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पाकिस्तान का इतिहास

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पाकिस्तान शब्द का जन्म सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली के द्वारा हुआ। इसके पहले सन् 1930 में शायर मुहम्मद इक़बाल ने भारत के उत्तर-पश्चिमी चार प्रान्तों -सिन्ध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद)- को मिलाकर एक अलग राष्ट्र का मांग की थी। 1947 अगस्त में भारत के विभाजन के फलस्वरूप पाकिस्तान का जन्म हुआ। उस समय पाकिस्तान में वर्तमान पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों सम्मिलित थे। सन् 1971 में भारत के साथ हुए युद्ध में पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा (जिसे उस समय तक पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था) बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र हो गया। आज का पाकिस्तानी भूभाग कई संस्कृतियों का गवाह रहा है। आधुनिक राष्ट्र पाकिस्तान का गठन करने वाले क्षेत्र का इतिहास प्राचीन भारत का हिस्सा है, जिसमें मध्ययुगीन काल में ब्रिटिश भारत का इतिहास भी शामिल है।https://www.dawn.com/news/1431314 If Pakistan shuns the term ‘Ancient India’ in its history books, is it entirely to blame? 10 सितंबर 2018 https://web.archive.org/web/20180910134831/https://www.dawn.com/news/1431314 10 सितंबर 2018 live आज के पाकिस्तानी भूभाग में ईसा के 3000 साल पहले सिन्धु घाटी सभ्यता का जन्म हुआ।https://www.dawn.com/news/1312059 Pakistan: The lesser-known histories of an ancient land 10 सितंबर 2018 https://web.archive.org/web/20180910204149/https://www.dawn.com/news/1312059 10 सितंबर 2018 live यह 1500 ईसापूर्व के आसपास नष्ट हो गया। ईसापूर्व सन् 543 में यह फारस के हखामनी शासकों के साम्राज्य का अंग बना। सिकन्दर ने 330 ईसापूर्व के आसपास हखामनी शासक दारा तृतीय को हराकर उसके सम्पूर्ण साम्राज्य पर कब्जा कर लिया। उसके साम्राज्य को उसके सेनापतियों ने बाँट लिया और इस क्षेत्र में एक अभूतपूर्व यूनानी-बैक्टियन संस्कृति का अंग बना। इसके बाद यह मौर्य साम्राज्य का अंग बना। इसके बाद शक (सीथियनों की भारतीय शाखा) और फिर कुषाणों की शाखा यहाँ आई। सन् 712 में फारस के एक अरब सेनापति मुहम्मद-बिन-क़ासिम ने सिन्ध के नरेश को हरा दिया। इसके बाद यहाँ इस्लाम का आगमन हुआ। इस क्षेत्र पर गजनवियों का अधिकार बारहवीं सदी में हुआ और 1206 में यह दिल्ली सल्तनत का अंग बन गया। सन् 1526 में दिल्ली की सत्ता पर मुगलों का अधिकार हो गया और 1857 के बाद यहाँ अंग्रेजों का शासन आया। 14 अगस्त 1947 को यह स्वतंत्र हुआ। सिन्धु घाटी सभ्यता सिन्धु घाटी सभ्यता ईसापूर्व 3300-1800 के बीच यहाँ सिन्धुघाटी सभ्यता का विकास हुआ। यह विश्व के चार प्राचीन ताम्र-कांस्यकालीन सभ्यताओं में से एक थी। इसका क्षेत्र सिन्धु नदी के किनारे अवस्थित था पर गुजरात (भारत) और राजस्थान में भी इस सभ्यता के अवशेष पाए गए हैं। मोहेन्जो-दारो, हड़प्पा इत्यादि स्थल पाकिस्तान में इस सभ्यता के प्रमुख अवशेष-स्थल हैं। इस सभ्यता के लोग कौन थे इसके बारे में विद्वानों में मतैक्य नहीं है। कुछ इसे आर्यों की पूर्ववर्ती शाखा कहते हैं तो कुछ इसे द्रविड़। कुछ इसे बलोची भी ठहराते हैं। इस मतभेद का एक कारण सिन्धु-घाटी सभ्यता की लिपि का नहीं पढ़ा जाना भी है। ऐसा माना जाता है कि 1500 ईसापूर्व के आसपास आर्यों