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युवराज कुमार
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डॉ युवराज कुमार Yuv raj Kumar new.jpg अंगूठाकार डा. युवराज कुमार]] 1971 12 12 वाराणसी, उत्तर प्रदेश भारतीय एमबीबीएस, एम एस (आर्थो), एमआरसीएस (आई), एम्आईएमएस (यूके) अस्थि शल्य चिकित्सक डा. सविता कुमार हिंदू स्वर्गीय सरयू प्रसाद, राम प्यारी देवी http://www.dryuvraj.com
युवराज कुमार (अंग्रेजी Dr. Yuvraj Kumar) (जन्म 12 दिसंबर 1971) भारतीय अस्थि शल्य चिकित्सक (अंग्रेजी Orthopaedic Surgeon) और मैराथन धावक हैं। उन्होंने एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन और मुंबई फुल मैराथन समेत लंबी दूरी की कई प्रतिस्पर्धाओं में भी हिस्सा लिया है। उन्होंने पिछले 10 सालों में 10 हजार आर्थोपेडिक शल्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। दिल्ली - राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नई अस्थि शल्य तकनीकों की शुरूआत करने में अग्रणी है। वह हरियाणा के फरीदाबाद के प्रमुख चिकित्सा केन्द्र क्यूआरजी हेल्थ सिटी में जोड़ प्रतिस्थापन एवं रीढ की सर्जरी (अंग्रेजी Joint Replacement and Spine Surgery) विभाग के प्रमुख हैं।http://qrghealthcity.com/doctor-profile/dr-yuvraj-kumar-80 Name : Dr. Yuvraj Kumar qrghealthcity en https://web.archive.org/web/20190203021105/http://qrghealthcity.com/doctor-profile/dr-yuvraj-kumar-80 3 फ़रवरी 2019 deadhttps://www.amarujala.com/delhi-ncr/faridabad/regular-and-simple-exercise-of-knee-can-help-you-from-knee-surgery घुटने के नियमित व सरल व्यायाम आपको घुटने की सर्जरी से बचा सकते हैं Amar Ujala हिन्दी https://web.archive.org/web/20180226071621/https://www.amarujala.com/delhi-ncr/faridabad/regular-and-simple-exercise-of-knee-can-help-you-from-knee-surgery 26 फ़रवरी 2018 live उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
आरंभिक जीवन
युवराज कुमार का जन्म 12 दिसंबर, 1971 को भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के धार्मिक शहर वाराणसी में हुआ। उनके पिता सरयू प्रसाद व्यावसायी थी जबकि माता राम प्यारी देवी गृहणी थी। युवराज कुमार व्यवसायी परिवार से से थे। आरंभ में उनका परिवार विध्यांचल में बिरजापुर में रहता था। जब उनकी उम्र केवल पांच साल थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई और इसकारण उन्हें बचपन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बचपन में ही अपने पिता को खो देने और तमाम तरह की मुश्किलात झेलने के बावजूद उन्होंने डॉक्टर बन कर अपनी मां के सपने को पूरा किया और अब समाज सेवा के जरिये अपने खुद के सपने को पूरा करना चाहते हैं।
उनके नाना डा. हंसराज बिहार के नालंदा जिला के शहर में हकीम थे। वह बालो डॉक्टर के नाम से जाने जाते थे। उनकी मां अप्रशिक्षित डॉक्टर परिवार से होने के कारण वह अपने बेटे को प्रशिक्षित डॉक्टर बनाना चाहती थीं। उनके पिता की मृत्यु कम उम्र में ही हो गई इसलिए बचपन काफी मुश्किलों के दौर से गुजरा। उनके पिता की मृत्यु के बाद उनके बड़े भाई ने सहारा दिया और उन्होंने पढ़ाई की व्यवस्था की।
आरंभिक शिक्षा
आरंभिक शिक्षा वह अपने बड़े भाई की सलाह पर पटना आकर 1869 में स्थापित सरकारी स्कूल टी. के. घोष अकादमी में दाखिला लिया। उस स्कूल से भारत के प्रथम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद और पश्चिम बंगाल के प्रथम मुख्यमंत्री डा. विधान चन्द्र रॉय (डा. बी सी राय) के अलावा कई जानी-मानी हस्तियां ने शिक्षा हासिल की थी।http://www.aadarshansamachar.com/inauguration-of-new-building-of-tk-ghosh-academy/ टी के घोष एकेडमी के नए भवन का उदघाटन aadarshansamachar.com हिन्दी https://web.archive.org/web/20180826150251/http://www.aadarshansamachar.com/inauguration-of-new-building-of-tk-ghosh-academy/ 26 अगस्त 2018 dead इस स्कूल को उसी स्कूल से उन्होंने 1987 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और उसके बाद मगध विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट किया।
