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उत्पत्तिवाद
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उत्पत्तिवाद भारतीय काव्यशास्त्र में रस निष्पत्ति से संबन्धित एक विचारधारा अथवा मत है जिसके प्रणेता भट्ट लोल्लट हैं। भरत मुनि के प्रख्यात ग्रंथ नाट्यशास्त्र में वर्णित रस की निष्पत्ति से संबन्धित पाँच परवर्ती प्रमुख मतों में से यह एक है। इस मत के अनुसार निष्पत्ति से भरत मुनि का आशय उत्पत्ति और संयोग से सम्बन्ध था; विभाव कारण थे और रस उनके कार्य। इस मत का मानना है कि रस नायक इत्यादि में रहता है।श्यामसुन्दर दास रूपक रहस्य https://books.google.com/books?id=oY1TAAAAYAAJ 1967 अर्थात् रस की वास्तविक अनुभूति तो मूल नायक इत्यादि को होती है, नाटक में हिस्सा लेने वाले पात्र तो मात्र उसका अभिनय करते हैं।Purnima Dwivedi Tathya Parakh Hindi Sahitya Sanklan: Net Tatha Pradhyapak Pariksha Me Puchhe Jane Wale Prashno Ka Vishaywar Tatha Advitiya Sanklan https://books.google.com/books?id=Bl1jDwAAQBAJ&pg=PA271 20 July 2018 Educreation Publishing 271– GGKEY:TLGJJC961C3 इसे आरोपवाद अथवा उपचितवाद के नाम से भी जाना जाता है।
इन्हें भी देखें
रस निष्पत्ति
भट्ट लोल्लट
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय काव्यशास्त्र