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411 समाचार
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खरगोन ज़िला

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खरगोन ज़िलाKhargone district MP Khargone district map.svg खरगोन 8,030 18,72,413 2011 230 ब्लॉक ? हिन्दी खरगोन भारत देश में मध्य प्रदेश राज्य का जिला है। भूगोल खरगोन जिला मध्यप्रदेश की दक्षिणी पश्चिमी सीमा पर स्थित है। 21 अंश 22 मिनिट - 22 अंश 35 मिनिट (उत्तर) अक्षांश से 74 अंश 25 मिनिट - 76 अंश 14 मिनिट (पूर्व) देशांश के बीच यह जिला फैला है। इसका क्षेत्रफल लगभग 8030 वर्ग कि॰मी॰ है। इस जिले के उत्तर में धार, इंदौर व देवास, दक्षिण में महाराष्ट्र, पूर्व में खण्डवा, बुरहानपुर तथा पश्चिम में बड़वानी है। नर्मदा घाटी के लगभग मध्य भाग में स्थित इस जिले के उत्तर में विंध्याचल एवं दक्षिण में सतपुड़ा पर्वतश्रेणियां हैं। नर्मदा नदी जिले में लगभग 50 कि॰मी॰ बहती है। कुंदा तथा वेदा अन्य प्रमुख नदियां हैं। देजला-देवड़ा, गढ़ी गलतार, अंबकनाला तथा अपर वेदा प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं हैं। महेश्वर पनबिजली तथा सिंचाई योजना नर्मदा पर बनी तीन प्रमुख पनबिजली व सिंचाई योजनाओं में से एक है। खरगोन जिला मुख्यालय के अक्षांश व देशांश क्रमशः 21°49'18" (उत्तर) तथा 75°37'10" (पूर्व) हैं। यह शहर औसत समुद्र सतह से लगभग 283 मीटर (± 9 मीटर) की ऊंचाई पर है। इतिहास इतिहासकारों के मतानुसार नर्मदा घाटी की सभ्यता अत्यंत प्राचीन है। रामायण काल, महाभारत काल, सातवाहन, कनिष्क, अभिरोहर्ष, चालुक्य, भोज, होलकर, सिंधिया, मुगल तथा ब्रिटिश आदि से यह क्षेत्र जुड़ा हुआ है। विभिन्न कालों में यहां जैन, यदुवंशी, सिद्धपंथी, नागपंथी आदि का प्रभाव रहा है। प्राचीन स्थापत्य कला के अवशेष इस क्षेत्र के ऐतिहासिक गाथाओं को व्यक्त करने में आज भी सक्षम हैं। इस क्षेत्र में प्राप्त पाषाणकालीन शस्त्रों से भी यह सिद्ध होता है। भारत के उत्तर व दक्षिण प्रदेशों को जोड़ने वाले प्राकृतिक मार्ग पर बसा यह क्षेत्र सदैव ही महत्वपूर्ण रहा है। इतिहास के विभिन्न कालखण्डों में यह क्षेत्र - महेश्वर के हैहय, मालवा के परमार, असीरगढ़ के अहीर, माण्डू के मुस्लिम शासक, मुगल तथा पेशवा व अन्य मराठा सरदारों - होल्कर, शिंदे, पवार - के साम्राज्य का हिस्सा रहा है। 1 नवम्बर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य के गठन के साथ ही यह जिला "पश्चिम निमाड़" के रूप में अस्तित्व में आ गया था। कालांतर में प्रशासनिक आवश्याकताओं के कारण दिनांक 25 मई 1998 को "पश्चिम निमाड़" को दो जिलों - खरगोन जिला एवं बड़वानी जिला में विभाजित किया गया। नाम इतिहास ऐसा अनुमान है कि आर्य एवं अनार्य सभ्यताओं की मिश्रित भूमि होने के कारण यह क्षेत्र "निमार्य" नाम से जाना जाने लगा जो कि कालांतर में अपभ्रंश हो कर "निमार" एवं फिर "निमाड़" में परिवर्तित हो गया। (निमा = आधा)। एक अन्य मतानुसार यह नाम नीम के वृक्षों के कारण भी पड़ा। आवागमन यह जिला इंदौर, खण्डवा, बड़वानी, धार, झाबुआ, धुळै (धूलिया), जळगाव (जलगांव) से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। आगरा - मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 इस जिले से गुज़रता है। जिले के पूर्वी भाग से मीटर गेज रेल्वे मार्ग जाता है जो कि दिल्ली - जयपुर - इंदौर - खण्डवा - हैदराबाद मार्ग है। इस रेल्वे मार्ग पर महत्वपूर्ण स्टेशन बड़वाह एवं सनावद हैं। खण्डवा ब्रॉड गेज का सबसे पास का स्टेशन तथा इंदौर सबसे पास का हवाई अड्डा है। काश कि इस जिले में रेल की सुविधा होती तो यह क्षेत्र प्रगति का शिखर चूम रहा होता। प्रशासनिक-भाग प्रशासनिक दृष्टि से जिले को 5 अनुविभाग, 8 तहसील, 9 जनपद पंचायत (विकासखण्ड) तथा 1407 राजस्व ग्रामों में बांटा गया है। यह जिला एक आदिवासी जिला है जिसमें 600 ग्राम पंचायतें, 3 नगर पालिकाएं, 4 नगर पंचायतें तथा 7 कृषि उपज मण्डियां हैं। जिले के 2 मुख्यालय हैं - प्रशासन, पुलिस व अन्य सभी शासकीय कार्यालयों के लिये खरगोन तथा न्यायिक व्यवस्था के लिये मण्डलेश्वर। खरगोन, कसरावद, भीकनगांव, बड़वाह, सनावद, मण्डलेश्वर, महेश्वर, बिस्टान तथा करही जिले के प्रमुख नगर हैं। खनिज व फसलें ग्रेनाइट, कैल्साइट, क्वार्टजाइट, चूना पत्थर, ब्रेक्सिया, रेतीला पत्थर आदि जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं। ज्वार व मक्का खरीफ़ की तथा गेहूं रबी की प्रमुख फसलें हैं। कपास तथा मूंगफली प्रमुख व्यावसायिक फसलें हैं। निमाड़ को कपास का कटोरा कहा जाता है। उद्योग व शिक्षा जिले में लगभग 13779 छोटे तथा 14 मध्यम व बड़े उद्योग हैं। खरगोन, निमरानी, बड़वाह, पाडली तथा भीकनगांव में औद्योगिक क्षेत्र हैं। जिले में 1 अभियांत्रिकी महाविद्यालय, 2 पोलीटेक्निक महाविद्यालय तथा कई स्नातकोत्तर व स्नातक स्तर के महाविद्यालय एवं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं। खरगोन जिले के नर्मदा नदी पर स्थित नगर मण्डलेश्वर शिक्षा के क्षेत्र बेहद तरक्की कर चूका है यहाँ १ सरकारी व तीन निजी महाविद्यालय है इसके अलावा फार्मेसी कॉलेज है एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल के संचालकों द्वारा एक इंजीनियरिंग कॉलेज भी खुल चूका है। पूर्व में भी यह नगर शैक्षणिक रूप से जिले में अव्वल रहा है। करही भी जिले में शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल है। यहाँ लगभग 18 स्कूल है तथा एक शासकीय ITI है, जो जिले में सबसे आगे व उत्तम है, जहाँ आसपास के जिलों से विद्यार्थी यहाँ पढ़ाई के लिए आते है, इस शहर के विद्यालयों से हर वर्ष टॉपर निकलते है। पड़ोसी-जिले बड़वानी जिला - खरगोन से 90 कि॰मी॰ दूर राज्य महामार्ग क्रमांक 27 (खण्डवा - खरगोन - बड़वानी - कुक्षी - वडोदरा गुजरात) पर बड़वानी जिला मुख्यालय बसा हुआ है। बावनगजा - बड़वानी से 10 कि॰मी॰ दूर एक अत्यंत प्रसिध्द जैन तीर्थस्थल। बुरहानपुर जिला - खरगोन से 130 कि॰मी॰ दूर बसा यह शहर पहले "दक्षिण का द्वार" कहलाता था। दिल्ली - मुंबई रेलमार्ग पर स्थित है। असीरगढ़ - यह किला खरगोन से 100 कि॰मी॰ इंदौर - बुरहानपुर मार्ग पर है। इसे "दक्षिण की कुंजी" नाम से जाना जाता था। देवास जिला - खरगोन