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सेक्स एट डॉन
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सेक्स एट डॉन प्रथम संस्करण का आवरण पृष्ठ क्रिस्टोफर रयानकैसिल्डा जेथा संयुक्त राज्य अमेरीका अंग्रेज़ी मानव कामुकतामानवशास्त्र हार्पर जून 29, 2010 मुद्रित (सजिल्द & अजिल्द) 384 978-0-06-170780-3 HQ12 .R93 2010
सेक्स एट डॉन (Sex at Dawn) क्रिस्टोफर रायन और कैसिल्डा जेथा की लिखी पुस्तक है जो मानव संभोग प्रणाली के बारे में है। इस पुस्तक के लेखकों नें यौन विकास की "मानक कथा" के विपरीत अपने तर्क दिए हैं। इन तर्कों के अनुसार यौन साथियों के साथ संबंध रखना विकासवादी अनुकूलता के वातावरण में सामान्य और स्वीकृत था। लेखकों का तर्क है कि कृषि उत्पादन के कारण उच्च जनसंख्या घनत्व से पहले मानवों के लिए शिकारी-संग्रहकर्ताओं के स्व-निहित समूह सामान्य थे। लेखकों के अनुसार कृषि उत्पादन से पहले यौन संबंध अपेक्षाकृत बिना विवेक के होते थे और इनमें पितृत्व का कोई विषय नहीं था। यह गतिविधि बोनोबो की संबंध प्रणाली के समान है। पुस्तक के अनुसार यौन संबंध ने विभिन्न समूहों में विश्वास के बंधन को मजबूत किया। ईर्ष्या का कारण बनने के स्थान पर इससे सामाजिक संतुलन और पारस्परिक दायित्व वाले चंचल यौन संबंधो से मजबूत हुये।
इस पुस्तक ने लोकप्रियता और बहुत प्रचार प्राप्त किया और आमतौर पर इसे सकारात्मक समालोचना मिली। इसके विपरीत सम्बंधित शैक्षणिक विषयों—जैसे मानवविज्ञान, विकासवादी मनोविज्ञान, प्राइमेट विज्ञान, जीव विज्ञान और काम विज्ञान—के कुछ विद्वानों ने पुस्तक की कार्यप्रणाली और निष्कर्षों की अत्यधिक आलोचना की, हालांकि उन्होंने कुछ तर्कों की सराहना भी की।
सारांश
लेखकों का तर्क है कि मान जाति का विकास समतावाद शिकारी-संचयी समूहों के रूप में हुआ जिसमें यौन संपर्क एक साझा संसाधन था जैसे भोजन, बच्चों की देखभाल और समूह की रक्षा करना।http://thehumanist.org/march-april-2011/speaking-of-sex/ Speaking of Sex Seidman Barry F. Arnell Dowret मार्च–अप्रैल 2011 ह्यूमनिस्ट मैगज़ीन en सेक्स की बात करने पर 3 फ़रवरी 2025
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
सेक्स एट डॉन का आधिकारिक जालस्थल फ़रवरी 2014 में पुरालेखित।
श्रेणी:यौन अभिविन्यास और विज्ञान