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दीपक
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thumb|right|200px|मिट्टी का पारंपरिक दीयादीप, दीपक, दीवा या दीया वह पात्र है जिसमें सूत की बाती और तेल या घी रख कर ज्योति प्रज्वलित की जाती है। पारंपरिक दीया मिट्टी का होता है लेकिन आज आधुनिक युग में धातु के दीये भी प्रचलन में हैं। प्राचीनकाल में इसका प्रयोग प्रकाश के लिए किया जाता था पर बिजली के आविष्कार के बाद अब यह सजावट की वस्तु के रूप में अधिक प्रयोग होता है। धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठानों में इसका महत्व अभी भी बना हुआ है। यह पंचतत्वोंस्तंभ क none में से एक, अग्नि का प्रतीक माना जाता है। दीपक जलाने का एक मंत्रस्तंभ ख none भी है जिसका उच्चारण सभी शुभ अवसरों पर किया जाता है। इसमें कहा गया है कि सुन्दर और कल्याणकारी, आरोग्य और संपदा को देने वाले हे दीप, हमारी बुद्धि के विकास के लिए हम तुम्हें नमस्कार करते हैं। विशिष्ट अवसरों पर जब दीपों को पंक्ति में रख कर जलाया जाता है तब इसे दीपमाला कहते हैं। ऐसा विशेष रूप से दीपावली के दिन किया जाता हैं। अन्य खुशी के अवसरों जैसे विवाह आदि पर भी दीपमाला की जाती है।
दीपक का इतिहास
ज्योति अग्नि और उजाले का प्रतीक दीपक कितना पुरातन है ।इसके विषय में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। गुफाओं में भी यह मनुष्य के साथ था। कुछ बड़ी अंधेरी गुफाओं में इतनी सुन्दर चित्रकारी मिलती है जिसे बिना दीपक के बनाना सम्भव नहीं था। भारत में दिये का इतिहास प्रामाणिक रूप से ५००० वर्षों से भी ज्यादा पुराना हैं जब इसे मुअन-जो-दडो में ईंटों के घरों में जलाया जाता था। खुदाइयों में वहाँ मिट्टी के पके दीपक मिले है। कमरों में दियों के लिये आले या ताक़ बनाए गए हैं, लटकाए जाने वाले दीप मिले हैं और आवागमन की सुविधा के लिए सड़क के दोनों ओर के घरों तथा भवनों के बड़े द्वार पर दीप योजना भी मिली है। इन द्वारों में दीपों को रखने के लिए कमानदार नक्काशीवाले आलों का निर्माण किया गया था। http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/lalit_nibandh/2000/deeparva.htm दीप ज्योति नमस्तुते 5 अगस्त 2007 एचटीएम अभिव्यक्ति https://web.archive.org/web/20070808055919/http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/lalit_nibandh/2000/deeparva.htm 8 अगस्त 2007 dead
दीपक भारतीय संस्कृति और जीवन में इस प्रकार मिला जुला है कि इसके नाम पर भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक राग का नाम दीपक राग - रखा गया है। कहते हैं इसके गाने से दीपक अपने आप जलने लगते हैं।
अंगूठाकार
क. स्तंभ क none पांच तत्व हैं मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु। कहते हैं कि इन पांच तत्वों से ही सृष्टि का निर्माण हुआ है। अतः प्रत्येक हिंदू अनुष्ठान में पंचतत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
ख. स्तंभ ख none दीपमंत्र इस प्रकार है।
शुभंकरोति कल्याणम् आरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमस्तुते।।
दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः ।
दीपो हरतु मे पापं संध्या दीप नमोऽस्तुते ॥
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
दीप ज्योति नमस्तुते
सत्य की दीया तप का तेल
yes
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