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अभिप्रेरणा
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अभिप्रेरणा लक्ष्य-आधारित व्यवहार का उत्प्रेरण या उर्जाकरण है। अभिप्रेरणा या प्रेरणा आंतरिक या बाह्य हो सकती है। इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर इंसानों के लिए किया जाता है, लेकिन सैद्धांतिक रूप से, पशुओं के बर्ताव के कारणों की व्याख्या के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस आलेख का संदर्भ मानव अभिप्रेरणा है। विभिन्न सिद्धांतों के अनुसार, बुनियादी ज़रूरतों में शारीरिक दुःख-दर्द को कम करने और सुख को अधिकतम बनाने के मूल में अभिप्रेरणा हो सकती है, या इसमें भोजन और आराम जैसी खास ज़रूरतों को शामिल किया जा सकता है; या एक अभिलषित वस्तु, शौक, लक्ष्य, अस्तित्व की दशा, आदर्श, को शामिल किया जा सकता है, या इनसे भी कमतर कारणों जैसे परोपकारिता, नैतिकता, या म्रत्यु संख्या से बचने को भी इसमें आरोपित किया जा सकता है।
अभिप्रेरणा की अवधारणाएं
आंतरिक और बाह्य प्रेरणा
आंतरिक प्रेरणा
आंतरिक प्रेरणाhttps://www.motivatorindia.in/2019/09/motivational-poem-in-hindi.html प्रेरणादायक कविता संग्रह 28 अक्तूबर 2019 https://web.archive.org/web/20191028110922/https://www.motivatorindia.in/2019/09/motivational-poem-in-hindi.html 28 अक्तूबर 2019 dead अपने आप में किसी कार्य या गतिविधि में ही अंतर्निहित पुरस्कार - किसी पहेली का आनंद लेने या खेल से लगाव से-आती है।Deci E.
1972
Intrinsic Motivation, Extrinsic Reinforcement, and Inequity
Journal of Personality and Social Psychology
22 1
113-120
1970 के दशक से प्रेरणा के इस स्वरूप का अध्ययन सामाजिक और शैक्षणिक मनोवैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। शोध में पाया गया है कि यह आमतौर पर उच्च शैक्षणिक उपलब्धि और छात्रों द्वारा उठाये जाने वाले लुत्फ़ के साथ जुड़ा हुआ है। फ्रिट्ज हेइदर के गुणारोपण सिद्धांत, बंडूरा के आत्म-बल पर किए गए कार्यों और रयान
Bandura
A.
1997
Self-efficacy: The exercise of control
New York: Freeman
604
9780716726265
http://books.google.com/books?id=mXoYHAAACAAJ
सितंबर 2021 InternetArchiveBot और डेकी के संज्ञानात्मक मूल्यांकन सिद्धांत के जरिए आंतरिक प्रेरणा की व्याख्या की गयी। विद्यार्थी आंतरिक रूप से अभिप्रेरित हो सकते हैं अगर वे:
अपने शैक्षणिक परिणामों के लिए आंतरिक कारकों को श्रेय दें जिसे वे नियंत्रित कर सकते हैं (मसलन, उन्होंने कितना प्रयास किया),
यकीन है कि वे अभिलषित लक्ष्यों तक पहुंचने में प्रभावी कारक हो सकते हैं (जैसे कि, परिणाम किस्मत द्वारा निर्धारित नहीं होते),
तोता-रटंत के जरिए अच्छा ग्रेड प्राप्त करने में रुचि के बजाए किसी विषय विशेष में दक्षता हासिल करने में दिलचस्पी.
आंतरिक अभिप्रेरणा और 16 बुनियादी अभिलाषाओं के सिद्धांतो के लिए नीचे देखें.
आन्त्रिक अभिप्रेरणा जैसे: भुख, प्यास्, मल्, मुत्र्, कमेछा, क्रोध्, प्रेम्, उदसि आदि
बह्ये अभिप्रेरणा जैसे: परीक्षा परिणाम्, पुरुस्कार, दन्ड्, प्रतियोगिता, प्रशन्सा, निन्दा आदि।
बाह्य अभिप्रेरणा
बाह्य अभिप्रेरणा साधक के बाहर से आती है। रुपया-पैसा सबसे स्पष्ट उदाहरण है, लेकिन दबाव और सजा का खतरा भी आम बाह्य प्रेरणा हैं।
खेल में, खिलाड़ी के प्रदर्शन पर भीड़ तालियां बजाती है, जो उसे और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर सकती है। ट्राफियां भी बाहरी प्रोत्साहन हैं। प्रतियोगिता भी सामान्य बाह्य प्रेरणा है, क्योंकि यह प्रदर्शनकर्त्ता को जीतने और अन्य को हराने के लिए प्रोत्साहित करती है, न कि गतिविधि के आंतरिक पुरस्कार का लुत्फ़ उठाने के लिए।
सामाजिक मनोवैज्ञानिक शोध बताता है कि बाह्य पुरस्कार अति औचित्यता और साथ ही आंतरिक प्रेरणा में कमी की ओर ले जा सकता है।
बाह्य प्रोत्साहन कभी-कभी अभिप्रेरणा को कमजोर कर सकते हैं। ग्रीन और लेप्पर द्वारा किये गए एक क्लासिक अध्ययन से पता चलता है कि जिन बच्चों को उनकी चित्रकारी के लिए मुक्तहस्त हो कर फेल्ट-टिप कलमों से पुरस्कृत किया गया था, बाद में उनहोंने कलमों के साथ फिर से खेलने या कलमों को चित्रकारी के लिए इस्तेमाल में कम रुचि दिखाई.
आत्म-संयम
Self motivation
प्रेरणा के आत्म-संयम को भावनात्मक बौद्धिकता का एक उपसमूह समझनेवालों की तादाद में वृद्धि हो रही है, संतुलित परिभाषा (कई बौद्धिक परीक्षणों द्वारा मापा गया) के अनुसार एक व्यक्ति भले ही बहुत अधिक बुद्धिमान हो सकता है, फिर भी कुछ खास कार्यों में इस बौद्धिकता को समर्पित करने में वह अभिप्रेरित नहीं भी हो सकता है। येल स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोफेसर विक्टर व्रूम का "प्रत्याशा सिद्धांत" इसका लेखा पेश करता है कि व्यक्ति ही तय करेंगा कि एक विशेष लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह अपने आत्मसंयम को कब लागू करे.
प्रेरकशक्ति और अभिलाषाओं की व्याख्या एक कमी या ज़रुरत के रूप में की जा सकती है, जो एक लक्ष्य या प्रोत्साहन को प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरित करती है . ये विचार व्यक्ति के अंदर पैदा होते हैं और आचरण को प्रोत्साहित करने के लिए किसी बाहरी उत्प्रेरक की ज़रुरत नहीं पड़ सकती है। बुनियादी प्रेरकशक्ति किन्हीं कमियों; मसलन- भूख जो एक व्यक्ति को भोजन की तलाश के लिए प्रेरित करता है, से कौंधती है, जबकि अधिक सूक्ष्म प्रेरकशक्ति प्रशंसा और अनुमोदन प्राप्त करने की इच्छा, जो एक व्यक्ति को इस तरह से आचरण करने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे दूसरे खुश हों.
