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पटियाला घराना
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पटियाला घराना, हिन्दुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध घरानों में से एक है। यह घराना दिल्ली घराने की एक शाखा के रूप में माना जाता है। इस घराने का प्रतिनिधित्व बड़े गुलाम अली खां ने की ।
संस्थापना
पटियााला घराने के संस्थापक के रूप में विभिन्न मत हमें प्राप्त होते हैं। भगवत शर्ण शर्मा अनुसार, ‘‘इस घराने के संस्थापक के रूप में अली-बक्श तथा पफतेह अली का नाम अग्रगण्य है जो कि संगीत जगत में, ‘अलिया-पफतु’ की गायक जोड़ी के नाम से विख्यात हैं। पंजाब राज्य में ये दोनों कलाकार मूलपुरूष ‘जरनैल-करनैल’ के नाम से भी जाने जाते थे। देखा जाये तो ये नाम इनके कर्मों की सार्थकता सिद्ध करते हैं। जिस प्रकार सेना का नेतृत्व जनरल (जरनैल) और कर्नल (करनैल) करते हैं, इसी प्रकार इस घराने की गायकी को प्रगति के मार्ग की ओर अग्रसर करने के लिये इन दोनों महान कलाकारों ‘अलिया पफतु’ ने इस घराने का नेतृत्व किया। इनको तान कपतान मानने का भी मत है।’’
एक अन्य मतानुसार पटियाला घराने के जन्मदाता जयपुर घराने के वंशज आशिक अली खां हैं। कुछ तानरस खां को, कुछ मान्यतायें हमें दित्ते खां के पिता उस्ताद जस्से खां के जन्मदाता के रूप में प्राप्त होती है। कुछ लोग मियाँ दित्ते खां को इस घराने का आदि पुरूष मानते हैं। उनके अनुसर महाराजा पटियाला (नरेन्द्र सिंह) ने संगीत द्वारा अपने को मनोरंजन प्रदान करने के लिये दित्ते खां को दरबारी गायक नियुक्त किया। भले ही दित्ते खां शास्त्रीय गायन की अपेक्षा पंजाबी लोकधुनों के ही प्रतिष्ठित कलाकार थे। उनके अनुसार दत्ते खां ही इस घराने के अन्वेषक थे। तद्पश्चात् दित्ते खां के पुत्र मियाँ कालु खां तथा उनके पुत्रों ने इस घराने की वृद्धि में अपना योगदान दिया।
कुछ विद्वान दित्ते खां के पुत्र मियाँ कालु (सारंगी वादक) को पटियाला घराने का जन्मदाता स्वीकार करते हैं। इस मत के विद्वानों का विचार है कि इस घराने की नींव बीज रूप में मियाँ कालु खां ने महाराजा राजेन्द्र सिंह के राज्यकाल में ही डाल दी थी, भले ही मान्यता एवं ख्याति इसको ‘अलिया-पफत्तु’ द्वारा प्राप्त हुई। मियाँ कालु ने अपने समय के सर्वश्रेष्ठ विभिन्न घरानेदार संगीतज्ञों के ख़्याल गायन की शिक्षा ली तथा अपने पुत्र अली बख़्श तथा उसके परममित्र प़फतेह अली को ख़्याल गायन की शिक्षा दी तथा कालान्तर में मियाँ कालु ने ही इन दोनों को विभिन्न सुप्रसि( संगीतज्ञों से शिक्षा प्राप्त करवाने के लिये सुयोग्य तथा सफल प्रयत्न किये जिससे विभिन्न घरानों की गायकी ग्रहण करके नवीन शैली प्रसिद्ध करवाने का मियाँ कालु के मस्तिष्क का सुविचार प्रतीत होता है।
श्रेणी:संगीत घराने