देशभर के सबसे महत्वपूर्ण बिजली उत्पादन केंद्रो मे से एक है।http://abpnews.abplive.in/ind/2014/05/24/article329024.ece/%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%AC-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%9A#.VHGCK_mSxqgजून 2020 InternetArchiveBot http://aajtak.intoday.in/story/bihars-litchis-for-president-pm--1-732086.html संग्रहीत प्रति 23 नवंबर 2014 https://web.archive.org/web/20141129075816/http://aajtak.intoday.in/story/bihars-litchis-for-president-pm--1-732086.html 29 नवंबर 2014 live इतिहास प्राचीन काल में मुजफ्फरपुर मिथिला (तिरहुत) राज्य का अंग था। बाद में मिथिला में वज्जि गणराज्य की स्थापना हुई। तीसरी सदी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा विवरणों से यह पता चलता है कि यह क्षेत्र काफी समय तक महाराजा हर्षवर्धन के शासन में रहा। उनकी मृत्यु के बाद स्थानीय क्षत्रपों का कुछ समय शासन रहा तथा आठवीं सदी के बाद यहाँ बंगाल के पाल वंश के शासकों का शासन शुरु हुआ जो 1019 तक जारी रहा। तिरहुत पर लगभग 11 वीं सदी में चेदि वंश का भी कुछ समय शासन रहा। सन 1211 से 1226 बीच गैसुद्दीन एवाज़ तिरहुत का पहला मुसलमान शासक बना। चम्पारण के सिमराँव वंश के शासक हरसिंह देव के समय 1323 ईस्वी में तुग़लक वंश के शासक गयासुद्दीन तुग़लक ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया लेकिन उसने सत्ता मिथिला के शासक कामेश्वर ठाकुर को सौंप दी। चौदहवीं सदी के अंत में तिरहुत समेत पूरे उत्तरी बिहार का नियंत्रण जौनपुर के राजाओं के हाथ में चला गया जो तबतक जारी रहा जबतक दिल्ली सल्तनत के सिकन्दर लोदी ने जौनपुर के शासकों को हराकर अपना शासन स्थापित नहीं किया। इसके बाद विभिन्न मुग़ल शासकों और बंगाल के नवाबों के प्रतिनिधि इस क्षेत्र का शासन चलाते रहे। पठान सरदार दाऊद खान को हराने के बाद मुगलों ने नए बिहार प्रांत का गठन किया जिसमें तिरहुत को शामिल कर लिया गया। 1764 में बक्सर की लडाई के बाद यह क्षेत्र सीधे तौर पर अंग्रेजी हुकूमत के अधीन हो गया। सन 1875 में प्रशासनिक सुविधा के लिये तिरहुत का गठन कर मुजफ्फरपुर जिला बनाया गया। मुजफ्फरपुर ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अत्यंत महत्वपूरण भूमिका निभाई है। महात्मा गाँधी की दो यात्राओं ने इस क्षेत्र के लोगों में स्वाधीनता के चाह की नयी जान फूँकी थी। खुदीराम बोस, जुब्बा साहनी, पण्डित सहदेव झा,पंडित सहदेव झा (एक महान व्यक्तित्व) -:  पंडित सहदेव झा एक महान‌ स्वतंत्रता सेनानी थे, जिनका जन्म 20 अक्टूबर 1874  को मुजफ्फरपुर जिला के मीनापुर थाना अन्तर्गत हरका मानशाही गांव में हुआ एवं देहावसान 20 दिसम्बर 1982 को हुआ। -: अपने काशी प्रवास के दौरान सर्वप्रथम पंडित मदन मोहन मालवीय जी के कहने पर 1911 ई. में पंडित सहदेव झा ने राष्ट्रीय कांग्रेस की सक्रिय सदस्यता स्वीकार की । -:पहली बार 1912 के कांग्रेस के बिहार अधिवेशन में पंडित सहदेव झा ने हिस्सा लिया , तदोपरांत पूरे भारत में होने वाले अधिकांश कांग्रेस अधिवेशन