इसके विपरीत, बाह्य पुरस्कार की भूमिका और उद्दीपना को पशुओं में भी देखा जाता है। पशुओं को प्रशिक्षण देने के दौरान जब वे सही ढंग से किसी चाल को सही ढंग से समझकर उस कार्य को संपन्न करते हैं तो उन्हें अच्छी तरह खिला-पिलाकर उनकी आवभगत में इसकी मिसाल देखी जा सकती है। पशुओं को अच्छा खाना खिलाना उनके लगातार बढ़िया प्रदर्शन के लिए उत्प्रेरक का काम करता है; यहां तक कि बाद में जब अच्छा भोजन न भी दिया जाए तब भी उनका प्रदर्शन समान बना रहता है।
अभिप्रेरक सिद्धांत
अभिप्रेरणा का प्रोत्साहन सिद्धांत
कोई इनाम, ठोस या अमूर्त, एक क्रिया (व्यवहार) के बाद इस इरादे से दिया जाता है, ताकि वह व्यवहार दुबारा घटित हो। व्यवहार में सकारात्मक अर्थ जोड़कर ऐसा किया जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि अगर व्यक्ति को इनाम तुरंत मिलता है, तो प्रभाव बहुत अधिक होता है और देरी होते जाने से प्रभाव कम होता जाता है। क्रिया-पुरस्कार के संयोजन के दोहराव से वह क्रिया आदत बन सकती है। प्रेरणा दो स्रोतों से आती है: अपने अदंर से और अन्य लोगों से. इन दोनों स्रोतों को क्रमशः आंतरिक अभिप्रेरणा और बाह्य अभिप्रेरणा कहा जाता है।
उचित प्रेरक तकनीक लागू करना उससे कहीं अधिक मुश्किल है जैसा कि वो लगता है। स्टीवन केर्र ने यह पाया कि जब एक इनाम प्रणाली बनायी जाती है, यह आसान हो सकता है कि A को पुरस्कृत किया जाय, जबकि B से आशा लगायी जा रही है और इस प्रक्रिया में हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं जो आपके लक्ष्यों को जोखिम में डाल सकते हैं।केर, स्टीवन (1995) ऑन द फौली ऑफ़ रेवार्डिंग A, वाइल होपिंग फॉर B.
http://pages.stern.nyu.edu/~wstarbuc/mob/kerrab.html https://web.archive.org/web/20100329044619/http://pages.stern.nyu.edu/~wstarbuc/mob/kerrab.html 29 मार्च 2010
एक संबलितकारक (reinforcer) पुरस्कार से अलग है, माहौल में कुछ खास चीजों के योग से इस संबलितकरण या सुदृढीकरण में वांछित व्यवहार की दर में मापी गयी वृद्धि पैदा करने का इरादा होता है।
सहज प्रेरणा-कटौती (ड्राइव-रिडक्शन) सिद्धांत
Drive theory
कई तरह के सहज प्रेरणा सिद्धांत होते हैं। सहज प्रेरणा-कटौती सिद्धांत इस अवधारणा से पनपा है कि हमारी कुछ खास जैविक सहज प्रेरणा होती हैं, जैसे कि भूख. अगर इसे संतुष्ट नहीं किया जाता (इस मामले में भोजन करने से है), समय के गुजरने के साथ सहज प्रेरकशक्ति में वृद्धि होती जाती है। प्रेरकशक्ति संतुष्ट हो जाती है तो उसकी ताकत कम हो जाती है। यह सिद्धांत विचारों की प्रतिक्रिया नियंत्रण प्रणाली जैसे ऊष्मास्थैतिक (थर्मोस्टेट) के फ्रायड के सिद्धांतों के विविध विचारों पर आधारित है।
प्रेरकशक्ति के कुछ सहज ज्ञान युक्त या लोक वैधता सिद्धांत हैं। उदाहरण के लिए जब भोजन पकाया जा रहा होता है तो भोजन तैयार हो जाने तक भूख के बढ़ने के साथ ताल मिला कर सहज प्रेरकशक्ति प्रतिमान भी उपस्थित होता है और खाना खा लेने के बाद मनोगत भूख में कमी आ जाती है। कई तरह की समस्याएं हैं, तथापि, जो सहज प्रेरणा कटौती की वैधता को खुली बहस के लिए छोड़ देती हैं। पहली समस्या यह है कि यह इसकी व्याख्या नहीं करता कि गौण संबलितकारक (reinforcer) सहज प्रेरणा को कैसे कम करते हैं। उदाहरण के लिए पैसों से जैविक या मनोवैज्ञानिक जरूरत पूरी नहीं होती, लेकिन तनख्वाह (पे चेक) दूसरे क्रम की स्थिति के जरिए प्रेरकशक्ति को कम कर देती है। दूसरे, एक सहज प्रेरणा, जैसे कि भूख, को खाना खाने की एक "इच्छा" के रूप में देखा जाता है, जो सहज प्रेरणा को एक होमुनकुलर स्वभाव बनाता है - एक ऐसा लक्षण जिसकी आलोचना 'छोटे आदमी' की बुनियादी समस्या और उसकी इच्छाओं को सहज ही हृदयद्रावी बताकर की जाती है।
इसके अलावा यह साफ़ है कि सहज प्रेरणा कटौती सिद्धांत पूरी तरह से आचरण का सिद्धांत नहीं हो सकता, या एक भूखा इंसान खाना पकाना पूरा करने से पहले खाए बगैर भोजन पका नहीं सकता. सभी प्रकार के व्यवहार से निपटने में सहज प्रेरणा सिद्धांत की सक्षमता, सहज प्रेरणा को सतुष्ट नहीं करने से (संयम जैसी अन्य विशेषताओं को जोड़कर), या "स्वादिष्ट" भोजन के लिए अतिरिक्त प्रेरकशक्ति लगाकर, जो "भोजन" के लिए सहज प्रेरकशक्तियों से मिलकर खाना पकाने और स्वाद के बारे बताती है।
संज्ञानात्मक विचार वैषम्य सिद्धांत
Cognitive dissonance
लिओन फेस्टिंगर ने सुझाया है, दो संज्ञानों के बीच असामंजस्य से जब कोई व्यक्ति कुछ असुविधा का अनुभव करता है तब ऐसा होता है। उदाहरण के लिए, एक उपभोक्ता अपनी एक खरीद के लिए खुद को आश्वासित करता है, लेकिन साथ ही वह पुनरवलोकन करते हुए सोचता है कि दूसरा फैसला बेहतर हो सकता है।
जब किसी विश्वास और किसी व्यवहार के बीच संघर्ष चल रहा हो, तब संज्ञानात्मक विचार वैषम्य का एक अन्य उदाहरण देखने को मिलता है। एक व्यक्ति स्वस्थ रहना चाहता है, उसका मानना है कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, फिर भी वह धूम्रपान जारी रखता है।
प्रयोजन सिद्धांत
प्रयोजन सिद्धांत का अनुक्रम
Maslow's hierarchy of needs
अभिप्रेरणा के व्यापक रूप से चर्चित होने वाले सिद्धांतों में से एक अब्राहम मस्लोव का सिद्धांत है।
सिद्धांत का सारांश इस तरह प्रकट किया जा सकता है:
मनुष्य की कुछ जरूरतें और इच्छाएं है जो उसके बर्ताव या आचरण को प्रभावित करती हैं। केवल पूरी न होनेवाली जरूरत ही व्यवहार को प्रभावित करती हैं, न कि पूरी हो जानेवाली जरूरत.
