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चंद्रकांता (उपन्यास)

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चंद्रकांता Chandrakanta.jpg मुखपृष्ठ देवकीनन्दन खत्री भारत हिन्दी फंतासी उपन्यास लहरी बुक डिपो, वाराणसी, भारत १८८८ 891.433 चंद्रकान्ता हिन्दी के शुरुआती उपन्यासों में है जिसके लेखक देवकीनन्दन खत्री हैं। सबसे पहले इसका प्रकाशन सन 1888 में हुआ था। यह लेखक का पहला उपन्यास था। यह उपन्यास अत्यधिक लोकप्रिय हुआ था और तब इसे पढ़ने के लिये बहुत लोगों ने देवनागरी/हिन्दी भाषा सीखी थी। यह तिलिस्म और ऐयारी पर आधारित है और इसका नाम नायिका के नाम पर रखा गया है।http://www.pustak.org/bs/home.php?bookid=31 संग्रहीत प्रति 24 मार्च 2007 https://web.archive.org/web/20070810180602/http://www.pustak.org/bs/home.php?bookid=31 10 अगस्त 2007 dead इसने नीरजा गुलेरी के इसी नाम के मेगा बजट टीवी धारावाहिक को प्रेरित कियाhttps://www.thelallantop.com/jhamajham/chandrakanta-neerja-guleris-magnum-opus-serial-was-still-remembered-for-its-grand-success/ तिलिस्मी सीरियल ‘चंद्रकांता’, जिसके ये 7 किरदार भुलाए नहीं भूलते (हालाँकि पटकथा में उपन्यास से कई अंतर थे) जो भारतीय टेलीविजन के इतिहास में सबसे बड़े ब्लॉकबस्टर में से एक बन गया।https://theprint.in/features/chandrakanta-the-show-in-which-irrfan-won-hearts-four-lines-at-a-time/412322/ Chandrakanta, the show in which Irrfan won hearts four lines at a time 3 मई 2020 https://web.archive.org/web/20200503225548/https://theprint.in/features/chandrakanta-the-show-in-which-irrfan-won-hearts-four-lines-at-a-time/412322/ 3 मई 2020 dead कथानक चन्द्रकान्ता को एक प्रेम कथा कहा जा सकता है। इस शुद्ध लौकिक प्रेम कहानी को, दो दुश्मन राजघरानों, नवगढ और विजयगढ के बीच, प्रेम और घृणा का विरोधाभास आगे बढ़ाता है। विजयगढ की राजकुमारी चंद्रकांता और नवगढ के राजकुमार वीरेन्द्र विक्रम को आपस में प्रेम है। लेकिन राज परिवारों में दुश्मनी है। दुश्मनी का कारण है कि विजयगढ़ के महाराज नवगढ़ के राजा को अपने भाई की हत्या का जिम्मेदार मानते है। हालांकि इसका जिम्मेदार विजयगढ़ का महामंत्री क्रूर सिंह है, जो चंद्रकांता से शादी करने और विजयगढ़ का महाराज बनने का सपना देख रहा है। राजकुमारी चंद्रकांता और राजकुमार विरेन्द्र विक्रम की प्रमुख कथा के साथ साथ ऐयार तेजसिंह तथा ऐयारा चपला की प्रेम कहानी भी चलती रहती है। कथा का अंत नौगढ़ के राजा सुरेन्द्र सिंह के पुत्र वीरेन्द्र सिंह तथा विजयगढ़ के राजा जयसिंह की पुत्री चन्द्रकांता के परिणय से होता है। पात्र चंद्रकांता- विजयगढ़ की राजकुमारी वीरेन्द्र विक्रम- नवगढ़ का राजकुमार तेजसिंह- ऐयार चपला- ऐयारा क्रूर सिंह- विजयगढ़ का महामंत्री समीक्षा उपन्यास का आकर्षण हैं तिलिस्मी और ऐयारी के अनेक चमत्कार जो पाठक को विस्मित तो करते ही हैं, रहस्य निर्मित करते हुए उपन्यास को रोचकता भी प्रदान करते हैं। क्रूर सिंह के षड्यंत्र एवं वीरेन्द्र विक्रम के पराक्रम का वर्णन अत्यधिक रोचक बन जाता हैं। लेखक अपने इस उपन्यास में न केवल तिलस्म का बहुत ही सुंदर वर्णन करता है, बल्कि उपन्यास की प्रस्तावना में उसकी सच्चाई के बारे में भी बताता है की कैसे तिलस्म कोई झूठी कहानी नहीं है। लेकिन वक्त के साथ साथ लेखक तिलस्म को जादू के रूप में जोड़कर लिखने लग गए। हकीकत में तिलस्म जादू जैसा दिख सकता है, लेकिन उसमें जादू नहीं हुआ करता था। देवकीनंदन के इस उपन्यास में रहस्य और रोमांच के साथ तिलस्म के बारे में सस्पेन्स ने इस उपन्यास को विलक्षण और एक मील का पत्थर बना दिया। यहाँ तक की आजाद भारत में बहुत से उपन्यासकारों ने उस उपन्यास की हूबूहू और बहुत मिलती जुलती कहानी वाले कई उपन्यास लिखे। उसमें कुछ ने अपने नाम भी उसके साथ मिलते जुलते रखे (जैसे की वेद प्रकाश शर्मा का नॉवेल देव कांता संतति, ओम प्रकाश शर्मा का सूर्य कांता संतति इत्यादि)। इन्हें भी देखें चंद्रकांता संतति विजयगढ़ बाहरी कड़ियाँ चन्द्रकान्ता (गद्यकोश में) चन्द्रकान्ता, भाग 1 - (आनलाइन नि:शुल्क उपलब्ध) कहां तक उचित है चन्द्रकान्ता को साहित्य से ख़ारिज करना बाबू देवकीनन्दन खत्री डिजिटल लाइब्रेरी सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दी श्रेणी:उपन्यास श्रेणी:हिन्दी साहित्य