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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की hi 200px|center hi 1847 सार्वजनिक अभियांत्रिकी विद्यालय अशोक मिश्र अजीत कु. चतुर्वेदी छात्र महासचिव ४०० (201011) 1,000 (201011) 8,036 (201415) 4472 2093 1471 रुड़की उत्तरखाण्ड भारत शहरी, ३६५ एकड़ रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज (1847–1853) थॉमसन कॉलेज ऑफ़ सिविल इंजीनियरिंग (1853–1948) रुड़की विश्वविद्यालय (UOR) (1948–2001) अंग्रेज़ी, हिन्दी www.iitr.ac.in 29 51 52 N 77 53 47 E type:edu inline,title अपने रूपांतरण के बाद से भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान रूडकी ने भारत को जनशक्ति तथा ज्ञान उपलब्ध कराने तथा अनुसंधान कार्य करने मे प्रमुख भूमिका अदा की है। यह संस्थान विश्व के सर्वोत्तम प्रोद्यौगिकी संस्थानो मे अपना स्थान रखता है। इसने प्रोद्यौगिकी विकास के सभी क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है। विज्ञान, प्रोद्यौगिकी व इंजीनियरिंग शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्र मे इसे धारा निर्धारक (ट्रैंड सेटर) भी माना जाता है। अक्टुबर 1996 में यह संस्थान अपने अस्तित्व के 150 वर्ष पुर्ण कर चुका है। 21 सितम्बर 2001 को भारत सरकार ने एक अध्यादेश जारी करके इस संस्थान को देश का सातवां भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान घोषित किया। आई. आई. टी. रूडकी को रष्ट्र का एक महत्वपूर्ण बनाने के लिए यह अध्यादेश अब संसद के एक अधिनियम मे परिवर्तित हो चुका है। वस्तुकला एवं इंजीनियरिंग के 10 विषयों में स्नातक पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे है ; स्नातकोत्तर, प्रयुक्त विज्ञान व वस्तुकला तथा नियोजन विष्यों के 55 पाठ्यक्रमो की सुविधा उपलब्ध है। संस्थान के सभी विभागों व अनुसंधान केन्द्रों में शोधकार्य की भी सुविधाएं है। संस्थान में समस्त भारत के विभिन्न केन्द्रों पर आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जे.ई.ई.) के माध्यम से बी टेक. व बी. आर्क. पाठ्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इतिहास व धरोहर सन 1847 में ब्रिटिश सामराज्य के प्रथम इंजीनियरिंग कॉलेजे के रूप में रूड़की कॉलेज की स्थापना हुई। 1854 में थॉमसन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के रूप में इसका पुनः नामकरण किया गया। इस संस्थान की कार्यकुशलता व क्षमता का सम्मान करते हुए तथा स्वतंत्रता के बाद के भारत की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) के 1948 अधिनियम संख्या प द्वारा इसे विश्वविद्यालय स्तर प्रदान किया गया। नवंबर 1949 में पूर्ववर्त्ती कॉलेजे को स्वतंत्र भारत के प्रथम इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के रूप में उन्नत करते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसे चार्ट्रर प्रदान किया। अपनी स्थापना के बाद से रूड़की विश्वविद्यालय ने देश को प्रौद्योगिकी जनशक्ति तथा ज्ञान उपलब्ध कराने एवं अनुसंधान कार्य करने में प्रमुख भुमिका अदा की है। यह विश्वविद्यालय संसार के सर्वोत्तम् प्रौद्योगिकी संसथानों मे गिना जाता रहा है तथा इसने प्रौद्योगिकी विकास के सभी क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी व इंजीनियरिंग शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में इसे धारा निर्धारक (ट्रैंड सेटर) भी माना जाता रहा है। अक्टुबर 1996 में विश्वविद्यालय ने अपने अस्तित्व के 150 वर्ष मे प्रवेश किया। 