चूंकि जरूरतें अनेक होती हैं इसलिए इनकी प्राथमिकता मूलभूत जरूरतों से लेकर जटिल तक, क्रमानुसार उनके महत्त्व के आधार पर तय होती हैं।
निम्न स्तर की ज़रूरत अगर न्यूनतम संतुष्टि दे जाती हैं तो व्यक्ति अपनी अगली जरूरत की ओर कदम बढ़ाता है।
पदानुक्रम की और ज्यादा प्रगति से एक व्यक्ति अधिक व्यक्तिपरकता, मानविकता और मनोवैज्ञानिक स्वस्थता दिखाएगा.
जरूरतों की सूची मूलभूत (बिलकुल निम्न) से लेकर सबसे जटिल तक इस प्रकार है:
शारीरिक
सुरक्षा
तादीयत्वता
आत्मसम्मान
स्व प्रत्यक्षीकरण
हर्जबर्ग का दोहरा कारक सिद्धांत
Frederick Herzberg
फ्रेडरिक हर्जबर्ग का दोहरा कारक सिद्धांत, उर्फ आंतरिक / बाह्य प्रेरणा के सिद्धांत, का निष्कर्ष है कि कार्यस्थल में कुछ तत्वों से काम में संतुष्टि मिलती है, लेकिन अगर ये अनुपस्थित हो तो असंतोष पैदा होता है।
जो कारक लोगों को अपना जीवन हमेशा के लिए बदलने के लिए प्रेरित करते हैं, लेकिन 'एक व्यक्ति के रूप में मेरा सम्मान हो' की भावना जीवन के किसी भी स्तर पर बहुत ही प्रेरित करनेवाला कारक है।
उन्होंने इसमें इस तरह फर्क किया:
अभिप्रेरक ; (उदहारण के लिए चुनौतीपूर्ण काम, मान्यता, जिम्मेदारी) जो सकारात्मक संतोष देता है, और
सेहत संबंधी कारक ; (जैसे रुतबा, नौकरी की सुरक्षा, वेतन और मामूली लाभ), अगर ये उपस्थित हों तो अभिप्रेरित नहीं करते, लेकिन यदि अनुपस्थित हों तो हतोत्साहित करते हैं।
सेहत संबंधी कारक नाम इसलिए दिया गया क्योंकि जहां सफाई हो, जरूरी नहीं कि आप और अधिक स्वस्थ हो जाएं, लेकिन इसके न होने पर आपकी सेहत में गिरावट हो सकती है।
इस सिद्धांत को कभी-कभी "अभिप्रेरक-स्वच्छता सिद्धांत" भी कहा जाता है।
सूचना प्रणाली और उपयोगकर्ता की संतुष्टि से संबंधित अध्ययन (कंप्यूटर उपयोगकर्ता की संतुष्टि देखें) जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में हर्जबर्ग सिद्धांत का उपयोग पाया जाता है।
एल्डरफर का ERG सिद्धांत
Clayton Alderfer
क्लेटन एल्डरफर ने मस्लोव के जरूरतों के पदानुक्रम का विस्तार कर ERG सिद्धांत (अस्तित्व, संबद्धता और विकास) को स्थापित किया। शारीरक और सुरक्षा संबंधी जरुरतों, जो कि निचले क्रम की जरूरतें है, को अस्तित्व की श्रेणी में रखा जाता हैं; जबकि प्रेम और आत्मसम्मान संबंधी जरुरतों को संबद्धता की श्रेणी में रखा जाता है। विकास श्रेणी में हमारे आत्म-प्रत्यक्षीकरण और आत्मसम्मान संबंधित जरूरतें निहित हैं।
आत्म-संकल्प के सिद्धांत
एडवर्ड डेसी और रिचर्ड रयान द्वारा विकसित आत्म-संकल्प के सिद्धांत में मानव व्यवहार की प्रेरकशक्ति के रूप में आंतरिक प्रेरणा के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। मस्लोव और इस आधार पर निर्मित अन्य के पदानुक्रमिक सिद्धांत की तरह SDT (Self-determination theory) वृद्धि और विकास की स्वाभाविक प्रवृत्ति को मान्यता देता है। हालांकि ऐसे दूसरे सिद्धांतों की तरह SDT किसी भी तरह की उपलब्धि के लिए "स्वतः चालक" ("autopilot") को शामिल नहीं करता है, लेकिन इसके बजाय माहौल से सक्रिय प्रोत्साहन की मांग करता है। प्राथमिक कारक, जो प्रेरणा और विकास को प्रोत्साहित करते हैं; वे स्वायत्तता, योग्यता की सराहना और संबद्धता हैं। Deci Edward L. & Ryan, Richard M. 1985 Intrinsic motivation and self-determination in human behavior https://archive.org/details/intrinsicmotivat0000deci Plenum New York 0-30-642022-8
व्यापक सिद्धांत
उपलब्धि अभिप्रेरणा के मामले में नवीनतम प्रस्ताव एकीकृत दृष्टि है, जैसा कि हाइंज स्कूलर, जॉर्ज सी थोर्नटन III, एंडरिअस फ्रिंट्रप और रोज मुलर-हनसन द्वारा प्रतिपादित "ओनियन-रिंग मॉडल ऑफ एचीवमेंट मोटिवेशन" में प्रतिपादित किया गया है। इस विचार का आधार यह है कि प्रदर्शन अभिप्रेरणा के कारण व्यक्तित्व का मुख्य घटक प्रदर्शन की ओर रुख कर लेता है। नतीजतन, यह आयामों के एक अनुक्रम को शामिल करता है जो कि काम में सफलता के लिए प्रासंगिक हैं, लेकिन जिन्हें पारंपरिक तौर पर प्रदर्शन अभिप्रेरणा का हिस्सा नहीं माना जाता. विशेष रूप से यह पूर्व में अलग रहे दृष्टिकोणों को वर्चस्व जैसे सामाजिक उद्देश्यों के साथ उपलब्धि की ज़रुरत के लिए एकीकृत करता है। उपलब्धि प्रेरणा सूची (Achievement Motivation Inventory AMI) (स्कूलर, थोर्नटन, फ्रिंट्रप और मुइलर-हैनसन, 2003) इसी सिद्धांत पर आधारित हैं और व्यवसायिक व पेशेवर सफलता के आकलन के लिए तीन कारक (17 अलग स्केल) प्रासंगिक हैं।
संज्ञानात्मक सिद्धांत
लक्ष्य सिद्धांत
लक्ष्य सिद्धांत इस धारणा पर आधारित है कि कभी-कभी एक स्पष्ट रूप से परिभाषित अंत तक पहुंचने के लिए लोगों के पास एक प्रेरकशक्ति होती है। अक्सर, यह अंत अपने आपमें एक पुरस्कार होता है। एक लक्ष्य दक्षता इन तीन विशेषताओं से प्रभावित होती हैं: निकटता, कठिनाई और विशिष्टता. एक आदर्श लक्ष्य को एक ऐसी स्थिति बनानी चाहिए, जहां व्यवहार के प्रवर्तन और अंत के बीच का समय समीप हो। यह हमें बताता है कि कुछ बच्चे बीजगणित में माहिर होने के बजाय मोटर साइकिल चलाना सीखने के लिए क्यों अधिक प्रेरित हुआ करते हैं। एक लक्ष्य मध्यम श्रेणी का होना चाहिए, जो पूरा करने में न बहुत कठिन हो न बहुत आसान. दोनों ही मामलों में, चुनौती पसंद करने वालों की तरह (जो सफलता में कुछ प्रकार की असुरक्षा की कल्पना कर लेते हैं) अधिकांश लोग बेहतर तरीके से प्रेरित नहीं होते. साथ ही लोग यह महसूस करना चाहते हैं कि इस बात की काफी संभावना है कि वे सफल हो जाएंगे. अपनी कक्षा में लक्ष्य के वर्णन में विशिष्टता की दिलचस्पी है। व्यक्ति विशेष के लिए लक्ष्य निष्पक्ष रूप से परिभाषित और सुस्पष्ट होना चाहिए। अधिकतम संभव ग्रेड पाने के लिए की गयी कोशिश, एक खराब निर्दिष्ट लक्ष्य का एक बढ़िया उदाहरण है। अधिकांश बच्चों को पता ही नहीं होता कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उन्हें कितना प्रयास करने की जरूरत है।लोक और लैथम (2002)
