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वैद्यनाथ मन्दिर, देवघर
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बैद्यनाथ मन्दिर, देवघर Baba_Dham.jpg बैद्यनाथ शिव मंदिर और पार्वती माता का मंदिर एक पवित्र लाल रस्सी से बंधे हुए हैं। भारत झारखण्ड देवघर देवघर, झारखंड 22
Baba Baidyanath Dham https://www.incredibleindia.gov.in/en/jharkhand/deoghar/baba-baidyanath-dham Incredible India 2025-04-27 महाशिवरात्रि 22 राजा पूरनमल (वर्तमान में उपस्थित मंदिर के निर्माता), विश्वकर्मा (प्राचीन मंदिर निर्माता) बाबा बैद्यनाथ मन्दिर प्रबन्ध परिषद babadham.org भगवान शिव नागर शैली
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मन्दिर भारतवर्ष के झारखण्ड राज्य के देवघर नामक स्थान में अवस्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है।http://www.shivshaktidham.in/baijnath-jyotirlinga संग्रहीत प्रति 7 दिसंबर 2015 https://web.archive.org/web/20150217161204/http://www.shivshaktidham.in/baijnath-jyotirlinga 17 फ़रवरी 2015 dead http://www.templesofindia.net/content/baba-baidyanath-temple-deoghar-jharkhand संग्रहीत प्रति 7 दिसंबर 2015 https://web.archive.org/web/20150416162326/http://www.templesofindia.net/content/baba-baidyanath-temple-deoghar-jharkhand 16 अप्रैल 2015 dead यह मंदिर भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगो में से एक है। यहा शिव जी 'बैद्यनाथ' के नाम से विराजमान है, इसी कारण से लोग इसे 'वैद्यनाथ धाम' के नाम से भी जाने जाते हैं। साथ ही यह एक सिद्धपीठ तथा इक्यावन शक्तिपीठों में से भी एक है, जहाँ पौराणिक परंपरा के अनुसार माता सती का हृदय गिरा था।
येह देवघर में शिव का अत्यन्त पवित्र और भव्य मन्दिर है। हर वर्ष सावन के महीने में स्रावण मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु "बोल-बम!" "बोल-बम!" का जयकारा लगाते हुए बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं। ये सभी श्रद्धालु अजगैबीनाथ मंदिर , सुल्तानगंज से पवित्र गंगा का जल लेकर लगभग सौ किलोमीटर की अत्यन्त कठिन पैदल यात्रा कर बाबा को जल चढाते हैं।
स्थापना व कथा
इस लिंग की स्थापना का इतिहास यह है कि एक बार राक्षसराज रावण ने हिमालय पर जाकर शिवजी की प्रसन्नता के लिये घोर तपस्या की और अपने सिर काट-काटकर शिवलिंग पर चढ़ाने शुरू कर दिये। एक-एक करके नौ सिर चढ़ाने के बाद दसवाँ सिर भी काटने को ही था कि शिवजी प्रसन्न होकर प्रकट हो गये। उन्होंने उसके दसों सिर ज्यों-के-त्यों कर दिये और उससे वरदान माँगने को कहा। रावण ने लंका में जाकर उस लिंग को स्थापित करने के लिये उसे ले जाने की आज्ञा माँगी। शिवजी ने अनुमति तो दे दी, पर इस चेतावनी के साथ दी कि यदि मार्ग में इसे पृथ्वी पर रख देगा तो वह वहीं अचल हो जाएगा। अन्ततोगत्वा वही हुआ। रावण शिवलिंग लेकर चला पर मार्ग में एक चिताभूमि आने पर उसे लघुशंका निवृत्ति की आवश्यकता हुई। रावण उस लिंग को एक व्यक्ति को थमा लघुशंका-निवृत्ति करने चला गया। इधर उन व्यक्ति ने ज्योतिर्लिंग को बहुत अधिक भारी अनुभव कर भूमि पर रख दिया। फिर क्या था, लौटने पर रावण पूरी शक्ति लगाकर भी उसे न उखाड़ सका और निराश होकर मूर्ति पर अपना अँगूठा गड़ाकर लंका को चला गया। इधर ब्रह्मा, विष्णु आदि देवताओं ने आकर उस शिवलिंग की पूजा की। शिवजी का दर्शन होते ही सभी देवी देवताओं ने शिवलिंग की वहीं उसी स्थान पर प्रतिस्थापना कर दी और शिव-स्तुति करते हुए वापस स्वर्ग को चले गये। जनश्रुति व लोक-मान्यता के अनुसार यह वैद्यनाथ-ज्योतिर्लिग मनोवांछित फल देने वाला है।
मन्दिर के मुख्य आकर्षण
thumb|वैद्यनाथधाम (देवघर) के मुख्य मन्दिर का चित्र
देवघर का शाब्दिक अर्थ है देवी-देवताओं का निवास स्थान। देवघर में बाबा भोलेनाथ का अत्यन्त पवित्र और भव्य मन्दिर स्थित है। हर साल सावन के महीने में स्रावण मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु "बोल-बम!" "बोल-बम!" का जयकारा लगाते हुए बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते है। ये सभी श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगा का जल लेकर लगभग सौ किलोमीटर की अत्यन्त कठिन पैदल यात्रा कर बाबा को जल चढाते हैं।
