411 REFERENCE · Wikipedia
गोण्डा
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
गोंडा जिला मुख्यालय (उत्तर प्रदेश) गोंडा जिले गोंडा जिलायह भारत के प्रान्त उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख जिला गोंडा जिले का मुख्यालय है जो पूर्व में बस्ती, पश्चिम में बहराइच, उत्तर में बलरामपुर तथा दक्षिण में बाराबंकी और फैजाबाद से घिरा हुआ है। यहाँ की जिला जेल में काकोरी काण्ड के एक प्रमुख क्रान्तिकारी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को निर्धारित तिथि से दो दिन पूर्व १७ दिसम्बर १९२७ को बेरहम ब्रिटिश सरकार द्वारा फाँसी दी गयी थी। गोंडा शहर सन १६२०ई में स्थापित हुआ । सन् १८५६ ई में जिले की रूप में स्थापित हुआ। यहां के राजापुर ग्राम मे गोस्वामी तुलसीदास का जन्म हुआ था। गोण्डा
जिला मुख्यालय
26.47
81.30
उत्तर प्रदेश
गोंडा जिला
अवधी
१२०
२००१
३४,३१,३८६
७३५२ वर्ग किलोमीटर
०५२६२
up 43
gonda.nic.in
मानस झील, नौखान झील, पार्वती अरगा पक्षी विहार, पथरी झील, बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर, जयप्रभाग्राम, गोण्डा
भूगोल
गोण्डा २६° ४७' तथा २७° २०' उत्तरी अक्षांश के मध्य एवं ८१° ३०' तथा ८२° ४६' देशान्तर के मध्य में स्थित है। जनपद का कुल क्षेत्रफल 4003 वर्ग कि0मी0 है जो देवीपाटन मण्डल के कुल क्षेत्रफल का 28.13 प्रतिशत है। इस जनपद में 04 तहसीलें गोण्डा, मनकापुर, करनैलगंज एवं तरबगंज है। इन तहसीलों में तहसील गोण्डा का क्षेत्रफल 1249.48 वर्ग कि0मी0, तहसील मनकापुर का 763.70 वर्ग कि0मी0, तरबगंज का 963.31 वर्ग कि0मी0 व करनैलगंज का 1026.51 वर्ग कि0मी0 है। इस प्रकार जनपद गोण्डा के कुल क्षेत्रफल का 31.21 प्रतिशत तहसील गोण्डा, 19.07 प्रतिशत तहसील मनकापुर, 24.06 प्रतिशत तहसील तरबगंज व 25.64 प्रतिशत तहसील करनैलगंज का क्षेत्रफल है।
इतिहास
January 2021
गोण्डा प्राचीन काल में कोशल महाजनपद का भाग था, मुगलों के शासन में यह फरवरी १८५६ तक अवध का हिस्सा था और मुगलों के आधीन था जिसे बाद में अंग्रेजों ने कब्ज़ा लिया।
ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम की गायें इस क्षेत्र में चरा करती थी, जिससे इस क्षेत्र का नाम "गोनर्द" पड़ा। यही कालान्तर में अपभ्रंश होकर गोण्डा कहलाया। आज भी बहुत से ग्रामीण "गोण्डा" को "गोंड़ा" कहते हैं। गोण्डा को महाभाष्यकार पतंजलि की जन्मभूमि भी माना जाता है। पतंजलि को "गोनर्दीय पतंजलि" भी कहा जाता है। यहाँ स्थित "सूकरखेत", जो सूकरक्षेत्र का ही अपभ्रंश है, तुलसीदास जी की जन्मस्थली माना जाता है। कालान्तर मे चलकर गोण्डा पर भर शासको ने छोटे छोटे राज्य स्थापित किया जिस मे राजा मानिकदेव भर द्वारा स्थापित मनकापुर काफी प्रसिद्ध हुआ यह से दक्षिण 35 कि.मी. पर उमरी बेगमगंज में मां बाराही का विश्व का एकमात्र बड़ा ही पुरातन मंदिर है और इसी दिशा में गोण्डा से 37 कि. मी की दूरी पर पसका (सूूूकरखेत) मे प्रसिद्ध बाराह भगवान मन्दिर है।तथा यही पर तुुुलसीदास जी के गुुरू नरिहरदास जी का आश्रम भी यही है।
गोंण्डा में श्री दुःख हरणनाथ मंदिर, काली भवानी, खैरा भवानी, हनुमानगढ़ी, सुरसा मंदिर प्रमुख मंदिर हैं व गोण्डा से 35 कि. मी उत्तर खरगुपुर में एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर का है जो पांडव द्वारा स्थापित है और गोण्डा का गौरव बड़ा रहै है इन्ही के समीप झाली धाम में कामधेनु गौ और विशालकाय कछुए देश विदेश के पर्यटको की उत्सुक्ता का केंद्र है
गोण्डा के नवाबगंज में पार्वती अरगा पक्षी विहार है जहां देशी व विदेशी पक्षीयों का दर्शन होता है और मुख्यालय से उत्तर में धानेपुर के समीप एक बहुत बड़ी मनोरम सोहिला झील भी है जिसके पास धरमेई गाँव सुप्रसिद्ध कथाव्यास श्रद्धेय श्रीकृष्णानंद व्यास जी की जन्मस्थली भी है।