डगलस वेर्मीरेन ने इस पर व्यापक शोध किया है कि अनेक लोग अपने लक्ष्यों को पाने में क्यों विफल हो जाते हैं। असफलता के लिए सीधे-सीधे प्रेरित कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। वेर्मीरेन ने कहा है कि जब तक एक व्यक्ति स्पष्ट रूप से अपने प्रेरित कारक या उनके महत्त्वपूर्ण और सार्थक कारणों की पहचान नहीं कर लेता, वह भला क्यों लक्ष्य प्राप्त करना चाहेगा, उनमें कभी भी इसे प्राप्त करने की शक्ति नहीं होगी।
व्यवहार परिवर्तन के मॉडल
व्यवहार परिवर्तन के सामाजिक-संज्ञानात्मक मॉडल में प्रेरणा और इच्छाशक्ति का निर्माण शामिल है। प्रेरणा को एक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है जो व्यवहार के इरादों के निर्माण की अगुवाई करता है। इच्छाशक्ति को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है जो इरादे को वास्तविक व्यवहार की ओर ले जाने का काम करती है। दूसरे शब्दों में, प्रेरणा और इच्छाशक्ति क्रमशः लक्ष्य स्थापित करने और लक्ष्य हासिल करने के संदर्भ में देखे जाते हैं। दोनों प्रक्रियाओं में आत्म-नियामक प्रयासों की आवश्यकता है। अनेक आत्म-नियामक रचनाओं को लक्ष्य प्राप्त करने के लिए वृन्दवादन (orchestration) में काम करने की जरूरत होती है। आत्म-गुण या आत्म-बल को समझना अभिप्रेरक और इच्छाशक्ति रचना का एक उदाहरण है। व्यवहार के इरादों, कार्य योजनाओं के विकास और कार्यवाही की इच्छाशक्ति के विकास के निर्माण को आत्मबल सहज बनाता है। यह इरादे को कार्यवाही में बदलने में मदद कर सकता हैं।
इन्हें भी देखें
स्वास्थ्य संबंधी कार्य की प्रक्रिया का दृष्टिकोण
I-चेंज मॉडल' अचेतन अभिप्रेरणा
कुछ मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि मानव व्यवहार का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा अचेतन अभिप्रेरणा से ऊर्जाकृत और निर्देशित होता है। मस्लोव के अनुसार, "मनोविश्लेषण ने अक्सर ही दिखाया है कि एक सचेत इच्छा और परम अचेतन लक्ष्य के बीच रिश्ते का आधार प्रत्यक्ष होने की जरूरत नहीं."मैस्लो, मोटिवेशन और पर्सोनालिटी, पृष्ठ. 66. दूसरे शब्दों में, बतायी गयी अभिप्रेरणा हमेशा कुशल पर्यवेक्षकों द्वारा लगाये गए अनुमान से मेल नहीं खाती. उदाहरण के लिए, यह संभव है कि एक व्यक्ति दुर्घटना-प्रवण हो, क्योंकि उसमें खुद को चोट पहुंचाने की अचेतन इच्छा है और इसलिए नहीं कि वह लापरवाह या सुरक्षा-नियमों से अनजान है। इसी तरह, कुछ ज्यादा वजनी लोग भोजन के बिल्कुल भूखे नहीं होते, लेकिन लड़ने और चुंबन के लिए बेचैन रहते हैं। भोजन करना ध्यान की कमी का महज एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया है। कुछ श्रमिक दूसरों की तुलना में उपकरणों की अधिक क्षति करते हैं, क्योंकि उनके अचेतन भावनाओं में प्रबंधन के विरूद्ध आक्रोश है।
मनोचिकित्सकों का कहना है कि कुछ व्यवहार इतने स्वचालित होते हैं कि व्यक्ति के चेतन मन में इसके कारण उपलब्ध नहीं हो पाते. बाध्यकारी सिगरेट धूम्रपान इसका एक उदाहरण है। कभी-कभी आत्मसम्मान को बनाए रखना इतना महत्त्वपूर्ण होता है और किसी गतिविधि के लिए अभिप्रेरणा ऐसी भयावह होती है कि इसे समझा नहीं जा सकता, वास्तव में, जो छद्मवेश में या दबा दी गयी होती है। युक्तिसंगत, या "व्याख्या से परे", ऐसे छद्मवेश या रक्षा प्रणाली है, के नाम से यह जाना जाता है। खुद अपनी गलतियां दूसरे पर आरोपित करना एक अन्य मिसाल है। "मुझे लगता है कि मुझे दोष दिया जाय", दरअसल "यह उसकी गलती है, वह स्वार्थी है" में बदला जाता है। शक्तिशाली लेकिन सामाजिक रूप से अस्वीकार्य प्रेरकशक्ति का दमन दिखावटी व्यवहार में बदल जा सकता है, जो कि दमित प्रवृत्तियों के विपरीत है। उदाहरणस्वरुप, एक कर्मचारी जो अपने बॉस से नफरत करता है, लेकिन वह कुछ ज्यादा ही काम किया करता है ताकि ऐसा लगे कि बॉस के प्रति उसके मन में बड़ा आदरभाव है।
अचेतन प्रेरकशक्तियां मानव व्यवहार की व्याख्या में बाधा डालती हैं और वे जिस हद तक मौजूद रहती हैं, प्रशासक के जीवन को उतना ही मुश्किल में डाल देती हैं। दूसरी ओर, अचेतन प्रेरकशक्तियों के अस्तित्व की जानकारी से व्यवहार की समस्याओं का और अधिक चौकस आकलन किया जा सकता है। हालांकि कुछ समकालीन मनोवैज्ञानिक अचेतन कारकों के अस्तित्व से इंकार करते हैं, कई लोगों का मानना है कि ये केवल चिंता और तनाव के समय में सक्रिय होते हैं और सामान्य जीवन की घटनाओं में मानव व्यवहार-कर्त्ता के दृष्टिकोण से - युक्तिसंगत रूप से उद्देश्यपूर्ण होता है।
आंतरिक अभिप्रेरणा और 16 बुनियादी इच्छाओं का सिद्धांत
6,000 से अधिक लोगों पर किये गए अध्ययन की शुरुआत से प्रोफेसर स्टीवन रेइस ने एक सिद्धांत प्रस्तावित किया, जिसमें 16 बुनियादी इच्छाओं की बात कही गयी है जो लगभग सभी इंसानी व्यवहार में पाया जाता है।
Reiss
Steven
2000
Who am I: The 16 basic desires that motivate our actions and define our personalities
New York: Tarcher/Putnam
288
1-58542-045-X
http://books.google.fr/books?id=EbOjA5oAsEUC
7 जनवरी 2010
