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411 समाचार
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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, २०२५

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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, २०२५ भारत में उच्च शिक्षा के लिये एक एकीकृत नियामक ढाँचा तैयार करने हेतु प्रस्तावित एक नया कानून है, जिसे संविधान की संघ सूची की प्रविष्टि 66 (उच्च शिक्षा के मानकों का निर्धारण) के अंतर्गत तैयार किया गया है। यह विधेयक भारत की उच्च शिक्षा नियामक प्रणाली में एक आधारभूत पुनर्गठन का प्रस्ताव करता है।विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 यह विधेयक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) जैसी संस्थाओं को समाप्त कर एक एकीकृत नियामक संस्था के अधीन लाने का उद्देश्य रखता है।शिक्षा बिल 2025 से बदलेगा भारत का भविष्यविकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025: इस विधेयक के तहत उच्च शिक्षा के लिए एक एकीकृत नियामक परिषद की स्थापना की जाएगी, जिसमें तीन स्वतंत्र स्तंभ होंगे — विनियमन, प्रत्यायन (अक्रीडिटेशन) और शैक्षणिक मानक। सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में अधिकारों का अतिक्रमण, अनुपालन की अत्यधिक जटिलताएं और गुणवत्ता आश्वासन की कमजोरी हैं। यह विधेयक परिणाम आधारित प्रत्यायन और संस्थागत स्वायत्तता से जुड़ी पारदर्शी और प्रदर्शन-आधारित शासन प्रणाली लागू करने का प्रयास करता है। इसका मूल उद्देश्य प्रभावी समन्वय और मानकों के निर्धारण के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों को उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिये सशक्त बनाना है। विधेयक की आवश्यकता : राष्ट्रीय शिक्षा नीति, २०२० के अनुरूप उच्च शिक्षा के नियामक ढाँचे का सुधार करना, जिसमें अधिकार क्षेत्रों के आपसी अतिव्यापन को समाप्त करना, नियमों का सरलीकरण और अनुपालन भार में कमी लाना शामिल हो, ताकि संस्थान अकादमिक उत्कृष्टता पर अधिक ध्यान दे सकें। सन्दर्भ