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411 समाचार
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बिनोद बिहारी महतो

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बिनोद बिहारी महतो 1923 09 23 yes बलियापुर झारखंड, भारत 1991 12 18 1923 08 23 yes दिल्ली, भारत महेंद महतो मंदाकिनी देवी फुलमनी देवी झारखंड मुक्ति मोर्चाझारखंड मुक्ति मोर्चा (बी) भारतीय बिनोद बिहारी महतो (23 सितंबर 1923 - 18 दिसंबर 1991) एक भारतीय वकील और राजनीतिज्ञ थे। वह 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक थे। वह 1980, 1985, 1990 में बिहार विधानसभा के तीन बार सदस्य और 1991 में गिरिडीह से लोकसभा के सदस्य थे।https://m.telegraphindia.com/states/jharkhand/saffron-munda-loves-everything-green-bjp-cries-neglect-as-chief-minister-warms-up-to-old-jmm-associates/cid/823787 Saffron Munda loves everything green - BJP cries neglect as chief minister warms up to old JMM associates telegraphindia.com 24 फ़रवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190203143827/https://m.telegraphindia.com/states/jharkhand/saffron-munda-loves-everything-green-bjp-cries-neglect-as-chief-minister-warms-up-to-old-jmm-associates/cid/823787 3 फ़रवरी 2019 deadhttps://m.livehindustan.com/news/dhanbad/article1-Binod-Bihari-death-anniversary-tribute-to-the-father-of-the-Jharkhand-movement-for-those-trying-634181.html झारखंड आंदोलन के जनक बिनोद बिहारी को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि के लिए जुटे लोग livehindustan.comhttp://www.akhandbharatnews.com/binod-bihari-mahato-gave-the-key-to-read-and-fight/ बिनोद बिहारी महतो ने दिया “पढ़ो और लड़ो” का मूलमंत्र akhandbharatnews.com 24 फ़रवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190221055847/http://www.akhandbharatnews.com/binod-bihari-mahato-gave-the-key-to-read-and-fight/ 21 फ़रवरी 2019 dead प्रारंभिक जीवन बिनोद बिहारी महतो का जन्म 23 सितंबर 1923 को धनबाद के बालीपुर प्रखंड के बङादाहा गाँव में एक कुड़मी महतो परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम महेंद्र महतो एक किसान थे और माता का नाम मंदाकिनी देवी थी। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा बालीपुर से की। उन्होंने अपनी पढ़ाई पढ़ाई डीएवी झरिया और धनबाद हाई इंग्लिश स्कूल से पूरा किया।https://books.google.co.in/books?id=Z04oDwAAQBAJ&printsec=frontcover&dq=binod+bihari+mahato&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjqgu-rkL3iAhVPXSsKHeM5ASQQ6AEIIDAB#v=onepage&q&f=false झारखण्‍ड आंदोलन के मसीहा बिनोद बिहारी मेहतो : Jharkhand Andolan Ke Masiha Binod Bihari Mahato books.google.co.in शिक्षा, कैरियर और राजनीति उन्होंने पी.के. रे मेमोरियल कॉलेज से इंटर किया। उन्होंने रांची कॉलेज से स्नातक और लॉ कॉलेज, पटना से लॉ की पढ़ाई की। परिवार की आर्थिक समस्याओं के कारण, उन्होंने धनबाद न्यायालय में दैनिक श्रम के रूप में लेखन कार्य किया। वह एक शिक्षक के रूप में भी काम करते थे। इसके बाद उन्हें धनबाद में क्लर्क की नौकरी मिल जाती है। उन्होंने 1956 में धनबाद में वकील का पेशा शुरू किया। उन्होंने पंचेत डैम, मैथन डैम, सिंदरी कारखानों, आदि के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए कई मामले लड़े। बिनोद बिहारी महतो ने झारखंड आंदोलन के लिए कलम को बनाया था हथियार, जानें उनसे जुड़ी कुछ अनसुनी बातें।