https://web.archive.org/web/20110811085841/http://books.google.fr/books?id=EbOjA5oAsEUC
11 अगस्त 2011
live
Reiss
Steven
2004
Multifaceted nature of intrinsic motivation: The theory of 16 basic desires
Review of General Psychology
8
3
179-193
10.1037/1089-2680.8.3.179
http://nisonger.osu.edu/papers/Multifaceted%20nature%20of%20intrinsic%20motivation.pdf
7 जनवरी 2010
https://web.archive.org/web/20101225225247/http://nisonger.osu.edu/papers/Multifaceted%20nature%20of%20intrinsic%20motivation.pdf
25 दिसंबर 2010
dead
ये इच्छाएं इस प्रकार हैं:
स्वीकृति, अनुमोदन की जरूरत
जिज्ञासा, सोचने की जरूरत
खाना, भोजन की जरूरत
परिवार, बच्चों के पालन-पोषण की जरूरत
सम्मान, अपने कबीले/जातीय समूह के पारंपरिक मूल्यों के प्रति वफादारी की जरूरत
आदर्शवाद, सामाजिक न्याय की जरूरत
आजादी, वैयक्तिकता की जरूरत
व्यवस्था, संगठित, स्थिर, पूर्वानुमेय माहौल की जरूरत
शारीरिक गतिविधि, व्यायाम की जरूरत
सत्ता, इच्छा के प्रभाव की जरूरत
रोमांस, सेक्स की जरूरत
बचत, संग्रह करने की जरूरत
सामाजिक संपर्क, (मैत्री संबंध) दोस्तों की जरूरत
हैसियत, सामाजिक प्रतिष्ठा / महत्त्व की जरूरत
प्रशांति, सुरक्षा की जरूरत
प्रतिहिंसा, पलटकर वार करने की जरूरत
इस मॉडल में, इन बुनियादी इच्छाओं पर लोगों में मतभेद है। ये बुनियादी इच्छाएं आंतरिक प्रेरणा का प्रतिनिधित्व करती हैं जो व्यक्ति के व्यवहार को सीधे प्रेरित करती है और इनका उद्देश्य परोक्ष रूप से अन्य इच्छाओं को संतुष्ट करने का नहीं है। लोग गैर-बुनियादी इच्छाओं से भी प्रेरित हो सकते हैं, लेकिन इस मामले में गंभीर प्रेरणा से यह संबंधित नहीं है, या केवल अन्य बुनियादी इच्छाओं को प्राप्त करने के साधन के तौर पर अकेला साधन नहीं है।
अन्य सिद्धांत
खंडन सिद्धांत
नियंत्रित अभिप्रेरणा
अभिप्रेरणा पर नियंत्रण को केवल एक सीमित हद तक समझा जाता है। अभिप्रेरणा प्रशिक्षण (motivation training) ' के विभिन्न दृष्टिकोण हैं, लेकिन आलोचकों द्वारा इनमें से कई को छद्म वैज्ञानिक माना गया है। अभिप्रेरणा को कैसे नियंत्रित किया जाए यह जानने के लिए पहले इसे समझने की जरूरत है कि बहुत सारे लोगों में प्रेरणा की कमी क्यों होती है।
शुरुआती क्रार्यक्रम
आधुनिक ख्याल इस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत को अनुभवसिद्ध सहायता प्रदान करता है कि बचपन में ही मोटे तौर पर भावनात्मक प्रोग्रामिंग हो जाया करती है। मिशिगन के बच्चों के अस्पताल की PET क्लिनिक के चिकित्सा निदेशक और वेन स्टेट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडीसिन में बाल रोग, तंत्रिका विज्ञान और रेडियोलोजी के प्राध्यापक हैरोल्ड चुगानी ने पाया कि वयस्कों की तुलना में बच्चों के दिमाग नयी सूचनाओं (भावनाओं से जुड़े) को ग्रहण करने में कहीं अधिक सक्षम होते हैं। वल्कुटीय (Cortical) क्षेत्रों में मस्तिष्क गतिविधि वयस्कों की अपेक्षा तीन से नौ साल की उम्र के बच्चों में दुगुनी होती है। इस अवधि के बाद, वयस्कता के साथ-साथ निरंतर इसमें गिरावट निम्न स्तर की ओर जाती रहती है। दूसरी ओर, नौ साल की उम्र तक मस्तिष्क आयतन लगभग 95% तक बड़ा हो चुका होता है।
संगठन
अभिप्रेरणा के बिल्कुल सीधे दृष्टिकोणों के अलावा, प्रारंभिक जीवन में, ऐसे समाधान हैं जो अधिक निरपेक्ष हैं, लेकिन शायद आत्म-प्रेरणा के लिए अधिक व्यावहारिक नहीं हैं। वस्तुतः हर अभिप्रेरणा परिदर्शिका में कम से कम एक अध्याय व्यक्ति के कार्यों और लक्ष्यों की समुचित व्यवस्था के बारे में होता है। आमतौर पर यह सुझाव दिया जाता है कि जो कार्य पूरे हो चुके हैं और जो काम पूरे नहीं हुए हैं, उनके बीच अंतर करते हुए कार्यों की सूची बनाना जरूरी होता है इसलिए उसे बनाने के लिए कुछ जरूरी प्रेरणा को उस "मेटा-टास्क" (अधिकार्य) में स्थानांतरित करना चाहिए, कार्य सूची में जिसे कार्य की प्रगति बताया गया है, जो एक दिनचर्या बन सकती है। पूरे किये गए कार्यों की सूची देखना भी प्रेरक का काम कर सकता है, क्योंकि यह उपलब्धि के लिए एक संतोषजनक भावना पैदा कर सकती है।
अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक कार्यों की सूचियों में यह बुनियादी प्रकार्यात्मकता है, हालांकि पूरा हो चुके और अधूरे कार्यों के बीच अंतर हमेशा स्पष्ट (पूरे हुए कार्यों की अलग सूची बनाने के बजाय उन्हें हटा दिया जाता है) नहीं होता है।
सूचना व्यवस्था के अन्य रूप भी अभिप्रेरक हो सकते हैं, जैसे कि किसी के विचारों को व्यवस्थित करने के लिए मन के नक्शे का उपयोग और इस प्रकार तंत्रिका नेटवर्क को इस तरह "प्रशिक्षित" करना, जिससे कि मानवीय मस्तिष्क दिए गए कार्यों पर ध्यान केंद्रित करे. विचारों को चिह्नित करने का सबसे आसान तरीका यह है कि उन्हें गोल बिन्दु लगाने वाली शैली सूचीबद्ध करना भी पर्याप्त होगा, या यह उनके लिए अधिक उपयोगी हो सकता है जो आंखों का कम इस्तेमाल करते हैं।
कर्मचारी प्रेरणा
किसी भी संस्था में श्रमिकों को कार्यरत रखने के लिए कुछ न कुछ चाहिए। अधिकांशतः कर्मचारियों के वेतन किसी संस्था के लिए उनके द्वारा काम करते रहने के लिए पर्याप्त है। लेकिन, कभी-कभी सिर्फ वेतन के लिए संस्था में काम करते रहना कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नहीं होता। कर्मचारी को एक कंपनी या संस्था के लिए काम करने को प्रेरित किया जाना जरूरी है। किसी कर्मचारी में अगर कोई प्रेरणा मौजूद नहीं है, तो उसके काम की गुणवत्ता या आम तौर पर सारे कार्य में गिरावट आएगी.