का आगमन पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों के मार्फ़त भारत में हुआ। आर्यों का निवास स्थान कैस्पियन सागर के पूर्वी तथा उत्तरी हिस्सों में माना जाता है जहाँ से वो इसी समय के करीब ईरान, यूरोप औप भारत की ओर चले गए थे। सन् 543 ईसापूर्व में पाकिस्तान का अधिकांश इलाका ईरान (फारस) के हख़ामनी साम्राज्य के अधीन आ गया। लेकिन उस समय इस्लाम का उदय नहीं हुआ था; ईरान के लोग ज़रदोश्त के अनुयायी थे और देवताओं की पूजा करते थे। सन् 330 ईसापूर्व में मकदूनिया (यूनान) के विजेता सिकन्दर ने दारा तृतीय को तीन बार हराकर हखामनी वंश का अन्त कर दिया। इसके कारण मिस्र से पाकिस्तान तक फैले हखामनी साम्राज्य का पतन हो गया और सिकन्दर पंजाब तक आ गया। ग्रीक स्रोतों के मुताबिक उसने सिन्धु नदी के तट पर भारतीय राजा पुरु (ग्रीक - पोरस) को हरा दिया। पर उसकी सेना ने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया और वह भारत में प्रवेश किये बिना वापस लौट गया। इसके बाद उत्तरी पाकिस्तान और अफगानिस्तान में यूनानी-बैक्ट्रियन सभ्यता का विकास हुआ। सिकन्दर के साम्राज्य को उसके सेनापतियों ने आपस में बाँट लिया। सेल्युकस नेक्टर सिकन्दर के सबसे शक्तिशाली उत्तराधिकारियों में से एक था। मौर्यों ने 300 ईसापूर्व के आसपास पाकिस्तान को अपने साम्राज्य के अधीन कर लिया। इसके बाद पुनः यह ग्रीको-बैक्ट्रियन शासन में चला गया। इन शासकों में सबसे प्रमुख मिनांदर ने बौद्ध धर्म को प्रोत्साहित किया। पार्थियनों के पतन के बाद यह फारसी प्रभाव से मुक्त हुआ। सिन्ध के राय राजवंश (सन् 489-632) ने इसपर शासन किया। इसके बाद यह उत्तर बारत के गुप्त और फारस के सासानी साम्राज्य के बीच बँटा रहा। इस्लाम का आगमन सन् 712 में फारस के सेनापति मुहम्मद बिन कासिम ने सिन्ध के राजा को हरा दिया। यह फारसी विजय न होकर इस्लाम की विजय थी। बिन कासिम एक अरब था और पूर्वी ईरान में अरबों की आबादी और नियंत्रण बढ़ता जा रहा था। हँलांकि इसी समय केन्द्रीय ईरान में अरबों के प्रति घृणा और द्वेष बढ़ता जा रहा था पर इस क्षेत्र में अरबों की प्रभुसत्ता स्थापित हो गई थी। इसके बाद पाकिस्तान का क्षेत्र इस्लाम से प्रभावित होता चला गया। पाकिस्तानी सरकार के अनुसार इसी समय 'पाकिस्तान की नींव' डाली गई थी। इसके 1192 में दिल्ली के सुल्तान पृथ्वीराज चौहान को हराने के बाद ही दिल्ली की सत्ता पर फारस से आए तुर्कों, अरबों और फारसियों का नियंत्रण हो गया। पाकिस्तान दिल्ली सल्तनत का अंग बन गया। मध्यकाल सोलहवीं सदी में मध्य-एशिया से भाग कर आए हुए बाबर ने दिल्ली की सत्ता पर अधिकार किया और पाकिस्तान मुगल साम्राज्य का अंग बन गया। मुगलों ने काबुल तक के क्षेत्र को अपने साम्राज्य में मिला लिया था। अठारहवीं सदी के अन्त तक विदेशियों (खासकर अंग्रेजों) का प्रभुत्व भारतीय उपमहाद्वीप पर बढ़ता गया। सन् 1857 के गदर के बाद सम्पूर्ण भारत अंग्रेजों के शासन में आ गया। १८८५ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई जिसका उद्देश्य था प्रशासन में भारतीय भागीदारी बढ़ाना। हँलांकि कई मुस्लिम नेता इसमें बहुत सक्रिय थे पर कुछ लोग इसे हिन्दू-बहुल पार्टी के रूप में देखते थे। 