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411 समाचार
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1942: अ लव स्टोरी

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1942: अ लव स्टोरी 1942 अ लव स्टोरी.jpeg 1942: अ लव स्टोरी का पोस्टर विधु विनोद चोपड़ा संजय लीला भंसालीकामना चन्द्राविधु विनोद चोपड़ा अनिल कपूरजैकी श्रॉफमनीषा कोइरालाअनुपम खेर विधु विनोद चोपड़ा आर॰ डी॰ बर्मन बिनोद प्रधान रेणु सलुजा एसएलबी फ़िल्म्सविनोद चोपड़ा प्रोडक्शन्स भारत 15 अप्रैल, 1994 157 मिनट हिन्दी 1942: अ लव स्टोरी 1993/1994 में बनी हिन्दी भाषा की प्रेमकहानी फ़िल्म है। मुख्य भूमिकाओं में अनिल कपूर, मनीषा कोइराला, जैकी श्रॉफ, अनुपम खेर, डैनी डेन्जोंगपा और प्राण हैं। इस फिल्म को अपने संगीत, गीत, चित्रण, छायांकन, बोल और अपनी प्रमुख अभिनेत्री मनीषा कोइराला के अभिनय के लिए अत्यधिक प्रशंसित किया गया था।बर्थडे स्पेशल - मनीषा कोइराला: एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा... https://khabar.ndtv.com/news/filmy/birthday-special-manisha-koirala-ek-ladki-ko-dekha-to-aisa-laga-1444535 23 जून 2018 एनडीटीवी इंडिया 16 अगस्त 2016 https://web.archive.org/web/20181225173228/https://khabar.ndtv.com/news/filmy/birthday-special-manisha-koirala-ek-ladki-ko-dekha-to-aisa-laga-1444535 25 दिसंबर 2018 live यह फिल्म संगीत निर्देशक राहुल देव बर्मन की मौत के कुछ समय बाद रिलीज़ हुई थी। फिल्म सफल रही थी। संक्षेप यह फिल्म सन् 1942 में गढ़ी हुई है जब ब्रिटिश राज गिर रहा था। यह एक समय था जब कई भारतीय या तो अंग्रेजों के लिए काम कर रहे थे या भूमिगत बैठक और उनके खिलाफ विरोध में रैली कर रहे थे। इस माहौल में, नरेन सिंह (अनिल कपूर) राजेश्वरी "रज्जो" पाठक (मनीषा कोइराला) से प्यार करता है। उस समय उनके रोमांस को राजनीतिक और सामाजिक अशांति के बावजूद बढ़ता हुआ दिखाया गया है। नरेन के पिता, दीवान हरि सिंह (मनोहर सिंह), एक वफादार ब्रिटिश कर्मचारी हैं, जबकि रज्जो के पिता रघुवीर पाठक (अनुपम खेर) ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ रहे क्रांतिकारी है। जब नरेन शादी के लिये राज्जो का हाथ रघुवीर से माँगता है, तो रघुवीर नाराज हो जाता है। नरेन कहता कि वह रज्जो के लिए हर चीज का बलिदान देने के लिए तैयार है और उसके लिए अपने प्यार का रघुवीर को विश्वास दिलाता है। पाठक नरम पड़ जाता है और नरेन को अपने पिता से बात करने के लिए कहता है। जब नरेन ऐसा करता है, हरि सिंह गुस्से में होता है कि उनके बेटे ने क्रांतिकारी की बेटी रज्जो को चुना है, लेकिन वह नाटक करते हैं कि वह नरेन की खुशी के लिए कुछ भी करेंगे। हरि सिंह ने रघुवीर के गुप्त स्थान को प्रकट करने में नरेन का इस्तेमाल किया और ब्रिटिश अधिकारियों को जानकारी लीक कर दी। जल्द ही, पुलिस पाठक के छिपे हुए ठिकाने में पहुँचती और उसे मारने की कोशिश करती है। वह बम को फोड़ देता है और उन सब के साथ खुद भी मर जाता है। रज्जो, जो उस समय बाहर थी भाग जाती है। उसे पाठक का एक साथी शुभंकर (जैकी श्रॉफ) द्वारा शरण में ले लिया जाता है। शुभंकर के प्रशिक्षण के तहत, रज्जो अपने पिता के क्रांतिकारी मार्ग का पालन करती है। इस बीच, नरेन अपने पिता से रघुवीर की हत्या और रज्जो को दूर करने में एक मोहरा के रूप में इस्तेमाल करने के लिए नाराज है। राज्जो के साथ मेल करने का वादा करते हुए वह अपने पिता का विरोध करते हुए एक क्रांतिकारी बनने का वचन देता है। नरेन अपने पिता के साथ सभी संबंधों को खत्म कर देता है और शहर के सामने ब्रिटिश शासन, विशेष रूप से जनरल डगलस के खिलाफ खड़ा होता है। उसे दोषी ठहराया जाता है और इरादतन हत्या के लिये फाँसी की सजा दी जाती है। नरेन के कार्यों से प्रेरित, रज्जो शुभंकर को उसके बारे में बताती है। शुभंकर नरेन को फांसी से बचाता है और दोनों हरि सिंह और कई ब्रिटिश वफादारों को खत्म कर देते हैं। मेजर बिष्ट (डैनी डेन्जोंगपा) द्वारा उनकी सहायता की जाती है जिन्होंने जनरल डगलस के आदेशों पर ब्रिटिश बंदूकधारियों द्वारा अपनई क्रांतिकारी बेटी चंदा की हत्या को दुखद रूप से देखा था। वफादार लोगों के साथ, शुभंकर ने उसी रस्सी द्वारा जनरल डगलस को लटका दिया जो नरेन के लिए थी। शुभंकर, रज्जो और नरेन, मेजर बिष्ट के साथ मिलकर भारतीय ध्वज को सलाम करते हैं जिसे शुभंकर द्वारा फहराया जा रहा है। फिल्म का अंत हो जाता है। मुख्य कलाकार अनिल कपूर - नरेन सिंह मनीषा कोइराला - राजेश्वरी "रज्जो" पाठक जैकी श्रॉफ - शुभंकर अनुपम खेर - रघुवीर पाठक डैनी डेन्जोंगपा - मेजर बिष्ट प्राण - अबीद अली बेग चाँदनी - चंदा रघुवीर यादव - मुन्ना सुषमा सेठ - गायत्री देवी सिंह मनोहर सिंह - दीवान हरि सिंह आशीष विद्यार्थी - आशुतोष ब्रायन ग्लोवर - जनरल डगलस संगीत फिल्म के मूल गीतों को जावेद अख्तर के बोलों के साथ आर॰ डी॰ बर्मन द्वारा रचित किया गया था। आर॰ डी॰ बर्मन ने सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के लिए अपना आखिरी फिल्मफेयर पुरस्कार जीता और जावेद अख्तर ने सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। कुमार सानु ने सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक के लिए लगातार 5वाँ फिल्मफेयर पुरस्कार जीता और कविता कृष्णमूर्ति ने सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता, जो उनकी हैट-ट्रिक का पहला था। इस फिल्म से गायिका कविता कृष्णमूर्ति का उदय भी हुआ था।कविता कृष्णमूर्ति: 90's के कुछ सबसे प्यारे गानों वाली आवाज़ https://hindi.firstpost.com/special/kavita-krishnamurti-biography-voice-behind-most-romantic-songs-of-90s-era-jo-jita-vahi-sikandar-1942-a-love-story-am-82785.html 23 जून 2018 फर्स्टपोस्ट 25 जनवरी 2018 hi-IN https://web.archive.org/web/20181225173226/https://hindi.firstpost.com/special/kavita-krishnamurti-biography-voice-behind-most-romantic-songs-of-90s-era-jo-jita-vahi-sikandar-1942-a-love-story-am-82785.html%20 25 दिसंबर 2018 live जो कुछ सालों के लिये अव्वल गायिका रही। # गीत गायक अवधि 1 "एक लड़की को देखा" कुमार सानु 4:37 2 "कुछ न कहो" (उदासीन) लता मंगेशकर 6:23 3 "कुछ न कहो" (कोरस) 2:06 4 "कुछ न कहो" कुमार सानु 6:06 5 "प्यार हुआ चुपके से" कविता कृष्णमूर्ति 5:15 6 "रिम झिम रिम झिम" कुमार सानु, कविता कृष्णमूर्ति 5:18 7 "रूठ ना जाना" कुमार सानु 3:27 8 "ये सफर" शिवाजी चट्टोपाध्याय 5:41 नामांकन और पुरस्कार 1995 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार - जैकी श्रॉफ 1995 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक पुरस्कार - कुमार सानु 1995 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार - कविता कृष्णमूर्ति 1995 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार - राहुल देव बर्मन 1995 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार पुरस्कार - जावेद अख्तर सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 0109010 1942: अ लव स्टोरी स्टोरी, 1942: अ लव श्रेणी:आर॰ डी॰ बर्मन द्वारा संगीतबद्ध फिल्में श्रेणी:विधु विनोद चोपड़ा द्वारा निर्देशित फ़िल्में