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राफेल
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right|thumb|150px|रफ़ायल का चित्र
रफ़ायल (Raffaello Sanzio da Urbino या Raphael, 1483 – 1520) परम पुनरुत्थान काल के इटली के महान चित्रकार एवं वास्तुशिल्पी थे। लियोनार्डो दा विन्ची, माइकल एंजेलो और रफ़ायल अपने युग के महान कलाकार हैं।
रफ़ायल को शताब्दियों तक समूह संयोजन का आचार्य माना जाता रहा है। व्यक्तियों के समूह, समूहों का सम्पूर्ण चित्र में अनुपात, चित्र की ऊँचाई और गहराई का अनुपात, और व्यक्तियों की विभिन्न मुद्राएँ - इन सब में उन्होंने कमाल कर दिखाया है। रफ़ायल की सर्वाधिक ख्याति उनके मैडोन्ना चित्रों से है। रफ़ायल की कला से ही बरॉक शैली का विकास हुआ।
माइकेल एंजेलो की अपेक्षा रफ़ायल का काम शान्त, मधुर और नारीसुलभ मोहिनी से भरपूर है। रफ़ायल की नारी और बाल चित्रण में विशेष अभिरुचि थी।
परिचय
रफ़ायल का जन्म इटली के उर्बीनो (Urbino) में हुआ था। उनके पिता जियोवान्नी सान्ती एक चित्रकार थे। 1500 में रफ़ायल पेरुजिहनो के यहाँ कार्य सीखने लगे। 'सैनिक का स्वप्न' नामक चित्र की रचना उन्होंने इसी समय की, जब वह मात्र 17 वर्ष के थे। 1500-1510 का युग रफ़ायल के लिये एक महान चित्रकार के रूप में उदय का युग था।
लियोनार्डो तथा माइकेल एंजिलो का प्रभाव
लियोनार्डो की वर्जिन (कुमारी), शिशु तथा सन्त के चित्रों से रफ़ायल ने एक नवीन प्रकार के मैडोन्ना चित्रों का विकास किया तथा मोनालिसा के आधार पर व्यक्ति चित्रों की एक नयी पद्धति आरम्भ की। जिसका उदाहरण मेडालेन्ना डोनी का व्यक्ति चित्र है। विन्ची के छाया प्रकाश के सिद्धान्तों का प्रभाव रफ़ायल की पृष्ठभूमियों में इसी समय से मिलना आरम्भ हुआ। माइकेल एंजिलो के प्रभाव से उनकी आकृतियों की रेखाएँ शक्तिशाली और संयमपूर्ण हो गयी।
चित्रांकन कार्य
right|thumb|200px|'एथेंस का विद्यालय' नामक चित्र
right|thumb|200px|'वर्जिन का विवाह' नामक चित्र
पाठ=|अंगूठाकार|256x256पिक्सेल|'फ़ोर्नारिना': रफ़ायल की प्रेमिका
1508 में वे रोम गये तथा पोप जूलियस द्वितीय के द्वारा वैटिकन में चित्रांकन के लिये नियुक्त किया गया। शीघ्र ही वे वहाँ का प्रधान चित्रकार हो गये। यहाँ रफ़ायल ने 'स्कूल ऑफ ऐथेन्स' नामक प्रसिद्ध कृति बनायी। यह चरम पुनरुत्थान काल की उत्तम कृति मानी जाती है। इसमें प्लैटो तथा अरस्तू को बात करते हुए बाहर आते दिखाया है। प्लेटो की हस्तमुद्रा ऊपर की ओर संकेत कर रही है। इसके वस्त्रों का रंग लाल और उसकी सलवटें उर्ध्वलय में हैं। अरस्तु की हस्त मुद्राएँ एवं नीले वस्त्र सभी क्षैतिज कर्णवत हैं जो इसी संसार को महत्वपूर्ण मानने का संकेत कर रहे हैं।
1514 में रफ़ायल सेण्ट पीटर के गिरजाघर के प्रमुख शिल्पी बन गये। रोम के फ़र्नेसिया नामक स्थान पर उन्होंने जो भित्तिचित्र अंकित किये वह उत्कृष्त श्रेणी के हैं। वह टेपेस्ट्री डिज़ाइन का भी आविष्कार कर रहे थे जिससे अंकित पर्दे सिस्टीन चैपल में टाँगना की योजना थी। इसी समय वे ओल्ड टेस्टामेण्ट के आधार पर भी चित्र बना रहे थे। 1515 में निर्मित उनका एक चित्र 'सिस्टाइन मैडोन्ना' है जो उन्होेंने अकेले ही चित्रित की है। इस चित्र में मैडोन्ना पृथ्वी की मानुषी न रहकर स्वर्ग की देवी हो गयी है और उसे बादलों में तैरते हुए चित्रित किया गया है।
रफ़ायल की अन्तिम श्रेष्ठ कृति 'ईसा का दिव्य स्वरुप धारण करना' है जो उन्होेंने 1517 में आरम्भ की तथा 1520 में अपनी मृत्यु तक पूर्ण नहीं कर सके। इसे रफ़ायल के प्रिय शिष्य ज्यूलियो रोमानो ने पूर्ण किया। 37 वर्ष की आयु में ही रफ़ायल की मृत्यु हो गयी। किसी भी चित्रकार ने इससे पूर्व इतनी सामाजिक पृतिष्ठा प्राप्त नहीं की थी।
कुछ प्रमुख चित्र
रफ़ायल द्वारा निर्मित कुछ अन्य बेहतरीन कृतियाँ निम्नलिखित हैं।
गुईडीबाल्डो डि मोंटेफेल्ट्रो का चित्र
एलिज़ाबेथ गोन्ज़ागा का चित्र
वर्ज़िन का विवाह (चित्रित)
एथेंस का विद्दालय (चित्रित)
सिस्टाइन मैडोन्ना
ला वेली जॉर डिनर
रफ़ायल की वास्तुकला
रफ़ायल ने चित्रकला के अलावा वास्तुकला के क्षेत्र में भी काम किया और नाम कमाया। उन्होंने रोमन वास्तुशैली को नया जीवन देने की कोशिश की। रोम का सेंट पीटर गिरिजाघर पुनरुत्थान शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।मध्यकालीन यूरोप https://web.archive.org/web/20150417020903/https://books.google.co.in/books?id=6iRAekANvqoC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false 17 अप्रैल 2015 (गूगल पुस्तक)
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
राफेल की कला साधना
पश्चिमी चित्रकला (जागरण)
श्रेणी:इटली के चित्रकार
श्रेणी:कलाकार