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चंद्रवल्ली
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मई 2017
चंद्रवल्ली कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में चित्रदुर्ग पहाड़ी के पश्चिम में स्थित है। यह दीर्घकाल से किंवंदंतियों का विषय एवं सातवाहन (आंध्र) मुद्राओं का स्रोत रहा है।
पुरातत्ववेत्ताओं के उत्खनन से यहाँ दो सांस्कृतिक स्तर प्राप्त हुए हैं। प्रारंभिक स्तरों की संस्कृति मेगालिथ कब्रों की सभ्यता के निकट है। यह सभ्यता की प्रथम अवस्था है जिसमें सिक्के या चित्रित मृण्पात्र नहीं मिलते। उत्तर पाषाणकाल के प्रामाणिक अवशेषों का यहाँ अभाव है। इस संस्कृति के अंतिम दिनों में आंध्र सभ्यता के चिह्न मिलने लगते हैं। इसकी सूचना काँच की चूड़ियों, श्वेत या पीले रंग से चित्रित पात्रों एवं आंध्र सिक्कों से मिलती है। रोमन सम्राट् आगस्टस (28 ई.पू. - 14 ई.) और टाइबेरियस (14ई.-37ई.) के दीनार, यूनानी ऐंफोरा (amphora) एवं रुलेटेड (rouletted) मृद्भांड भी यहाँ मिले हैं, जिससे इनके भूमध्यसागरीय प्रदेशों से संबंध प्रमाणित होते हैं। स्पष्ट है, यह नगर आंध्र सभ्यता के प्रमुख केंद्रों एवं रोमन व्यापारिक क्षेत्र में विशिष्ट स्थान रखता रहा होगा। चंद्रवल्ली की कहान समीपवर्ती ब्रह्मगिरि की संस्कृति से पर्याप्त साम्य रखती है।
• काल संबंध: चंद्रावली में सातवाहन काल के और साथ में रोमन काल के सिक्के भी मिले हैं शीशे के सिक्के(सातवाहन काल) और चांदी के सिक्के (रोमन काल)के साथ सोने, चांदी व तांबे से बने आभूषण भी मिले हैं ।Thakur Hema 2016-11-04 CHANDRAVALLI – AN EARLY HISTORIC SETTLEMENT IN KARNATAKA, INDIA https://doi.org/10.14795/j.v3i3.173 JOURNAL OF ANCIENT HISTORY AND ARCHAEOLOGY 3 3 10.14795/j.v3i3.173 2360-266X
उत्खनन कार्य: प्रसिद्ध पुरातत्वविद् M Wheeler ने ब्रह्मगिरी के साथ चंद्रवल्ली का भी उत्खनन 1947 में कराया था । IGNCA Ancient India No. 4 (1947–48)
श्रेणी:कर्नाटक के शहर