thumb|right|मन्दिर के समीप में स्थित पवित्र तालाब का चित्र
मन्दिर के समीप ही एक विशाल तालाब भी स्थित है। बाबा बैद्यनाथ का मुख्य मन्दिर सबसे पुराना है जिसके आसपास अनेक अन्य मन्दिर भी बने हुए हैं। बाबा भोलेनाथ का मन्दिर माँ पार्वती जी के मन्दिर से जुड़ा हुआ है।
पवित्र यात्रा
बैद्यनाथ धाम की पवित्र यात्रा श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में शुरू होती है। सबसे पहले तीर्थ यात्री अजगैबीनाथ ,सुल्तानगंज में एकत्र होते हैं जहाँ वे अपने-अपने पात्रों में पवित्र गंगाजल भरते हैं। इसके बाद वे गंगाजल को अपनी-अपनी काँवर में रखकर बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ की ओर बढ़ते हैं। पवित्र जल लेकर जाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह पात्र जिसमें जल है, वह कहीं भी भूमि से न सटे।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग बाबा बासुकिनाथ मन्दिर
श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग बाबा बासुकिनाथ अपने शिव मन्दिर के लिये जाना जाता है। वैद्यनाथ मन्दिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक बासुकिनाथ में दर्शन नहीं किये जाते। यह मन्दिर देवघर से 42 किलोमीटर दूर जरमुण्डी गाँव के पास स्थित है। यह मंदिर शिव के नागेश्वर रूप की पूजा होती है। इन्हें "फौजदारी बाबा" भी कहा जाता है, यहाँ पर स्थानीय कला के विभिन्न रूपों को देखा जा सकता है। इसके इतिहास का सम्बन्ध नोनीहाट के घाटवाल से जोड़ा जाता है। बासुकिनाथ मन्दिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मन्दिर भी हैं। मान्यता है कि यहां फुलायस पूजा करवाने से और "धरना देकर" आप बाबा से अपनी अर्जी लगा कर मनोकामना पूर्ण कर सकते हैं।
बैजू मन्दिर
बाबा बैद्यनाथ मन्दिर परिसर के पश्चिम में देवघर के मुख्य बाजार में तीन और मन्दिर भी हैं। इन्हें बैजू मन्दिर के नाम से जाना जाता है। इन मन्दिरों का निर्माण बाबा बैद्यनाथ मन्दिर के मुख्य पुजारी के वंशजों ने किसी जमाने में करवाया था। प्रत्येक मन्दिर में भगवान शिव लिंग स्वरूप में स्थापित है।
वैद्यनाथधाम में महाशिवरात्रि व पंचशूल की पूजा
भारत में झारखण्ड के देवघर जिले में स्थित वैद्यनाथ का मंदिर है। विश्व के सभी शिव मंदिरों के शीर्ष पर त्रिशूल लगा दीखता है मगर वैद्यनाथधाम परिसर के शिव, पार्वती, लक्ष्मी-नारायण व अन्य सभी मंदिरों के शीर्ष पर पंचशूल लगे हैं।
यहाँ प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि से 2 दिनों पूर्व बाबा मंदिर, माँ पार्वती व लक्ष्मी-नारायण के मंदिरों से पंचशूल उतारे जाते हैं। इस दौरान पंचशूल को स्पर्श करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। जैसा कि नीचे के चित्रों में आपको दिखाई पड़ेगा। वैद्यनाथधाम परिसर में स्थित अन्य मंदिरों के शीर्ष पर स्थित पंचशूलों को महाशिवरात्रि के कुछ दिनों पूर्व ही उतार लिया जाता है। सभी पंचशूलों को नीचे लाकर महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व विशेष रूप से उनकी पूजा की जाती है और तब सभी पंचशूलों को मंदिरों पर यथा स्थान स्थापित कर दिया जाता है। इस दौरान बाबा व पार्वती मंदिरों के गठबंधन को हटा दिया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन नया गठबंधन किया जाता है। गठबंधन के लाल पवित्र कपड़े को प्राप्त करने के लिए भी भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। महाशिवरात्रि के दौरान बहुत-से श्रद्धालु अजगैबीनाथ, सुल्तानगंज से कांवर में गंगाजल भरकर 108 किलोमीटर पैदल चलकर और ‘बोल बम’ का जयघोष करते हुए वैद्यनाथधाम पहुंचकर ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल अर्पण करते हैं।
इन्हें भी देखें
द्वादश ज्योतिर्लिंग
अजगैबीनाथ मंदिर
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Baidyanath Temple वैद्यनाथ मन्दिर, देवघर
भगवान शिव के दर्शन और तीर्थ, उनकी वीडियो और चित्रों के संग
शिव पुराण
आधिकारिक साइट
बैद्यनाथ
यहां पर पूजाओं का ब्यौरा
महाशिवरात्रि
गूगल अर्थ समाज
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श्रेणी:झारखंड
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