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411 समाचार
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जॉन मियरशाइमर

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John Mearsheimer.jpg जॉन जोसेफ़ मियरशाइमर जॉन मियरशाइमर 1947 12 14 ब्रुकलिन, न्यू यॉर्क राज्य, संयुक्त राज्य Neorealism University of Chicago International relations theory, international security, deterrence theoryhttp://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0020.pdf संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20190807111818/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0020.pdf 7 अगस्त 2019 dead https://books.google.com/books/about/Conventional_deterrence.html?id=cV-5AAAAIAAJ Conventional Deterrence – John J. Mearsheimer – Google Books Books.google.com.au 1990-07-17 2014-08-27 https://web.archive.org/web/20190609015212/https://books.google.com/books/about/Conventional_deterrence.html?id=cV-5AAAAIAAJ 9 जून 2019 live Hans Morgenthau, E. H. Carr, Kenneth Waltz Robert D. Kaplan Offensive neorealism United States Military Academy University of Southern California Cornell University जॉन जोसेफ मियरशाइमर (अंग्रेज़ी-John Joseph Mearsheimer / ˈ m ɪər ʃ aɪ m ər / ; जन्म- 14 दिसंबर, 1947) अमेरिका के एक राजनीतिक वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों विद्वान हैं, जो के अंतर्गत आता है यथार्थवादी विचारधारा से सम्बंध रखते हैं। फ़िलहाल वे शिकागो विश्वविद्यालय में आर वेंडेल हैरिसन विशिष्ट सेवा प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। मियरशाइमर ने आक्रामक यथार्थवाद के सिद्धांत का प्रस्ताव रखा। इसके अनुसार जो देश विश्व में महाशक्ति हैं, उनकी यह इच्छा रहती है कि कैसे भी करके अपनी शक्ति का विस्तार करें। अन्य राज्यों के इरादों को लेकर असुरक्षा और अनिश्चितता के चलते दुनिया में आधिपत्य प्राप्त करने की यह इच्छा तर्कसंगत है। इसी के बल पर वे अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों को समझने और समझाने का प्रयास करते हैं। वे उन चुनिंदा अमरीकी विशेषज्ञों में से थे, जिन्होंने शुरुआत से ही भारत के परमाणु हथियार हासिल करने के निर्णय का समर्थन किया। वे 2003 में इराक युद्ध के मुखर विरोधी थे। 1994 में यूक्रेन के अपने परमाणु हथियारों को छोड़ने केफैसले का विरोध करने वाले लगभग इकलौते थे। उन्होंने यह भविष्यवाणी की थी, कि एक निवारक (deterrent, यहाँ तात्पर्य परमाणु हथियार से है) के बिना, यूक्रेन को रूसी आक्रामकता का सामना करना पड़ेगा। यह भविष्यवाणी सच साबित हुई, जब 2014 में रूस ने क्रीमिया (जो कि पहले यूक्रेन का हिस्सा था) पर क़ब्ज़ा जमा लिया।उनके सबसे विवादास्पद विचार मध्य पूर्व में अमेरिकी सरकार की कार्रवाइयों पर रुचि समूहों द्वारा कथित प्रभाव के बारे में हैं जो उन्होंने अपनी किताब द इज़राइल लॉबी एंड यूएस फॉरेन पॉलिसी में लिखा था। अपने सिद्धांत के अनुसार, मियरशाइमर का यह मानना है कि चीन की बढ़ती शक्ति संभवतः इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संघर्ष करवाएगी। उनके विचार इक्कीसवीं सदी में विश्व भर के राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के के छात्रों को पढ़ाया जाता है। प्रारंभिक वर्ष मियरशाइमर न्यूयॉर्क शहर में 14 दिसम्बर, 1947 को पैदा हुए। वेस्ट प्वाइंट से स्नातक करने के बाद, उन्होंने एक अधिकारी के रूप में अमेरिकी वायु सेना में सात साल बिताए। 