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कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इतिहास
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( एआई ) का इतिहास प्राचीन काल के कृत्रिम प्राणियों के मिथकों, कहानियों और अफवाहों के साथ शुरू हुआ, जिन्हें कुशल रचनाकारों ने बुद्धि या चेतना से संपन्न किया था। प्राचीन काल से लेकर वर्तमान काल तक तर्कशास्त्र और औपचारिक तर्कणा के अध्ययन ने 1940 के दशक में प्रोग्रामेबल डिजिटल कंप्यूटर के को जन्म दिया, जो अमूर्त गणितीय तर्क पर आधारित एक मशीन थी। इस उपकरण और इसके पीछे के विचारों ने वैज्ञानिकों को प्रेरित किया और वे एक इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क बनाने की संभावना पर चर्चा करने लगे।
एआई के क्षेत्र में अनुसंधान की नींव 1956 में डार्टमाउथ कॉलेज परिसर में आयोजित एक कार्यशाला में रखी गई थी। Kaplan Haenlein 2018 इस कार्यशाला में भाग लेने वाले लोग दशकों तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अनुसंधान में अग्रणी बने रहे। उनमें से कई ने भविष्यवाणी की थी कि एक पीढ़ी के भीतर मनुष्यों जितनी बुद्धिमान मशीनें अस्तित्व में आ जाएँगी। इस कल्पना को साकार करने की आशा में अमेरिकी सरकार ने लाखों डॉलर प्रदान किए। Newquist 1994 143–156
समय के साथ यह स्पष्ट हो गया कि शोधकर्ताओं ने इस उपलब्धि की कठिनाई को बहुत कम करके आंका था। Newquist 1994 144–152 1974 में, जेम्स लाइटहिल द्वारा आलोचना और यूएसए कांग्रेस के दबाव के कारण अमेरिका और ब्रिटेन की सरकारों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अनियंत्रित अनुसंधान के लिए धन देना बंद कर दिया। सात वर्ष बाद, जापानी सरकार की एक दूरदर्शी पहल और विशेषज्ञ प्रणालियों की सफलता के परिणामस्वरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश को फिर से प्रोत्साहन मिला, और 1980 के दशक के अंत तक, यह उद्योग एक अरब डॉलर का उद्यम बन गया था। हालांकि, 1990 के दशक में निवेशकों का उत्साह कम हो गया। इस काल को 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता का शीत-ऋतु' कहा गया है। फिर भी, अन्य नामों के तहत अनुसंधान और वित्त पोषण बढ़ता रहा।
2000 के दशक के आरम्भ में, मशीन लर्निंग का उपयोग शिक्षा जगत और उद्योग जगत की कई समस्याओं में किया गया। शक्तिशाली कंप्यूटर हार्डवेयर की उपलब्धता, विशाल डेटा सेटों के संग्रह और ठोस गणितीय विधियों के अनुप्रयोग के कारण यह सफलता संभव हुई। इसके तुरंत बाद, डीप लर्निंग एक अभूतपूर्व तकनीक सिद्ध जिसने अन्य सभी विधियों को पीछे छोड़ दिया। ट्रांसफ़ॉर्मर आर्किटेक्चर की शुरुआत 2017 में हुई और इसका इस्तेमाल प्रभावशाली जनरेटिव एआई अनुप्रयोगों के निर्माण के लिए किया गया।
2020 के दशक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में निवेश में तेज़ी से वृद्धि हुई। ट्रांसफ़ॉर्मर आर्किटेक्चर के विकास से ए आई में जो विशाल क्रान्ति आयी थी, उसी के परिणामस्वरूप चैटजीपीटी जैसे बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) का तेज़ी से विस्तार हुआ और उसे सार्वजनिक उपयोग के लिये खोला गया। ये मॉडल ज्ञान, ध्यान और रचनात्मकता जैसे मानवीय गुणों को प्रदर्शित करते हैं, और इन्हें विभिन्न क्षेत्रों में के कार्य निष्पादन के लिये लगाया गया है। चैटजीपीटी के बाद अनेकानेक बृहद भाषा मॉडल प्रकाश में आ चुके हैं जो विभिन्न प्रकार की क्षमताओं से युक्त हैं।
इस क्षेत्र में 30 नवंबर, 2022 को चैटजीपीटी के प्रथम रिलीज़ के बाद से अब तक के कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँ निम्नलिखित हैं-
फरवरी 2023: माइक्रोसॉफ्ट ने copilot की घोषणा की
मार्च 2023: ओपनएआई ने जीपीटी-4 जारी किया।
मार्च 2023: गूगल ने बार्ड (अब जेमिनी) लॉन्च किया।
नवंबर 2023: ब्लेचले पार्क में पहला एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।
अप्रैल 2024: मेटा ने लामा 3 जारी किया
मई 2024: यूरोपीय संघ ने एआई अधिनियम को मंजूरी दी।
मई 2024: ओपनएआई ने जीपीटी-4o जारी किया।
मई 2025 : चीनी कंपनी DeepSeek ने बेहद कम लागत में ChatGPT-स्तर का मॉडल जारी किया, जो मुक्तस्रोत था।
सितंबर 2025: ओपनएआई ने वीडियो जेनरेशन मॉडल, सोरा 2 जारी किया।
अक्टूबर 2025: क्लाउड एआई कंप्यूट के लिए टेक कंपनियाँ भागीदार बनीं
सन्दर्भ
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