से 150 कि॰मी॰ दूर। बैंक नोट प्रेस तथा कई प्रसिद्ध औद्योगिक संस्थान ब कारखाने यहां हैं। रेल्वे स्टेशन है। धार जिला - यह शहर खरगोन से 130 कि॰मी॰ दूरी पर स्थित है। माण्डू (माण्डवगढ़) - खरगोन से लगभग 120 कि॰मी॰ दूर अत्यंत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल। इंदौर जिला - यह शहर खरगोन से 143 कि॰मी॰ दूर है। इंदौर को मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी भी कहा जाता है। यहां रेल्वे जंक्शन एवं हवाई अड्डा है। खण्डवा जिला - खरगोन से 90 कि॰मी॰ है। रेल्वे जंक्शन है। दिल्ली - मुंबई ब्रॉड गेज रेलमार्ग तथा दिल्ली - जयपुर - हैदराबाद मीटर गेज रेलमार्ग यहां से गुजरते हैं। ऊँकारेश्वर - यह स्थान खरगोन से 90 कि॰मी॰ दूर नर्मदा नदी के किनारे पर बसा है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग - श्री ममलेश्वर यहां स्थित है। उज्जैन जिला - खरगोन से 195 कि॰मी॰ दूर यह शहर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग - श्री महाकालेश्वर के लिये प्रसिद्ध है। पर्यटन स्थल एवं रेल्वे जंक्शन है। जळगाव (जलगांव जिला) एवं धुळै (धूलिया) - महाराष्ट्र के ये जिले खरगोन के पड़ौसी जिले है। पर्यटन खरगोन - जिला मुख्यालय - कुंदा नदी के तट पर बसा यह शहर अत्यंत प्राचीन नवग्रह मन्दिर के लिये प्रसिद्ध है। यह शहर इंदौर (रेल्वे / हवाई अड्डा) से 143 कि.मी., बड़वानी से 90 कि॰मी॰ (गुजरात से आते हुए - राज्य महामार्ग 26), सेंधवा से 70 कि॰मी॰ (महाराष्ट्र से आते हुए - आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धामनोद से 65 कि॰मी॰ (इंदौर से आते हुए - आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), ठीकरी से 45 कि॰मी आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धार से 130 कि.मी., खण्डवा से 90 कि॰मी॰ तथा बुरहानपुर से 130 कि॰मी॰ दूरी पर है। यह शहर कपास एवं जिनिंग कारखानों का एक प्रमुख केन्द्र है। महेश्वर - यह शहर हैहयवंशी राजा सहस्रार्जुन, जिसने रावण को पराजित किया था, की राजधानी रहा है। ऋषि जमदग्नि को प्रताड़ित करने के कारण उनके पुत्र भगवान परषुराम ने सहस्रार्जुन का वध किया था। कालांतर में महान देवी अहिल्याबाई होल्कर की भी राजधानी रहा है। नर्मदा नदी के किनारे बसा यह शहर अपने बहुत ही सुंदर व भव्य घाट तथा माहेश्वरी साड़ियों के लिये प्रसिद्ध है। घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर हैं जिनमे से राजराजेश्वर मंदिर प्रमुख है। आदिगुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ यहीं हुआ था। यह जिले की एक तहसील का मुख्यालय भी है। करही - महेश्वर से 31 कि॰मी॰ तथा खरगोन से 69 कि॰मी॰ दूर स्थित यह शहर कपड़ा मार्किट तथा एजुकेशन के लिए प्रशिद्ध है। मालन नदी के किनारे बसा यह शहर शिक्षा के क्षेत्र में जिले में एजुकेशन हब बनाता जा रहा है। यहाँ गुप्तेश्वर महादेव मंदिर है, जो माँ अहिल्याबाई होल्कर के द्वारा उनके शासन काल के समय बनवाया गया था। यहाँ दुर्गा मंदिर, राम मंदिर, जैन मंदिर तथा नाग मन्दिर प्रमुख दर्शनीय मंदिर है। जिले में यह शहर कपास एवं जिनिंग