में उपस्थित रहकर उन्होंने सक्रिय सहभागिता दिखाई। -: 1917 में अंग्रेजों के तिनकठवा कानून ( इसमें एक बीघा/20 कट्ठा  में से तीन कट्ठा में जबरन नील की खेती करायी जाती थी )के विरुद्ध में जब राजकुमार शुक्ल जी ने आंदोलन किया एवं उनके बुलाने पर महात्मा गांधी जी चंपारन‌ आये तो उसी दरम्यान‌ गांधी जी से घनिष्ठता बढ़ी । -: पंडित सहदेव झा एक समृद्ध किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे और राजसी वस्त्र पहनते थे, 1919 में रॉलेट एक्ट के विरोध में गांधी जी के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल हुई और महात्मा गांधी बिहार आये, इसी क्रम में पंडित सहदेव झा अपने पैतृक निवास मुजफ्फरपुर जिला के मीनापुर थाना अन्तर्गत हरका मानशाही गांव से रामपुर हरी जा रहे थे,रास्ते में एक कुंआ पर एक महिला नहा रही थी , उस महिला ने अपने साड़ी के दो टुकड़े किए थे आधा सुखा रही थी एवं आधा से किसी प्रकार अपने शरीर को ढकने का प्रयास कर रही थी , यह दृश्य देखकर गांधी जी ने पंडित सहदेव झा से कहा, पंडित जी इस देश में इतनी गरीबी है की एक महीला को अपना शरीर ढकने के लिए समुचित वस्त्र नहीं मिल पा रहा और आप हैं की राजसी वस्त्र धारण किये हुए हैं , यह बात हुई और उनका कारवां आगे बढ़ गया अगले दीन सीतामढ़ी के रून्नीसैदपुर में जनसभा हुई जिसमें गांधी जी ने भरे मंच से कहा नेता होने के साथ ही  मैं एक बनिया भी हूं जहां जाता हूं व्यापार के अवसर तलाशता हूं , यहां भी व्यापार करने आया हूं और आज इस भरे मंच से मैं पंडित सहदेव झा जी के साफा, चपकन, एवं पगड़ी की नीलामी करने जा रहा हूं , इस प्रकार जब पंडित सहदेव झा के कपड़ों की निलामी संपन्न हुई तो गांधी जी नीलामी से प्राप्त पैसा पंडित जी को देने आये, तब पंडित सहदेव झा ने कहा , चूंकि एक महिला की दयनीय दशा देखकर आज यह नीलामी हुई है अतः इससे प्राप्त पैसा महिला उत्थान में लगाया जाये , वहीं पर महिला उत्थान के लिए कस्तूरबा गांधी ट्रस्ट की नींव पड़ी एवं उस संस्था का  पहला डोनेशन पंडित सहदेव झा के कपड़ों की नीलामी से प्राप्त रूपया था, कालांतर में कस्तूरबा गांधी ट्रस्ट ने महिला उत्थान के लिए बहुत सारे सामाजिक कार्य किए। -: 1930 में मुजफ्फरपुर में गांधी जी के आह्वान पर शराबबंदी एवं नशा के विरुद्ध आंदोलन का पंडित सहदेव झा ने नेतृत्व किया। -: 1934 में भूकंप के बाद जब महात्मा गांधी बिहार दौरे पर आये तो उनके साथ इन्होंने क्षेत्र का सघन दौरा किया एवं जनमानस के हक में कार्य किया। -: 1936 में जवाहरलाल नेहरू के आह्वान पर बाबा रामचंद्र, विजय सिंह पथिक, एन जी रंगा एवं सहजानंद सरस्वती के साथ किसानों को एकत्रित करने के लिए कार्य किए। -:12 अगस्त 1942 को पंडित सहदेव झा के नेतृत्व में हजारों भीड़ मीनापुर थाना पर पहुंची, वहां थाना परिसर में भारतीय झंडा फहराया गया एवं तत्कालीन मीनापुर थाना प्रभारी लुइस वालर को जबरन गांधी टोपी पहनाई गई, इसके खिलाफ लुइस वालर ने स्वयं पंडित सहदेव झा सहित 29 लोग एवं अन्य अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कि और उस लिस्ट में पहला नाम