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वंशीधर शुक्ल
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वंशीधर शुक्ल yes 1904 01 23 मन्योरा गाँव, लखीमपुर ज़िला, उत्तर प्रदेश, भारत yes 1980 04 26 1904 01 23 भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक देशभक्ति गीत कदम कदम बढ़ाए जा के रचयिता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसप्रजा सोशलिस्ट पार्टी विधानसभा सदस्य श्री नगर विधानसभा क्षेत्र 1957 1962 बंसीधर मिश्रा छेदीलाल शुक्ल (पिता)
वंशीधर शुक्ल (Pt. Vanshidhar Shukla) (जन्म: 1904; मृत्यु: 1980) एक प्रसिद्ध हिन्दी और अवधी भाषा के कवि, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। http://awadh.org/tag/%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A7%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2/ कविता : मंहगाई (कवि वंशीधर शुक्ल) Awadhi.org अवधी 7 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20140812201851/http://awadh.org/tag/%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A7%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2/ 12 अगस्त 2014 dead http://www.hindustantimes.com/news-feed/nm17/when-he-recorded-nirala-s-voice-clandestinely/article1-158663.aspx When he recorded Nirala’s voice clandestinely 7 अक्टूबर 2006 हिंदुस्तान टाइम्स en 7 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20140808061253/http://www.hindustantimes.com/news-feed/nm17/when-he-recorded-nirala-s-voice-clandestinely/article1-158663.aspx 8 अगस्त 2014 live
उनके पिता छेदीलाल शुक्ल भी एक कवि थे। वंशीधर शुक्ल ने महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। वह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी विधानसभा क्षेत्र से 1957 से 1962 तक विधायक रहे।
वंशीधर शुक्ल को अमर राष्ट्रभक्ति गीत “कदम-कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा, ये ज़िंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पर लुटाए जा” के सृजनकर्ता के रूप में जाना जाता है। http://isahitya.com/index.php/english-sahitya/77-special-articles/316-vanshidhar-shukl-biography दुर्भाग्य है कि हम जनकवि वंशीधर शुक्ल को भुला बैठे Isahitya hi 7 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20140809200117/http://isahitya.com/index.php/english-sahitya/77-special-articles/316-vanshidhar-shukl-biography 9 अगस्त 2014 dead यह गीत आजाद हिंद फौज का रेजिमेंटल क्विक मार्च था, जिसे ब्रिटिश शासन ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत में प्रतिबंधित कर दिया था। स्वतंत्रता के बाद यह गीत भारत में देशभक्ति गीत के रूप में लोकप्रिय हो गया।Qadam Qadam: the growing popularity https://www.tribuneindia.com/news/lifestyle/qadam-qadam-the-growing-popularity-363722 द ट्रिब्यून 23 जनवरी 2022'Kadam Kadam' from 'Gumnaami': A song that has inspired generations https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/bengali/music/kadam-kadam-from-gumnaami-a-song-that-has-inspired-generations/articleshow/71254484.cms टाइम्स ऑफ इंडिया 23 सितंबर 2019
उनकी प्रमुख कृतियों में ‘उठो सोने वालों सबेरा हुआ है’ और ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भई’ शामिल हैं, जो अवधी भाषा में लिखी गई हैं। उनकी रचनावली ‘हुजूर केरी’ को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा प्रकाशित किया गया था। वंशीधर शुक्ल ने लखीमपुर खीरी के मध्य में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर 'गांधी विद्यालय' की स्थापना की।
जीवन परिचय
वंशीधर शुक्ल का जन्म 1904 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले के मन्यौरा गाँव में हुआ था। उनका जन्म बसंत पंचमी के दिन एक कृषक परिवार में हुआ था। उनके पिता पं. छेदीलाल शुक्ल एक किसान थे और आल्हा गायन के लिए जाने जाते थे। बचपन में वंशीधर शुक्ल अपने पिता के साथ आल्हा गायन में सम्मिलित होते थे, जिससे उन्हें लोकगीतों और कविता में रुचि उत्पन्न हुई।
1919 में उनके पिता का निधन हो गया, जिससे पारिवारिक उत्तरदायित्व उन पर आ गया। इसके बाद उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की ओर रुझान बढ़ाया। 1925 के आसपास वे गणेशशंकर विद्यार्थी के संपर्क में आए, जिनके प्रभाव में उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। इस दौरान वे कई बार जेल भी गए। वंशीधर शुक्ल की कविताएँ सामाजिक और राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित थीं। उन्होंने साहित्य और राजनीति के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए।
कृतित्व
वंशीधर शुक्ल ने स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित साहित्य की रचना की। 1921 में वे पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए और 1928 में महात्मा गांधी के आह्वान पर कांग्रेस में शामिल हुए।कविताओं से क्रांति की मशाल रोशन की बंशीधर शुक्ल ने https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/lakhimpur-kheri/poetry-illuminating-torch-of-revolution-vanshidhar-shukla अमर उजाला 13 अगस्त 2016
