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सुंईया मेला
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सुंईया मेला, राजस्थान के बाड़मेर जिले के चौहटन कस्बे में पौष कृष्ण पक्ष अमावस्या की सोमवती अमावस्या, मूल नक्षत्र, व्यादिपद योग को मुहूर्त पर लगता है। इसे "मारवाड़ का अर्द्धकुंभ" कहा जाता है। सुंईया महादेव एक "मरु कुंभ" भी है। इस दो दिवसीय मेले में लाखों की तादाद में श्रद्धालु भारत के दूर-दूर प्रदेशों से यहां आते हैं।अनुमान के तौर पर करीब 10 लाख श्रद्धालु इस मेले में आते हैं और महास्नान का लाभ लेते हैं।सूईंया मेले में पवित्र स्नान की मान्यता है। यहां लाखों श्रद्धालु कड़कड़ाती सर्दी में पवित्र स्नान के लिये पहुंचते है। इस दिन यहां सूईंया महादेव मंदिर का झरना, कपालेश्वर महादेव मंदिर का झरना, धर्मराज की बेरी इंद्रभान तालाब और विष्णु पगला के पांच स्थलों के पवित्र मिश्रित जल से स्नान करते है।
== महत्व ==
सुंईया मेले का धर्मशास्त्रों के अनुसार माहात्म्य है क्योंकि यह विशेष योग पर ही भरा जाता है। पौष माह, सोमवार, अमावस्या, मूल नक्षत्र व व्यातिपात योग इन पांचों योग का एक ही समय मिलने पर सुंईया मेले का आयोजन होता है।
मान्यता है कि यह पांडवों की तपोभूमि है। इस तपोभूमि के दर्शन करने एवं पवित्र स्नान से लाखों पाप धुल जाते हैं, ऐसी मान्यता है। एक कथा के अनुसार इस मेले का पुण्य लाभ प्राप्त करने के लिए पांडवों ने अपने वनवास के 12 वर्ष यहां व्यतीत किए तथा पांचों योग के मिलने का इंतजार किया। लेकिन मनोकामना पूर्ण नही हुई तब कुपित होकर पांडवों ने श्राप दिया कि इन बारह वर्षों में ऐसा योग नहीं बना लेकिन कलयुग में ऐसे योग का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
== सन्दर्भ ==