पंडित सहदेव झा का था । -: 15 अगस्त को मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी रोड पर रामपुर हरी के पास कुछ क्रान्तिकारी सड़क जाम करके विरोध प्रदर्शन कर रहे थे जिसमें फोर्स की गोली से 5 क्रान्तिकारी, विशन देव पटवा, चतुर्भुज मिश्र, केशव शाही, विन्देश्वर पाठक, और रमण राय शहीद हो गये एवं दर्जनों घायल हुए, इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया और पुनः          16 अगस्त 1942 को पंडित सहदेव झा के नेतृत्व में थाना परिसर में हजारों की संख्या में भीड़ एकत्रित हुई जहां भीड़ से घबड़ाकर तत्कालीन थाना प्रभारी लुइस वालर ने भीड़ तीतर-बीतर करने के उद्देश्य से पंडित सहदेव झा पर गोली चलवा दी इसी क्रम में पंडित सहदेव झा समेत कई लोगों को गोली लगी, बांगुर सहनी गोली लगने से उसी वक्त शहीद हो गये फिर क्या था गुस्साई भीड़ ने पंडित सहदेव झा के नेतृत्व में तत्कालीन थाना प्रभारी लुइस वालर को थाना परिसर में ही कुर्सी से बांध कर जिन्दा जला दिया  और थाना‌ परिसर से यूनियन जैक उतार कर भारतीय झंडा लहरा दिया , यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उस वक्त तक अपने आप में इस‌ प्रकार की प्रथम एवं इकलौती घटना थी । -: लुइस वालर हत्याकांड में पुनः सैकड़ों लोगों को अभियुक्त बनाया गया और इस बार अभियुक्तों  कि लिस्ट में पहले नंबर पर पंडित सहदेव झा का नाम था , इसी केस में 1943 के जनवरी में अंग्रेज प्रशासन ने पंडित सहदेव झा के ऊपर 5000 कि इनामी राशी घोषित कि जो उस वक्त बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी , कालांतर में पंडित सहदेव झा समेत बाकी क्रान्तिकारियों को बचाने के उद्देश्य से महान स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा सहनी ने अपने एकतरफा बयान‌ में सारे आरोप अपने ऊपर ले लिया और उनको फांसी हुई । -: स्वतंत्रता आंदोलन के दरम्यान 1930,1933 और 1942 में तीन बार  पंडित सहदेव झा को गिरफ्तार किया गया । -: 1947 में आजादी के बाद हर ओर फैले दंगों के दौरान कौमी एकता के लिए उन्होंने यादगार काम किया ।‌ -: विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में पंडित सहदेव झा की सक्रिय सहभागिता रही , उन्होंने खुद अपना जमीन‌ दान किया और परसौनी राजा, बेतिया नरेश, शिवहर के आनंदा बाबू, काशी नरेश, जौतपुर स्टेट, दरभंगा महाराज जैसे लोगों से जमीन दान‌ भी करवाये। -: खादी ग्रामोद्योग संघ के प्रचार प्रसार के लिए भी उन्होंने काफी कार्य किया ।शुक्ल बंधु जैसे अनेक क्रांतिकारियों की यह कर्मभूमि रही है। 1930 के नमक आन्दोलन से लेकर 1942 के भारत छोडो आन्दोलन के समय तक यहाँ के क्रांतिकारियों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे,मुजफ्फरपुर उत्तरी छोर की कमान युवा राम संजीवन ठाकुर ने संभाले रखी। मुजफ्फरपुर का वर्तमान नाम ब्रिटिस काल के राजस्व अधिकारी मुजफ्फर खान के नाम पर पड़ा है। 1972 तक मुजफ्फरपुर जिले में शिवहर, सीतामढी तथा वैशाली जिला शामिल था। मुजफ्फरपुर शहर मे महादेव का बहुत बङा स्थान है जहां मन से मांगे हर मनोकामना को पुरा होते लोगो ने देखा है जिसका नाम बाबा गरीबनाथ धाम है,इसके अलावे देवी मंदिर, मां बंग्लामुखी मंदिर भी यहां प्रसिद्ध है।