1906 में मुसलमानों के एक दल मुस्लिम लीग का गठन हुआ। १९३० में मुस्लिम लीग तथा अन्य दलों के नेताओं को इस बात का डर था कि यदि भारत सवतंत्र हो गया तो उसमें मुसलमानों की भागीदारी बहुत कम हो जाएगी क्योंकि वे अल्पसंख्यक हैं। इसी कारण से उन्होंने एक अलग राष्ट्र की मांग की। प्रसिद्ध शायर अलामा इक़बाल ने इस सिद्धांत का साथ दिया और १९४० में हुए लाहौर समझौते के तहत द्विराष्ट्र सिद्धांत पर और बल दिया गया। इस बैठक की वजह १९३७ में हुए चुनाव में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मुस्लिम लीग की पराजय, द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत सरकार की बिना किसी भारतीय नेता के परामर्श के शमिल होना तथा हिन्दू महासभा के गठन को लेकर उपजी स्थिति थी। आज़ादी के बाद thumb|right|480px|१९७० में पाकिस्तान के दो अंग - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। १९७१ में पूर्वी भाग बांग्लादेश बनकर स्वतंत्र हो गया 1947 में भारत को अंग्रेज़ों से स्वतंत्रता मिली। 14 अगस्त को पाकिस्तान स्वतंत्र हुआ और 15 अगस्त को भारत। १९४८ तथा १९६५ में पाकिस्तान ने भारत के साथ लड़ाई की। इन दोनों युद्धों में जीत का निर्णय नहीं हो सका था और अंतर्ऱाष्ट्रीय संधि के तहत संघर्षविराम हुआ। सन् 1971 में भारत के साथ हुए युद्ध में पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र हो गया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। सन् १९९८ में भारत के साथ करगिल युद्ध हुआ जिसमें पाकिस्तानी सेना को करगिल से पीछे हटना पड़ा। 1999 में हुए एक तख्तापलट में सेनानायक परवेज़ मुशर्रफ़ ने सत्ता पर अधिकार कर लिया। बाद में विदेशी और आंतरिक दबाब के कारण उन्होंने देश की सेना के प्रमुख का पद छोड़ दिया और राष्ट्रपति बने रहे। पर अंतरर्र्ऱाष्ट्रीय तथा आंतरिक दबाव के कारण उन्हें चुनाव करवाने पड़े जिनमें उनकी हार हुई और इसी चुनाव के दौरान पाकिस्तान पूपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी। 1947 अंग्रेजों से आजादी मिलने के साथ-साथ भारत का विभाजन हो गया और पाकिस्तान अस्तित्व में आया। पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना देश के गवर्नर जनरल बने। लियाकत अली खान को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। इसके एक वर्ष बाद ही जिन्ना का निधन हो गया जो टीबी की बीमारी से पीड़ित थे। 1951 प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की रावलपिण्डी में हत्या कर दी गई। कम्पनी बाग में वह एक सभा में मौजूद थे, उसी समय उन पर दो गोलियां दागी गईं। पुलिस ने मौके पर ही हमलावर को ढेर कर दिया। लियाकत अली को झटपट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके बाद बंगाली मूल के ख्वाजा नजीमुद्दीन पाकिस्तान के दूसरे प्रधानमन्त्री बने। 1958 सन 1956 में पाकिस्तान को पहला संविधान मिला। लेकिन राजनीतिक खींचतान के बीच 1958 में पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति इसकंदर मिर्जा ने संविधान को निलंबित कर मार्शल लॉ लगा दिया। फिर कुछ दिनों बाद ही सेना प्रमुख जनरल अयूब खान मिर्जा को हटाकर खुद देश के राष्ट्रपति बन बैठे। पाकिस्तान में पहली बार सत्ता सेना के हाथ में आई। 1965 पाकिस्तान में अमेरिका जैसी राष्ट्रपति शासन प्रणाली लागू करने वाले अयूब खान ने 1965 में चुनाव कराने का निर्णय लिया। वह खुद पाकिस्तान मुस्लिम लीग के उम्मीदवार बने जबकि विपक्ष ने उनके सामने जिन्ना की बहन फातिमा जिन्ना को उतारा। फातिमा जिन्ना को भरपूर वोट मिले लेकिन अयूब खान इलेक्ट्रोल कॉलेज के जरिए चुनाव जीत गए। इसी वर्ष भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ जिसमें पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी। 