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पंडित राम प्रसाद बैरागी
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अक्टूबर 2024
पंडित राम प्रसाद बैरागी हिमाचल प्रदेश के कसौली कस्बे के सुबाथु मन्दिर के पुजारी थे रामप्रसाद बैरागी को अम्बाला की जेल सर्वप्रथम फाँसी पर चढ़ाया गया था।https://m.tribuneindia.com/2008/20081123/spectrum/book4.htm संग्रहीत प्रति 27 मई 2021 30 दिसंबर 2016 https://web.archive.org/web/20161230141347/http://www.tribuneindia.com/2008/20081123/spectrum/book4.htm dead सुबाथू के क्रांतिकारी राम प्रसाद बैरागी ने देश की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह जन क्रांति गतिविधियों का आयोजन करके अंग्रेजों को देश से बाहर निकालना चाहते थे। इसलिए गदर को सफल बनाने के लिए हिमाचल में एक जासूसी संगठन बनाया गया। इसके नेता राम प्रसाद बैरागी थे।https://www.divyahimachal.com/2017/12/%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%B9-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80/ 1857 की क्रांति में बैरागी को कसौली के क्रांतिकारियों का अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध में पूरा समर्थन मिला। पूरे देश में क्रांति के संचालन के लिए एक गुप्त संगठन बनाया गया था। पहाड़ों में इसके नेता पंडित राम प्रसाद वैरागी थे।https://m.jagran.com/himachal-pradesh/solan-15886085.html संगठन पूरे देश में पत्रों के माध्यम से क्रान्ति का संचालन कर रहा था। 12 जून 1857 को इस संगठन के कुछ पत्र अंबाला के कमिश्नर जीसी बार्नस के हाथ लग गए। इनमें दो पत्र राम प्रसाद वैरागी के भी थे, जिससे संगठन का भेद खुल गया। अन्त में वैरागी को पकड़ कर अंबाला जेल में फाँसी पर चढ़ा दिया।
इन्हें भी देखें
कसौली
अम्बाला
श्रेणी:१८५७ में निधन
श्रेणी:भारतीय क्रांतिकारी