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411 समाचार
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भारत के जल संसाधन

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भारत के जल संसाधन यहाँ कि अर्थव्यवस्था के लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत की काफ़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है और भारतीय कृषि काफ़ी हद तक वर्षाजल पर ‌‌‌‌निर्भर है। सिंचित क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा नलकूपों द्वारा है और भारत विश्व का सबसे बड़ा भू जल उपयोगकर्ता भी है। भारत में वर्षा कि मात्रा बहुत है किन्तु यह वर्षा साल के बारहों महीनों में बराबर न होकर एक ऋतु विशेष में होती है जिससे वर्षा का काफ़ी जल बिना किसी उपयोग के बह जाता है।जून 2014 जल प्रदूषण और जल गुणवत्ता के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। thumb|300px|कालीनगर, वर्दवान, पश्चिम बंगाल में बाढ़ का एक दृश्य जल संसाधन उपलब्धता भारत में जल संसाधन की उपलब्धता क्षेत्रीय स्तर पर जीवन-शैली और संस्कृति के साथ जुड़ी हुई है।जून 2014 साथ ही इसके वितरण में पर्याप्त असमानता भी मौजूद है। एक अध्ययन के अनुसार भारत में ७१% जल संसाधन की मात्रा देश के ३६% क्षेत्रफल में सिमटी है और बाकी ६४% क्षेत्रफल के पास देश के २९% जल संसाधन ही उपलब्ध हैं।वर्मा और फंसालकर,२००७ हालाँकि कुल संख्याओं को देखने पर देश में पानी की माँग अभी पूर्ती से कम दिखाई पड़ती है। २००८ में किये गये एक अध्ययन के मुताबिक देश में कुल जल उपलब्धता ६५४ बिलियन क्यूबिक मीटर थी और तत्कालीन कुल माँग ६३४ बिलियन क्यूबिक मीटर।Narsimhan, T N. 2008. A note on India's water budget and evapotranspiration. Journal of Earth System Science. Vol 117. No 3. PP 237- 240.(सरकारी आँकड़े जल की उपलब्धता को ११२३ बिलियन क्यूबिक मीटर दर्शाते है लेकिन यह ओवर एस्टिमेटेड है)। साथ ही कई अध्ययनों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निकट भविष्य में माँग और पूर्ति के बीच अंतर चिंताजनक रूप ले सकता हैAddams et al., 2009 Addams, L., G. Boccaletti, M. Kerlin, and M. Stuchtey. 2009. Charting Our Water Future: Economic Frameworks to Inform Decision-making. World Bank. https://web.archive.org/web/20100705072816/http://www.mckinsey.com/App_Media/Reports/Water/Charting_Our_Water_Future_Full_Report_001.pdf 5 जुलाई 2010 क्षेत्रीय आधार पर वितरण को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो समस्या और बढ़ेगी। वर्षा जल भारत में वर्षा-जल की उपलब्धता काफ़ी है और यह यहाँ के सामान्य जीवन का अंग भी है। भारत में औसत दीर्घकालिक वर्षा ११६० मिलीमीटर है जो इस आकार के किसी देश में नहीं पायी जाती। साथ ही भारतीय कृषि का एक बड़ा हिस्सा सीधे वर्षा पर निर्भर है जो करीब ८.६ करोड़ हेक्टेयर क्षेत्रफल पर है और यह भी विश्व में सबसे अधिक है।Amarsinghe and Sharma, 2009 चूँकि भारत में वर्षा साल के बारहों महीने नहीं होती बल्कि एक स्पष्ट वर्षा ऋतु में होती है, अलग-अलग ऋतुओं में जल की उपलब्धता अलग लग होती है। यही कारण है कि वार्षिक वर्षा के आधार पर वर्षा बहुल इलाकों में भी अल्पकालिक जल संकट देखने को मिलता है। इसके साथ ही अल्पकालिक जल संकट क्षेत्रीय विविधता के मामले में देखा जाय तो हम यह भी पाते हैं कि चेरापूंजी जैसे सर्वाधिक वर्षा वाले स्थान के आसपास भी चूँकि मिट्टी बहुत देर तक जल धारण नहीं करती और वर्षा एक विशिष्ट ऋतु में होती है, अल्पकालिक जल संकट खड़ा हो जाता है।बंद्योपाध्याय, १९९८ Bandyopadhyay, J., B. Gujja, A. Nigam, and R. Talbot.1998. Fresh Water for India's Children and Nature. New Delhi: UNICEF-WWF अतः सामान्यतया जिस पूर्वोत्तर भारत को जलाधिक्य के क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा था उसे भी सही अरथों में ऐसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह जलाधिक्य भी रितुकालिक होता है। सतही जल नदी जल भारत में १२ नदियों को प्रमुख नदियाँ वर्गीकृत किया गया है जिनका कुल जल-ग्रहण क्षेत्र २५२.८ मिलियन हेक्टेयर है जिसमें गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना सबसे बृहद है। { |- |सिन्धु |७३.३ |गंगा |५२५ } हालाँकि इन नदियों में भी जल की मात्रा वर्ष भर समान नहीं रहती। भारत में नदियों को जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना भी बनी जा रही है जिसमें से कुछ के तो प्रोपोज़ल भी बन चुके हैं। अन्य सतही जल अन्य सतही जल में झीलें, ताल, पोखरे और तालाब आते हैं। भू-जल भारत विश्व का सबसे बड़ा भूगर्भिक जल का उपभोग करने वाला देश है। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक भारत करीब २३० घन किलोमीटर भू-जल का दोहन प्रतिवर्ष करता है।World Bank. 2010 Deep Well and Prudence: Towards Pragmatic Action for Addressing Groundwater Overexploitation in India. Washington, DC: The World Bank सिंचाई का लगभग ६०% और घरेलू उपयोग का लगभग ८०% जल भू जल ही होता है।उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रमुख और विशाल राज्य में सिंचाई का ७१.८ % नलकूपों द्वारा होता है (इसमें कुओं द्वारा निकला जाने वाला जल नहीं शामिल है)। केन्द्रीय भू जल बोर्ड के वर्ष २००४ के अनुमानों के मुताबिक भारत में पुनर्भरणीय भू जल की मात्रा ४३३ बिलियन क्यूबिक मीटर थी जिसमें ३६९.६ बी.सी.एम. सिंचाई के लिये उपलब्ध था। जल संकट पूरे भारत के आंकड़े देखने पर हमें जल संकट अभी भविष्य की चीज़ नज़र आता है लेकिन स्थितियाँ ऐसी नहीं है। क्षेत्रीय रूप से भारत के कई इलाके पानी की कमी से जूझ रहे हैं। बड़े शहरों में तो यह समस्या आम बात हो चुकी है। जल प्रदूषण भारत में जल प्रदूषण पानी कि उपलब्धता से आशय केवल पानी कि मात्रा से लिया जाता है जबकी इसमें पानी की गुणवत्ता का भी समावेश किया जाना चाहिये। आज के समय में भारत की ज्यादातर नदियाँ प्रदूषण का शिकार हैं और भू जल भी प्रदूषित हो रहा है। इन्हें भी देखें भारत की नदियाँ भारत में जल प्रदूषण सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ जल संसाधन मंत्रालय केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भू जल बोर्डजून 2020 InternetArchiveBot श्रेणी:भारत का भूगोल श्रेणी:पर्यावरण श्रेणी:पर्यावरण और सतत विकास