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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

माइग्रेन और योग

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जून 2017 जून 2017 जून 2017 अप्रैल 2014 माइग्रेन और योग आधुनिक जीवन की व्यस्तता के साथ ही माइग्रेन के रोगियों की संख्या इसलिए बढ़ रही है कि पुराने रोगी ठीक नहीं होते और नई पीढ़ी के रोगी बढ़ते ही जाते हैं। इस रोग का निवारण किसी भी पद्धति में स्थायी रूप से संभव नहीं है। अतः योग के प्रयोगों से लगभग दो सौ रोगियों के सफल उपचार के बाद यह लेखनबद्ध अनुभव अनेक रोगियों को मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है। प्रचलित तीव्र प्रभावशाली दवाइयों जैसे पेरासिटामॉल, फिनोबार्बीटोन, बल्कीजीन आदि का उपयोग रोग दबाने में होता है। इनके कुप्रभाव से रोगी को अन्य अनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं। जैसे हाथों में कंपन, दृष्टि में कमजोरी, आत्मबल में ह्रास, नींद में कमी आदि। माइग्रेन सामान्यतः 14-15 साल की उम्र से प्रारंभ होता है। यह महिलाओं में अधिक पाया जाता है। 35 से 40 वर्ष की आयु के बाद यह रोग प्रायः नहीं होता, परंतु किशोरावस्था में होने पर यह 45-50 की आयु तक चलता रहता है। किसी भी चिकित्सा पद्धति में इसका स्थायी उपचार उपलब्ध नहीं है। कई चिकित्सकों द्वारा तो माइग्रेन के साथ जीवन जीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। 2-3 महीने, 1 या 2 हफ्ते के या 2-3 दिन के अंतराल से आधे सिर का दर्द मरीज को प्रभावित करता है। प्रमुख लक्षणों में तीव्र सिर दर्द के साथ आंख में दर्द होना, एक तरफा सिर दर्द, गर्दन में दर्द, चक्कर और उल्टी करने की इच्छा रोगी प्रकट करता है। रोगी बंद कमरे में, अंधेरे में, एकांत में पड़ा रहना पसंद करता है। भोजन की इच्छा भी समाप्त हो जाती है। टीवी देखना, संगीत सुनना, शोर आदि से उसे अरुचि होती है। धूप की तरफ देखने या धूप सिर में पड़ने से भी माइग्रेन दर्द शुरू हो जाता है। रोगियों के अनुभव के अनुसार प्रवास से माइग्रेन होता है, उपवास करने से, रात्रि जागरण से, समय पर भोजन न करने से, अधिक बोलने से, भीड़ और शोर वाली जगह पर थोड़ी देर बैठने से, किसी बात को लेकर तनाव होने आदि से माइग्रेन होता है। इस बात का जब शोध किया गया, तब जिन व्यक्तियों को यह रोग है, उनके मस्तिष्क के एक भाग में रक्त का प्रवाह कम होने के आसार एम.आर.आई. एवं ई.ई.जी. द्वारा पाए गए। इसके साथ नेत्रदर्शी (ऑफ्थलमोस्कोप) से भी पता चलता है कि रक्त का प्रवाह एक आंख की तरफ कम हो गया और दूसरी आंख की ओर सामान्य है। श्रेणी:योग श्रेणी:न्यूरोलॉजिकल रोग