411 REFERENCE · Wikipedia
पंथी गीत
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
पंथी गीतछत्तीसगढ़ के लोकगीत और लोकनृत्य http://www.ignca.nic.in/coilnet/chgr0042.htm ignca.nic.in 3 अक्टूबर 2015 https://web.archive.org/web/20160429100143/http://www.ignca.nic.in/coilnet/chgr0042.htm 29 अप्रैल 2016 dead और इस गीत के साथ किया जाने वाला पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ के सतनाम धर्म के लोगो के द्वारा ईश्वर (सतनाम पिता) की स्तुति में और संत गुरूघासीदास बाबा के जीवन चरित्र एवं उनके उपदेशों का वर्णन करने हेतु किया जाता है।पंजाब में जो स्थान गुरु नानक देव जी का है छत्तीसगढ़ में वही स्थान गुरु घासीदास जी का है इन्होंने महान तप करके सत्य को पाया और उसे ही मनुष्य एवं जीवन का आधार माना जीवन की मूल भूत इकाइयों को जाना और इसे जन मानस तक पहुचाया। सत्य की खोज करने के कारण ही धर्म का नाम सतनाम अर्थात सत्यनाम पड़ा । पंथी नृत्य सतनाम के अनुनायियों अर्थात सतनामियों के द्वारा किया जाने वाला नृत्य है जिसमे नृत्य करते हुए गुरु की महिमा गुरु के उपदेशों का बखान गाकर किया जाता है गुरु घासीदास दास द्वारा दिये उपदेश इस नृत्य के माध्यम से लोगो तक पहुचाये जाते है। ज्ञात हो कि गुरुघासीदास ने मूर्ति पूजा का खंडन किया इसलिए सतनाम में मूर्तिपूजा निषेध है। छत्तीसगढ़ वृहद सन्दर्भ उपकार प्रकाशन 408 https://books.google.co.in/books?id=c5x6BwAAQBAJ&lpg=PR15&ots=GE1i-mdlnQ&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%A5%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF&pg=PA408#v=onepage&q=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%A5%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF&f=false 3 अक्टूबर 2015 https://web.archive.org/web/20151004130124/https://books.google.co.in/books?id=c5x6BwAAQBAJ&lpg=PR15&ots=GE1i-mdlnQ&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%A5%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF&pg=PA408#v=onepage&q=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%A5%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF&f=false 4 अक्तूबर 2015 live यह निर्गुण भक्ति धारा से प्रेरित गीत और नृत्य हैं जिसमे गुरु घासीदास के द्वारा दिए गए उपदेश को गीत और नृत्य के माध्यम से मंच पर प्रस्तुत किया जाता है।नृत्य करने वालो की संख्या निश्चित नही है। इस नृत्य के नर्तक बहुत ज्यादा ऊर्जा से भरपूर होते हैं और तरह तरह की कलाबाजियां भी दिखाते हैं एवम मानव पिरामिड बनाते हैं जिससे दर्शक रोमांचित हो उठते हैं। घासीदास जी के अमर संदेश-पंथी गीत http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/1629/3/0#.Vg-Rteyqqko 3 अक्टूबर 2015 देशबंधु 20 फरवरी 2010 https://web.archive.org/web/20151004182732/http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/1629/3/0#.Vg-Rteyqqko 4 अक्तूबर 2015 live
इसके साथ प्रमुख वाद्य यंत्र के रूप में झांझ मंजीरा और मांदर तथा ढोलक का उपयोग किया जाता है। इसे छत्तीसगढ़ की खास पहचान के रूप में भी देखा जाता है।कृषि मंत्री ने किया सतनामी समाज के समाज सेवियों का सम्मान http://www.dprcg.gov.in/2478-21-9-2013 dprcg.gov.in छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग 3 अक्टूबर 2015 21 सितंबर 2013 https://web.archive.org/web/20151004011348/http://www.dprcg.gov.in/2478-21-9-2013 4 अक्तूबर 2015 dead
इस नृत्य के नर्तकों में महान स्वर्गीय देवदास बंजारे का नाम उल्लेखनीय है।देवदास बंजारे को पुण्यतिथि पर किया याद http://www.bhaskar.com/news/CHH-RAI-HMU-MAT-latest-raipur-news-030523-2523433-NOR.html 3 अक्टूबर 2015 दैनिक भास्कर 27 अगस्त 2015 https://web.archive.org/web/20151004093010/http://www.bhaskar.com/news/CHH-RAI-HMU-MAT-latest-raipur-news-030523-2523433-NOR.html 4 अक्तूबर 2015 live
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
यूट्यूब पर पंथी मास्टर देवदास बंजारे पर रमण सिंह का वक्तव्य