1974 में वायु सेना में रहते हुए उन्होंने दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (University of Southern California) से अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध में मास्टर डिग्री प्राप्त की। वायु सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने 1981 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।। विचार परम्परागत निवारण (Conventional deterrence) मियरशाइमर अपनी पहली पुस्तक कन्वेंशनल डिटेरेंस (Conventional Deterrence1983) इसमें यह बताते हैं युद्ध शुरू करने के फैसले सैकिस तरह न्य संघर्ष के अनुमानित परिणाम पर निर्भर करते हैं। अन्य शब्दों में कहें तो यह किताब यह समझने का प्रयास करती है कि युद्ध का परिणाम कैसा होगा, इस बारे में निर्णायकर्ताओँ की रणनैतिक सोच कैसी है, इस बात को प्रभावित करती है कि निवारक (deterrence) सफल रहेगा या असफल। मियरशाइमर का मूल तर्क यह है कि जब संभावित हमलावर की यह सोच हो कि हमले की सफल होने संभावना कम और क़ीमत ज़्यादा होगी, तो निवारक के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। किंतु यदि संभावित हमलावर यह सोचता है कि हमला सफल और कम लागत वाला होगा, तो निवारक के असफल होने की संभावना है। अब व्यापक रूप से यह स्वीकार कर लिया गया है कि निवारक का सिद्धांत इसी प्रकार काम करता है। मियरशाइमर का ख़ास तौर पर यह मानना है कि निवारक की सफलता इस बात से निर्धारित होती है कि हमलावर के पास कौन-कौन सी रणनीतियाँ उपलब्ध हैं। वे तीन रणनीतियों का ज़िक्र करते हैं- संघर्षण-युद्ध (war-of-attrition), जिसमें युद्ध के परिणाम और हमलावर के लिए अधिकतम लागत के बारे में काफ़ी अनिश्चितता होती है। सीमित लक्ष्य (limited-aims) की रणनीति, जिसमें कम जोखिम और कम लागत की आवश्यकता होती है। ब्लिट्जक्रेग (blitzkrieg) रणनीति, जो अपेक्षाकृत कम लागत के साथ तेजी के साथ और निर्णायक रूप से दुश्मन को हराने का एक तरीका है। मियरशाइमर के लिए, आधुनिक युद्ध के मैदान में अधिकतम विफलताएं संभावित हमलावरों की इस ग़लत धारणा के कारण होती हैं कि वे सफलतापूर्वक एक ब्लिट्जक्रेग रणनीति को लागू कर सकते हैं, जिसमें टैंक और अन्य यंत्रीकृत बलों को एक गहरी पैठ पर आक्रमण करने और दुश्मन के पीछे खदेड़ने के लिए तेजी से हमला किया जाता है। बाक़ी दो रणनीतियों से निवारक के विफल होने की संभावना कम ही है, क्योंकि संघर्षण-युद्ध रणनीति से लागत ज़्यादा और लाभ सीमित होने के साथ-साथ सफलता की कम संभावना रहती है, और सीमित लक्ष्य रणनीति से संघर्ष के संघर्षण-युद्ध में तब्दील होने की संभावना रहती है। परंतु यदि हमलावर के पास सुसंगत ब्लिट्जक्रेग रणनीति उपलब्ध है, तो उसके हमला करने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि इसके संभावित लाभ युद्ध शुरू करने की लागत और जोखिमों की भरपाई कर देते हैं। परमाणु प्रसार और परमाणु निवारण मियरशाइमर ने द न्यू यॉर्क टाइम्स अख़बार में 1998 और 2000 में लिखे गए सम्पादकीय अभिलेखों (op-eds) में भारत के परमाणु हथियार हासिल करने के निर्णय का समर्थन किया है। इस संदर्भ में उन्होंने यह तर्क दिया कि भारत के पास परमाणु निवारक होने से उसे चीन और पाकिस्तान के खिलाफ संतुलन बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता की गारंटी रखने में मदद मिलेगी है। उन्होंने भारत के प्रति संयुक्त राज्य की प्रसार-विरोधी नीति की भी आलोचना की, जिसे उन्होंने दक्षिण एशिया क्षेत्र में अमेरिकी हितों के लिए अवास्तविक और हानिकारक माना। "India Needs The Bomb" https://web.archive.org/web/20180820194809/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/P0009.pdf 20 अगस्त 2018 , New York Times, March 24, 2000. आक्रामक नवयथार्थवाद मियरशाइमर आक्रामक नवयथार्थवाद (offensive neorealism) के प्रमुख प्रस्तावक हैं। यह एक ऐसा संरचनात्मक सिद्धांत है, जो हंस मॉरगेन्थाऊ के शास्त्रीय यथार्थवाद (classical realism) के विपरीत, अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली की अराजकता के भीतर महान शक्तियों के बीच सुरक्षा प्रतियोगिता पर प्राथमिकता से जोर देता है, और न कि राजनेताओं और राजनयिकों पर (मुख्य रूप से नहीं)। एक अन्य संरचनात्मक यथार्थवादी (structural realist) सिद्धांत- केनेथ वाल्ट्ज के रक्षात्मक नवयथार्थवाद (defensive neorealism) के विपरीत, आक्रामक नवयथार्थवाद का कहना है कि राष्ट्र अपनी वर्तमान शक्ति की मात्रा से संतुष्ट नहीं हैं, किंतु सुरक्षा के लिए आधिपत्य चाहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में अराजकता है, और इस कारण राष्ट्रों को दूसरे राष्ट्रों (का अहित करने) की क़ीमत पर अपनी शक्ति बढ़ाने के मौक़े ढूँढने के लिए काफ़ी बड़ा प्रोत्साहन मिलता है। एक राष्ट्र के लिए अन्य राष्ट्र शक्ति अर्जित करने और आधिपत्य स्थापित करने की उसकी होड़ में उसके प्रतियोगी हैं। मियरशाइमर ने अपनी 2001 की पुस्तक द ट्रेजेडी ऑफ ग्रेट पावर पॉलिटिक्स में इस दृष्टिकोण को अभिव्यक्त किया: वर्तमान और भविष्य के लिए कितनी शक्ति पर्याप्त है- यह निर्धारित करने की कठिनाई को देखते हुए महाशक्तियां यह मानती हैं कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि वर्तमान में आधिपत्य प्राप्त किया जाए, और परिणामवश भविष्य में किसी और महाशक्ति द्वारा चुनौती मिलने की किसी भी संभावना को समाप्त कर दिया जाए। केवल एक गुमराह राष्ट्र ही तत्कालीन अन्तर्राष्ट्रीय प्रणाली में आधिपत्य स्थापित करने के अवसर को गँवाएगा, वह भी केवल इसलिए क्योंकि उसे लगा कि उसके पास पहले से ही बने रहने के लिए पर्याप्त शक्ति है। उन्होंने लोकतांत्रिक शांति सिद्धांत को भी खारिज कर दिया है, जिसके मुताबिक़ लोकतंत्र का पालन करने वाले दो देश कभी एक दूसरे के साथ युद्ध में नहीं जाते हैं। नाइट वॉचमैन नाइट वॉचमैन (पहरेदार) मियरशाइमर की शब्दावली में "ग्लोबल हेजेमन" (विश्वाधिपति) है, जैसा कि उन्होंने अपनी पुस्तक द ट्रेजेडी ऑफ ग्रेट पावर पॉलिटिक्स में बताया है। 1990 में उन्होंने कहा था कि पश्चिमी लोकतांत्रिक देश आपस में इसलिए नहीं लड़ रहे हैं क्योंकि अमेरिका एक पहरेदार के रूप में मौजूद है। खाड़ी युद्ध जनवरी और फरवरी 1991 की शुरुआत में, मियरशाइमर ने शिकागो ट्रिब्यून में दो सम्पादकीय अभिलेख प्रकाशित किए और न्यूयॉर्क टाइम्स, और यह तर्क दिया कि कुवैत को इराक के क़ब्ज़े से मुक्त कराने के लिए युद्ध छोटा होगा, और इसमें हज़ार से कम अमेरिकी सैनिकों की मृत्यु के साथ एक अमेरिका को एक निर्णायक जीत हासिल होगी। युद्ध की शुरुआत में मुख्यधारा के मत से भिन्न था, जिसमें कहा जा रहा था कि युद्ध महीनों तक चलेगा और हजारों अमेरिकी लोगों की जान जाएगी। मियरशाइमर