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411 समाचार
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स्वरूपानंद सरस्वती

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शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाराज (जन्म: 2 सितम्बर 1924 – ब्रह्मलीन: 11 सितम्बर 2022) एक हिन्दू अध्यात्मिक गुरु, शंकराचार्य और स्वतन्त्रता सेनानी थे।स्वरूपानंद सरस्वती: सारांश http://jagadgurushankaracharya.org/ 4 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20120829194510/http://jagadgurushankaracharya.org/ 29 अगस्त 2012 dead स्वामी श्री द्वारका शारदा पीठ एवं ज्योतिष पीठ (ज्योर्तिमठ) जिसे जोशीमठ भी कहते है उसके जगद्गुरू शंकराचार्य थे।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योर्तिमठ (ज्योतिषपीठ)और स्वामी सदानंद सरस्वती द्वारका शारदा पीठ में उनके उत्तराधिकारी हैं। शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती A delegation led by Swami Swaroopanand Saraswati Ji comprising of environmentalists and others meeting the Prime Minister, Dr. Manmohan Singh, under the auspices of the Ganga Seva Abhiyan, in New Delhi on October 16, 2008.jpg हिन्दू पोथीराम उपाध्याय 1924 9 2 y ज़िला सिवनी, मध्य प्रदेश, भारत 2022 9 11 1924 9 2 y नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश, भारत ब्रह्मानन्द सरस्वती और स्वामी करपात्री http://www.shrisharadapeetham.org/ भारतीय } {{infobox officeholder|embed=yes शंकराचार्य द्वारका शारदा पीठम,ज्योर्तिमठ(ज्योतिषपीठ) 1982 2022 अभिनव सच्चिदानंद तीर्थ,कृष्ण बोध आश्रम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योर्तिमठ (ज्योतिषपीठ)और स्वामी सदानंद सरस्वती (द्वारका शारदा मठ) जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती , स्वामी सदानंद सरस्वती Shankaracharya of Dwarka Sharda math and Jyotir math(jyotishpeeth) जीवन परिचय स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म 2 सितम्बर 1924 को मध्य प्रदेश राज्य के सिवनी के दिघोरी गांव में ब्राह्मण परिवार में पिता श्री धनपति उपाध्याय और मां श्रीमती गिरिजा देवी के यहां हुआ। माता-पिता ने इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा। नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ कर धर्म यात्रायें प्रारम्भ कर दी थीं। इस दौरान वह काशी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन श्री स्वामी करपात्री महाराज वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली। 1950 में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती से दण्ड-सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती नाम से जाने जाने लगे। 1950 में वे दंडी संन्यासी बनाये। योगदान और कार्य शंकराचार्य का पद हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है, हिंदुओं का मार्गदर्शन एवं भगवत् प्राप्ति के साधन आदि विषयों में हिंदुओं को आदेश देने के विशेष अधिकार शंकराचार्यों को प्राप्त होते हैं। सभी हिंदूओं को शंकराचार्यों के आदेशों का पालन करना चाहिये। वर्तमान युग में अंग्रेजों की कूटनीति के कारण धर्म का क्षय, जो कि हमारी शिक्षा पद्धति के दूषित होने एवं गुरुकुल परंपरा के नष्ट होने से हुआ है, हिंदूओं को संगठित कर पुनः धर्मोत्थान के लिये चारों मठों के शंकराचार्य एवं सभी वैष्णवाचार्य महाभाग सक्रिय हैं। हिंदुओं को संगठित करने की भावना से आदिगुरु भगवान शंकराचार्य ने 1300 वर्ष पूर्व भारत के चारों दिशाओं में चार धार्मिक राजधानियां (गोवर्धन मठ, श्रृंगेरी मठ, द्वारका मठ एवं ज्योतिर्मठ) मठ स्थापित किये। जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी 1982 से 2022 तक द्वारकापीठ एवं 1973 से 2022 तक ज्योतिष पीठ के अद्वितीय शंकराचार्य थे।Thumbnail sketch biography of Swami Swaroopanand Saraswati http://www.paulmason.info/gurudev/sources/text/SwamiSwaroopanand.htm Paul Mason n.d. 26 January 2015जनवरी 2026 InternetArchiveBot स्वतंत्रता संग्राम मे योगदान जब स्वामी जी ने छोड़ दिया, यह वह समय था, जब भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी। जब 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा, तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह "क्रांतिकारी साधु" के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसी दौरान उन्होंने वाराणसी की जेल में नौ और मध्यप्रदेश की जेल में छह महीने की सजा भी काटी। वे करपात्री महाराज की राजनीतिक दल राम राज्य परिषद के अध्यक्ष भी थे। विचार और जागरुकता स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती जी, सांई बाबा (या चांद मिया) की पूजा करने के विरोध में रहे, क्योंकि कुछ हिंदू दिशाहीन हो कर अज्ञानवश असत् की पूजा करने में लगे हुए हैं। जिससे हिंदुत्व में विकृति पैदा हो रही है। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के अनुसार इस्कॉन भारत में आकर कृष्ण भक्ति की आड़ में धर्म परिवर्तन कर रहा है, ये अंग्रेजों की कूटनीति है कि हिंदुओं का ज्ञान ले कर हिंदुओं को ही दीक्षा दे कर ईसाई बना रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर जबरदस्ती हिंदू धर्मांतरण का भी आरोप लगाया। उन्होंने जम्मू और कश्मीर में हिंदुओं की घटती आबादी और उनकी हत्या के बारे में भी हिंदुओं को जागरूक किया। श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का 95 वां जन्मदिवस वृंदावन में बर्ष 2018 में मनाया गया एवं यहीं उनका 72वां चातुर्मास समपन्न हुआ।http://jagadgurushankaracharya.org/ usurped https://web.archive.org/web/20150512054457/http://jagadgurushankaracharya.org/ 12 May 2015 Shri Jagat Guru Swaroopanand jagadgurushankaracharya.org इन्हें भी देखें मठ शंकराचार्य वेदान्त दर्शन अद्वैतवाद आदि शंकराचार्य हिन्दू गुरु व सन्त हिन्दू धर्म का इतिहास सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ http://jagadgurushankaracharya.org/ कौन है स्वरूपानंद सरस्वती? शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:हिन्दू गुरु श्रेणी:शंकराचार्य श्रेणी:1924 में जन्मे लोग श्रेणी:आध्यात्मिक गुरु श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी