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अनुच्छेद 139 (भारत का संविधान)

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भारत का संविधान भाग 5 संघ न्यायपालिका अनुच्छेद 140 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 138 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी :श्रेणी:संविधान 1949 प्रकाशित भारत के संविधान का अनुच्छेद 139 सर्वोच्च न्यायालय की अधिकारिता के विस्तार से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह सुनिश्चित करता है कि न्यायालय मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। यह अनुच्छेद संसद को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह विधि द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को ऐसे अतिरिक्त अधिकार दे सके, जिनके माध्यम से वह कुछ विशिष्ट प्रकार के रिट (परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा आदि) जारी कर सके।Conferment on the Supreme Court of powers to issue certain writs https://www.constitutionofindia.net/articles/article-139-conferment-on-the-supreme-court-of-powers-to-issue-certain-writs/ भारत का संविधान en-US पृष्ठभूमि संविधान-निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के संरक्षण का प्रमुख दायित्व सौंपा जाएगा। यद्यपि अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति पहले से ही प्रदान की गई थी, फिर भी यह अनुभव किया गया कि समय के साथ ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जहाँ न्यायालय की अधिकारिता को और विस्तृत करने की आवश्यकता हो।सचिव, भारत सरकार डॉ. जी. नारायण राजू भारत का संविधान https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf 9 नवम्बर 2015 भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड 78 इसी उद्देश्य से अनुच्छेद 139 को संविधान में सम्मिलित किया गया, ताकि संसद को यह लचीलापन प्राप्त हो सके कि वह आवश्यकतानुसार सर्वोच्च न्यायालय को अतिरिक्त रिट अधिकार प्रदान कर सके। यह प्रावधान न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ और परिस्थितिनुकूल बनाए रखने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम था। अनुच्छेद 139 को अनुच्छेद 32 (मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट अधिकार) तथा अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता) के साथ जोड़कर समझा जाता है।Bharata Ka SamĐvidhana https://www.google.co.th/books/edition/Bharata_Ka_Sam%C4%90vidhana/-L2bAAAAMAAJ विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार 2005 यह प्रावधान इस बात को रेखांकित करता है कि जहाँ अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु शक्ति देता है, वहीं अनुच्छेद 139 संसद को यह क्षमता प्रदान करता है कि वह इस अधिकारिता का विस्तार अन्य उद्देश्यों तक कर सके। मूल पाठ संसद विधि द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को यह अधिकार प्रदान कर सकेगी कि वह ऐसे किसी भी प्रयोजन के लिए, जो अनुच्छेद 32 के खंड (2) में निर्दिष्ट प्रयोजनों से भिन्न हो, निर्देश, आदेश या रिट जारी कर सके।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 52 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४७सचिव, भारत सरकार डॉ० रीटा वशिष्ट भारत का संविधान https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s380537a945c7aaa788ccfcdf1b99b5d8f/uploads/2023/05/2023050186.pdf 26 नवम्बर 2021 भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) 64 Parliament may by law confer on the Supreme Court power to issue directions, orders or writs, including writs in the nature of habeas corpus, mandamus, prohibition, quo warranto and certiorari, or any of them, for any purposes other than those mentioned in clause (2) of article 32.भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 52 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४६ संदर्भ टिप्पणी अनुच्छेद 139 भारतीय संविधान की लचीली और प्रगतिशील प्रकृति का परिचायक है। यह न्यायपालिका को समयानुकूल सशक्त बनाने के लिए विधायिका को आवश्यक साधन प्रदान करता है। यद्यपि इस अनुच्छेद के अंतर्गत शक्ति सीधे सर्वोच्च न्यायालय को नहीं, बल्कि संसद को दी गई है, फिर भी इसका अंतिम उद्देश्य न्यायालय की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता को बढ़ाना ही है।भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान) https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE/acGM0AYUDwAC भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय, विद्या विभाग 2014 इस प्रकार, अनुच्छेद 139 न्यायिक प्रणाली को अधिक व्यापक, सक्षम और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक साधन के रूप में स्थापित होता है। बाहरी कड़ियाँ भारत का संविधान श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद