Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

निकाह

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

thumb|एक मौलाना विवाह समारोह के दौरान निकाह को संपन्न कराते हुए। अंगूठाकार|एक पाकिस्तानी दुल्हन शादी के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करते हुवे। निकाह:इस्लाम में निकाह एक शादी का क़ानूनी अनुबंध है। (अरबी: ar عقد القران 'अक़्द अल-क़िरान,"शादी के अनुबंध"; نکاح نامہ;निकाह नामा) वधू और वधुवर के बीच शरिया के अनुसार अनुबंध। या दूल्हे और दुल्हन के बीच एक क़रार नामा है। इस निकाह के लिये दोनों की अनुमती होना ज़रूरी है। दुल्हे को चाहिये कि निकाह का शुल्क जिसे "महर" कहा जाता है, अदा करना पडता है। इस्लाम में निकाह एक संस्कार ना होकर मात्र एक अधिकार (कान्ट्रैक्ट) है। इस्लाम धर्म मे निकाह के बाद पत्नी का पति के शरीर पर एवं पति का पत्नी के शरीर पर अधिकार होता है। Muhhamadmulla https://www.amarujala.com/india-news/karnataka-high-court-said-muslim-marriage-contract-not-a-rite-like-hindu-marriage इस्लाम में निकाह सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट है, हिन्दू विवाह जैसा संस्कार नहीं: कर्नाटक HC अमर उजाला 16 नवंबर 2022https://dopolitics.in/muslim-marriage-is-a-contract-and-not-sacrament-unlike-a-hindu-marriage-karnataka-high-court कर्नाटक हाईकोर्ट: मुस्लिम निकाह अनुबंध, हिंदू विवाह की तरह संस्कार नहीं Dopolitics 16 नवंबर 2022 15 नवंबर 2022 https://web.archive.org/web/20221115192506/https://dopolitics.in/muslim-marriage-is-a-contract-and-not-sacrament-unlike-a-hindu-marriage-karnataka-high-court deadनिकाह के लगवी मानी जमा करना, मिलाना, गांठ बांधना और एक दुसरे में दाखिल होने के हैं। और शरई मानी “मियां-बीवी के बीच अकद जिससे वती (सोहबत) करना हलाल” होता है।https://ummat-e-nabi.com/nikah-ke-masail-in-hindi/ निकाह के मसाइल ख़ुत्बाए निकाह, मेहर, हमबिस्तरी, वलीमा 2023-10-15 Ummate Nabi ﷺ hi-IN 2023-10-15 इस निकाह में दुल्हा और दुल्हन की तरफ़ से दो मुस्लिम गवाह होना चाहिए और एक वकील होना भी ज़रूरी है, वकील का मतलब कोर्ट का लायर नही बल्कि वकालत करने रिश्तेदार या दोस्त का होना भी आवश्यक माना जाता है। इस तरीक़े को शरीयत या शरिया या इस्लामीय न्यायसूत्र का तरीका कहते हैं।  http://www.amazon.com/Consuming-Desires-Family-Crisis-Middle/dp/0804761566 Hasso, Frances S. Consuming Desires: Family Crisis and the State in the Middle East 978-0804761567 Stanford University Press 2011 5 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20160304232537/http://www.amazon.com/Consuming-Desires-Family-Crisis-Middle/dp/0804761566 4 मार्च 2016 live इस निकाह को "निकाह-मिन-सुन्नह" या सुन्नत तरीक़े से किया गया निकाह कहते हैं। निकाह क़ुरआन में सूरा -- अल-बक़रा - आयत 2:221 और मुशरिक (बहुदेववादी) स्त्रियों से निकाह न करो जब तक कि वे ईमान न लाएँ। एक ईमानदारी बांदी (दासी), मुशरिक स्त्री से कहीं उत्तम है; चाहे वह तुम्हें कितनी ही अच्छी क्यों न लगे। और न (ईमानवाली स्त्रियाँ) मुशरिक पुरुषों से विवाह करो, जब तक कि वे ईमान न लाएँ। एक ईमानवाला गुलाम आज़ाद मुशरिक से कहीं उत्तम है, चाहे वह तुम्हें कितना ही अच्छा क्यों न लगे। ऐसे लोग आग (जहन्नम) की ओर बुलाते है और अल्लाह अपनी अनुज्ञा से जन्नत और क्षमा की ओर बुलाता है। और वह अपनी आयतें लोगों के सामने खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि वे चेतेंhttps://tanzil.net/#trans/hi.farooq/2:221 Tanzil - Quran Navigator القرآن الكريم tanzil.net 2025-02-13 सूरा अन-निसा (औरत) - आयत 4:23 तुमपर हराम (निषिद्ध) कर दी गई हैं; तुम्हारी माताएँ, तुम्हारी बेटियाँ, तुम्हारी बहनें, तुम्हारी फूफियाँ, तुम्हारी मौसियाँ (खालाएँ) और भतीजियाँ, भाँजियाँ, तुम्हारी वे माताएँ जिन्होंने तुम्हें दूध पिलाया है, दूध के रिश्ते से तुम्हारी बहनें, तुम्हारी पत्नियों की माताएँ (सासें) , तुम्हारी गोद में पालित-पोषित तुम्हारी उन पत्नियों की बेटियाँ जिनसे तुम संभोग कर चुके हो। यदि तुमने उनसे संभोग न किया हो, तो तुमपर (उनकी बेटियों से विवाह करने में) कोई गुनाह नहीं, और तुम्हारे सगे बेटों की पत्नियाँ और यह कि तुम दो बहनों को (निकाह में) एकत्रित करो, परंतु जो (अज्ञानता के काल में) बीत चुका, (सो बीत चुका)। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, असीम दयावान है। सूरा अन-निसा (औरत) - आयत 4:24 तथा उन स्त्रियों से (विवाह करना हराम है), जो दूसरों के निकाह़ में हों, सिवाय तुम्हारी दासियों के। यह अल्लाह ने तुम्हारे लिए अनिवार्य कर दिया है। और इनके सिवा दूसरी स्त्रियाँ तुम्हारे लिए ह़लाल कर दी गई हैं कि तुम अपना धन (महर) खर्च करके उनसे विवाह कर लो (बशर्ते कि तुम्हारा उद्देश्य) सतीत्व की रक्षा हो, अवैध तरीके से काम वासना की तृप्ति न हो। फिर उन औरतों में से जिनसे तुम लाभ उठाओ, उन्हें उनका महर अवश्य चुका दो। तथा यदि महर निर्धारित करने के बाद आपसी सहमति (से कोई कमी-बेशी) कर लो, तो तुमपर कोई गुनाह नहीं है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है। सूरा अन-नूर (प्रकाश) - आयत 24:32 तथा तुम अपने में से अविवाहित पुरुषों तथा स्त्रियों का निकाह कर दो, और अपने दासों और अपनी दासियों में से जो सदाचारी हैं उनका भी (विवाह कर दो)। यदि वे निर्धन होंगे, तो अल्लाह उन्हें अपने अनुग्रह से धनी बना देगा। और अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।https://quranenc.com/hi/browse/hindi_omari/24#32 अर्थों का अनुवाद सूरा सूरा अन्-नूर - हिंदी अनुवाद पवित्र क़ुरआ विश्वकोश hi 2025-02-13 समझौते द्वारा शादी निकाह की अहमियत अंगूठाकार|मेंहदी पर एक मुस्लिम दुल्हन के हाथ, तमिलनाडु, भारत. इन्हें भी देखें फ़िक़ह महर निकाह (1982 फ़िल्म) सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ (पीडीएफ) ई-पुस्तक: शादी - एक के रूप Ibada (अंग्रेजी) फिक़्ह के परिवार पर IslamQA.info - एक विषय-वार पूरा दिशानिर्देश के लिए इस्लामी शादी और वैवाहिक जीवन (अंग्रेजी) शादी की प्रक्रिया में इस्लाम पर ICNA वेबसाइट श्रेणी:शरियत श्रेणी:इस्लामी संस्कृति श्रेणी:विवाह