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411 समाचार
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अंजीर

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अंजीरFicus carica LC IUCN3.1 Fig tree.jpg 250px अंजीर के पत्ते और फल पादप अंजीर (अंग्रेजी नाम फ़िग , वानस्पतिक नाम: "फ़िकस कैरिका", प्रजाति फ़िकस, जाति कैरिका, कुल मोरेसी) एक वृक्ष का फल है जो पक जाने पर गिर जाता है। पके फल को लोग खाते हैं। सुखाया फल बिकता है। सूखे फल को टुकड़े-टुकड़े करके या पीसकर दूध और चीनी के साथ खाते हैं। यह बहुत ही लाभकारी फल है। इसका जैम (फलों के टुकड़ों का मुरब्बा) भी बनाया जाता है। सूखे फल में चीनी की मात्रा लगभग ६२ प्रतिशत तथा ताजे पके फल में २२ प्रतिशत होती है। इसमें कैल्सियम तथा विटामिन 'ए' और 'बी' काफी मात्रा में पाए जाते हैं। अंजीर के सेवन से बध्दकोष्ठताअगस्त 2023 InternetArchiveBot (कब्जियत) दूर होती है। यह हड्डियों को मजबूत करता है। एक अध्ययन के अनुसार अंजीर में बोरान नामक एक सूक्ष्म पोषकतत्व मौजूद होता है, जो कैल्शियम को सोखने तथा इसे हड्डियों तक पहुँचाने में मदद करता है। अंजीरInspire With Ravi Anjeer khane ke fayde अंजीर खाने के फायदे #anjeerkefayde #anjeer 2025-02-04 https://www.youtube.com/watch?si=_cozN9cxi6r4oFN_&v=x6QoNfIPlCk&feature=youtu.be 2025-02-09 मध्यसागरीय क्षेत्र और दक्षिण पश्चिम एशियाई मूल की एक पर्णपाती झाड़ी या एक छोटे पेड़ है जो पाकिस्तान से यूनान तक पाया जाता है। इसकी लंबाई ३-१० फुट तक हो सकती है। अंजीर विश्व के सबसे पुराने फलों मे से एक है। यह फल रसीला और गूदेदार होता है। इसका रंग हल्का पीला, गहरा सुनहरा या गहरा बैंगनी हो सकता है। अंजीर अपने सौंदर्य एवं स्वाद के लिए प्रसिद्ध अंजीर एक स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और बहुउपयोगी फल है। यह विश्व के ऐसे पुराने फलों में से एक है, जिसकी जानकारी प्राचीन समय में भी मिस्त्र के फैरोह लोगों को थी। आजकल इसकी पैदावार ईरान, मध्य एशिया और अब भूमध्यसागरीय देशों में भी होने लगी है। प्राचीन यूनान में यह फल व्यापारिक दृष्टि से इतना महत्त्वपूर्ण था और इसके निर्यात पर पाबंदी थी। आज विश्व का सबसे पुराना अंजीर का पेड़ सिसली के एक बगीचे में है।http://www.abhivyakti-hindi.org/ss/anjeer.htm अनोखे अंजीर १२ नवंबर २००९ एचटीएम अभिव्यक्ति https://web.archive.org/web/20090929232016/http://www.abhivyakti-hindi.org/ss/anjeer.htm 29 सितंबर 2009 dead अंजीर का वृक्ष छोटा तथा पर्णपाती (पतझड़ी) प्रकृति का होता है। तुर्किस्तान तथा उत्तरी भारत के बीच का भूखंड इसका उत्पत्ति स्थान माना जाता है। भूमध्यसागरीय तट वाले देश तथा वहाँ की जलवायु में यह अच्छा फलता-फूलता है। निस्संदेह यह आदिकाल के वृक्षों में से एक है और प्राचीन समय के लोग भी इसे खूब पसंद करते थे। ग्रीसवासियों ने इसे कैरिया (एशिया माइनर का एक प्रदेश) से प्राप्त किया; इसलिए इसकी जाति का नाम कैरिका पड़ा। रोमवासी इस वृक्ष को भविष्य की समृद्धि का चिह्न मानकर इसका आदर करते थे। स्पेन, अल्जीरिया, इटली, तुर्की, पुर्तगाल तथा ग्रीस में इसकी खेती व्यावसायिक स्तर पर की जाती है। नाशपाती के आकार के इस छोटे से फल की अपनी कोई विशेष तेज़ सुगंध नहीं पर यह रसीला और गूदेदार होता है। रंग में यह हल्का पीला, गहरा सुनहरा या गहरा बैंगनी हो सकता है। छिलके के रंग का स्वाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता पर इसका स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कहाँ उगाया गया है और यह कितना पका