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आयशा अल-बाउनिया

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आयशा अल-बाउनिया عائشة الباعونية ar लगभग 1460 ई. दमिश्क, मामलुक सल्तनत 1517 ई. (922 हिजरी) दमिश्क सीरियाई इस्लाम (सूफीवाद) सूफी विदुषी, कवयित्री, न्यायविद, लेखिका अरबी साहित्य का सृजन, सूफीवाद पर लेख क़ादिरिया आयशा अल-बाउनिया (अरबी: عائشة الباعونية; निधन: 1517 ई.) मध्यकालीन इस्लामी जगत की एक सूफी लेखिका, कवयित्री और विदुषी थीं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, 20वीं शताब्दी से पूर्व की महिलाओं में अरबी भाषा में सर्वाधिक साहित्यिक रचनाएं उनके नाम दर्ज हैं। उनका साहित्य मुख्य रूप से सूफीवाद, ईश्वर-प्रेम और पैगंबर मुहम्मद पर केंद्रित है। उन्हें एक इस्लामी न्यायविद (फ़कीह) के रूप में भी जाना जाता है, जिन्हें फ़तवा (कानूनी राय) जारी करने और शिक्षा देने की आधिकारिक अनुमति (इज़ाज़ा) प्राप्त थी।Qutbuddin Tahera 2006 Women Poets Meri Josef W. Medieval Islamic Civilisation: An Encyclopedia 2 Routledge 865–867 http://nelc.uchicago.edu/sites/nelc.uchicago.edu/files/2006%20Women%20Poets%20%28Med.%20Islamic.%20Civ.%20Enc.%29.pdf 20 मार्च 2026 7 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20140207005116/http://nelc.uchicago.edu/sites/nelc.uchicago.edu/files/2006%20Women%20Poets%20%28Med.%20Islamic.%20Civ.%20Enc.%29.pdf dead परिवार और शिक्षा आयशा का जन्म दमिश्क (Damascus) में हुआ था। उनका संबंध 'बाउनी' परिवार से था। यह परिवार मूल रूप से जॉर्डन के अजलुन क्षेत्र के बाउना गाँव से दमिश्क आकर बसा था। 15वीं शताब्दी के दौरान बाउनी परिवार के कई सदस्य दमिश्क में काज़ी (न्यायाधीश), विद्वान और प्रशासक रहे थे। उनके पिता, यूसुफ अल-बाउनी, भी दमिश्क में एक न्यायाधीश थे।Khalidi W. A. S. 1960 AL-BĀ'ŪNĪ Gibb H. A. R. The Encyclopaedia of Islam Brill 1 1109 पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण आयशा को बचपन से ही शैक्षणिक वातावरण मिला। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उन्होंने आठ वर्ष की आयु में कुरान कंठस्थ कर लिया था। उन्होंने अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से हदीस, इस्लामी न्यायशास्त्र (फ़िक़्ह) और अरबी साहित्य का अध्ययन किया।Homerin Th Emil 2003 Living Love: The Mystical Writings of 'A'ishah al-Ba'uniyah https://knowledge.uchicago.edu/record/1047 Mamlūk Studies Review 10.6082/M18W3BFC 1947-2404 सूफीवाद और आध्यात्मिक यात्रा इस्लामी कानून के अध्ययन के अतिरिक्त, आयशा का रुझान सूफीवाद की ओर हुआ। वे 'क़ादिरिया' (Qadiriyya) सूफी सिलसिले से जुड़ गईं। उन्होंने जमाल अल-दीन इस्माइल अल-हवारी और उनके उत्तराधिकारी याह्या अल-उरमावी को अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक चुना। आयशा ने अपनी रचनाओं में मक्का की अपनी तीर्थयात्रा और वहां के अपने आध्यात्मिक अनुभवों (visions) का उल्लेख किया है, जिनमें उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के दर्शन होने का वर्णन किया है।