1969 फातिमा जिन्ना के खिलाफ विवादास्पद जीत और भारत के साथ 1965 में हुई जंग के नतीजों से अयूब खान की छवि को बहुत नुकसान हुआ। जबरदस्त विरोध प्रदर्शनों के बीच उन्होंने राष्ट्रपति पद छोड़ दिया और सत्ता अपने आर्मी चीफ जनरल याहया खान को सौंप दी। देश में फिर मार्शल लॉ लगा और सभी असेंबलियां भंग कर दी गईं। 1970 पाकिस्तान में आम चुनाव कराए गए। पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के नेता शेख मुजीबउर रहमान की पार्टी आवामी लीग को जीत मिली। नेशनल असेंबली की कुल 300 सीटों में से आवामी लीग को 160 सीटें मिलीं। 81 सीटों के साथ जुल्फिकार अली भुट्टो की पाकिस्तान पीपल्स पार्टी दूसरे स्थान पर रही। लेकिन आवामी लीग की जीत को स्वीकार नहीं किया गया। 1971 चुनाव नतीजों को लेकर छिड़े विवाद ने एक युद्ध की जमीन तैयार की। इसमें भारत ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान की मदद की और 1971 में 'बांग्लादेश' के नाम से भारतीय उपमहाद्वीप में एक नए देश का उदय हुआ। १९४७ में भारत का विभाजन धर्म के नाम पर हुआ था (द्विराष्ट्र सिद्धान्त), लेकिन एक धर्म होने के बावजूद पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान एक साथ नहीं रह पाए। 1972 पाकिस्तान की टूट के लिए याहया खान के शासन को जिम्मेदार माना गया, जिसके कारण उनका सत्ता में रहना मुश्किल होने लगा। ऐसे में, उन्होंने देश की सत्ता जुल्फिकार अली भुट्टो को सौंप दी। देश में लगे मार्शल लॉ को हटाया गया और जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। 1972 में ही भुट्टो ने पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम शुरू किया। 1973 पाकिस्तान में फिर एक 'नया संविधान लागू हुआ जिसके तहत पाकिस्तान को एक संसदीय लोकतन्त्र बनाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख हो। इस तरह भुट्टो राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री पद पर आ गए। भुट्टो ने 1976 में जनरल जिया उल हक को अपना चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया, जो आगे चल कर उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गए। 1977 पाकिस्तान में आम चुनाव हुए जिसमें भुट्टो की पार्टी को भारी जीत मिली। लेकिन विपक्ष ने चुनावों में धांधली के आरोप लगाए और देश में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया। मौके का फायदा उठाते हुए जिया उल हक ने भुट्टो का तख्तापलट किया और संविधान को निलम्बित कर देश में फिर से मार्शल लॉ लगा दिया। 1978 जिया उल हक ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्होंने सेना प्रमुख का पद भी अपने ही पास रखा। भुट्टो को जिया की "हत्या के साजिश" के आरोप में दोषी करार देकर फांसी पर चढ़ा दिया गया। इसी साल जिया उल हक देश के इस्लामीकरण की अपनी नीति के तहत विवादित हूदूद ऑर्डिनेंस लाए, जिसमें कुरान के मुताबिक सजाएं देने का प्रावधान किया गया। 1985 पाकिस्तान में आम चुनाव हुए, लेकिन पार्टी के आधार पर नहीं। मार्शल लॉ हटाया गया और नई नेशनल असेंबली ने बीते आठ साल के जिया के कामों पर मुहर लगाई और उन्हें राष्ट्रपति चुना गया। मोहम्मद खान जुनेजो प्रधानमंत्री बनाए गए। इससे पहले 1984 में जिया उल हक ने अपनी इस्लामीकरण की नीति पर एक जनमत संग्रह भी कराया जिसमें 95 समर्थन का दावा किया गया। 1988 बढ़ते मतभेदों के बीच जिया उल हक ने संसद को भंग कर दिया और जुनेजो की सरकार को भी बर्खास्त कर दिया। 