मुजफ्फरपुर का पुराना नाम महाभारत एवं रामायण काल मे अलग था,जो जल्द सुधार हो जाये तो पौराणिक महत्व बढ जायेगा। मुजफ्फरपुर को इस्लामी और हिन्दू सभ्यताओं की मिलन स्थली के रूप में भी देखा जाता रहा है। दोनों सभ्यताओं के रंग यहाँ गहरे मिले हुये हैं और यही इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है। भूगोल क्षेत्रफलः 3172 किमी२ नदियाँ: गंडक, बूढी गंडक, बागमती तथा लखनदेई मौसम मुजफ्फरपुर का मौसम गर्मियों में, अप्रैल से जून, महीनों के बीच अत्यंत गर्म एवं नम रहता है (28/40 °C,90% अधिकतम्)। इसके मुकाबले सर्दियां काफ़ी सुखद एवं शीतल होती हैं। मुज़फ़्फ़रपुर Yes Yes 22 26 32 37 44 40 36 33 32 32 29 24 06 12 17 22 25 27 26 26 26 22 15 07 12 17 7 16 42 185 339 259 242 39 17 7 Muzaffarpur Weather June 2012 राजनीतिक विभाजन अनुमंडलः पूर्वी अनुमंडल तथा पश्चिमी अनुमंडल प्रखंडः १६ औराई, बोचहाँ, गायघाट, कटरा, मीनापुर, मुरौल, मुसहरी, सकरा, काँटी, कुढनी, बरुराज (मोतीपुर), पारु, साहेबगंज, सरैयाबंदरा मरवां पंचायतों की संख्या: ३८७ गाँवों की संख्या: १८११ भारत के बड़े गाव में से एक जजुआर कटरा ब्लाक में है शिक्षण संस्थान विश्वविद्यालय बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय महाविद्यालय लंगट सिंह महाविद्यालय मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी दर्शनीय स्थल right|thumb|मुजफ्फरपुर में लीची गार्डन बसोकुंड: जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म वैशाली के निकट बसोकुंड में लिच्छवी कुल में हुआ था। यह स्थान जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है। यहाँ अहिंसा एवं प्राकृत शिक्षा संस्थान भी है। जुब्बा साहनी पार्क: भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान जुब्बा साहनी ने १६ अगस्त १९४२ को मीनापुर थाने के इंचार्ज लियो वालर को आग में जिंदा झोंक दिया था। बाद में पकड़े जाने पर उन्हें ११ मार्च १९४४ को फांसी दे दी गयी।http://ilovebihar.com/forum/showthread.php?t=312 संग्रहीत प्रति 5 अगस्त 2009 https://web.archive.org/web/20100107015951/http://www.ilovebihar.com/forum/showthread.php?t=312 7 जनवरी 2010 dead जिले के इस महान स्वतंत्रता सेनानी की याद में बनाया गया पार्क दर्शनीय है। बा‍बा गरीबनाथ मंदिर: मुजफ्फरपुर के इस शिव मंदिर को देवघर के समान आदर प्राप्त है। सावन के महीने में यहाँ शिवलिंग का जलाभिषेक करने वालों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। रामचंद्र शाही संग्रहालय : इतिहास और पुराने कलाकृतियों को देखने में रुचि रखते हैं तो रामचंद्र शाही संग्रहालय जरूर जाएं। इस संग्रहालय में कुषाण काल से लेकर 13वीं शताब्दी तक की दुर्लभ वस्तुएं देखने को मिलती हैं। यहां पर आपको जैन, महावीर, बौद्ध स्तूप, मुहर आदि चीजें देखने को मिलेंगी। लीची गार्डन : मुजफ्फरपुर की पहचान ही लीची से है और अगर आप यहां आए हैं तो लीची गार्डन जाना ना भूलें। हर साल फरवरी से मई के महीने के बीच में यहां पर लीची की पैदावार होती है। इस दौरान आप यहां पर लजीज लीची का स्वाद ले सकते हैं। श्री चतुर्भुज स्थान मंदिर : यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर साल भर हर महीने किसी ना किसी तरह का उत्सव होता रहता है। यहां पर आप शांत वातावरण में भगवान विष्णु के दर्शन कर सकते हैं।