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फीता कृमि
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फीता कृमि (Tapeworm) चपटे कृमियों के 'सेस्टोडा' (Cestoda) वर्ग का एक अकशेरुकी (Invertebrate) प्राणी है। यह मानव सहित विभिन्न रीढ़धारी (Vertebrate) प्राणियों के पाचन तंत्र में अंतःपरजीवी (Endoparasite) के रूप में निवास करता है। शारीरिक रूप से यह फीते (रिबन) के समान लंबा, चपटा और देहगुहाहीन (Acoelomate) होता है। इसमें द्विपार्श्व सममिति (Bilateral symmetry) पाई जाती है। आकार की दृष्टि से इसकी कुछ प्रजातियां 30 मीटर (लगभग 100 फीट) तक लंबी हो सकती हैं।
== शारीरिक संरचना और जनन ==
फीता कृमि का शरीर अनेक खंडों में विभाजित होता है। शरीर के प्रत्येक खंड को 'प्रोग्लोटिड' (Proglottid) कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक प्रोग्लोटिड एक स्वतंत्र प्रजनन इकाई की तरह कार्य करता है, क्योंकि इनमें नर और मादा दोनों जनन अंग एक साथ मौजूद होते हैं (उभयलिंगी)। इसके सिर वाले हिस्से को 'स्कोलेक्स' (Scolex) कहा जाता है, जिसमें मौजूद चूसकों (Suckers) और हुक की सहायता से यह परपोषी (Host) की आंत की दीवारों से मजबूती से चिपका रहता है।
== संक्रमण और प्रभाव ==
मानव शरीर में फीता कृमि का संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित और अधपके मांस के सेवन से होता है। विशेष रूप से सूअर का अधपका मांस खाने से 'टीनिया सोलियम' (Taenia solium) नामक प्रजाति का संक्रमण फैलता है। जब कोई व्यक्ति संक्रमित मांस खाता है, तो कृमि के सिस्ट (Cyst) मानव आंत में पहुँचकर वयस्क फीता कृमि में विकसित हो जाते हैं और परपोषी के शरीर से अपना पोषण प्राप्त करने लगते हैं। इस संक्रमण से बचाव के लिए मांस को पूरी तरह से पकाकर खाना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।
== सन्दर्भ ==