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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

त्रिनिदाद

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right|त्रिनिदाद और टोबैगो का मानचित्र त्रिनिदाद (अंग्रेजी: ट्रिनिडाड, स्पैनिश:ट्रिनिटी) कैरेबियाई या केरिबियन सागर में एक द्वीप है। त्रिनिदाद और टोबैगो द्वीप मिलकर एक द्वीप देश का निर्माण करते हैं। इनमे से त्रिनिदाद ज्यादा बडा़ और सघन जनसंख्या वाला द्वीप है। त्रिनिदाद कैरिबियन के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित द्वीप है और वेनेजुएला के पूर्वी तट से सिर्फ 11 किमी (7 मील) दूर है। त्रिनिदाद, पूरे वेस्ट इंडीज का सबसे बड़ा छठे स्थान का द्वीप है। इसका क्षेत्रफल 4769 किमी ² (1864 वर्ग मी.) है और यह 10 ° 3'N 60 ° 55'W / 10,05, -60,917 और 10 ° 50'N 61 ° 55'W / 10,833, -61,917 के बीच स्थित है। चगवानस त्रिनिदाद का प्रमुख नगर है। यहाँ भारतीय मूल निवासियों का बाहुल्य है। विश्वास किया जाता है कि प्राचीन काल में वह दक्षिणी अमरीका का एक भाग रहा होगा। द्वीप की आकृति वर्गाकार तथा क्षेत्रफल 48,46,04 वर्ग किलोमीटर है जिसके उत्तरी-पश्चिमी तथा दक्षिणी-पश्चिमी कोने में दो प्रायद्वीप हैं। उत्तर तथा दक्षिण में एक द्वीप के मध्य में पर्वतीय श्रृंखलाएँ पूर्व से पश्चिम द्वीप के आर पार फैली हुई हैं। एरिपो पर्वत उत्तर-पूर्व में है जिसकी ऊँचाई 973 मीटर है। यहाँ अनेक तेज तथा छोटी धाराएँ हैं। जलवायु गर्म तथा तर है। औसत ताप 25 डिग्री सें0 है। अधिकांश वर्षा जून से दिसंबर तक होती है। अधिकांश भूक्षेत्र जंगलों से ढका हुआ है। खाद्यान्नों के अतिरिक्त कहवा, ईख, केला तथा अन्य गरम और तर जलवायु के फल प्रचुर मात्रा में पैदा होते हैं। यूरोपीय निवासियों में अंग्रेज, फ्रांसीसी, पुर्तगाली तथा स्पेनी मुख्य हैं। आदिवासियों में अफ्रीकी जाति के लोग हैं। दक्षिण-पश्चिम में स्थित पिच झील से हजारों टन डामर (Asphalt) निकाला जाता है। खनिज तेल, चीनी, कहवा, शराब, तथा डामर निर्यात की मुख्य वस्तुएँ हैं। द्वीप में 188.8 किलोमीटर लंबी रेलवे तथा 3742.4 किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। यहाँ की राजधानी तथा मुख्य बंदरगाह पोर्टस्पैन है। दूसरा मुख्य नगर तथा बंदरगाह सेन फनरैंडो है। अंग्रेजी अधिकांश लोगों की भाषा है। इतिहास त्रिनिदाद और टोबैगो द्वीपों का इतिहास अमरीकी मूल निवासियों की बस्तियों के साथ शुरू होता है। दोनों द्वीपों से क्रिस्टोफर कोलंबस का साक्षातकार अपनी तीसरी यात्रा पर, 1498 की जुलाई में हुआ था। यह नाम भी उसी का दिया हुआ है। 1552 तक यह द्वीप उपेक्षित रहा और स्पेनवालों ने इसपर अधिकार करने की रुचि नहीं दिखाई। टोबैगो ब्रिटिश, फ्रांसीसी, डच और कोरलन्डर के हाथों मे जाकर अंततः ब्रिटेन के हाथों में चला गया। 1797 तक त्रिनिदाद पर स्पैनिश लोगों का अधिपत्य था, लेकिन फ्रांसीसी एक बड़े पैमाने पर यहाँ बने रहे। 1888 में दोनो द्वीपों एक ही उपनिवेश में शामिल थे। त्रिनिदाद और टोबैगो ने 1962 में ब्रिटिश साम्राज्य से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की और 1976 में एक गणराज्य बना। इसके बाद धीरे-धीरे स्पेनवाले यहाँ आए लेकिन स्थानीय "इंडियनों" तथा अन्य यूरोपियनों में हुए संघर्ष ने यूरोपियनों का बसना कठिन कर दिया। कुछ दिनों तक यह द्वीप स्पेनी व्यापारियों का केंद्र रहा। दास व्यापार ने जन्म लिया। फिर भी स्पेन के अन्य लोग वहाँ जाने में रुचि नहीं लेते थे। 1783 में स्पेन की सरकार ने अन्य राष्ट्रों के लोगों को बसने की अनुमति दे दी। इसका परिणाम यह हुआ कि बहुत से लोग, विशेषतया फ्रांसीसी, वहाँ पहुँचे और द्वीप नाममात्र को स्पेन का रह गया। 1802 में ट्रिनिडैड अंग्रेजों के अधिकार में आ गया और स्वतंत्र होने तक (31 अगस्त 1962 तक) वे ही उसके अधिकारी बने रहे। ट्रिनिडैड में नीग्रो और भारतीयों ने आर्थिक मामलों में एक दूसरे पर आश्रित होते हुए भी अपनी सांस्कृतिक भिन्नता को नहीं मिटने दिया है। अंतर्विवाहों की संख्या नगण्य है। यह सांस्कृतिक और जातीय अंतर राजनीति में भी भूमिका अदा करता है। नीग्रो प्राय: नगरों में तथा ट्रिनिडौड के उत्तरी, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी स्थानों पर, जहाँ कृषि के लिये अच्छी सुविधाएँ नहीं हैं, बसे हुए हैं। भारतीय अच्छी कृषियोग्य भूमि में बसे हुए हैं और नीग्रो लोगों की अपेक्षा व्यापार, उद्योग आदि में अधिक संपन्न हैं। स्नेनी राज्य के काल से 19वीं शताब्दी तक चीनी ही यहाँ का मुख्य उत्पादन रहा। 1834 में दासप्रथा के समाप्त होने के कारण श्रमशक्ति का अभाव हो गया। इसके लिये लगभग 1 लाख 50 हजार भारतीयों को बसाया गया। 19वीं शताब्दी के अंत तक कोको का उत्पादन अधिक बढ़ा और उसका निर्यात चीनी से भी अधिक होने लगा। 1910 में दक्षिण ट्रिनिडैड में पेट्रोल प्राप्त हुआ। उस समय से आज तक ट्रिनिडैड की अर्थव्यवस्था में उसका महत्वपूर्ण स्थान है। समीपस्थ द्वीप टोबैगो में सबसे पहले अंग्रेज 1616 में बसने के लिए पहुँचे, किंतु वहाँ के "इंडियनों" ने उन्हें वहाँ नहीं रहने दिया। अगले 200 वर्षों तक वहाँ अनेक जगहों से लोग आते जाते रहे। अंततोगत्वा 1814 में वहाँ अंग्रेजों का अधिकार हो गया, जो लगभग 150 वर्ष तक बना रहा। इस समय तक टोबैगो पृथक् उपनिवेश के रूप में शासित था, 1888 में ट्रिनिडैड के साथ इसे मिला दिया गया। दोनों साथ ही साथ एक राष्ट्र के रूप में स्वतंत्र हुए। श्रेणी:ट्रिनिडाड श्रेणी:कैरेबियन द्वीप