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एली विसेल
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एली विसेल (30 सितंबर 1928 – 2 जुलाई 2016) रोमानिया में जन्मे एक अमेरिकी लेखक, प्रोफ़ेसर, सामाजिक कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता थे। वे उन लोगों में थे जो नाजी अत्याचारों से बच गए थे। उन्होंने 57 किताबें लिखीं, जिनमें ज़्यादातर फ़्रेंच और अंग्रेज़ी में थीं। उनकी पहली किताब, नाइट (फ़्रेंच नाम ला न्युई), 1958 में प्रकाशित हुई। यह किताब नाज़ी यातना शिविरों में उनके अनुभवों पर आधारित है। उन्हें 1986 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
== जीवन परिचय ==
एली विसेल का जन्म 1928 में सिघेटु मार्मात्सियेई में हुआ था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्हें, उनके परिवार और उनके शहर के अन्य यहूदियों को नाज़ी कंसंट्रेशन कैंपों में भेज दिया गया। वहाँ उनके माता-पिता और छोटी बहन की मृत्यु हो गई, जबकि वे और उनकी दो बड़ी बहनें बच गईं।
1945 में मित्र देशों की सेनाओं ने उन्हें बुखेनवाल्ड कंसंट्रेशन कैंप से आज़ाद कराया। इसके बाद वे पेरिस गए, जहाँ उन्होंने सोरबोन विश्वविद्यालय में पढ़ाई की और पत्रकार के रूप में काम किया।
बाद में एली विसेल मानवाधिकारों के बड़े समर्थक बन गए। उन्होंने दुनिया भर में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाई। उन्होंने सोवियत और इथियोपियाई यहूदियों, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद, रवांडा नरसंहार, बोस्नियाई नरसंहार, कंबोडियाई नरसंहार और कई अन्य पीड़ित समुदायों के लिए न्याय की माँग की।
वे इज़राइल के भी समर्थक थे और मध्य-पूर्व के मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते थे। साथ ही, उन्होंने इज़राइल और फ़िलिस्तीन के बीच शांति के लिए बातचीत को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू का समर्थन किया। जिसमें ईरान पर उनका 2015 का विवादास्पद कांग्रेस भाषण भी शामिल था। सिलवान में यहूदी बसने वालों की तारीफ़ करने वाले विज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। उनका कहना था कि यरूशलेम "यहूदी लोगों का है" और उन्होंने वहाँ किसी भी तरह के क्षेत्रीय समझौते का विरोध किया।
== सन्दर्भ ==