90 दिनों के भीतर उन्होंने देश में नए आम चुनाव कराने का वादा किया, लेकिन 17 अगस्त 1988 को वह अपने 31 अन्य साथियों के साथ एक विमान हादसे में मारे गए। 1978 से लेकर 1988 तक जिया उल हक ने पाकिस्तान पर एक छत्र राज किया। 1988 देश में आम चुनाव हुए और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को भारी बहुमत मिला। जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। चुनाव में बेनजीर की पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को 38 प्रतिशत मत मिले। वहीं नवाज शरीफ के नेतृत्व में इस्लामी जम्हूरी इत्तेहाद पार्टी 30 प्रतिशत मतों के साथ दूसरे स्थान पर आई। 1990 [भ्रष्टाचार]] के आरोपों में बेनजीर को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी। राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने संसद को भंग कर भुट्टो सरकार को बर्खास्त कर दिया। चुनाव हुए और जिया के दौर में राजनीति का ककहरा सीखने वाले नवाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री चुने गए। इसके साल भर बाद पाकिस्तान की संसद ने शरिया बिल को मंजूर किया और इस्लामिक कानून पाकिस्तान की न्याय प्रणाली का हिस्सा बने। 1993 राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने नवाज शरीफ सरकार को भी भ्रष्टाचार और नकारेपन के आरोपों में चलता कर दिया। इसी वर्ष खुद उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया। देश में फिर चुनाव हुए जिनमें जीत दर्ज कर बेनजीर भुट्टो दूसरी बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के एक सदस्य फारूक लेघारी को देश का राष्ट्रपति चुना गया। 1996 राष्ट्रपति लेघारी ने नेशनल असेम्बली को भंग कर बेनजीर सरकार को बर्खास्त कर दिया जो भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी थी। इस तरह, दस साल के भीतर देश चौथी बार आम चुनाव की दहलीज पर खड़ा था। 1997 के चुनाव में नवाज शरीफ की पीएमएल (एन) को भारी जीत मिली और वह दूसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री बने। 1998 पाकिस्तान ने बलूचिस्तान प्रान्त के चघाई की पहाड़ियों में परमाणु परीक्षण किया। इससे कुछ दिन पूर्व भारत ने पोखरण में अपना दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। परमाणु परीक्षण के बाद अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिए। लेकिन इससे भारतीय उपमहाद्वीप में परमाणु हथियारों की होड़ को रोका नहीं जा सका। 1999 इसी वर्ष पाकिस्तान ने गुप्त रूप से कारगिल की पहाड़ियों पर अधिकार कर लिया। इसके कारण भारत और पाकिस्तान में कारगिल युद्ध हुआ। इस युद्ध में भारत की विजय हुई। पाकिस्तानी सेना को कारगित की पहाड़ियों से भागना पड़ा। इसके बाद नवाज शरीफ सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ की जगह ख्वाजा जियाउद्दीन अब्बासी को सेना प्रमुख बनाना चाहते थे। लेकिन जैसे ही इसका पता मुशर्रफ को लगा तो उन्होंने नवाज शरीफ का ही तख्तापलट कर दिया और उन्हें नजरबन्द कर लिया। इस तरह पाकिस्तान की बागडोर चौथी बार एक सैन्य शासक के हाथ में आई। 2000 पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने मुशर्रफ के तख्तापलट को उचित ठहराया और तीन साल के लिए उन्हें सारे अधिकार दे दिए। इसी साल नवाज शरीफ और उनका परिवार निर्वासन में सऊदी अरब चले गए। 2001 में मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति बन गए और सेना प्रमुख का पद भी उन्होंने अपने पास ही रखा। 