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अग्नि सूक्त
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सितंबर 2026
अग्नि सूक्त ऋग्वेद के प्रथम मण्डल का प्रथम सूक्त है। इसके ऋषि मधुच्छन्दा वैश्वामित्र है। यह विश्वामित्र के पुत्र हैं। इसके देवता "अग्नि" हैं । इसका छन्द "गायत्री-छन्द" है । इस सूक्त का स्वर "षड्जकृ" है। गायत्री-छन्द में आठ-आठ अक्षरों के तीन पाद (चरण) होते हैं। इस प्रकार यह छन्द चौबीस अक्षरों (स्वरों) का छन्द होता है।
अग्नि-सूक्त में कुल नौ मन्त्र हैं। संख्या की दृष्टि से सम्पूर्ण वैदिक संस्कृत में इन्द्र (250) के बाद अग्नि (200) का ही स्थान है , किन्तु महत्ता की दृष्टि से अग्नि का सर्वप्रमुख स्थान है। स्वतन्त्र रूप से अग्नि का 200 सूक्तों में स्तवन किया गया है । सामूहिक रूप से सम्पूर्ण वैदिक साहित्य में अग्नि का 2483 सूक्तों में स्तवन किया गया है।
अग्नि पृथ्वी स्थानीय देवता है। इनका पृथ्वीलोक में प्रमुख स्थान है।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
सूक्त
वेद
अग्नि
श्रेणी:ऋग्वेद