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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कट्यूशा रॉकेट लॉन्चर

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कट्यूशा रॉकेट लॉन्चर thumb सोवियत संघ मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर 1939 – वर्तमान (विभिन्न आधुनिक रूपों में) द्वितीय विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध लाल सेना अनुसंधान संस्थान बीएम-8 (82 मिमी), बीएम-13 (132 मिमी), बीएम-31 (300 मिमी) ट्रक, टैंक, ट्रैक्टर कट्यूशा रॉकेट लॉन्चर (Katyusha rocket launcher, Катюша) द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ द्वारा निर्मित और उपयोग किया जाने वाला एक प्रकार का 'मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर' था। पारंपरिक तोपखाने की तुलना में, कट्यूशा कम सटीक था और इसे रीलोड करने में अधिक समय लगता था, लेकिन यह एक साथ दर्जनों रॉकेट दागकर दुश्मन के मोर्चे पर भारी तबाही मचाने में सक्षम था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के सबसे घातक और प्रतिष्ठित हथियारों में से एक बन गया। इस हथियार का आधिकारिक नाम कभी 'कट्यूशा' नहीं था (आधिकारिक नाम बीएम-13 या बीएम-8 थे)। "कट्यूशा" नाम लाल सेना के सैनिकों द्वारा मिखाइल इसाकोवस्की के एक बहुत ही लोकप्रिय युद्धकालीन रूसी गीत 'कट्यूशा' (एक लड़की का नाम जो अपने प्रेमी का युद्ध से लौटने का इंतज़ार कर रही है) के आधार पर रखा गया था। दूसरी ओर, नाज़ी जर्मनी के सैनिकों ने इसके भयानक और गगनभेदी शोर और इसके समानांतर पाइपों (जो चर्च के पाइप ऑर्गन की तरह दिखते थे) के कारण इसे "स्टालिन का ऑर्गन" नाम दिया था।Bellamy Chris Absolute War: Soviet Russia in the Second World War https://archive.org/details/absolutewarsovie0000bell Pan Macmillan 2007 978-0330488082 250-255Voices of the Scandinavian Waffen-SS: The Final Testament of Hitler's Vikings विकास और डिज़ाइन 1930 के दशक के अंत में सोवियत इंजीनियरों द्वारा विकसित, कट्यूशा का डिज़ाइन आश्चर्यजनक रूप से सरल और सस्ता था। लॉन्चर प्रणाली: सबसे प्रसिद्ध संस्करण बीएम-13 था, जिसमें 132 मिमी के रॉकेट दागे जाते थे। इसकी रेल आमतौर पर एक साधारण ट्रक के पीछे फिट की जाती थीं। युद्ध के दौरान, अमेरिकी 'लेंड-लीज़' कार्यक्रम के तहत प्राप्त स्टूडेबेकर यूएस6 ट्रकों का बड़े पैमाने पर कट्यूशा को माउंट करने के लिए उपयोग किया गया। उत्पादन में आसानी: पारंपरिक हॉवित्जर तोपों को बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्टील और जटिल मशीनिंग की आवश्यकता होती थी। इसके विपरीत, कट्यूशा लॉन्चर केवल कुछ स्टील की पटरियों को वेल्ड करके बनाया जा सकता था। इसे हल्के कारखानों में भी तेज़ी से और सस्ते में उत्पादित किया जा सकता था।Glantz David M. House Jonathan M. When Titans Clashed: How the Red Army Stopped Hitler https://archive.org/details/whentitansclashe0000glan University Press of Kansas 2015 978-0700621217 110-115 युद्ध रणनीति और मनोवैज्ञानिक प्रभाव कट्यूशा की सबसे बड़ी ताकत इसकी सटीकता नहीं थी, बल्कि इसकी "संतृप्ति बमबारी" की क्षमता थी। विस्फोटक शक्ति: चार बीएम-13 लॉन्चरों की एक बैटरी मात्र 7 से 10 सेकंड के भीतर 64 रॉकेट दाग सकती थी। यह एक विशाल क्षेत्र को पल भर में उच्च-विस्फोटक और छर्रों से पाट देती थी। जब तक दुश्मन समझ पाता कि हमला कहाँ से हो रहा है, कट्यूशा ट्रक अपनी जगह बदलकर सुरक्षित निकल जाते थे (इसे 'शूट-एंड-स्कूट' रणनीति कहा जाता है)। मनोवैज्ञानिक प्रभाव: कट्यूशा के रॉकेट जब दागे जाते थे, तो हवा को चीरते हुए एक भयानक चीखती हुई आवाज़ पैदा करते थे। जर्मन सैनिकों के स्मरणपत्रों के अनुसार, इस आवाज़ ने और उसके बाद होने वाले अंधाधुंध विस्फोटों ने जर्मन पैदल सेना के मनोबल पर विनाशकारी प्रभाव डाला था।Harrison Richard W. The Russian Way of War: Operational Art, 1904-1940 University Press of Kansas 2001 230-238 978-0700610747 कट्यूशा ने द्वितीय विश्व युद्ध में स्टालिनग्राद की लड़ाई से लेकर बर्लिन के पतन तक हर बड़े सोवियत आक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने आधुनिक तोपखाने की अवधारणा को बदल दिया। आज दुनिया भर की सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी आधुनिक मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम कट्यूशा के ही वैचारिक वंशज हैं।"History of the Rocket Research Institute, RNII" सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ नेशनल WWII म्यूज़ियम - सोवियत तोपखाना श्रेणी:सोवियत संघ