है। इसे पूरा का पूरा छिलका बीज और गूदे सहित खाया जा सकता है। घरेलू उपचार में ऐसा माना जाता है कि स्थाई रूप से रहने वाली कब्ज़ अंजीर खाने से दूर हो जाती है। जुकाम, फेफड़े के रोगों में पाँच अंजीर पानी में उबाल कर छानकर यह पानी सुबह-शाम पीना चाहिएhttps://www.deshbandhu.co.in/vichar/health-benefits-of-fig--anjir-health-news-health-latest-news-94094-2 अंजीर खाने के फायदे 2020-12-19 Deshbandhu 10 मई 2022 10 मई 2022 https://web.archive.org/web/20220510053823/https://www.deshbandhu.co.in/vichar/health-benefits-of-fig--anjir-health-news-health-latest-news-94094-2 dead। दमा जिसमे कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है इससे कफ बाहर आ जाता है। कच्चे अंजीरों को कमरे के तापमान पर रख कर पकाया जा सकता है लेकिन उसमें स्वाभाविक स्वाद नहीं आता। घरेलू उपचारों में अंजीर का विभिन्न प्रकार से प्रयोग किया जाता है। पौष्टिक तत्त्व right|thumb|300px|अंजीर के कच्चे फल अंजीर कैलशियम, रेशों व विटामिन ए, बी, सी से युक्त होता है। एक अंजीर में लगभग ३० कैलरी होती हैं। एक सूखे अंजीर में कैलरी ४९, प्रोटीन ०.५७९ ग्राम, कार्ब १२.४२ ग्राम, फाइबर २.३२ ग्राम, कुल फैट ०.२२२ ग्राम, सैचुरेटेड फैट ०.०४४५ ग्राम, पॉलीअनसैचुरेटेड फैट ०.१०६, मोनोसैचुरेटेड फैट ०.०४९ ग्राम, सोडियम २ मिग्रा और विटामिन ए, बी, सी युक्त होता है।http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?page=article&articleid=4540&edition=200809&category=12 अंजीर खाएं, एनीमिया भगाएं १२ नवंबर २००९ जागरण सखी https://web.archive.org/web/20101121145432/http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?page=article&articleid=4540&category=12&edition=200809 21 नवंबर 2010 dead इसमें ८३ प्रतिशत चीनी होने के कारण यह विश्व का सबसे मीठा फल है। डायबिटीज के रोगियों को दूसरे फलों की तुलना में अंजीर का सेवन खासतौर से लाभकारी होता है। अंजीर पोटैशियम का अच्छा स्रोत है, जो रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है। अंजीर में स्थित रेशे वजन को संतुलित रखते हुए मोटापे को कम रखते हैं साथ ही स्तन कैंसर और मेनोपॉज की तकलीफ़ों को दूर करने में मददगार पाए गए हैं। सूखे अंजीर में फेनोल, ओमेगा-३, ओमेगा-६ होता है। यह फैटी एसिड कोरोनरी हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने में मदद करता है। अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है। अंजीर में पोटैशियम ज्यादा होता है और सोडियम कम होता है इसलिए यह उच्चरक्तचाप की समस्या से भी बचाता है। अंजीर के सेवन करने से मधुमेह, सर्दी-जुकाम, दमा और अपच जैसी तमाम व्याधियों में भी लाभ देखा गया है।http://hariomgroup.net/hariombooks/satsang/Hindi/Arogyanidhi2.htm#_Toc227395355 अंजीर १२ नवंबर २००९ आरोग्य निधि https://web.archive.org/web/20090601032450/http://hariomgroup.net/hariombooks/satsang/Hindi/Arogyanidhi2.htm#_Toc227395355 1 जून 2009 dead 1 दिन में कितने अंजीर खाना चाहिए ? वैसे तो अंजीर खाने के बहुत सारे फायदे बताएं गया है लेकिन यह फायदे आपको तभी मिलते हैं जब आपको अपनी आवश्यकता अनुसार उचित मात्रा में अंजीर खाया जाए इसीलिए यह जानना बहुत ही जरूरी है कि हमें एक दिन में ज्यादा से ज्यादा कितना अंजीर खाना चाहिए ताकि हमें किसी प्रकार का नुकसान ना हो सके तो आपको 1 दिन में लगभग 2 से 3 अंजीर तक ही खाना चाहिए या आपके लिए पर्याप्त होता है और इसमें से मिलने वाली सारे फायदे भी आपके शरीर के लिए ठीक रहते हैं इससे ज्यादा नहीं