कर्मचारी-प्रेरणा का अंतिम लक्ष्य है पूरी क्षमता के साथ कर्मचारी को काम पर लगाये रखना. कर्मचारियों को प्रेरित करने के कई तरीके हैं। कर्मचारियों के बीच प्रतिस्पर्धा करवाकर उन्हें प्रेरित करने के कुछ परंपरागत तरीके हैं। कर्मचारियों के बीच प्रेरणा उत्पन्न करने का एक शानदार तरीका है दोस्ताना प्रतियोगिता. इससे कर्मचारियों को प्रतियोगिता में अपने साथियों की तुलना में अपने हुनर को बेहतर दिखाने का एक मौका मिलता है। यह न केवल कर्मचारियों को अधिक से अधिक उत्पादन करने के लिए प्रेरित करेगा। बल्कि प्रतिस्पर्धा के कारण हुए रिकॉर्ड परिणामों से नियोक्ता को इसका भी पता चलेगा कि कौन सबसे अधिक उत्पादनशील है।
औषधियां
विशेष रूप से ट्रांस ह्यूमनिस्ट आंदोलन से जुड़े हुए कुछ लेखकों का सुझाव है कि "प्रेरणा-उत्प्रेरक" के रूप में "स्मार्ट ड्रग्स", जिसे नूट्रॉपिक्स भी कहा जाता है, का इस्तेमाल करना चाहिए। दिमाग पर इनमें से कई दवाओं के प्रभाव को सुस्पष्ट रूप से नहीं समझा गया है और उनकी कानूनी स्थिति अक्सर खुले प्रयोग को मुश्किल बनाती है।
अनुप्रयोग
शिक्षा
विद्यार्थियों की शिक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका होने के कारण शैक्षणिक मनोवैज्ञानिकों में प्रेरणा के लिए खास दिलचस्पी है। हालांकि, प्रेरणा के विशिष्ट प्रकार का अध्ययन अन्य क्षेत्रों में मनोवैज्ञानिकों द्वारा किये जा रहे कहीं अधिक सामान्य रूप के अध्ययनों से गुणात्मक रूप से अलग है।
शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा के विभिन्न प्रभाव पड़ सकते हैं कि कैसे कोई विद्यार्थी सीखता है और वह विषय वस्तु के प्रति कैसा व्यवहार करता है।ओर्म्रोड़, 2003 यह कर सकता है:
विशेष लक्ष्य की ओर प्रत्यक्ष व्यवहार
प्रयास और ऊर्जा की वृद्धि का मार्गदर्शन
गतिविधियों का प्रारंभ और उसके धुन में बढ़ोत्तरी
संज्ञानात्मक प्रगति में वृद्धि
निर्धारित करना कि कौन-से परिणाम मजबूती दे रहे हैं
बेहतर प्रदर्शन के लिए अगुवाई.
क्योंकि विद्यार्थी हमेशा आंतरिक तौर पर प्रेरित नहीं होते हैं, सो उन्हें कभी-कभी स्थापित प्रेरणा की जरूरत पड़ती है, जो शिक्षक द्वारा पैदा किये गए वातावरण में मिलती है।
प्रेरणा दो प्रकार की होती हैं:
आंतरिक प्रेरणा तब प्रकट होती है जब लोग कुछ करने के लिए आंतरिक रूप से प्रेरित होते हैं, क्योंकि यह या तो उन्हें खुशी देती है, उन्हें लगता है कि यह महत्त्वपूर्ण है, या महसूस करते हैं कि वे जो सीख रहे हैं वो सार्थक है।
बाह्य प्रेरणा की भूमिका तब शुरू होती है, जब किसी छात्र को कुछ करने के लिए मजबूर किया जाता है या फिर उस पर ऐसे बाह्य कारको का खास तरह से इस्तेमाल किया जाता है जिससे वह उत्प्रेरित हो (जैसे कि रूपये-पैसे या अच्छे ग्रेड).
यह भी ध्यान रखने योग्य है कि प्रेरणा के इस द्विविभाजन के विस्तार, जैसे कि आत्मसंकल्प के सिद्धांत के बारे में पहले से ही सवाल उठाया गया है।
आत्मकेंद्रित वर्णक्रम विकार के उपचार में प्रेरणा को एक आधारभूत क्षेत्र, निर्णायक प्रतिक्रिया थेरेपी के रूप में पाया गया है।
Andragogy (जो वयस्क छात्र को प्रेरित करता है) की अवधारणा में प्रेरणा भी एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है।
सडबरी (Sudbury) मॉडल स्कूल का अभिप्रेरणा पर दृष्टिकोण
सडबरी मॉडल स्कूलों का यह निष्कर्ष है कि सामान्य तौर पर सीखने में और विशेष रूप से वैज्ञानिक निरक्षरता में, विलंब की समस्या का इलाज यह है कि असली रोग: स्कूलों में बाध्यता, को सब के लिए सिरे से ही समाप्त कर दिया जाय. उनका दावा है कि एक मुक्त समाज में यह मानवीय स्वभाव है सांचे में ढालने के लिए दबाव के हर प्रयास से पीछे हटता है; कि हम स्कूल में बच्चों पर ज़रूरतों का अधिक बोझ डालेंगे, तो यह तय है कि हम उनके गले में जो चीजें उतारने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे वे दूर भागने लगेंगे; कि बच्चों के अभियान और अभिप्रेरणा आखिरकार उन्हें विश्व का महान नायक बनाने के लिए ही तो है। वे इस पर जोर देते हैं कि स्कूल इस अभियान को जीवित रखें, जैसा कि कुछ स्कूल यह काम कर रहे हैं: खुले तौर पर पालन-पोषण कर रहे हैं, जो इनके फलने-फूलने के लिए जरूरी है।ग्रीनबर्ग डी. (1992) फ्रीडम नर्चर्स कल्चर्स ऐंड लर्निंग https://web.archive.org/web/20130622120847/http://books.google.com/books?id=YQn_BA76TF4C&pg=PA14&dq=Freedom+Nurtures+Culture+and+Learning 22 जून 2013 , एडुकेशन इन अमेरिका: अ व्यू फ्रॉम सडबरी वैली.