ने बताया कि उनका तर्क निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित था- सबसे पहले, इराकी सेना एक कमज़ोर सेना थी, जो चलित बख्तरबंद लड़ाई लड़ने के लिए तैयार नहीं थी। दूसरा, अमेरिकी बख्तरबंद सेना बेहतर ढंग से सुसज्जित और प्रशिक्षित थीं। तीसरा, अमेरिकी तोपखाने भी अपने इराकी समकक्ष से बेहतर थे। चौथा, अमेरिकी वायु सेना को इराकी वायु सेना के कमज़ोर आक्रमण से अप्रभावित रहते हुए इराकी जमीनी बलों के खिलाफ विनाशकारी साबित होना चाहिए। अंततः, इराकी रिज़र्व सेना आगे की तरफ़ तैनात थी, और सऊदी-कुवैती सीमा की तरफ़ से इराकी रक्षा रेखा को भेदने के अमेरिकी प्रयासों का मुकाबला करने में असमर्थ साबित होगी। युद्ध के दौरान ये पाँचों भविष्यवाणियां सच साबित हुईं। चीन मियरशाइमर ने अमेरिका की चीन के प्रति नीति की निंदा की है, क्योंकि वे मानते हैं कि यदि चीन इसी तरह तेज़ी से आर्थिक विकास करता रहा, तो इससे आगे चलकर एक "तीव्र सुरक्षा प्रतियोगिता" और यहाँ तक कि संभावित युद्ध होने तक का ख़तरा है। वे सलाह देते हैं कि अमेरिका को चीन का घेराव करना चाहिए। इसके तहत अमेरिका को चीन को और बड़े क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करने और एशिया में अपने प्रभाव का विस्तार से रोकना चाहिए। मियरशाइमर ने कि अमेरिकी नीति-निर्माताओँ से यह सिफारिश की है कि चीन के पड़ोसी देशों के साथ एक संतुलन गठबंधन बनाया जाए । उनके अनुसार, भारत, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, रूस और वियतनाम संयुक्त राज्य अमेरिका के संभावित सहयोगी हो सकते हैं जिनके खिलाफ मेगा-पावर चीन हावी होने का प्रयास कर सकता है। मियरशाइमर ने 2019 में एक लेख में तर्क दिया कि "उदारवादी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था 2019 में चरमरा रही है", और उदारवादी व्यवस्था को "तीन यथार्थवादी व्यवस्थाओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा- एक पतली-सी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जो सहयोग को बढ़ावा देती है, और दो बंधे हुए आदेश (जिनके बीच सुरक्षा प्रतियोगिता होगी) - एक जिसमें चीन का प्रभुत्व है, और दूसरा जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रभुत्व है, चीन का उदय और घेराव मियरशाइमर का दावा है कि चीन का उदय शांतिपूर्ण नहीं होगा Mearsheimer John J. April 2006 China's Unpeaceful Rise http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0051.pdf Current History China and East Asia Current History Magazine 105 690 160–162 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20181220230305/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0051.pdf 20 दिसंबर 2018 dead http://cips.uottawa.ca/event/why-china-cannot-rise-peacefully/ Why China Cannot Rise Peacefully | CIPS 2012-10-17 Cips.uottawa.ca 2014-08-27 https://web.archive.org/web/20121201001247/http://cips.uottawa.ca/event/why-china-cannot-rise-peacefully/ 1 दिसंबर 2012 dead और अमेरिका चीन को घेरने और क्षेत्रीय आधिपत्य हासिल करने से रोकने की कोशिश करेगा। http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0051.pdf संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20181220230305/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0051.pdf 20 दिसंबर 2018 dead