खाना चाहिए। फायदें 1. पाचन- अंजीर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार है | 2. हड्डियों- अंजीर में कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं | 3. ब्लड शुगर- अंजीर में मौजूद फाइबर ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है | 4. हार्ट- अंजीर में पोटैशियम और फाइबर होते हैं जो हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है | 5. मोटापा- अंजीर में प्राकृतिक मिठास होती है और इसमें कैलोरी कम होती है, जिससे वजन को कम करने में मदद मिल सकती है | 6. स्किन- अंजीर का सेवन स्किन को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकता है | 7. एनीमिया- अंजीर में आयरन की अच्छी मात्रा होती है, जो हीमोग्लोबिन के लेवल को बढ़ाने में मदद कर सकता है |https://ndtv.in/food/soak-figs-overnight-eat-in-the-morning-on-an-empty-stomach-khali-pet-bheege-anjeer-khane-fayde-figs-benefits-6299702 इन 7 लोगों के लिए औषधी से कम नहीं है सुबह खाली पेट भीगे अंजीर का सेवन, फायदे जान चौक जाएंगे आप ndtv.in hi 2024-10-24जून 2026 InternetArchiveBot प्रकार अंजीर कई प्रकार का होता है, परंतु मुख्य प्रकार चार हैं: (१) कैप्री फिग, जो सबसे प्राचीन है और जिससे अन्य अंजीरों की उत्पत्ति हुई है, (२) स्माइर्ना, (३) सफेद सैनपेद्रू और (४) साधारण अंजीर। भारत में मार्सेलीज़, ब्लैक इस्चिया, पूना, बँगलोर तथा ब्राउन टर्की नाम की किस्में प्रसिद्ध हैं। खेती अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न जलवायु वाले स्थानों में की जाती है, परंतु भूमध्यसागरीय जलवायु इसके लिए अत्यंत उपयुक्त है। फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है। पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है। यों तो सभी प्रकार की मिट्टी में इसका वृक्ष उपजाया जा सकता है, परंतु दोमट अथवा मटियार दोमट, जिसमें उत्तम जल निकास (ड्रेनेज) हो, इसके लिए सबसे श्रेष्ठ मिट्टी है। इसमें प्राय खाद नहीं दी जाती; तो भी अच्छी फसल के लिए प्रति वर्ष प्रति वृक्ष २०-३० सेर सड़े हुए गोबर की खाद या कंपोस्ट जनवरी-फरवरी में देना लाभदायक है। इसे अधिक सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। ग्रीष्म ऋतु में फल की पूर्ण वृद्धि के लिए एक या दो सिंचाई कर देना अत्यंत लाभप्रद है। अंजीर के नए पौधे मुख्यत कृत्तों (कटिंग) द्वारा प्राप्त होते हैं। एक वर्ष की अवस्था की डाल का इस कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है। कृत्त जनवरी में लगाए जाते हैं और एक वर्ष बाद इस प्रकार तैयार हुए पौधों को स्थायी स्थान पर पंद्रह-पंद्रह फुट की दूरी पर रोपते हैं। प्रति वर्ष सुषुप्ति काल में इसकी कटाई-छँटाई करनी चाहिए क्योंकि अच्छे फल पर्याप्त मात्रा में नई डालियों पर ही आते हैं। फल अप्रैल से जून तक प्राप्त होते हैं। लगाने के तीन वर्ष बाद वृक्ष फल देने लगता है और एक स्वस्थ, प्रौढ़ वृक्ष से लगभग ४०० फल मिलते हैं। पत्तियों के निचले भाग में एक प्रकार का रोग लगता है जिसे मंडूर (रस्ट) कहते हैं, परंतु यह रोग विशेष हानिकारक नहीं है। चित्रदीर्घा सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ अंजीर के सेवन से होते हैं, अद्भुत फायदे। https://web.archive.org/web/20240304132655/https://sarkarifayde.com/anjeer-khane-ke-fayde/ 4 मार्च 2024 अंजीर की खेती की संपूर्ण जानकारी https://web.archive.org/web/20130711041720/http://https/ 11 जुलाई 2013 अंजीर है कई रोगों की दवा (पत्रिका) श्रेणी:फल श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना