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411 समाचार
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प्रभात रंजन सरकार

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प्रभात रंजन सरकार PRSarkar GentlemanPhoto 3.jpg 250px प्रभात रंजन सरकार yes 1921 05 21 जमालपुर, बिहार और उड़ीसा प्रांत, ब्रिटिश राज yes 1990 10 21 1921 05 21 कलकत्ता, पश्चिमी बंगाल, भारत भारतीय विद्यासागर कॉलेज कलकत्ता विश्वविद्यालय संस्थापक आनंदमार्ग प्राउट दार्शनिक, लेखक, कवि, संगीतकार, भाषाविद, सामाजिक अग्रदूत और आध्यात्मिक गुरु प्रभात रंजन सरकार (21 मई 1921 – 21 अक्टूबर 1990), अध्यात्मिक नाम श्री श्री आनन्दमूर्ति, एक आध्यात्मिक गुरु, आधुनिक लेखक, दार्शनिक,https://www.bhaskar.com/jharkhand/jamshedpur/news/remembering-the-great-philosopher-prabhat-ranjan-sarkar-100004-5328400.html महान दार्शनिक प्रभात रंजन सरकार काे किया याद 2019-08-26 Dainik Bhaskar hi 2020-08-12 सामाजिक विचारक, योगी, लेखक, पंथ-नेता, कवि, संगीतकार और भाषाविद थे। उनके शिष्य उन्हें 'बाबा' ("पिता") भी कहते हैं। 1955 में सरकार ने एक आध्यात्मिक और सामाजिक संगठन आनंद मार्ग (आनंद का मार्ग) की स्थापना की, जो ध्यान और योग में शिक्षा प्रदान करता है। भारत के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने सरकार के बारे में कहा है: "प्रभात रंजन सरकार भारत के महान आधुनिक दार्शनिकों में से एक थे।"Inayatullah, Sohail. (2002) Understanding Sarkar: The Indian Episteme, Macrohistory and Transformative Knowledge https://web.archive.org/web/20190831160439/https://books.google.com/books/about/Understanding_Sarkar.html%3Fid%3DB3rXAAAAMAAJ%26redir_esc%3Dy 31 अगस्त 2019. Leiden: Brill, 9004121935, authors book page https://web.archive.org/web/20171221022518/http://www.metafuture.org/Books/Understanding_Sarkar_Brill.htm 21 दिसंबर 2017. सरकार की साधना पद्धति को वैदिक और तांत्रिक दर्शन का व्यावहारिक संश्लेषण कहा गया है।Ishwaran 1999 9 उन्होंने भौतिकवाद और पूंजीवाद की निंदा की और उन्होंने माना कि ब्रह्मांड की रचना मैक्रोस्कोपिक कोनेशन के परिणामस्वरूप हुई - संपूर्ण ब्रह्मांड 'कॉस्मिक माइंड' के भीतर मौजूद है, जो स्वयं अपनी प्रकृति के बंधन के तहत आने वाली चेतना की पहली अभिव्यक्ति है। सरकार एक उर्वर लेखक थे और उन्होंने व्यापक स्तर पर सृजन किया। उनके द्वारा सृजित सिद्धांत- सामाजिक चक्र का सिद्धांत, प्रगतिशील उपयोग सिद्धांत, माइक्रोविटम सिद्धांत, नव-मानवतावाद का सिद्धांत आदि मानव के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जीवन-वृत्त सरकार का जन्म 21 मई 1921 को (सुबह 6:07 बजे) वैशाख माह की पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) को हुआ था। उनके पिता लक्ष्मी नारायण सरकार, जोकि होम्योपैथी के कुशल चिकित्सक थे, का परिवार पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के बामुनपारा (ब्राह्मणपारा) से ताल्लुक रखता था। सरकार अपनी बाल्यावस्था में असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे- कम उम्र में स्वयं द्वारा ध्यान का अभ्यास करना और विभिन्न भाषाओं और विभिन्न विषयों के महान ज्ञान को प्रदर्शित करना उनकी विशिष्टता रही। उन्हें ज्ञान किसी स्कूल से, पुस्तकें पढ़ने से या अन्य किसी माध्यम से प्राप्त नहीं हुआ था। उनके भीतर ज्ञान स्वयं प्रकट हुआ था। 1939 में कोलकाता विश्वविद्यालय, कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए सरकार ने कोलकाता के लिए जमालपुर छोड़ दिया।Joshi 2009 91 अपने पिता की मृत्यु के बाद अपने परिवार की देखभाल करने के लिए सरकार को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और 1944 से 1950 तक सरकार ने जमालपुर, बिहार में भारतीय रेलवे मुख्यालय में एक एकाउंटेंट के रूप में काम किया। यहीं पर उन्होंने अपने कुछ चुनिंदा साथियों को प्राचीन तंत्र साधना की तकनीक सिखाई और धीरे-धीरे उनके द्वारा सिखाई जाने वाली आध्यात्मिक पद्धतियों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों उनसे जुड़ते चले गए। आनन्द मार्ग आनन्द मार्ग प्रभात रंजन सरकार का 'आनन्द मार्ग' दुनिया के 180 देशों में फैला हुआ है।https://www.barnesandnoble.com/w/sarkar-you-can-not-be-forgotten-the-life-and-work-of-prabhat-ranjan-sarkar-ruchi-pandey/1124432704 Sarkar, you can not be forgotten. The life and work of Prabhat Ranjan SarkareBook Noble Barnes & Barnes & Noble en 2023-06-08 प्रकाशित कृतियाँ सरकार ने लगभग 350 पुस्तकें लिखी। उनकी किताबें दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवादित हो चुकी है। योगदान प्रभात रञ्जन सरकार ने विज्ञान, साम्यवाद और पूँजीवाद के समन्वय के विकल्प पर बहुत विचार किया है। वे खुद प्रगतिशिल थे, लेकिन आनंदमार्गियों के अनुसार पश्चिम बंगाल में उनके आंदोलन को कुचलने के लिए वामपंथियों ने आनंदमार्गियों को कई तरह से प्रताड़ित किया और प्रताड़ना का यह सिलसिला लम्बे समय तक जारी रहा। तंत्र और योग पर आधारित इस संगठन का उद्देश्य- आत्मोद्धार, मानवता की सेवा और जीव मात्र की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। आनंदमार्ग के दुनिया भर में चिंतन केंद्र हैं जहाँ तंत्र, योग और ध्यान सिखाया जाता है। इस एकेश्वरवादी संगठन का मूल मंत्र है 'बाबा नाम केवलम' है। परमाणु विज्ञान पर उनके चिंतन के कारण सरकार को 'माइक्रोवाइटा मनीषी' भी कहा जाता है। सन्दर्भ बाह्य कड़ियाँ Anandamarga.org Ananda Marga.net Microvita.info श्रेणी:1921 में जन्मे लोग