चिकित्सा शिक्षा एवं उच्च प्रशिक्षण
उन्होंने 1993 में पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हास्पीटल में दाखिला लिया तथा यहां से एमबीबीएस किया। सन 2004 में बिहार मेडिकल कॉलेज एंड हास्पीटल (बीएमसीएच) से एमएस आर्थोपेडिक्स पास किया। इसके बाद मुम्बई के बॉम्बे हॉस्पिटल में प्रसिद्ध स्पाइन सर्जन डा. समीर दलवी की निगरानी स्पाइनल सर्जरी में काम किया। 2006 के मध्य में लंदन में इंग्लैंड चले गए जहां दो अस्पतालों रॉयल नेशनल आर्थोपेडिक हॉस्पिटल स्टैमन और रसेलस्क्वायर में जीओएसएच ग्रिड ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल से छह महीने के लिए स्पाइनल फेलोशिप किया। स्पाइन फेलोशिप करने के बाद वह स्वदेश लौट आए। स्वदेश लौट कर उन्होंने नई दिल्ली में दिसंबर 2006 में इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन के रूप में काम शुरू किया। मरीजों की चिकित्सा एवं सेवा के सिलसिले में उन्होंने कई दिन 24 —24 घंटे काम किया। मई 2010 से फरीदाबाद में एशियन इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में आर्थोपेडिक्स विभाग में कंसल्टेंट के तौर पर ज्वाइन किया जहां पदोन्नत होकर आर्थोपेडिक्स विभाग के अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्होंने फरीदाबाद के प्रमुख अस्पताल क्यूआरजी हास्पीटल के आर्थोपेडिक विभाग के प्रमुख के तौर पर काम कर रहे हैं। वह लंबी अपनी फिटनेस को लेकर सर्तक रहते हैं। वह दूरी की दौड़ प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से हिस्सा लेते हैं।
अंगूठाकार|मुंबई फुल मैराथन में हिस्सा लेते हुए डा. युवराज कुमार (बीच में)
पारिवारिक जीवन
उनकी पत्नी डा. सविता कुमार स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ तथा गायिका है। उनके एक पुत्र — अक्ष एवं पुत्री पंखुडी हैं।
अनुसंधान
भारतीय आथोपेडिक एसोसिएशन के 48 वें वार्षिक सम्मेलन में ’’थ्रोरैकोलंबर स्पाइनल इंजरिज होने पर आरंभिक स्पाइनल डिकम्प्रेशन एवं पोस्टेरियर स्पाइनल इंस्ट्रूमेंटेशन का मूल्यांकन
नई दिल्ली में इंडियन हैबिटाट सेंटर में 7 सितम्बर, 2008 को आयोजित मिडकॉम, 2008 में ‘‘युवा मरीज में सम्पूर्ण घुटना प्रतिस्थापन (टीकेआर)’’ की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
भुवनेश्वर में इंडियन आर्थोपेडिक एसोसिएशन के 54 वें वार्षिक सम्मेलन, 2009 में ‘‘संक्रमित टोटल नी आर्थोस्कोपी’’ के बारे में शोध पपत्र पेश किया।
सम्मेलनों एवं कार्यशालाओं का आयोजन
अध्यक्ष के रूप में अनेक चिकित्सा सम्मेलनों का आयोजन किया है। इन सम्मेलनों में प्रमुख सम्मेलन हैं :
जून, 2014 में एशियन इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसेस में डा. एडरियन विल्सन द्वारा लाइव आर्थोस्कोपी सर्जरी
अप्रैल, 2015 में लैमिन्क्टोमी, लैमिनोप्लास्टी, किफोप्लास्टी, वर्टेब्रोप्लास्टी, स्पाइनल ट्यूमर एवं संक्रमण पर सम्मेलन
06 फरवरी, 2009 को नई दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास में स्वास्थ्य मेला
19 फरवरी, 2010 को नई दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास में स्वास्थ्य मेला
लंबी दूरी के धावक के रूप में
अनेक लंबी दूरी की दौड़ प्रतिस्पर्धाओं में भागीदारी की। इनमे से प्रमुख हैं :
एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन, नई दिल्ली
मुंबई फुल मैराथन, मुंबई
संदर्भ कड़ियां
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श्रेणी:मैराथन धावक