https://www.theatlantic.com/magazine/archive/2012/01/why-john-j-mearsheimer-is-right-about-some-things/8839/ Why John J. Mearsheimer Is Right (About Some Things) – Robert D. Kaplan Heller Chris 2011-12-20 The Atlantic 2014-08-27 https://web.archive.org/web/20120720031629/http://www.theatlantic.com/magazine/archive/2012/01/why-john-j-mearsheimer-is-right-about-some-things/8839/ 20 जुलाई 2012 live http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0056.pdf संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20180820180304/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0056.pdf 20 अगस्त 2018 dead http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/P0014.pdf संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20190727222511/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/P0014.pdf 27 जुलाई 2019 dead यद्यपि चीन का सैन्य और शायद राजनयिक रूप से घेराव संभव है, किंतु आर्थिक रूप से नहीं।https://www.amazon.com/gp/product/B07MZZGV7C/ref=dbs_a_def_rwt_bibl_vppi_i2 Globalization with Chinese Characteristics: Liberalism, Realism, Marxism Engle Eric 2019-01-11 2019-02-09 मियरशाइमर का मानना है कि जिस तरह किसी ज़माने में अमेरिका ने पश्चिमी गोलार्ध पर अपना क़ब्ज़ा जमाया था, उसी प्रकार चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर अपना दबदबा स्थापित करने की कोशिश करेगा। ऐसा करने से चीन को उसके पड़ोसियों के समक्ष भारी सुरक्षा और श्रेष्ठता हासिल होगी, क्योंकि चीन अपने इन पड़ोसियों को संभावित चुनौती के रूप में देखता है। यही तथ्य चीन को सैन्य विस्तार करने के लिए प्रेरणा देगा।http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0053.pdf संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20180820201036/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0053.pdf 20 अगस्त 2018 dead इसके अतिरिक्त, मियरशाइमर कहते हैं कि अमेरिका एक संतुलित गठबंधन बनाने का प्रयास करेगा जिसमें चीन की बढ़ती ताकत और शक्ति प्रक्षेपण क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए मुख्य रूप से भारत, जापान, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और इंडोनेशिया शामिल हों। http://www.abc.net.au/tv/bigideas/browse/video_popup.htm?vidURL=/tv/bigideas/stories/2010/09/07/3001041-mediarss-full.xml&vidTitle=John%20Mearsheimer:%20China's%20Challenge%20to%20US%20Power&vidLength=Full Video Full Clip – Browse – Big Ideas – ABC TV Abc.net.au https://web.archive.org/web/20170203034214/http://www.abc.net.au/tv/bigideas/browse/video_popup.htm?vidURL=%2Ftv%2Fbigideas%2Fstories%2F2010%2F09%2F07%2F3001041-mediarss-full.xml&vidTitle=John%20Mearsheimer%3A%20China%27s%20Challenge%20to%20US%20Power&vidLength=Full 2017-02-03 dead 2014-08-27 वे इसके प्रमाण के रूप में वे अमेरिका के वियतनाम और भारत के साथ प्रगाढ़ होते संबंधों की ओर इशारा करते हैं। http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0054.pdf 2010 German translation 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20180413130715/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0054.pdf 13 अप्रैल 2018 dead