Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

बंजारा भाषा

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

बंजारा बंजारी भारत बंजारा 1 करोड 2011 जनगणना e25 lamb1269 भारोपीय हिंद-ईरानी हिन्द-आर्य पश्चिमी राजस्थानी-मारवाड़ी राजस्थानी Lambadi केसुला नै मोरारी। मायड भाषा बंजारा री। thumb|2019 में तेलंगाना के दो बंजारा युवा लम्बाड़ी में चर्चा कर रहे हैं बंजारा भाषा (OpenSpeaks-Lmn-Lambadi-Nenavath Mohan- Lambada 02.wav उच्चारण) राजस्थानी जैसी एक प्राचीन और हिन्द-आर्य भाषा समूह की एक स्वतंत्र बोली है, जो पूरे भारत के बंजारों द्वारा बोली जाती है। इसलिए इसे बंजारा भाषा कहते हैं। इसके अलावा इसे दक्षिण पश्चिमी भारत में 'लंबाडी'' और महाराष्ट्र में 'गोरमाटी', 'बंजारी' भी कहते हैं। लेकिन देश में उसकी असली पहचान 'बंजारा भाषा' नाम से पायी जाती है। बंजारा गौर समुदाय का उदगम स्थल शूरवीरों की धरती राजस्थान को ही माना जाता है संभवत: इसीलिए यह मारवाड़ी , मेवाती से मिलती जुलती बोली है। बंजारा भाषा अपने समुदाय द्वारा पूरे भारत मे बोली जाती है, जो गौर बंजारा समुदाय की मातृभाषा मानी जाती है।Inclusion of Banjara language in 8 th Schedule sought 24 अक्टूबर 2021 The Hindu इसकी क्षेत्रीय बोलियाँ भी हैं। कोई लिपि न होने के कारण इसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश, पंजाब में इसको वहाँ की स्थानीय लिपियों में लिखा जाता है। आज बंजारा भाषा में बड़े पैमाने पर साहित्य निर्माण हो रहा हैै। यह बंजारा भाषा केे लिए बड़ी उपलब्धि है। "केसुला नै मोरारी। मायड भाषा बंजारा री। चाँदा सुर्यास्यूं अमरारी। जीवे जीवेस्यू प्यारी।।इस गरिमा पूर्ण रचना को बंजारा भाषा का गौरवगीत माना जाता है ; जिसकी रचना बंजारा साहित्य एवं संस्कृति के विशेषज्ञ एकनाथराव पवार नायक ने की है। संविधान की आठवीं अनुसूचि में बंजारा भाषा को सम्मिलित करवाने की माँग, संसद में सांसद उमेश जाधव, सांसद सुरेश धानोरकर, पूर्व सांसद हरिसिंह राठौड़, राजीव सातव ,सांसद पी.बलराम नायक आदि ने उठाई । केसुला नै मोरारी मायड भाषा बंजारा री दैनिक सकाळLoksabha member Suresh Dhanorkar demands quota for Banjara community 11 फरवरी 2022 The New Indian Express विशेषताएँ बंजारा प्राचीन बोलियों में से एक है। इस भाषा का बंजारा साहित्य देवनागरी लिपि में ही लिखा जाता है। हालाँकि इसकी एक स्वतंत्र लिपि निर्माण करने का कार्य जारी है। गौर बंजारा भाषा में आज बड़े पैमाने पर किताब, रचनाएं, गीत, भजन, लघुपट जैसे विभिन्न माध्यम का निर्माण होने जा रहा है। और इस प्राचीनतम बंजारा भाषा पर अध्ययन और अनुसंधान का कार्य भी शुरू है। बंजारा भाषा समुदाय की विरासत के संरक्षण के साथ सदियों पुराने ज्ञान, विश्वासों और मूल्यों का वहन करती आ रही है। बंजारा भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने के लिये प्रयास किया जा रहा है। गौर बंजारा भाषा, साहित्य, संस्कृती एवं कला के संवर्धन हेतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा 16 मार्च 2024 को गौर बंजारा साहित्य अकादमी स्थापित करने में सरकारने मान्यता प्रदान की। गौर बंजारा साहित्य अकादमी की माँग सन 2015 में प्रख्यात बंजारा साहित्य और संस्कृति के विशेषज्ञ एकनाथ पवार नायक ने रखी थी। इस अकादमी स्थापन कराने में महाराष्ट्र राज्य के जलसंसाधन मंत्री संजय राठौर और साहित्यिक एकनाथ पंवार की अहम भूमिका मानी जाती है। https://www.lokmat.com/nagpur/gaer-banjara-sahitya-kala-akademi-recognized-by-the-state-government-a-a957-c629/ Gor Banjara Sahitya, Kala Akademi recognized by the state government गाेर बंजारा साहित्य, कला अकादमीला राज्य सरकारनं दिली मान्यता Lokmat.com 2024-03-17 LOKMAT mr 2024-03-26https://dailybanjara.com/banjara-bhasha-aathvi-anusuchi-me-sammilit-ki-pratiksha बंजारा भाषा : आठवी अनुसूची में सम्मिलित की प्रतिक्षा, बाधाऐं और सुझाव - एकनाथ पवार नायक 2025-05-06 Daily Banjara hi 2025-05-11बंजारा बोली भाषा : एक अध्ययन डा. चव्हाण मोहन सुर्या प्रकाशन 2007 गैलरी सन्दर्भ श्रेणी:भारत की भाषाएँ