https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/ranchi/jharkhand-movement-binod-bihari-mahato-made-weapon-to-pen-know-some-unheard-things-related-to-him-srn बिनोद बिहारी महतो ने झारखंड आंदोलन के लिए कलम को बनाया था हथियार, जानें उनसे जुड़ी कुछ अनसुनी बातें Prabhat Khabar उन्होंने झरिया से 1952 के चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। 1967 में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी विभाजित हो गई। वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य थे। 1971 में, उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादि) के टिकट पर धनबाद लोकसभा चुनाव में भाग लिया और दूसरा स्थान प्राप्त किया। वह धनबाद नगरपालिका में चुनाव जीते। वे 1980 से 1985 तक टुंडी से विधानसभा के सदस्य रहे। फिर वह 1990 में सिंदरी और टुंडी से विधानसभा सदस्य बने। इसके बाद वह 1991 में गिरिडीह से लोकसभा के सदस्य बने।https://books.google.co.in/books?id=mDJte7_WYFgC&pg=PA20&dq=binod+bihari+mahato&hl=hi&sa=X&ved=0ahUKEwiUjcDW4r3iAhUg7nMBHW16DB0Q6AEIITAB#v=onepage&q&f=false Jharkhand Andolan Ke Masiha : Binod Bihari Mahato books.google.co.in व्यक्तिगत जीवन उन्होंने फुलमनी देवी से शादी की। उनके पांच बेटे राज किशोर महतो, नील कमल महतो, चंद्र शेखर महतो, प्रदीप सुमेर महतो, अशोक कुमार महतो और दो बेटियां चंद्रवती देवी और तारावती देवी थीं। शिवाजी समाज विनोद बिहारी महतो ने वकील का पेशा 1956 में शुरू किया। कुड़मी/कुर्मी (महतो) पृष्ठभूमि के कारण, उन्होंने इस पेशे में कई कुड़मियों से मुलाकात की। कुड़मियों/कुर्मियो कि समस्याओं हल करने के लिए उन्होंने 1967 में "शिवाजी समाज" नामक संगठन बनाया, जो कुड़मी (महतो) जाति में चल रही दहेज प्रथा, बाल विवाह आदि कुप्रथाओं और समस्याओं पर आंदोलन किया। समाज की समस्याओं को हल करने और अपराधी को दंडित करने के लिए कई बैठकें की। शिवाजी समाज ने कई रैलियों का आयोजन किया।उस समय 'शिवाजी समाज' को आतंकवादी संगठन भी घोषित किया गया। इसके नेताओं के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। संगठन ने कुड़मी की भाषा, त्योहार और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम किया। यह संगठन छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित था। "शिवाजी समाज" के नाम का कारण यह था कि बिनोद बिहारी महतो मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी के प्रशंसक थे। शिवाजी ने औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंड मुक्ति मोर्चा (बी) बिनोद बिहारी महतो 25 साल तक कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रहे। उनका अविश्वास अखिल भारतीय दलों से टूट चुका था। उनका मानना था कि कांग्रेस और जनसंघ जैसे राजनीतिक दल सामंतवादियों और पूंजीवादियों लिए हैं, जबकि दलित और पिछड़ी जाति के लिए कोई दल नहीं हैं। इसलिए इन दलों के सदस्य के रूप में दलित और पिछड़ी जाति के लिए लड़ना मुश्किल होगा। बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और ए.के. राय ने मिलकर, 1972 को झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया। महतो को झारखंड मुक्ति मोर्चा का संथापक अध्यक्ष और शिबू सोरेन को सचिव बनाया गया। 1980 में, महतो ने झामुमो द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने के फैसले के बाद "झारखंड मुक्ति मोर्चा (बी)" पार्टी का गठन किया। 1987 में झामुमो अध्यक्ष निर्मल महतो की कथित तौर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ हत्या के बाद बिनोद बिहारी महतो झामुमो में वापस लौट आए। जनवरी 1990 में झामुमो (बी) का झामुमो में विलय हो गया। सन्दर्भ श्रेणी:१०वीं लोक सभा के सदस्य श्रेणी:झारखंड के लोग श्रेणी:1923 में जन्मे लोग श्रेणी:बिहार के राजनीतिज्ञ श्रेणी:१९९१ में निधन