21 सितम्बर 2001 को संसद में, इस विश्वविद्यालय को भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान रूडकी के रूप मे परिवर्तित करने का एक बिल पारित करके, इसे राष्ट्र का एक महत्वपूर्ण संस्थान घोषित कर दिया गया। इस तरह से इस संस्थान के इतिहास मे पहले से ही आभायुक्त इसके राजमुकुट में एक और रत्न जड़ दिया गया। प्रवेश चाहे संसथान में प्रेवेश लेने का निर्णय करने अथवा अधिक सूचना प्राप्त करने या आई.आई.टी. रूड़की में शामिल होने हेतु अपने आपको मानसिक तौर पर तैयार करने के लिये आप हमसे प्रथम बार सम्पर्क कर रहें हों, हमने प्रवेश के संबंध में वह सभी सूचनाऍ लाने का भरसक प्रयास किया है, जो कुछ भी आप जानना चाहते हैं। हमें आशा है कि ये पृष्ठ प्रवेश प्रक्रिया के बारे में तथा कैसे आप कक्षा में व कक्षा के बाहर भी अच्छी से अच्छी तैयारी कर सकते हैं इस संबंध में आपके कुछ प्रश्नो का उत्तर देने में आपकी मदद करेंगें। यदि आप आई.आई.टी. रूड़्की में कैसी जिंदगी है, इस बारे में, या प्रवेश प्रक्रिया के किसी भी भाग के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं तो हम आपको अपने कार्यालय से सम्पर्क करने के लिए आमंत्रित करते हैं। अभिस्नातक प्रवेश अभिस्नातक पाठ्य्क्रमों में छत्रों को प्रवेश, समस्त भारत के विभिन्न केन्द्रों पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वली एक अखिल भारतीय प्रतियोगीता परीक्षा जिसे संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जे.ई.ई) कहते हैं, के माध्यम से दिया जाता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी संस्थान की जे.ई.ई वेबसाइट पर तथा जे.ई.ई. कार्यालय से प्राप्त की जा स्नातक पाठ्यक्रम आई.आई.टी. रूड़की के स्नातक पाठ्यक्रमों मे प्रवेश लेने वाले छत्रों को प्रवेश से पुर्व एक चयन प्रक्रिआ से गुजरना होता है। यह प्रवेश प्रक्रिया रष्ट्रीय (अखिल भारतीय) स्तर पर आयोजित की जाती है या संस्थान स्तर पर यह निर्भर करता है। उल्लेखनीय पूर्व छात्र पॉल पोथन - उद्योगपति नवीन जैन - उद्यमी दिनेश पालीवाल - व्यवसायिक कार्यकारी गुरु दास अग्रवाल - पर्यावरणविद् प्रदीप बैजल - आईएएस श्री निवास - भूभौतिकीविद् अजीत गुप्ता - उद्यमी अमित सिंघल - पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष, गूगल उत्पल बोरपुजारी - फिल्म आलोचक सुलखान सिंह - महानिदेशक, उत्तर प्रदेश पुलिस गंगा राम - सिविल अभियन्ता हर्ष गुप्ता - भूकंपविज्ञानी विभाग मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग, रुड़की रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, रुड़की वास्तुकल एवं नियोजन विभाग, रुड़की जल-विज्ञान विभाग, रुड़की जैव विज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, रुड़की प्रबंध अध्ययन विभाग, रुड़की रसायन विज्ञान विभाग, रुड़की गणित विभाग, रुड़की जनपद अभियांत्रिकी विभाग, रुड़की यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग, रुड़की भू-विज्ञान विभाग, रुड़की भूकम्प अभियांत्रिकी विभाग, रुड़की धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग, रुड़की कागज प्रौद्योगिकी विभाग, रुड़की विद्युत अभियांत्रिकी विभाग, रुड़की भौतिक विज्ञान विभाग, रुड़की इलैक्ट्रानिकी एवं संगणक अभियांत्रिकी विभाग, रुड़की जल संसाधन विकास प्रशिक्षण केन्द्र श्रेणी:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की