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विद्युत् विच्छेद
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दाएँ|अंगूठाकार|२००९ इक्वाडोर विद्युत्-संकट के समय केवल वाहन-दीपों ने प्रकाश प्रदान किया।
विद्युत्-विच्छेद, जिसे ब्लैकआउट, पावर फ़ेल्यर, पावर लॉस, पावर कट अथवा पावर आउट भी कहा जाता है, उपभोक्ता तक सम्पूर्ण विद्युत्-जाल-आपूर्ति के अभाव को सूचित करता है।Holloway Holloway 2020 123 Blackout
विद्युत्-जाल में विच्छेद के अनेक कारण हो सकते हैं। उदाहरणतः विद्युत्-गृहों में दोष, प्रसारण-रेखाओं अथवा उपकेंद्रों की क्षति, वितरण-तन्त्र के अन्य भागों की हानि, लघु परिपथ (शॉर्ट सर्किट), क्रमिक विफलता, फ़्यूज़ अथवा परिपथ-भंजक (सर्किट ब्रेकर) का क्रियान्वयन।
विद्युत्-विच्छेद विशेषतः उन स्थलों पर गम्भीर होता है जहाँ पर्यावरण तथा जन-सुरक्षा संकट में पड़ सकती है। चिकित्सालय, मल-शोधन-गृह तथा खदानें प्रायः स्टैण्डबाइ जनरेटर जैसे बैकअप-शक्ति-स्रोतों से युक्त रहते हैं, जो स्वतः चालू हो जाते हैं जब विद्युत्-आपूर्ति रुक जाती है। अन्य महत्त्वपूर्ण प्रणालियाँ, जैसे दूरसञ्चार, को भी आपात-शक्ति की आवश्यकता होती है। दूरभाष-केन्द्र के बैटरी-कक्ष में प्रायः सीसा-अम्ल-आधारित बैटरियों की शृंखला रहती है, तथा दीर्घकालिक विच्छेद की स्थिति में जनरेटर जोड़ने हेतु संयोजक-सॉकेट भी होता है।
विद्युत्-विच्छेद के समय गृहों, व्यवसायों तथा अन्य संस्थानों में विद्युत्-आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके कारणों में तीव्र मौसम-स्थितियाँ (जैसे आँधी, तूफ़ान, हिम-आँधी), भूकम्प, उपकरण-विफलता अथवा जाल-अधिभार सम्मिलित हैं।
प्रकार
अंगूठाकार|अन्धकार / विद्युत्-विच्छेद (ब्लैकआउट)
अंगूठाकार|क्षणिक दोष
विद्युत्-विच्छेद को अवधि तथा प्रभाव के आधार पर तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है—
क्षणिक दोष (Transient fault) — यह प्रायः विद्युत्-रेखा पर दोष से उत्पन्न होता है, जैसे लघु परिपथ अथवा फ्लैशओवर। दोष दूर होते ही विद्युत् स्वतः पुनःस्थापित हो जाती है।
ब्राउनआउट (Brownout) — यह विद्युत्-आपूर्ति में वोल्टेज की कमी है। ब्राउनआउट शब्द का उद्भव उस धुंधलेपन से हुआ है जो वोल्टेज घटने पर तन्तुदीप में दृष्टिगोचर होता है। इससे उपकरणों का प्रदर्शन दुर्बल हो सकता है अथवा उनका संचालन असत्य हो सकता है।
ब्लैकआउट (Blackout) — यह व्यापक क्षेत्र में दीर्घकालिक सम्पूर्ण विद्युत्-विच्छेद है। यह सर्वाधिक गम्भीर रूप है। यदि विद्युत्-गृह ठप हो जाए तो पुनःस्थापन कठिन होता है। विच्छेद कुछ मिनटों से लेकर कुछ सप्ताहों तक रह सकता है, यह जाल की संरचना पर निर्भर करता है।What happens during a blackout – Consequences of a prolonged and wide-ranging power outage Petermann Thomas Bradke Harald Lüllmann Arne Poetzsch Maik Riehm Ulrich 2011 Office of Technology Assessment at the German Bundestag 978-3-7322-9329-2 Berlin 10.5445/IR/1000103292https://eepublicdownloads.entsoe.eu/clean-documents/SOC%20documents/Incident_Classification_Scale/ICS_Methodology_2018-2019__Incident_Classification_Scale.pdf Incident Classification Scale 11 April 2018 European Network of Transmission System Operators for Electricity 6 loss of more than 50% of demand in the concerned TSO's control area; ortotal absence of voltage for at least three minutes in the concerned TSO's control area, leading to the triggering of restoration plans.