http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0034.pdf संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20180820201026/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0034.pdf 20 अगस्त 2018 dead मियरशाइमर का दावा है कि ऑस्ट्रेलिया को चीन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित होना चाहिए क्योंकि यह चीन और अमेरिका के बीच एक तीव्र सुरक्षा प्रतियोगिता को जन्म देगा। इससे यह क्षेत्र को अस्थिर हो जाएगा। http://sydney.edu.au/news/84.html?newsstoryid=5351 News | The University of Sydney Sydney.edu.au 2014-08-27 https://web.archive.org/web/20160304092649/http://sydney.edu.au/news/84.html?newsstoryid=5351 4 मार्च 2016 dead वे ये तर्क भी देते है कि चीन अमेरिकी नौसैनिक रणनीतिकार अल्फ्रेड थायर मेहैन के उग्रवादी आक्रामक दर्शन को अपना रहा है, जिन्होंने समुद्रों पर नियंत्रण और निर्णायक लड़ाई के लिए तर्क दिया है। http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0053.pdf संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20180820201036/http://mearsheimer.uchicago.edu/pdfs/A0053.pdf 20 अगस्त 2018 live पुस्तकें व्हाय लीडर्स लाय मियरशाइमर ने एक पुस्तक लिखी है जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में झूठ बोलने का विश्लेषण करती है। व्हाय लीडर्स लाय (नेता झूठ क्यों बोलते हैं, 2011) में वे तर्क देते हैं कि नेता विदेशी दर्शकों के साथ-साथ अपने लोगों से भी झूठ बोलते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करना उनके देश के हित में है। उदाहरण के लिए, अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट ने सितंबर 1941 में ग्रीयर घटना के बारे में झूठ बोला था, क्योंकि वे द्वितीय विश्व युद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका को शामिल करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध थे। रूज़वेल्ट के मुताबिक़ ऐसा करना अमेरिका के राष्ट्रहित में था। उनके दो मुख्य निष्कर्ष हैं- नेता वास्तव में अन्य देशों के लोगों से बहुत अधिक झूठ नहीं बोलते हैं वास्तव में लोकतांत्रिक देशों के नेताओँ की (तानाशाहों की तुलना में) अपने ही देश के लोगों से झूठ बोलने की संभावना अधिक होती है। Barker, Alexander (2011-10-17) International Deceit https://web.archive.org/web/20181105230509/http://www.oxonianreview.org/wp/international-deceit/ 5 नवंबर 2018, Oxonian Review इस प्रकार, उनकी पुस्तक की शुरुआत में ही लिखा है कि यह आश्चर्य की बात नहीं है कि सद्दाम हुसैन सामूहिक नरसंहार के हथियारों के बारे में झूठ नहीं बोल रहे थे - उन्होंने कहा कि उनके पास कोई ऐसा हथियार नहीं था - लेकिन जॉर्ज बुश और उनके कुछ प्रमुख सलाहकारों ने अमेरिकी लोगों से इसके बारे में झूठ बोला। मियरशाइमर का तर्क है कि लोकतांत्रिक देशों के नेताओं की अपने ही लोगों से झूठ बोलने की संभावना तब बढ़ जाती है, जब उन्हें कहीं दूर-दराज़ के स्थानों में युद्ध लड़ना होता है। वे कहते हैं कि नेताओं के लिए दूसरे देशों में झूठ बोलना मुश्किल है क्योंकि वे एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते है, खासकर कि तब जब सुरक्षा से सम्बन्धित मुद्दे दांव पर होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपको प्रभावी झूठ बोलने के लिए चाहिए होता है कि सामने