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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

प्रेम प्रकाश

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मई 2017 मई 2017 मई 2017 मई 2017 प्रेम प्रकाश Prem Parkash. Jalandhar. 1986 by Amarjit Chandan.jpg 250px प्रकाश 1986 में साहित्यकार भारतीय पंजाबी भाषा कहानी–संग्रह कुझ अनकहा वी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रेम प्रकाश (जन्म: 7 अप्रैल 1932 – मृत्यु: 30 मार्च 2025) पंजाबी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं।। S. R. Bakshi Sita Ram Sharma S. Gajnani Parkash Singh Badal: Chief Minister of Punjab https://books.google.com/books?id=cyebnJdCFlEC&pg=PA213 1 January 1998 APH Publishing 978-81-7024-987-0 213– उन्हें "1947 के बाद के पूर्वी पंजाबी साहित्य के प्रमुख लघु कथा लेखकों" में गिना जाता है।http://www.paperbackswap.com/Prem-Parkash/author/ Prem Parkash:, and a List of Books by Author Prem Parkash paperbackswap.com 14 February 2015 उनकी कहानियाँ सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और पंजाब के परिवर्तित सामाजिक परिदृश्य को प्रभावी ढंग से चित्रित करती थीं। वे प्रेम प्रकाश खन्नवी नाम से भी जाने जाते थे, जो उनके मूल गाँव खन्ना (पंजाब) से जुड़ा उपनाम है।इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह कुझ अनकहा वी के लिये उन्हें सन् 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp अकादमी पुरस्कार साहित्य अकादमी 11 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp 15 सितंबर 2016 dead जीवन और पेशा उनका पैतृक गांव बदीनपुर था, जो कभी नाभा रियासत का हिस्सा था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भादसों गांव से प्राप्त की और मैट्रिक के लिए खन्ना चले गए। इसके बाद उन्होंने क्रिश्चियन बेसिक ट्रेनिंग स्कूल, खरड़ से जे.बी.टी. (जूनियर बेसिक ट्रेनिंग) की पढ़ाई पूरी की। प्रेम प्रकाश ने 1963-64 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से उर्दू में स्नातकोत्तर (M.A.) किया। प्रेम प्रकाश का करियर विविध रहा: शुरुआत में वे अमलोह के पास बड़गुज्जरां गाँव में किसान थे। 1953 से 1962 तक उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में अध्यापन किया। इसके बाद 1964 से 1969 तक वे जालंधर में एक उर्दू अख़बार के संपादक रहे। 1969 से 1990 तक वे हिंद समाचार में उप-संपादक के रूप में कार्यरत रहे। 1970 में उन्होंने प्रसिद्ध लेखक सुरजीत हंस के साथ मिलकर "लकीर" नामक एक साहित्यिक पत्रिका शुरू की, जिसने पंजाबी साहित्य में नई दृष्टि और विचारधारा को बढ़ावा दिया। Nirupama Dutt Stories of the Soil: Classic Punjabi Stories https://books.google.com/books?id=He0kKXoo0t8C&pg=PA311 2010 Penguin Books India 978-0-14-306858-7 311– उनका निधन 30 मार्च 2025 को 92 वर्ष की आयु में हुआ।ਪੰਜਾਬੀ ਦੇ ਨਾਮਵਰ ਕਹਾਣੀਕਾਰ ਪ੍ਰੇਮ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਾ ਦਿਹਾਂਤ pa सन्दर्भ श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत पंजाबी भाषा के साहित्यकार