सडबरी मॉडल स्कूल प्रदर्शन नहीं करते और न ही मूल्यांकन, आंकलन, प्रतिलिपि, या सिफारिशें इस तर्क पर प्रस्तुत नहीं करते कि वे लोगों की कीमत नहीं लगाया करते और यह कि स्कूल कोई न्यायाधीश नहीं होता; विद्यार्थियों की एक दूसरे से तुलना, या उनके लिए कोई मानक निर्धारित करना विद्यार्थियों की गोपनीयता और आत्म-निर्णय के अधिकार का उल्लंघन है। छात्र खुद ही तय करें कि आत्म-मूल्यांकन की एक प्रक्रिया के रूप में खुद से ही सीखनेवाले के लिए अपने आत्म-मूल्यांकन को कैसे मापा जाय: पूरे वास्तविक जीवन की सीख और 21वीं सदी के लिए उचित शैक्षिक मूल्यांकन को वे प्रस्तुत करते हैं।ग्रीनबर्ग, डी. (2000). 21स्ट सेंचुरी स्कूल्स https://web.archive.org/web/20160303182858/http://sudburyvalleyschool.org/essays/102008.shtml 3 मार्च 2016 , अप्रैल 2000 में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आवाज़ कि प्रतिलिपि को संपादित किया गया। सडबरी मॉडल स्कूल के मुताबिक, यह नीति अपने छात्रों को नुकसान नहीं पहुंचाती, जब वे स्कूल के बाहर के जीवन में प्रवेश करते हैं। हालांकि, वे स्वीकार करते हैं यह प्रक्रिया को और अधिक कठिन बना देती है, लेकिन ऐसी कठिनाई विद्यार्थियों को अपना रास्ता खुद बनाना, अपने मानक खुद तय करना और अपने लक्ष्यों को पूरा करना सिखाती है। श्रेणीकरण और योग्यता निर्धारण नहीं करने की नीति से छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा या वयस्क अनुमोदन की लड़ाई से मुक्त माहौल बनाने में मदद मिलती है और छात्रों के बीच एक सकारात्मक सहकारी वातावरण को प्रोत्साहन मिलता है।ग्रीनबर्ग, डी.(1987). अध्याय 20, एवैल्युशन, फ्री ऐट लास्ट -- द सडबरी वैली स्कुल.gs
व्यवसाय
मस्लोव के ज़रूरतों के पदानुक्रम के निचले स्तर पर, जैसे कि शारीरिक जरूरतें, पैसा एक प्रेरक है, हालाँकि इसका प्रेरक प्रभाव कर्मचारियों पर केवल एक छोटी अवधि के लिए रह पाता है (हेर्ज़बर्ग के अभिप्रेरणा के द्वि-कारक मॉडल के अनुरूप). अब्राहम मस्लोव के अभिप्रेरणा के सिद्धांत और डगलस मक्ग्रेगोर के X सिद्धांत और Y सिद्धांत (नेतृत्व के सिद्धांत से संबंधित) दोनों का ही कहना है कि उच्च स्तर के पदों में पैसे की अपेक्षा प्रशंसा, सम्मान, पहचान, सत्ताधिकार और कुछ होने की भावना कहीं अधिक शक्तिशाली अभिप्रेरणा होती हैं।
मस्लोव ने पदानुक्रम के निम्नतम स्तर पर पैसे को रखा और अन्य ज़रूरतों को कर्मचारियों के लिए बेहतर अभिप्रेरक बताया। मक्ग्रेगोर अपनी X सिद्धांत श्रेणी में पैसे को रखा और महसूस किया कि यह एक कमजोर अभिप्रेरक है। प्रशंसा और मान्यता को Y सिद्धांत श्रेणी में रखा और पैसे से मजबूत अभिप्रेरक माना.
अभिप्रेरित कर्मचारी हमेशा किसी काम को बेहतर तरीके से करने के उपाय करते रहते हैं।
अभिप्रेरित कर्मचारी अधिक गुणवत्ता उन्मुख होते हैं।
अभिप्रेरित श्रमिक अधिक उत्पादनशील होते हैं।
औसत कार्यस्थल गंभीर जोखिम और श्रेष्ठ अवसर के चरम के लगभग बीच में होते हैं। घुड़की से अभिप्रेरणा एक अंधगली जैसी रणनीति है और स्वाभाविक रूप से कर्मचारी इस घुड़की पक्ष के बजाय अभिप्रेरणा घुमाव के अवसर पक्ष की ओर कहीं अधिक आकर्षित होते हैं। काम के माहौल में अभिप्रेरणा एक शक्तिशाली उपकरण है, जो कर्मचारियों को उत्पादन के उनके सबसे कुशल स्तरों पर काम करने की ओर ले चलता है।स्टेनमेट्ज़, एल. (1983) नाइस गाइज़ फिनिश लास्ट: मैनेजमेंट मिथ्स ऐंड रिअलिटी. बौल्डर, कोलोराडो: होरिज़न पब्लिकेशन्स इंक.
फिर भी, स्टेनमेर्त्ज़ ने अधीनस्थों के तीन आम चरित्र प्रकार की भी चर्चा की: प्रबल, उदासीन और उभयवृत्ति, जो सभी अनूठे ढंग से प्रतिक्रिया और परस्पर क्रिया करते हैं और तदनुसार इनके उपाय, बंदोबस्त और अभिप्रेरित किये जाने चाहिए। सभी चरित्रों का कैसे प्रबंध किया जाय, एक प्रभावी नेता को यह समझना जरूरी है और प्रबंधक को उन रास्तों का उपयोग करना अधिक महत्त्वपूर्ण है, जो कर्मचारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने, बढ़ने और जवाब खोजने के अवसर प्रदान करते हैं।स्टेनमेट्ज़, एल एल. (1983) नाइस गाइज़ फिनिश लास्ट: मैनेजमेंट मिथ्स ऐंड रिअलिटी. बौल्डर, कोलोराडो: होरिज़न पब्लिकेशन्स इंक. (पृष्ठ. 43-44)
मस्लोव और हेर्ज्बेर्ग की मान्यताओं को ब्रिटेन के एक निर्माण प्लांट वौक्सहॉल मोटर्स के एक क्लासिक अध्ययन द्वारा चुनौती दी गयी।गोल्डथोर्प, जे. एच., लॉकवुड, डी., बैचहौफर, एफ. और प्लैट, जे. (1968) द ऍफ़फलुयेंट वर्कर: ऐटिट्युड्स ऐंड बिहेवियर कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस. इसने काम करने के उन्मुखीकरण की अवधारणा का आरंभ किया और तीन मुख्य झुकावों के बीच अंतर निकला: निमित्त (जहां काम एक अंजाम का एक साधन है), नौकरशाही (जहां काम प्रतिष्ठा, सुरक्षा और तत्काल इनाम का एक स्रोत है) और एकात्मकता (जो समूह वफादारी को प्राथमिकता देता है).