वाला आप पर विश्वास करे। उनका कहना है कि नेताओं के लिए अपने लोगों से झूठ बोलना इसलिए आसान होता है क्योंकि आमतौर पर उनके बीच गहरा विश्वास होता है। झूठ के प्रकार मियरशाइमर अंतरराष्ट्रीय झूठ के नैतिक आयाम पर विचार नहीं करता है, जिसे वे एक उपयोगितावादी दृष्टिकोण से देखते हैं। वे कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय झूठ पांच तरह के होते हैं। https://www.youtube.com/watch?v=VPe5f5dcrGE Why Leaders Lie: The Truth About Lying in International Politics 11 October 2015 https://web.archive.org/web/20150414152920/https://www.youtube.com/watch?v=VPe5f5dcrGE 14 अप्रैल 2015 live अंतर-राज्य झूठ वह है जहां एक देश का नेता किसी अन्य देश के नेता या आम तौर पर किसी भी विदेशी दर्शक से वांछित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए झूठ बोलता है। डरा-धमका रहा है, जहां एक नेता अपनी घरेलू जनता से झूठ बोलता है। विवादास्पद नीतियों और सौदों को सार्वजनिक रूप से ज्ञात करने से रोकने के लिए रणनीतिक कवर-अप रोजगार निहित हैं। राष्ट्रवादी मिथक एक देश के अतीत के बारे में कहानियां हैं जो उस देश को सकारात्मक रोशनी में चित्रित करते हैं जबकि नकारात्मक प्रकाश में उसके विरोधी। उदारवादी झूठ संस्थानों, व्यक्तियों या कार्यों की नकारात्मक प्रतिष्ठा को स्पष्ट करने के लिए दिया जाता है। वे उन कारणों की व्याख्या करते हैं, जिनकी वजह से नेता ऐसे विभिन्न प्रकार के झूठ बोलते हैं। उनका मुख्य मत यह है कि नेता अन्य राज्यों के नेताओं की तुलना में घरेलू दर्शकों से झूठ ज़्यादा बोलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर झूठ बोलना नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसमें ब्लोबैक और बैकफ़ायर की सम्भावना शामिल हैं। "ब्लोबैक" वह स्थिति है जहाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर झूठ बोलने की वजह से आंतरिक स्तर पर छल का माहौल पैदा होता है। वहीं "बैकफ़ायर" वह स्थिति है जहाँ झूठ बोलने से असफल नीतियाँ बनती हैं। वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि झूठ बोलने के अलावा दो अन्य प्रकार के धोखे भी हैं: "छुपाना", जहाँ एक नेता किसी महत्वपूर्ण मामले के बारे में चुप रहता है, और "स्पिनिंग", जहाँ एक नेता एक ऐसी कहानी बताता है जो सकारात्मक पहलुओं पर पर जोर देती है और नकारात्मकता की अनदेखी करती है। द ग्रेट डेल्यूजन: लिबरल ड्रीम्स और इंटरनेशनल रियलिटीज अपनी 2018 की किताब, द ग्रेट डेल्यूजन: लिबरल ड्रीम्स और इंटरनेशनल रियलिटीज (महाभ्रम: उदारवादी सपने और अंतर्राष्ट्रीय वास्तविकता, येल यूनिवर्सिटी प्रेस, 2018) में, मियरशाइमर ने भूराजनीतिक रणनीति की एक आलोचना प्रस्तुत की जिसे वे 'उदारवादी आधिपत्य' बताते है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि यह एक 'महाभ्रम' है और इसपर बहुत अधिक ज़ोर दिया जाता है। उदारवादी आधिपत्य के बजाय राष्ट्रवाद पर ज़्यादा ज़ोर देना चाहिए । 