क्रमिक ब्लैकआउट (Rolling blackout) — जब विद्युत्-आवश्यकता आपूर्ति से अधिक हो जाती है, तब कुछ उपभोक्ताओं को विद्युत् दी जाती है और अन्य को नहीं। यह विकासशील देशों में सामान्य है, और पूर्व-निर्धारित अथवा बिना चेतावनी के हो सकता है। विकसित देशों में भी यह घटित हुआ है, जैसे कैलिफ़ोर्निया विद्युत्-संकट (२०००–२००१)। कभी-कभी यह जन-सुरक्षा हेतु भी किया जाता है, जैसे गैस-लीक से अग्नि रोकने अथवा वनाग्नि से बचाव हेतु।
विद्युत्-तन्त्र की रक्षा
दाएँ|अंगूठाकार|२१ जुलाई २००६ के तूफ़ान में वृक्ष-शाखाओं ने विद्युत्-रेखाओं में लघु परिपथ उत्पन्न किया। इससे प्रायः उन रेखाओं द्वारा आपूर्ति किए गए क्षेत्र में विद्युत्-विच्छेद हो जाता है।
विद्युत्-जाल में उत्पादन तथा भार (माँग) प्रत्येक क्षण लगभग समान रहना चाहिए, अन्यथा तन्त्र-घटक अधिभारित होकर नष्ट हो सकते हैं। इसके लिए संरक्षक रिले तथा फ़्यूज़ प्रयुक्त होते हैं, जो स्वतः अधिभार का पता लगाकर परिपथ को विच्छेदित कर देते हैं।
कभी-कभी किसी घटक का बन्द होना समीपवर्ती खण्डों में धारा-परिवर्तन उत्पन्न करता है, जिससे क्रमिक विफलता होकर बड़े क्षेत्र का विच्छेद हो सकता है—एक भवन से लेकर सम्पूर्ण नगर अथवा सम्पूर्ण विद्युत्-जाल तक।
आधुनिक विद्युत्-तन्त्रों को पुनरावृत्ति द्वारा इस प्रकार की विफलता से सुरक्षित बनाया जाता है। किन्तु अल्पकालिक आर्थिक लाभ हेतु कभी-कभी दीर्घकालिक निवेश नहीं किया जाता, जिससे जाल की स्थिरता समय के साथ क्षीण होती जाती है और केवल बड़े विच्छेद के बाद ही सुधारी जाती है।What happens during a blackout – Consequences of a prolonged and wide-ranging power outage Petermann Thomas Bradke Harald Lüllmann Arne Poetzsch Maik Riehm Ulrich 2011 Office of Technology Assessment at the German Bundestag 978-3-7322-9329-2 Berlin 10.5445/IR/1000103292Carreras B. A. Lynch V. E. Newman D. E. Dobson I. 2003 Blackout Mitigation Assessment in Power Transmission Systems http://www.ece.wisc.edu/~dobson/PAPERS/carrerasHICSS03.pdf https://web.archive.org/web/20110401070554/http://www.ece.wisc.edu/~dobson/PAPERS/carrerasHICSS03.pdf April 1, 2011 36th Hawaii International Conference on System Sciences Hawaii 11 जनवरी 2026 1 अप्रैल 2011 https://web.archive.org/web/20110401070554/http://www.ece.wisc.edu/~dobson/PAPERS/carrerasHICSS03.pdf
पुनःस्थापन
विद्युत्-उद्योग में ब्लैक स्टार्ट की संकल्पना है—अर्थात् सम्पूर्ण जाल-विच्छेद के पश्चात् विद्युत् की पुनःस्थापना। इसके लिए बैकअप-योजनाएँ बनाई जाती हैं। विद्युत्-जाल के लिए संकटों में साइबर-आक्रमण, सौर-तूफ़ान तथा तीव्र मौसम सम्मिलित हैं।
उदाहरणतः "उत्तर-पूर्व ब्लैकआउट २००३" उस समय हुआ जब अत्यधिक बढ़े वृक्ष उच्च-वोल्टेज रेखाओं से स्पर्श कर गए। इसके कारण अमेरिका तथा कनाडा में लगभग ५५ मिलियन लोग प्रभावित हुए और पुनःस्थापन में लगभग ६ अरब डॉलर का व्यय हुआ।
सन्दर्भ