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ए. आर. राजा राजा वर्मा
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right|thumbnail|172x245px|एआर राजराजवर्म्मा का एक चित्र
thumb|right|एआर राजराजवर्म्मा की हस्तलिपि
अनन्तपुरत्त राजराजवर्म्मा राजराजवर्म्मा (1863–1918) एक भारतीय कवि, व्याकरणाचार्य और महाराजा कॉलेज (वर्तमान तिरुवनंतपुरम विश्वविद्यालय महाविद्यालय) में प्राच्य भाषाओं के प्रोफ़ेसर थे। उन्हें सामान्यतः एआर राजराजवर्म्मा के नाम से जाना जाता था।
जीवन
एआर राजराजवर्म्मा तत्कालीन परप्पनाड के राजपरिवार का हिस्सा थे, जो मलप्पुरम ज़िला में स्थित था। राजराजवर्म्मा कोयि थम्पुरन का जन्म फरवरी 1863 में लक्ष्मीपुरम पैलेस में चंगनाचेरी में हुआ। उनकी माता का नाम कुंजिक्कावु थम्पुरट्टी और पिता का नाम वासुदेवन नम्बूदिरि था।जॉर्ज के एम करिमपुमन्निल माताइ जॉर्ज A.R. Rajaraja Varma https://books.google.com/books?id=fOIvAAAAIAAJ मैकर्स ऑफ़ इंडियन लिटरेचर 1979 साहित्य अकादमी नई दिल्ली 8170754 13
जीवन के बाद के वर्षों में, राजा राजा वर्म्मा भारत की पहली कार दुर्घटना के जीवित बचे व्यक्तियों में से एक बने। 20 सितंबर 1914 को राजा राजा वर्म्मा अपने मामा केरल वर्म्मा वालिया कोयिल थम्पुरन के साथ कार से यात्रा कर रहे थे, तभी कायमकुलम के निकट एक आवारा कुत्ता वाहन के सामने आ गया। चालक ने नियंत्रण खो दिया और कार पलट गई। केरल वर्म्मा को छाती में गहरी चोट लगी और दो दिन बाद 22 सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई। वे भारत की किसी भी कार दुर्घटना के पहले मृतक बने, जबकि राजा राजा वर्म्मा मामूली चोटों के साथ बच गए।
एआर राजराजवर्म्मा का निधन सन् 1918 में हुआ।
कृतियाँ
वर्म्मा ने संस्कृत और मलयालम में व्यापक लेखन किया। उन्हें मलयालम व्याकरण में उनके योगदान के लिए केरल का पाणिनि कहा जाता है।Modern Indian Literature, an Anthology: Plays and prose George K. M. 1994 साहित्य अकादमी 978-81-7201-783-5 394 वर्म्मा मलयालम साहित्य के स्वर्णयुग में केरल में हुए महान साहित्यिक पुनर्जागरण के प्रेरक तत्व थे। उल्लूर ने एआर राजराजवर्म्मा के बारे में कहा— "जब अन्य लोग मलयालम साहित्य की हवेली की दीवारों को अपनी चित्रकारी से सजा रहे थे, तब एआर ने उसकी नींव और गुंबद पर काम किया और उसे केरल की जनता के लिए दीर्घकालीन और प्रभावशाली संरचना बना दिया। उनकी कीर्ति इसी स्थापत्य उपलब्धि पर आधारित है और सदैव बनी रहेगी।"http://www.cscsarchive.org:8081/MediaArchive/Library.nsf/(docid)/35348160F23C204265257139002DA468?OpenDocument%26StartKey%3DA.%26Count%3D100 A. R. Rajaraja Varma 2010-08-27 dead https://web.archive.org/web/20110716110732/http://www.cscsarchive.org:8081/MediaArchive/Library.nsf/%28docid%29/35348160F23C204265257139002DA468?OpenDocument&StartKey=A.&Count=100 2011-07-16
प्रमुख कृतियाँ
व्याकरण और आलंकारिक विषयों पर
उनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं केरल पाणिनीयम्, भाषाभूषणम्, वृत्तमंजरी और साहित्य साह्यम्। अंतिम कृति ने मलयालम में अंग्रेज़ी शैली के विरामचिह्नों का परिचय कराया।Western Influence on Malayalam Language and Literature George K. M. 1972 साहित्य अकादमी 978-81-260-0413-3 22
कविताएँ
भंगविलापम्
मलयविलासम्
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अनुवाद
भाषा मेघदूतम्
भाषा कुमारसंभवम्
मलयाल शकुंतलम्
मालविकाग्निमित्रम्
चारुदत्तम्
सन्दर्भ
A. R. Raja Raja Varma
अतिरिक्त पठन
के एम जॉर्ज A.R. Rajaraja Varma https://sahitya-akademi.gov.in/publications/pdf/a-r-rajaraja-varma_english.pdf 1979 साहित्य अकादमी नई दिल्ली
P. Ananthan Pillai Kerala Panini 1934 K.R.G.Menon & Brothers Trivandrum ml
जोसेफ मुंडस्सेरी Rajarajante Mattoli 1961 मंगलोदयम त्रिशुर ml
श्रेणी:1863 में जन्मे लोग
श्रेणी:संस्कृत वैयाकरण
श्रेणी:१९१८ में निधन