411 REFERENCE · Wikipedia
कर्नाटक युद्ध
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
कर्नाटिक युद्ध 1744–1763 वर्तमान तमिल नाडु और आन्ध्र प्रदेश के कुछ भाग, भारत इंग्लैंड की जीत मुग़ल साम्राज्यhttp://books.google.com.pk/books?id=Y-08AAAAIAAJ The Cambridge History of the British Empire 16 December 2014 1929 126 https://web.archive.org/web/20141129145438/http://books.google.com.pk/books?id=Y-08AAAAIAAJ 29 नवंबर 2014 live
23px|border हैदराबाद के निज़ाम
Flag of the principality of Carnatic.gif कर्नाटिक के नवाब
बंगाल के नवाब फ्रांस की राजशाही
Kingdom of France फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी ग्रेट ब्रिटेन राजशाही
23px ईस्ट इण्डिया कम्पनी Alamgir IIAnwaruddin नासिर जंग मुजफ्फर जंग चन्दा साहिब Raza SahibWala-Jah Murtaza AliAbdul WahabHyder AliDalwai Nanjaraja Salabat Jung Dupleix De Bussy टॉमस आर्थर डी लैली d'Auteil Law De la Touche रॉबर्ट क्लाइव स्ट्रिंगर लॉरेंस
कर्नाटिक युद्ध (Karnatic Wars) भारत में इंग्लैंड औ्र फ्रांस के बीच १८वीं शताब्दी के मध्य में अपने बर्चस्व स्थापना की कोशिशों को लेकर हुआ युद्ध है। ब्रिटेन औ्र फ्रांस ने चार बार युद्ध किया। युद्ध का केंद्र कर्नाटिक (वर्तमान तमिल नाडु और आन्ध्र प्रदेश के कुछ भाग) के भूभाग रहे इसलिए इसे कर्नाटिक का युद्ध कहते हैं।
पृष्ठभूमि
thumb|कर्नाटक का क्षेत्र
१७०७ ई। में औरंगजे़ब के निधन के बाद मुगलों का भारत के विभिन्न भागों से नियंत्रण कमज़ोर होता गया। निजाम-उल-मुल्क ने ने स्वतंत्र हैदराबाद रियासत की स्थापना की। उसकी मृत्यु के बाद उसके बेटे नसीर जंग, और उसके पोते मुजफ्फर जंग में उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष शुरु हुआ। इसने ब्रिटेनी और फ्रांसीसी कंपनियों को भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने का सुनहरा मौका दे दिया। निज़ाम-उल-मुल्क की ही तरह नबाब दोस्त अली खान ने कर्नाटक को मुग़लों और हैदराबाद से स्वतंत्र कर लिया था। दोस्त अली के निधन के बाद उसके दामाद चंदा साहिब और मुहम्मद अली में उत्तराधिकार का विवाद शुरु हुआ। फ्रांस और इंग्लैंड ने यहाँ भी हस्तक्षेप किया। फ्रांस ने चंदा साहिब का और इंग्लैंड ने मुहम्मद अली का समर्थन किया। Naravane M.S. Battles of the Honorourable East India Company A.P.H. Publishing Corporation 2014 9788131300343 150–159
पहला कर्नाटिक युद्ध (1746-1748)
उत्तराधिकार के इस संघर्ष में पांडिचेरी के गवर्नर डूप्ले के नेतृत्व में फ्रांसीसियों की जीत हुई। और अपने दावेदारों को गद्दी पर बिठाने के बदले में उन्हें उत्तरी सरकार का क्षेत्र प्राप्त हुआ जिसे फ्रांसीसी अफसर बुस्सी ने सात सालों तक नियंत्रित किया। यह एक्स-ला-चैपल संधि के तहत समाप्त हुआ।
दूसरा कर्नाटिक युद्ध (1749 - 1754)
लेकिन फ्रांसीसियों की यह जीत बहुत कम समय की थी क्योकि 1751 ई. में रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश शक्ति ने युद्ध की परिस्थितियाँ बदल दी थी। रोबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश शक्ति ने एक साल बाद ही उत्तराधिकार हेतु फ्रांसीसी समर्थित दावेदारों को पराजित कर दिया।अंततः फ्रांसीसियों को ब्रिटिशों के साथ पान्डिचेरी की संधि करनी पड़ी।
तीसरा कर्नाटिक युद्ध ( 1756 - 1763 )
सातवर्षीय युद्ध (1756-1763 ई.।) अर्थात तृतीय कर्नाटक युद्ध में दोनों यूरोपीय शक्तियों की शत्रुता फिर से सामने आ गयी। इस युद्ध की शुरुआत फ्रांसीसी सेनापति काउंट दे लाली द्वारा मद्रास पर आक्रमण के साथ हुई। लाली को ब्रिटिश सेनापति सर आयरकूट द्वारा हरा दिया गया। 1761 ई. में ब्रिटिशों ने पोंडिचेरी पर कब्ज़ा कर लिया और लाली को जिंजी और कराइकल के समर्पण हेतु बाध्य कर दिया। अतः फ्रांसीसी बांडीवाश में लडे गये तीसरे कर्नाटिक युद्ध (1760 ई.) में हार गए और बाद में यूरोप में उन्हें ब्रिटेन के साथ पेरिस की संधि करनी पड़ी।[कर्नाटक युद्ध- माइ सिविल पुस्तक कॉम http://www.mycivilpustak.com/history/carnatic-wars-1746-1763/ https://web.archive.org/web/20160923235314/http://www.mycivilpustak.com/history/carnatic-wars-1746-1763/ 23 सितंबर 2016 आंग्ल-फ्रांसीसी युद्ध][]
इन्हें भी देखें
आरकाट राज्य
सन्दर्भ
श्रेणी:आधुनिक भारत का इतिहास
श्रेणी:तमिलनाडु का इतिहास
श्रेणी:तेलंगाना का इतिहास
श्रेणी:भारत संबंधित युद्ध
श्रेणी:फ्रांस संबंधित युद्ध
श्रेणी:औपनिवेशिक भारत
श्रेणी:ब्रिटेन संबंधित युद्ध