कर्ट लेविन का फोर्स फील्ड सिद्धांत, एडविन लोके का लक्ष्य सिद्धांत और विक्टर व्रूम का प्रत्याशा सिद्धांत सहित अन्य सिद्धांतों ने मस्लोव और हेर्ज्बेर्ग के सिद्धांतों को व्यापक और विस्तारित बनाया। इन्होंने सांस्कृतिक मतभेदों और तथ्य पर जोर दिया कि लोग अलग-अलग समय पर अलग-अलग कारणों से प्रेरित होते हैं।वेटमैन, जे. (2008) द एम्प्लोयी मोटिवेशन ऑडिट: कैम्ब्रिज स्ट्रेटेजी पब्लिकेशन्स
फ्रेडरिक विंस्लो टेलर द्वारा विकसित वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यवस्था के अनुसार श्रमिक की अभिप्रेरणा पूरी तरह से वेतन से निर्धारित होती है और इसलिए प्रबंधन को काम के मनोवैज्ञानिक या सामाजिक पहलुओं पर ध्यान देने की ज़रुरत नहीं। सार-संक्षेप में, वैज्ञानिक प्रबंधन मानवीय अभिप्रेरणा को बाह्य कारकों पर आधारित करता है और आंतरिक प्रोत्साहनों को खारिज करता है।
इसके विपरीत, डेविड मकक्लेल्लैंड का मानना है कि श्रमिक महज पैसे की आवश्यकता से प्रेरित नहीं होता है - दरअसल, बाह्य प्रेरणा (जैसे, पैसा) उपलब्धि प्रेरणा के रूप में आंतरिक प्रेरणा को बुझा सकती है, हालांकि पैसे को विभिन्न अभिप्रेरणाओं के लिए सफलता के एक सूचक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, उनके सलाहकार फर्म, मकबेर एंड कंपनी, ने अपना पहला आदर्श रखा था "हर किसीको उत्पादनशील, प्रसन्न और मुक्त रखने के लिए." मकक्लेल्लैंड के लिए, व्यक्ति की बुनियादी अभिप्रेरणा के साथ संतोष उसके जीवन तरतीब करता है।
एल्टन मेयो ने पाया कि कार्यस्थल पर मजदूर के सामाजिक संपर्क बहुत महत्त्वपूर्ण है और ऊब तथा कार्यों की एकरसता अभिप्रेरणा में कमी लाती है। मेयो का मानना था कि मजदूरों की सामाजिक जरूरतों को स्वीकार करने और उन्हें महत्त्वपूर्ण मानने से उन्हें अभिप्रेरित किया जा सकता है। नतीजतन, कर्मचारियों को काम के दौरान निर्णय लेने की आजादी दी गयी और अनौपचारिक कार्य समूहों पर अधिक से अधिक ध्यान दिया गया।
मेयो ने मॉडल का नाम दिया हावथोर्न प्रभाव. कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए कार्यस्थल में सामाजिक संपर्कों पर बहुत अधिक भरोसा करने के लिए उनके मॉडल की आलोचना की गयी।ह्युमन रिसौर्स मैनेजमेंट, HT ग्राहम ऐंड आर बेनेट एम + ई हैण्डबुक्स (1993) ISBN 0-7121-0844-0
रॉबिंस और जज नेसंगठनात्मक व्यवहार के लिए आवश्यक सिद्धांत में मान्यता कार्यक्रमों को अभिप्रेरणा के रूप परीक्षण में किया और पांच सिद्धांत बताया जो किसी कर्मचारी प्रोत्साहन कार्यक्रम की सफलता में योगदान करते हैं।Robbins
Stephen P.
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Upper Saddle River, NJ
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14 जून 2009
live
कर्मचारियों के व्यक्तिगत मतभेदों को मान्यता और व्यवहार की स्पष्ट पहचान को मान्यता के लायक समझा जाना
कर्मचारियों को भाग लेने की अनुमति
प्रदर्शन के साथ पुरस्कार को जोड़ा जाना
नियुक्तिकर्ता को प्रतिफल
मान्यता प्रक्रिया की प्रत्यक्षता
ऑनलाइन समुदाय
ऑनलाइन समुदायों (वास्तविक समुदाय) की सफलता में एक सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व भाग लेने और योगदान करने के लिए अभिप्रेरणा का प्रतिनिधित्व करता है।
और अधिक देखें: ऑनलाइन भागीदारी
इन्हें भी देखें
प्रबंधन की अकादमी
लत
अमोटिवेशनल सिंड्रोम
एनड्रागोजी
तत्परता
व्यवहार
इक्विटी थियोरी
प्रवाह
हेल्थ एक्शन प्रौसेस अप्रोच
मानव व्यवहार
ह्युमन पोटेंशिअल मोवमेंट
मानवतावाद
ह्युमानिस्टिक साइकोलोजी
I-चेंज मॉडल
Motivation
इंसेंटिव प्रोग्राम
मोटिवेशन क्राउडिंग थियोरी
ओपेरैंट कंडीशनिंग
ओर्गानिस्मिक थियोरी
ओर्गनाइजेशंल व्यवहार
पलाटाबिलिटी
पर्सोनालिटी साइकोलोजी
पसंद
रेगुलेटरी फोकस थ्योरी
आत्म-बल
सोसिअल साइकल थियोरी
सक्सेसरिस
वोलिशन
ऑउची के Z थियोरी
सन्दर्भ
आगे पढ़े
Baumeister
R. F.
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25 मार्च 2010
dead
बाहरी कड़ियाँ
फैक्टर्स ऑफ़ इंट्रीकसिक मोटिवेशन: इंट्रीकसिक मोटिवेशन का संक्षिप्त परिचय और इंट्रीकसिक मोटिवेशन के कारण का प्रभाव.
देयर इस नो इंट्रीकसिक मोटिवेशन: एक लेख जहां बहस है कि कोई इंट्रीकसिक मोटिवेशन मौजूद नहीं है।
श्रेणी:मानव व्यवहार
श्रेणी:प्रयोगात्मक मनोविज्ञान
श्रेणी:अनुभूति
श्रेणी:अभिप्रेरणा
श्रेणी:गूगल परियोजना