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411 समाचार
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भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

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असम के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर भारत सरकार द्वारा निर्मित एक रजिस्ट्री (एनआरसी) है जिसमें उन भारतीय नागरिकों के नाम हैं जो असम के वास्तविक (वैध ) नागरिक हैं। यह पंजी विशेष रूप से असम के लिए ही निर्मित की गयी थी। किन्तु २० नवम्बर २०१९ को भारत के गृहमन्त्री अमित शाह ने संसद में वक्तव्य दिया था कि इस पंजी का पूरे भारत में विस्तार किया जाएगा। कहा था कि इसे भारत की जनगणना 1951 के बाद 1951 में तैयार किया गया था। इसे जनगणना के दौरान वर्णित सभी व्यक्तियों के विवरणों के आधार पर तैयार किया गया था। जो लोग असम में बांग्लादेश बनने के पहले (25 मार्च 1971 के पहले) आए है, केवल उन्हें ही भारत का नागरिक माना जाएगा।https://hindi.thequint.com/explainers/know-about-national-register-of-citizenship क्या है ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस’, यहां है हर खास जानकारी अग्रवाल धीरज कुमार 28 दिसंबर 2017 द क्विंट 21 फरवरी 2018 https://web.archive.org/web/20180221161944/https://hindi.thequint.com/explainers/know-about-national-register-of-citizenship 21 फ़रवरी 2018 dead असम भारत का पहला ऐसा राज्य है जिसके पास राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC ) है। नागरिकता हेतु प्रस्तुत लगभग दो करोड़ से अधिक दावों (इनमें लगभग 38 लाख लोग ऐसे भी थे जिनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावजों पर संदेह था) की जाँच पूरी होने के बाद न्यायालय द्वारा एन.आर.सी. के पहले मसौदे को 31 दिसंबर 2017 तक प्रकाशित करने का आदेश दिया गया था। 31 दिसंबर 2017 को बहु-प्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का पहला ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया। कानूनी तौर पर भारत के नागरिक के रूप में पहचान प्राप्त करने हेतु असम में लगभग 3.29 करोड आवेदन प्रस्तुत किये गए थे, जिनमें से कुल 1.9 करोड़ लोगों के नाम को ही इसमें शामिल किया गया है। असम में नागरिक पंजी को आखिरी बार 1951 में अद्यतन किया गया था। उस समय असम में कुल 80 लाख नागरिकों के नाम प्ंजीकृत किए गये थे। 1979 में अखिल आसाम छात्र संघ (AASU) द्वारा अवैध आप्रवासियों की पहचान और निर्वासन की मांग करते हुए एक 6 वर्षीय आन्दोलन चलाया गया था। यह आन्दोलन 15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद शान्त हुआ था। कालक्रम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर सबसे पहले वर्ष 1951 में तैयार किया गया था । 1979 में अखिल आसाम छात्र संघ (AASU) द्वारा अवैध आप्रवासियों की पहचान और निर्वासन की मांग करते हुए एक 6 वर्षीय आन्दोलन चलाया गया था। 15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अखिल असम छात्रसंघ का आन्दोलन शान्त हुआ था। असम में बांग्लादेशियों की बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर नागरिक सत्यापन की प्रक्रिया दिसंबर, 2012 में शुरू हुई थी। मई, 2015 में असम राज्य के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। 31 दिसंबर, 2017 को असम सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC) मसौदे का पहला संस्करण जारी किया गया। भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने हेतु 3.29 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 1.9 करोड़ लोगों को वैध भारतीय नागरिक माना गया है। शेष 1.39 करोड़ आवेदनों की विभिन्न स्तरों पर जांच जारी थी। सन्दर्भ इन्हें भी देखें अखिल असम छात्र संघ असम समझौता नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, २०१९ श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीयता कानून श्रेणी:असम की राजनीति श्रेणी:भारतीय समाज