Homerin Th. Emil Writing Sufi Biography: The Case of ‘Ā’ishah al‐Bā‘ūn?yah (d. 922/1517) 1 https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1111/j.1478-1913.2006.00135.x The Muslim World en 96 3 389–399 10.1111/j.1478-1913.2006.00135.x 0027-4909 काहिरा प्रवास और इज़ाज़ा आयशा का विवाह अहमद इब्न मुहम्मद इब्न ज़ायदान से हुआ था। 1513 ईस्वी में, पति के निधन के बाद, वह अपने पुत्र अब्द अल-वहाब के साथ मिस्र की राजधानी काहिरा चली गईं। काहिरा में उन्होंने तत्कालीन मामलुक सल्तनत के इस्लामी विद्वानों के साथ विमर्श किया। उनके अध्ययन और ज्ञान के आधार पर, उन्हें कई विद्वानों द्वारा 'इज़ाज़ा' (शिक्षा देने और फतवा जारी करने का अधिकार) प्रदान किया गया। मध्यकालीन इस्लामी इतिहास में किसी महिला को यह दर्जा प्राप्त होना सामान्य नहीं था।Stewart Devin J. 2006 Degrees, or Ijaza Meri Josef W. Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia 1 Routledge 201–204 काहिरा प्रवास के दौरान उनकी भेंट मिस्र के शासक अल-अशरफ कान्सुह अल-गौरी से हुई। 1516 ईस्वी में, जब उस्मानिया (Ottoman) साम्राज्य के सुल्तान सेलिम प्रथम ने सीरिया पर अधिकार किया, तब आयशा ने अलेप्पो शहर में सुल्तान सेलिम से भी मुलाकात की थी। साहित्यिक कृतियाँ आयशा अल-बाउनिया ने कविता और गद्य दोनों विधाओं में लेखन किया। उनके साहित्य पर इब्न अरबी और इब्न अल-फ़रीद जैसे पूर्ववर्ती सूफी विचारकों का प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने सूफी सिद्धांतों, ईश्वरीय प्रेम और रहस्यवाद पर ग्रंथ लिखे हैं। उनकी कुछ ज्ञात रचनाएँ निम्नलिखित हैं:Homerin Th. Emil 2009 ĀʾISHAH al-Bāʿūniyyah Lowry Joseph Edmund Stewart Devin J. Essays in Arabic Literary Biography II: 1350–1850 Harrassowitz 21–27 978-3-447-05933-6 अल-मवरिद अल-अहना फी मवलिद अल-असना (al-Mawrid al-ahnā fī ’l-mawlid al-asnā): यह पैगंबर मुहम्मद के जीवन पर आधारित एक काव्य रचना है। दीवान फैज़ अल-फज़्ल व-जम अल-शमल (Dīwān Fayḍ al-faḍl wa-wa-jamʻ al-shaml): यह उनकी कविताओं का संकलन (दीवान) है। द प्रिंसिपल्स ऑफ सूफीज्म (The Principles of Sufism): आयशा उन चुनिंदा मध्यकालीन महिलाओं में से हैं जिन्होंने सूफीवाद के सिद्धांतों पर स्वतंत्र ग्रंथ लिखे। इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद थॉमस एमिल होमरिन (Th. Emil Homerin) ने किया है।https://nyupress.org/9781479864683/the-principles-of-sufism/ The Principles of Sufism NYU Press en-US 2026-03-20 आधुनिक शोधकर्ताओं ने उनके कार्यों का विश्लेषण मध्यकालीन दर्शन के संदर्भ में किया है।Before the canon: the non-European women who founded philosophy https://aeon.co/essays/before-the-canon-the-non-european-women-who-founded-philosophy Aeon 2021-10-19 19 जनवरी 2020 https://web.archive.org/web/20200119081926/https://aeon.co/essays/before-the-canon-the-non-european-women-who-founded-philosophy dead 1517 ईस्वी में दमिश्क में उनका निधन हुआ। उनके द्वारा रचित अरबी साहित्य का उपयोग आधुनिक सूफी अध्ययन में किया जाता है। इन्हें भी देखें सूफीवाद राबिया बसरी इस्लामी साहित्य हाफिद बौअज़ा नश्वान बिन्त अल-जमाल सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ विकिडाटा पर आयशा अल-बाउनिया श्रेणी:1517 में निधन श्रेणी:सीरियाई लोग श्रेणी:अरब कवयित्रियाँ श्रेणी:सूफी संत श्रेणी:मुस्लिम महिलाएँ श्रेणी:मध्यकालीन इस्लाम की महिलाएँ