दमदम कांड के बाद, उन्होंने खूनी पर्चा नामक क्रांतिकारी कविता लिखी, जो उस समय अत्यधिक लोकप्रिय हुई और 1928 में पूरे देश में प्रकाशित हुई। खीरी बम कांड के बाद पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा और क्रांतिकारी साहित्य जब्त कर लिया, जिसके चलते उन्हें छह महीने की जेल हुई। वे स्वदेशी आंदोलन और गांधीजी के नमक सत्याग्रह में भी सक्रिय रूप से शामिल हुए।
आंदोलन के दौरान अनेक चुनौतियों के बावजूद वे क्रांतिकारियों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध रहे। 1940 में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बार जेल गए।स्वाधीनता आंदोलन में बंशीधर शुक्ल की रचनाओं ने क्रांतिकारियों में भरा जोश https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/lakhimpur-kheri/in-the-freedom-movement-the-writings-of-banshidhar-shukla-filled-the-enthusiasm-of-the-revolutionaries-lakhimpur-news-bly4563660124 अमर उजाला 15 अगस्त 2021
उनकी प्रमुख काव्य रचनाओं में उठो सोने वालों, सवेरा हुआ है, वतन के फकीरों का फेरा हुआ है, उठ जाग मुसाफिर, भोर भयो, कदम कदम बढ़ाए जा और मेरा रंग दे बसंती चोला शामिल हैं। उनकी कविताओं का संकलन "वंशीधर शुक्ल रचनावली" उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित किया गया है। उन्होंने लखीमपुर खीरी शहर में महात्मा गांधी के सम्मान में "गांधी विद्यालय" की स्थापना की।http://isahitya.com/index.php/english-sahitya/77-special-articles/316-vanshidhar-shukl-biography दुर्भाग्य है की हम जनकवि वंशीधर शुक्ल को भुला बैठे Isahitya hi 7 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20140809200117/http://isahitya.com/index.php/english-sahitya/77-special-articles/316-vanshidhar-shukl-biography 9 अगस्त 2014
राजनैतिक जीवन
भारत की स्वतंत्रता के बाद, उन्होंने 1957 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीता और श्री नगर विधानसभा क्षेत्र (लखीमपुर खीरी) से विधायक बने। उन्होंने 1957 से 1962 तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, उन्होंने विधायक के वेतन भत्ते को स्वीकार न करने का निर्णय लिया।ऐसे भी विधायक : बंशीधर शुक्ल की सादगी और फक्कड़पन की दी जाती हैं मिसालें https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/lakhimpur-kheri/such-are-the-mlas-examples-are-given-of-banshidhar-shukla-s-simplicity-and-frivolity-lakhimpur-news-bly4744266161 अमर उजाला 5 फरवरी 2022स्वाधीनता आंदोलन में बंशीधर शुक्ल की रचनाओं ने क्रांतिकारियों में भरा जोश https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/lakhimpur-kheri/in-the-freedom-movement-the-writings-of-banshidhar-shukla-filled-the-enthusiasm-of-the-revolutionaries-lakhimpur-news-bly4563660124 अमर उजाला 15 अगस्त 2021
पुरस्कार और सम्मान
1978 में, वंशीधर शुक्ल को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मलिक मुहम्मद जायसी पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसमें ₹5000 की नकद राशि प्रदान की गई।पांडेय, सीमा. पं. वंशीधर शुक्ल: व्यक्ति और रचनाकार। पिलग्रिम्स पब्लिशिंग, वाराणसी, 2021। 9789350762738। पृष्ठ 2।
1977 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में सम्मानित किया, जिसकी अध्यक्षता कथाकार अमृतलाल नागर ने की थी और जिसमें कई प्रमुख भारतीय लेखक शामिल हुए थे। 1953 में, उन्हें अखिल भारतीय अभिनंदन हिंदी साहित्य परिषद, लखीमपुर खीरी और हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा सम्मानित किया गया था। 1962 से 1969 के बीच, उन्हें लखनऊ की हिंदी साहित्यिक समुदाय और बहराइच की अवध अकादमी से कई सम्मान प्राप्त हुए।
विरासत
वंशीधर शुक्ल के साहित्यिक कार्यों पर कई विश्वविद्यालयों में शोध किया गया है, और कानपुर विश्वविद्यालय ने उनके कार्यों को हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल किया है। उनके सम्मान में लखीमपुर खीरी में एक सड़क का नामकरण किया गया है।
उनके जीवन और कृतित्व पर आधारित एक जीवनी "पंडित वंशीधर शुक्ल: व्यक्ति और रचनाकार" शीर्षक से लिखी गई है, जिसे सीमा पांडेय ने लिखा है और पिलग्रिम्स पब्लिशिंग, वाराणसी द्वारा प्रकाशित किया गया है।पंडित वंशीधर शुक्ल: व्यक्ति और रचनाकार 2021 Pilgrims Book House, Varanasi 9789350762738
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने उनके सम्मान में एक पुरस्कार स्थापित किया है, जिसे "वंशीधर शुक्ल सर्जना पुरस्कार" के नाम से जाना जाता है। यह पुरस्कार हर वर्ष अवधी भाषा के साहित्य में योगदान देने वाले लेखकों को प्रदान किया जाता है।डॉ. विनय को निराला और रमाकांत को वंशीधर शुक्ल पुरस्कार https://www.jagran.com/uttar-pradesh/raebareli-nirala-to-dr-vinay-and-vanshihar-shukla-award-to-ramakant-21409711.html दैनिक जागरण 27 फरवरी 2021 हिंदी
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
वंशीधर शुक्ल का परिचय
वंशीधर शुक्ल कविता कोश पर
मंहगाई / वंशीधर शुक्ल
वंशीधर शुक्ल की कविता उठो सोने वालों
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