2002 पाकिस्तान में फिर से आम चुनाव हुए और ज्यादातर सीटें पीएमएल (क्यू) ने जीती। इस पार्टी को मुशर्रफ ने ही बनाया था जिसमें उनके वफादारों को अहम पद मिले। जफरउल्लाह खान जमाली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने गए, लेकिन वह दो साल ही पद पर रह पाए। 2004 में उनकी जगह शौकत अजीज को पाकिस्तान का प्रधानमन्त्री बनाया गया। 2007 परवेज मुशर्रफ ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी को बर्खास्त कर दिया जिसके बाद देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। आखिरकार चौधरी को बहाल किया गया लेकिन मुशर्रफ ने देश में इमरजेन्सी लगा दी। इस बीच पाकिस्तानी संसद ने पहली बार अपना पांच साल का निर्धारित कार्यकाल पूरा कर लिया। 2007 आम चुनावों में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की नेता बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान लौटीं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमे वापस लिए गए। लेकिन रावलपिंडी में एक चुनावी रैली के दौरान बम विस्फोट द्वारा उनकी हत्या कर दी गई। उनकी हत्या उसी कम्पनी बाग में हुई जहां पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की हत्या की गयी थी। 2008 बेनजीर की मृत्यु के बाद चुनावों में पीपीपी को सहानुभूति लहर का फायदा हुआ और नेशनल असेंबली की ज्यादातर सीटें उसके खाते में आईं। यूसुफ रजा गिलानी देश के प्रधानमंत्री बने जबकि बेनजीर के पति आसिफ अली जरदारी ने राष्ट्रपति का पद संभाला। आरोपों और विवादों के बीच पीपीपी की सरकार ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। 2013 पाकिस्तान में आम चुनाव हुए और पीएमएल (एन) सत्ता में आई। नवाज शरीफ तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। क्रिकेट से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी 2013 के चुनाव में तीसरी सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी। 17 प्रतिशत वोटों के साथ उसने राष्ट्रीय संसद की 35 सीटें जीतीं और खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत में उसकी सरकार बनी। 2017 भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें किसी सार्वजनिक पद पर रहने और चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री पद अपने विश्वासपात्र शाहिद खाकान अब्बासी को सौंपा। नवाज शरीफ अपने खिलाफ मुदकमों को राजनीति से प्रेरित बताते हैं। पाकिस्तानी सेना से टकराव के कारण भी वह चर्चा में आए। 2018 पाकिस्तान में फिर चुनाव हुए। सेना पर आरोप लगे कि वह किसी भी तरह से नवाज शरीफ और उनकी पार्टी को सत्ता से बाहर रखना चाहती थी। चुनाव मैदान में इमरान खान को सेना का समर्थन मिला। चुनाव प्रक्रिया में धांधली के आरोप भी लगे। फिलहाल इमरान पाकिस्तान के पीएम हैं, लेकिन पाकिस्तान बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। 2019 इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इमरान खान ने अपने चुनाव प्रचार में पाकिस्तान को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की बात की थी। इमरान खान की तमाम कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान अभी आर्थिक संकट से निकल नहीं पाया है। भारत के साथ चल रहे तनाव से पाकिस्तान को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें भारत का इतिहास भारत का विभाजन पाकिस्तान का विभाजन पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंक पाकिस्तान का इतिहास (1947-वर्तमान) श्रेणी:पाकिस्तान का इतिहास श्रेणी:पाकिस्तान श्रेणी:देशानुसार इतिहास