2014 क्रीमियन संकट सितम्बर 2014 में रूस के क्रीमिया पर आक्रमण के बाद मियरशाइमर ने यह तर्क दिया था कि यह आक्रमण रूस की इस चिंता से प्रेरित था यदि यूक्रेन नाटो और यूरोपीय एकीकरण की ओर बढ़ना जारी रखता है, तो रूस के लिए उसके सेवस्तोपोल में मौजूद ब्लैक सी फ्लीट वाले नौसैनिक अड्डे तक पहुंचना असम्भव हो जाएगा। उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि अमेरिकी नीति को रूस को अवशोषित करने की मंशा से यूक्रेन को नाटो में में सम्मिलित करने के बजाय नाटो और रूस के बीच एक अंतस्थ राज्य के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़ना चाहिए। अन्य पुस्तकें पारंपरिक परंपरा (कॉर्नेल यूनिवर्सिटी प्रेस, 1983) 0801415691 लिडेल हार्ट और इतिहास का भार (1988)     द ट्रेजेडी ऑफ़ ग्रेट पावर पॉलिटिक्स (2001)     द इजरायल लॉबी एंड यूएस फॉरेन पॉलिसी (2007)     क्यों नेता झूठ: अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में झूठ के बारे में सच्चाई (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2011)     महान भ्रम: लिबरल ड्रीम्स और अंतर्राष्ट्रीय वास्तविकताएं (येल यूनिवर्सिटी प्रेस, 2018)   यह भी देखें महाशक्ति अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यथार्थवाद ई. एच. कार हंस मोर्गेंथाऊ केनेथ वाल्ट्ज आक्रामक यथार्थवाद (अन्तर्राष्ट्रीय संबंध) नवयथार्थवाद (अन्तर्राष्ट्रीय सम्बंध) राजनीतिक शक्ति शक्ति का प्रक्षेपण संदर्भ 30em बाहरी कड़ियाँ जॉन मियर्सहाइमर होम पेज जॉन Mearsheimer द्वारा सभी प्रकाशन क्यों चीन शांति से नहीं बढ़ सकता, जॉन मियर्सहाइमर प्रस्तुति का वीडियो, 17 अक्टूबर, 2012 बर्कले में अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान द्वारा आयोजित इतिहास साक्षात्कार के साथ बातचीत थ्योरी वार्ता साक्षात्कार ईएच कैर बनाम। आदर्शवाद: द बैटल रेजेज ऑन जॉन मियर्सहाइमर द्वारा हंस मॉरगेन्थाऊ और इराक युद्ध: यथार्थवाद बनाम नव-परंपरावाद जॉन जे। मियर्सहाइमर, ओपनडेमोक्रेसी, १ ९ मई, २००५ हाल के सर्वेक्षण में अपने समय के पांच सबसे महत्वपूर्ण आईआर विद्वानों में से एक के रूप में मियर्सहाइमर को पहचानना था। इजरायल लॉबी एंड यूएस फॉरेन पॉलिसी ए हार्वर्ड स्टडी, मार्च, 2006 डब्ल्यूएसजे ने इजरायल लॉबी पर मियर्सहाइमर-वॉल्ट वर्किंग पेपर पर प्रतिक्रिया दी कैनेडी स्कूल ने अपने लोगो को लॉबी के अध्ययन से हटा दिया ' रोज़नर'स ब्लॉग, हेज़र्ट, 22 मार्च, 2006 इजरायल लॉबी और अमेरिकी विदेश नीति का विश्लेषण टोनी जुड, द न्यू यॉर्क टाइम्स, 20 अप्रैल 2006 को "एक लॉबी, नॉट ए कॉन्सपिरेसी" एलियट ए। कोहेन, वाशिंगटन पोस्ट, 5 अप्रैल, 2006 द्वारा "हाँ, इट्स एंटी-सेमिटिक" (आलोचकों की प्रतिक्रिया) जॉन मियर्सहाइमर और स्टीफन वॉल्ट, 11 मई, 2006 उपस्थिति इजरायल लॉबी क्या चाहती है, यह भी अक्सर विदेश नीति में अपने आलोचकों को Mearsheimer और Walt का जवाब देता है अमेरिका में इजरायल की लॉबी के बारे में वीडियो बहस में शामिल है Bloggingheads.tv पर जॉन Mearsheimer और Bruce Feiler "मध्य पूर्व: अमेरिका की शक्ति की सीमाओं को जानें", न्यूज़वीक, 29 नवंबर, 2008 को प्रकाशित, पत्रिका 8 दिसंबर 2008 के अंक से। गाजा संघर्ष पर "एक और युद्ध, एक और हार", अमेरिकी रूढ़िवादी, 26 जनवरी, 2009 अंक पैनल में प्रतिभागी, बधाई, आप जीत गए। । । अब क्या? अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव विशेष प्रित्जकर सैन्य संग्रहालय और पुस्तकालय में पैनल में प्रतिभागी, मध्य पूर्व: संकट और संघर्ष प्रित्जकर सैन्य संग्रहालय और पुस्तकालय में पैनल में भागीदार, इराक में अमेरिकी सेना: कौन जीत रहा है? प्रित्जकर सैन्य संग्रहालय और पुस्तकालय में श्रेणी:अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विद्वान श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:1947 में जन्मे लोग