गोंडा के बीचोंबीच गाँधी पार्क में गांधी जी की बहुत बड़ी मुर्ति स्थित है।
"बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर "- ये मंदिर गोंडा शहर से 17 किलोमीटर दूर स्थित है बाबा बालेश्वर नाथ बहुत ही प्राचीन मंदिर है यह गोंडा फैजाबाद रोड पर स्थित डुमरियाडीह बाजार से तरबगंज रोड पर बाल्हाराई ग्राम सभा में स्थित है मान्यता है कि यहाँ स्थित शिवलिंग श्वायाम्भू है औरंगजेब के शाशन काल में इस शिवलिंग पर आरे से प्रहार किया गया था ज़िसका चिन्ह आज भी विद्यमान है तथा इसी के आसपास 7 कोस में बिसेन राजपूत जो कि कालांतर में गौरहा बिसेन क्षत्रिय कहे जाते हैं यहीं निवास करते हैं,और यहीं पूरब में इमिलिया वरजोतपुरवा में वीर क्षत्रिय चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी के वंशज की २४ शाखाओं में से १८ वीं शाखा अवध के राजा श्री बच्छराज कुँवर जी के वंशज श्री कल्पनाथ चौहान के प्रपौत्र रामदुलारे चौहान s/o नागेश्वर चौहान जी की संताने निवास करती हैं।
इसी स्थानों पर चंदेलों की भी बस्तियां पाई जाती है, जिसमें हरिश्चंद्र सिंह चंदेल (पूर्व प्रधान) मुकुंदपुर निकट (माँ बाराही स्थल) अपने कर्तव्यों ,ईमानदारी और कर्मठता केे लिए विख्यात हैं, उनके प्रपौत्र विजय सिंह चंदेल 2015 में उत्तर प्रदेश अवार्ड सोसाइटी द्वारा अन्य कई जिले,राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के पुरष्कारों से नवाज़े जा चुके हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा जिले के माने जाने संस्थान फातिमा सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की है। वह जिले में कई मुहिम भी स्कूली शिक्षा के दौरान चला चुके है जैसे , नशा मुक्ति, स्वरोजगार, गरीबी उन्मूलन ।
"स्वामी नारायण मंदिर छपिया" गोंडा जिला मुख्यालय से पूरब की ओर छपिया में श्री घनश्याम जी का भव्य एवम् विशाल मंदिर है जहां पर दूर दूर से सैलानी घूमने आते हैं , यहीं घनश्याम जी की जन्मस्थली भी है।
अपने समय के जिले के होनहार विद्यार्थी रहे विजय न कि कुसल वक्ता बल्कि एक अच्छे छात्रनेता भी रहे है, छात्रों की समस्या को सड़क से संसद तक पहुचाने का काम करतें हैं। ,ज्ञातव्य हो कि विजय सिंह चंदेल इस समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जिले की गरिमा बढ़ा रहें है । और देश की सर्वोच्च सेवा UPSC की तैयारी कर रहे है, उसके साथ साथ गरीबों और शोषितों की आवाज भी मुखर कर रहे है।
ऐसी प्रतिभा पर न कि जिले बल्कि देश को गुमान है।
लहरों से डर गए तो नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मुहर्रम और जुलूस-ए-ज़ुल्फ़िकार
गोण्डा सदर में आयोजित होने वाला मुहर्रम यहाँ की ऐतिहासिक अज़ादारी और सांप्रदायिक सौहार्द (गंगा-जमुनी तहज़ीब) का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यहाँ की अज़ादारी मुख्य रूप से दो पारंपरिक केंद्रों—घोसियाना और चौक इमामबाड़ा के नेतृत्व में संचालित होती है।
7वीं मुहर्रम की ऐतिहासिक परंपरा
7वीं मुहर्रम का जुलूस यहाँ के सांस्कृतिक इतिहास में विशेष स्थान रखता है। यह आयोजन मौला हसन, मौला हुसैन, मौला अब्बास और कर्बला के अन्य शहीदों की स्मृति को समर्पित है।
समयावधि और रूट: यह जुलूस सुबह लगभग 5:00 बजे प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न वार्डों और संकरी गलियों से गुजरते हुए देर रात 2:00 से 3:00 बजे तक अनवरत चलता है।
बाल्कोनी परंपरा (सामुदायिक सहभागिता): इस जुलूस का मुख्य आकर्षण 'जुलूस-ए-ज़ुल्फ़िकार' (एक विशेष भारी पारंपरिक आलम) है, जिसे लगभग 20 फीट ऊंचे बांस पर स्थापित किया जाता है। इसकी ऊंचाई के कारण यह मार्ग में पड़ने वाले भवनों की प्रथम तल की बाल्कोनियों तक पहुँचता है। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की महिलाएं बाल्कोनी से इस पर पारंपरिक चादर और फल अर्पित करती हैं, जो इस क्षेत्र की सामाजिक एकता का प्रतीक है।
महा-मिलाप और सलामी: 7वीं मुहर्रम की देर रात (अनुमानित समय 1:00 से 2:00 बजे के मध्य) घोसियाना और चौक इमामबाड़े से निकलने वाले दोनों मुख्य जुलूसों का कर्बला मार्ग पर मिलन होता है, जिसे स्थानीय इतिहास में 'महा-मिलाप' कहा जाता है। इसके पश्चात रात 2:30 से 3:00 बजे के बीच 'सलाम ज़ुल्फ़िकार' की ऐतिहासिक सलामी की रस्म पूरी की जाती है और दोनों आलमों को उनके मूल स्थानों पर वापस रख दिया जाता है।
10वीं मुहर्रम (यौम-ए-आशूरा) और समापन
10वीं मुहर्रम के दिन ग्रामीण और शहरी संस्कृतियों का संगम देखा जाता है।
शहरी व ग्रामीण जुलूसों का एकीकरण: इस दिन सुभागपुर, सेमरा दम्मन और लाल चंद पुरवा जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से अत्यंत विशाल और ऊंचे ताजियों के जुलूस निकलते हैं। ये जुलूस रेलवे ओवरब्रिज को पार करके मुख्य स्टेशन क्षेत्र के महाराजा अग्रसेन चौराहे पर एकत्र होते हैं।
मार्ग प्रबंधन में अंतर: 7वीं मुहर्रम का जुलूस जहाँ आंतरिक वार्डों की संकरी गलियों से होकर गुजरता है, वहीं 10वीं मुहर्रम का संयुक्त जुलूस किसी गली में न जाकर सीधे मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग और चौराहों से होते हुए कर्बला मैदान की ओर अग्रसर होता है।
विसर्जन एवं विखंडन: शाम को सभी ताजियों को कर्बला परिसर में सम्मानपूर्वक विसर्जित (ठंडा) किया जाता है। इसके पश्चात, दोनों मुख्य ज़ुल्फ़िकार (आलम) को कर्बला परिसर के भीतर स्थित मस्जिद में ले जाकर अत्यंत सम्मान के साथ उनके अंगों को अलग (Dismantle) किया जाता है और उन्हें अगले वर्ष तक के लिए संबंधित अधिकृत परिवारों को सौंप दिया जाता है।
यातायात
गोण्डा जंक्शन रेलवे स्टेशन यातायात के लिये एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहाँ से देश की सभी दिशाओं के लिये ट्रेन मिलती हैं, गोण्डा पूर्वोतर रेलवे का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है, जो लखनऊ और गोरखपुर के बीच में पड़ता है। यात्री सुविधा के मामले में गोण्डा रेलवे स्टेशन अव्वल है।
गोण्डा प्रदेश की राजधानी लखनऊ, फैज़ाबाद, बलरामपुर एवं बहराइच से सड़क मार्ग द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों जैसे इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर, बरेली आदि तथा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को मोटर मार्ग द्वारा नियमित परिवहन बस सेवायें हैं।http://www.upsrtc.com/en/page/time-table Services Time Table Official Website of Uttar Pradesh State Road Transport Corporation, Government of Uttar Pradesh, India. www.upsrtc.com 29 January 2021 24 जनवरी 2021 https://web.archive.org/web/20210124023751/http://upsrtc.com/en/page/time-table dead
जनसंख्या
2011 में, गोंडा की जनसंख्या 3,433,919 थी, जिसमें पुरुष और महिलाएँ क्रमशः 1,787,146 और 1,646,773 थीं। 2024 में गोंडा जिले की अनुमानित जनसंख्या 4,320,000 है | https://www.census2011.co.in/census/district/554-gonda.html Gonda District Population Census 2011 - 2021 - 2024, Uttar Pradesh literacy sex ratio and density www.census2011.co.in 2024-12-19
सन्दर्भ
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर
श्रेणी:गोण्डा ज़िला
श्रेणी:गोण्डा ज़िले के नगर