https://www.prabhatkhabar.com/life-and-style/bihar-tourist-which-is-the-best-place-to-visit-in-bihar-visit-here-bml बिहार के साथ साथ मुजफ्फरपुर में जरूर घूमे इन जगह में 16 जनवरी 2023 प्रभात खबर देवी मंदिर: बंग्लामुखी मंदिर माता वैष्णो काली मंदिर। (स्वतन्तता सेनानी रामसंजीवन ठाकुर आवास के पास) पंचमुखी हनुमान मंदिर मोतीपुर माई मंदिर सरैया शक्ति पीठ कोठिया मज़ार (कांटी): दाता कंबल शाह मज़ार: शहीद खुदीराम स्‍मारक: छह्न्न्मास्तिका मन्दिर (कांटी) मां मनोकामना मन्दिर (प्रतापपुर) बाबाजी मनोकामनामहादेव ब्रह्म (प्रतापपुर) आवागमनDakini Devi bahilwara govind laxmipur हवाई मार्ग यहाँ का सबसे नजदीकी पताही हवाई अड्डा जो ४ किलोमीटर पर अवस्थित है लम्बे समय से बंद परा है। सामान्य हवाई अड्डा ८० किलोमीटर दूर पटना में स्थित है। एक अन्य हवाई अड्डा दरभंगा में स्थित है जो सैनिक उद्देश्यों के लिए बना है। रेल मार्ग मुजफ्फरपुर भारतीय रेल के पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह शहर रेलमार्ग से भारत के महत्वपूर्ण शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से गोरखपुर और हाजीपुर या मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर पहुंचा जा सकता है। मुजफ्फरपुर उतर-पूर्व भारतीय राज्‍यों से भी ट्रेन माध्‍यम से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग मुजफ्फरपुर बिहार के अन्‍य शहरों से सड़क के माध्‍यम से अच्‍छी तरह से जुड़ा हुआ है। हाजीपुर से प्रारंभ होकर सोनबरसा (सीतामढी) जानेवाली राष्ट्रीय राजमार्ग ७७ मुजफ्फरपुर होकर जाती है। लखनऊ से बरौनी को जोडनेवाली राष्ट्रीय राजमार्ग २८ मुजफ्फरपुर से गुजरती है। इसके अलावे राष्ट्रीय राजमार्ग ५७ तथा १०२ एवं राजकीय राजमार्ग ४६ तथा ४८ भी यहाँ से गुजरती है। राजधानी पटना से मुजफ्फरपुर (78 कि॰मी॰) के लिए हाजीपुर होकर नियमित बस सेवाएं हैं। पड़ोसी जिलों के लिए भी मुजफ्फरपुर से अच्छी बस सेवा उपलब्ध है। जलमार्ग जिले के पश्चिमी सीमा से गुजरनेवाली गंडक नदी नौका गम्य है लेकिन मानसून के दिनों में यह परिवहन योग्य नहीं रहती। इन्हें भी देखें मैथिली मिथिला मुज़फ्फरपुर ज़िला वातावरण इस शहर मे प्रदूषण एक बड़ी समस्या है इस शहर का नाम देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों मे शुमार है कचड़ा प्रबंधन और जल निकासी एक बड़ी समस्या है बारिश के दिनों मे यहाँ के लोगो को जल जमाव जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है अंग्रेजी में जिले का आधिकारिक जालस्थल मुजफ्फरपुर स संबंधित इतिहास सन्दर्भ श्रेणी:मुज़फ्फरपुर जिला श्रेणी:बिहार के शहर श्रेणी:मुज़फ्फरपुर ज़िले के नगर *