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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अशोक सुंदरी

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Ashokasundari 2 245CMR.jpg अशोकसुंदरी का एक चित्र नहुष देवी पद्मपुराण Hindu गणेश ( छोटे भाई ) , कार्तिकेय ( बड़े भाई ),अय्यपा ( छोटे भाई ) ,मनसा देवी( छोटी बहन ) और देवी ज्योति ( छोटी बहन ) एक छोटा भाई और भी है परमानन कल्पना, सपने और सुंदरता की देवी भगवान शिव माता पार्वती याति ययाति सयाति अयाति वियाति कृति और १०० पुत्रियां कमल अशोक सुंदरी (संस्कृत: अशोकसुन्दरी) यह एक हिन्दू देवकन्या हैं, जिनका वर्णन भगवान शिव और पार्वती की बेटी के रूप में किया गया है। वह आम तौर पर मुख्य शास्त्रों में शिव के पुत्री के रूप में वर्णित नहीं हैं, उनकी कथा पद्मपुराण में अंकित है। राजा नहुष की पत्नी हैं। जिनके ६ पुत्र और १०० पुत्रियां हैं । माता पार्वती के अकेलेपन को दूर करने हेतु कल्पवृक्ष नामक पेड़ के द्वारा ही अशोक सुंदरी की रचना हुई थी। अ+शोक अर्थात् सुख, माता पार्वती को सुखी करने हेतु ही उनका निर्माण हुआ था और वह अत्यंत सुंदर थीं इसी कारण इन्हें सुंदरी कहा गया। यें भगवान शिव और माता पार्वती बेटी हैं यें भगवान कार्तिकेय से छोटी किन्तु गणेशजी ,मनसा देवी, देवी ज्योति और भगवान अय्यपा से बड़ी हैं । महर्षि जरत्कारू और अश्विनी कुमार नासत्य इनके बहनोई हैं। महर्षि आस्तिक की मौसी हैं । देवसैना , वल्ली और ऋद्धि , सिद्धि की ननंद तथा संतोषी माता , क्षेम और लाभ की बुआ हैं http://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/ पद्मपुराण यहाँ से डाउनलोड करें। 19 मई 2014 https://web.archive.org/web/20140517032204/http://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/ 17 मई 2014 dead इनके परिवार में निम्नलिखित सदस्य है: दिव्य चरित्र अशोक सुंदरी के जन्म की कथा पद्म पुराण में बताई गई है जो नहुष नामक राजा के चरित्र वर्णन की इकाई है। एक बार माता पार्वती द्वारा विश्व में सबसे सुंदर उद्यान लाने के आग्रह से भगवान शिव पार्वती को नंदनवन ले गए, वहां माता को कल्पवृक्ष से लगाव हो गया और उन्होने उस वृक्ष को ले लिया। कल्पवृक्ष मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष है, पार्वती ने अपने अकेलेपन को दूर करने हेतु उस वृक्ष से यह वर मांगा कि उन्हे एक कन्या प्राप्त हो, तब कल्पवृक्ष द्वारा अशोक सुंदरी का जन्म हुआ। माता पार्वती ने उस कन्या को वरदान दिया कि उसका विवाह देवराज इंद्र जितने शक्तिशाली यूवक से होगा। एक बार अशोक सुंदरी अपने दासियों के संग नंदनवन में विचरण कर रहीं थीं तभी वहां हुंड नामक राक्षस का प्रवेश हुआ जो अशोक सुंदरी के सुंदरता से मोहित हो गया तथा विवाह का प्रस्ताव किया, तब उस कन्या ने भविष्य में उसके पूर्वनिर्धारित विवाह के संदर्भ में बताया। राक्षस ने कहा कि वह नहुष को मार डालेगा तब अशोक सुंदरी ने राक्षस को शाप दिया कि उसकी मृत्यु नहुष के हाथों होगी। उस राक्षस ने नहुष का अपहरण कर लिया जिससे नहुष को हुंड की एक दासी ने बचाया। महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में नहुष बड़ा हुआ तथा आगे जाकर उसने हुंड का वध किया। बाद में नहुष तथा अशोक सुंदरी का विवाह हुआ तथा वह ययाति जैसे वीर पुत्र तथा सौ रूपवती कन्याओं की माता बनीं। इंद्र के अभाव में नहुष को ही अस्थायी रूप से इंद्र बनाया गया, उसके घमंड के कारण उसे शाप मिला तथा इसी से उसका पतन हुआ। बादमें इंद्र ने अपनी गद्दी पुन: ग्रहण की। इन्हें भी देखें शिव पार्वती कार्तिकेय गणेश पद्मपुराण सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ वेदपुराण डॉट कॉम, संपूर्ण पद्मपुराण को अॉनलाइन सुनें। श्रेणी:हिन्दू धर्म श्रेणी: हिन्दू देवियाँ