कारखानों का खरगोन के बाद दूसरा प्रमुख केन्द्र है। यहाँ एक अनाज मंडी तथा ITI भी है। मण्डलेश्वर - महेश्वर से 8 कि॰मी॰ दूर यह शहर भी नर्मदा के किनारे ही बसा है। नर्मदा पर जल-विद्युत परियोजना व बांध का निर्माण हुआ है। इस नगर में दत्त मंदिर राम मंदिर, गुप्तेश्वर मंदिर शीतला माता मंदिर काशी विश्वेवर मंदिर एंड छप्पन देव मंदिर अत्यंत प्राचीन होकर दर्शनीय है यहाँ फांसी बैड्डी नामक स्थान पर अनेक देशभक्तों को १८५७ की क्रांति के समय फांसी दी गयी ऐसी किवदंती है मण्डलेश्वर से ८ किमी के अंतर पर ग्राम चोली बड़ा ही ऐतिहासिक ग्राम है यहाँ पांडव युगीन महादेव का मंदिर बड़ा गणपति और चौसठ योगिनीं मंदिर इसकी प्राचीनता को बयां करते है। चोली नामक स्थान पर अत्यंत प्राचीन शिव-मंदिर है जहां पर बहुत भव्य शिव-लिंग स्थित है। ऊन - यह स्थान खरगोन से 14 कि॰मी॰ दूरी पर है। परमार-कालीन शिव-मंदिर तथा जैन मंदिरों के लिये यह स्थान प्रसिद्ध है। एक बहुत प्राचीन लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी यहां स्थित है। खजुराहो के अलावा केवल यहीं परमार-कालीन प्राचीन मंदिर हैं। बकावां एवं रावेरखेड़ी - महान पेशवा बाजीराव की समाधी रावेरखेड़ी में स्थित है। उत्तर भारत के लिए एक अभियान के समय उनकी मृत्यु यहीं नर्मदा किनारे हो गई थी। बकावां में नर्मदा के पत्थरों को तराश कर शिव-लिंग बनाए जाते हैं। देजला-देवड़ा - कुंदा नदी पर एक बड़ा बांध है जिससे लगभग 8000 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। सिरवेल महादेव - खरगोन से 55 कि॰मी॰ दूर इस स्थान के बारे में मान्यता है कि रावण ने महादेव शिव को अपने दसों सर यहीं अर्पण किये थे। इसीलिये यह नाम पड़ा है। यह स्थान महाराष्ट्र की सीमा से बहुत ही पास है। महाशिवरात्रि पर म.प्र. एवं महाराष्ट्र से अनेक श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। नन्हेश्वर - खरगोन से 20 कि॰मी॰ दूर यह स्थान भी प्राचीन शिव-मंदिर के लिये प्रसिद्ध है। खरगोन से सिरवेल महादेव जाते समय यह स्थान रास्ते में है। बड़वाह व सनावद - ये जुड़वां शहर नर्मदा के दोनो ओर बसे हैं। उत्तर की ओर बड़वाह तथा दक्षिण की ओर सनावद है। ऊँकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने के लिये यहां से ही जाना पड़ता है। पुनासा में इंदिरा सागर जल-विद्युत परियोजना जाने क लिये भी सनावद के पास है। बड़वाह से मण्डलेश्वर, महेश्वर तथा धामनोद वह ठीकरी जाया जा सकता है। विश्वप्रसिद्ध लाल मिर्ची की मण्डी बैड़िया, सनावद के पास है। बैड़िया - यह नगर व्यापार की द्रस्टी से बहुत प्रसिद्ध है यह नगर खरगोन -सनावद मुख्य मार्ग पर स्थित है सनावद से 17 कि.मी. है !यहा से रावेरखेदी जाने का रास्ता है जो यहाँ से 11 की। मी . है। यह नगर खरगोन से 50 की। मी . है! मौसम यहाँ बेहद गर्मी होती है। वनों की अंधाधुन्द कटाई ने जिले को रेगिस्तान बना दिया है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ Official Website of Khargone District बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:भारत के ज़िले श्रेणी:मध्य प्रदेश के जिले *